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Published / 2026-01-22 21:04:05
श्री चंद्रभानु सत्पथी जी के रांची आगमन पर हुए कई कार्यक्रम

रांची में परम श्रद्धेय गुरुदेव श्री चंद्रभानु सत्पथी जी के शुभ आगमन पर भव्य आध्यात्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम का हुआ आयोजन 

सच्ची भक्ति वही है जो मानवता की सेवा से जुड़ी हो : गुरुदेव सत्पथी  

टीम एबीएन, रांची। श्रद्धा, सबूरी और सेवा के सार्वकालिक संदेश को जन-जन तक पहुंचाने वाले परम श्रद्धेय गुरुदेव श्री चंद्रभानु सत्पथी जी का एक भव्य आध्यात्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम का आयोजन सीएमपीडी, कांके रोड स्थित मयूरी प्रेक्षागृह में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं गरिमामय वातावरण में हुआ। यह कार्यक्रम न केवल आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक बना, बल्कि समाज सेवा और नैतिक मूल्यों के प्रति जनमानस को जागृत करने वाला भी सिद्ध हुआ। 

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं शहर के गणमान्य नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। गुरुदेव श्री चंद्रभानु सत्पथी जी ने अपने ओजस्वी वाणी-संदेश के माध्यम से श्रद्धा, सबूरी और निस्वार्थ सेवा के महत्व को सरल एवं प्रेरणादायी शब्दों में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति वही है जो मानवता की सेवा से जुड़ी हो और समाज के अंतिम व्यक्ति तक करुणा एवं सहयोग का भाव पहुंचायें। 

उन्होंने कहा कि करूणा के महान प्रतिरूप मां पिता है, उन्हें सम्मान करे। गौरतलब है कि गुरुदेव श्री चंद्रभानु सत्पथी जी के मार्गदर्शन में अब तक भारत सहित विश्वभर में 400 से अधिक साईं मंदिरों का निर्माण कराया जा चुका है। इसके साथ ही उनके सान्निध्य एवं प्रेरणा से अनेक शैक्षणिक संस्थानों एवं विद्यालयों का सफल संचालन किया जा रहा है। 

ये संस्थान शिक्षा के साथ-साथ संस्कार, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व का भी संदेश दे रहे हैं, जो समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण हैं। इस गरिमामय आयोजन में कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में संजय सेठ, केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री, भारत सरकार, की गरिमामयी उपस्थिति रही। अपने संबोधन में उन्होंने गुरुदेव के सामाजिक एवं आध्यात्मिक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे संत समाज को सही दिशा देने का कार्य करते हैं। 

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में सरयू राय पूर्व मंत्री झारखंड एवं विधायक जमशेदपुर, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, उपस्थित रहे। उन्होंने भी गुरुदेव के सेवा कार्यों को समाज के लिए अनुकरणीय बताया। कार्यक्रम के दौरान भक्ति, श्रद्धा और अनुशासन का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम का शुभारंभ गुरुदेव सत्पथी, मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि ने श्री साईं बाबा के तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर एवं मुकेश काबरा द्वारा गणेश वंदना के साथ किया। 

सभी आगंतुक अतिथियों का पुष्पगुच्छ देकर एवं अंग वस्त्र ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। तत्पश्चात बच्चों ने मनमोहक नृत्य कर सबका मन मोह लिया तथा महिलाओं द्वारा गाये सुमधुर भजनों ने वातावरण में आध्यात्मिक उत्सव का माहौल कर दिया। शहरवासियों, श्रद्धालुओं एवं समाज के सभी वर्गों के लोगों ने सपरिवार इस पावन अवसर पर उपस्थित होकर गुरुदेव का आशीर्वाद प्राप्त किया। आयोजन के उपरांत सभी उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। 

मौके अजय मारू, गोवर्धन प्रसाद गाड़ोदिया, राजकुमार केडिया, प्रेम प्रकाश अग्रवाल, मुकेश काबरा, सोहन दारुका, आदर्श दोदराजका, संजीव विजयवर्गीय, आनंद दोदराजका, मनीष कुमार, धर्मेंद्र तिवारी, ललित ओझा, संजय सर्राफ, मनीष लोधा, अमित चौधरी, विष्णु सेन, कमल सिंघानिया, पंकज पोद्दार, मुरारी अग्रवाल, किशोर मंत्री, निरंजन शर्मा, चंडी प्रसाद डालमिया, निर्मल बुधिया, अनिल अग्रवाल, अशोक नारसरिया, भानु जालान, अशोक धानुका, नरेंद्र लखोटिया, वासुदेव भाल्ला, रोहित पोद्दार सहित अनेक भक्तगण एवं समाजसेवी उपस्थित रहे। संपूर्ण कार्यक्रम अत्यंत सुव्यवस्थित, शांतिपूर्ण एवं आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुआ, जिसने रांचीवासियों के मन में आध्यात्मिक ऊर्जा एवं सेवा भाव का संचार किया।

गुरुजी डॉ. चंद्र भानु सतपथ्य जी का परिचय

गुरुजी चंद्र भानु सतपथ्य जी एक अत्यंत श्रद्धेय आध्यात्मिक गुरु हैं, जिनका शिरडी साईं बाबा से गहरा आध्यात्मिक संबंध है। वे बाबा के श्रद्धा और सबूरी के संदेश का प्रचार करते हैं तथा पवित्रता, विनम्रता, आत्म-अनुशासन और निःस्वार्थ सेवा पर विशेष बल देते हैं। उनकी सरल एवं व्यावहारिक शिक्षाएँ आत्मिक परिवर्तन, नैतिक जीवन और ईश्वरीय इच्छा के प्रति समर्पण की प्रेरणा देती हैं।

शिक्षाविदों और प्रशासकों के परिवार में जन्मे गुरुजी ने वर्ष 1972 में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में उत्तर प्रदेश कैडर से अपने सेवाकाल की शुरुआत की। उत्तर प्रदेश और भारत सरकार में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करने के उपरांत, वे वर्ष 2008 में पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त हुए और पुलिस महानिदेशक (DGP) के पद तक पहुँचे। अपने गौरवशाली सेवाकाल के दौरान उन्हें अनेक सम्मान प्राप्त हुए, जिनमें पुलिस पदक (वीरता) – 1985, दीर्घ एवं सराहनीय सेवा के लिए पुलिस पदक – 1991 तथा विशिष्ट सेवा के लिए पुलिस पदक – 1997 शामिल हैं, जो भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किए गए।

सरकारी सेवा में अपनी उल्लेखनीय उपलब्धियों के अतिरिक्त, गुरुजी एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त विद्वान, आध्यात्मिक चिंतक, लेखक, समाजसेवी और मानवतावादी के रूप में भी प्रतिष्ठित हैं। उनके योगदान न केवल अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से परे हैं, बल्कि समाज में वर्ग, पंथ, धर्म, लिंग एवं सामाजिक-आर्थिक भेदभाव को भी पार करते हैं।

गुरुजी डॉ. सतपथ्य को अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत किया गया है, जिनमें गोविंद नारायण सम्मान (2012), प्रतिभा पाटिल द्वारा श्री गुरु भागवत सम्मान (2012), बाबा बैद्यनाथ संगीत रत्न (2011) तथा दिव्य संगीत शिरोमणि (2011) उनके संगीत एवं आध्यात्मिक योगदान के लिए शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, ओड़िया आध्यात्मिक साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें महापुरुष जगन्नाथ दास सम्मान (2011) से भी सम्मानित किया गया।

Published / 2026-01-22 20:22:25
पलामू : हादसों के 24 घंटे तीन की मौत, एक की पहचान नहीं

एबीएन न्यूज नेटवर्क, पलामू। जिले के तीन अलग-अलग इलाकों में पिछले 24 घंटे के अंदर तीन हादसे हुए हैं। इन हादसों में तीन व्यक्ति की मौत हो गई। जिसमें से एक व्यक्ति की पहचान नहीं हो पाई है। सभी मृतकों के शवों का पुलिस ने पोस्टमार्टम कराया है। दो शव परिजनों को सौंप दिया गया है जबकि एक शव को सुरक्षित रखा गया है। 

  1. पहला हादसा पलामू के छतरपुर थाना क्षेत्र में हुआ। जहां सड़क हादसे में दीपक कुमार नामक युवक की मौत हो गई। दीपक अपने साथी के साथ बाइक से कहीं जा रहा था। इसी क्रम में वह हादसे का शिकार हो गया। छत्तरपुर थाना प्रभारी प्रशांत प्रसाद ने घटना की पुष्टि की है। 
  2. दूसरी घटना पलामू के हुसैनाबाद थाना क्षेत्र के दंगवार के इलाके की है, जहां हुए हादसे में एक व्यक्ति जख्मी हो गया। व्यक्ति की पहचान चंदन कुमार के रूप में हुई। वह बाइक से कहीं जा रहे थे और हादसे का शिकार हो गये। उन्हें इलाज के लिए हुसैनाबाद अनुमंडल अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां से उन्हें बेहतर इलाज के लिए एमएमसीएच रेफर कर दिया गया। लेकिन इलाज के क्रम में उनकी मौत हो गयी। 
  3. तीसरी घटना मेदिनीनगर टाउन थाना क्षेत्र के टीओपी 2 के इलाके की है। जबलपुर से चलकर हावड़ा जाने वाली शक्तिपुंज एक्सप्रेस से बुधवार को एक व्यक्ति नीचे गिर गया। इस हादसे में व्यक्ति की मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। टीओपी प्रभारी राकेश कुमार ने बताया कि मृतक की पहचान नहीं हुई है।

बिहार

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Published / 2026-01-17 18:43:24
120 एकड़ के प्रांगण में विराजमान होगा दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग

2 लाख किलो वजनी, 33 फीट लंबा... मोतिहारी में विश्व के सबसे विशाल शिवलिंग को देख हो जायेंगे हैरान 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, मोतिहारी/ पटना। आज बिहार के मोतिहारी में केसरिया के कठौलिया गांव में बन रहे विराट रामायण मदिर के प्रांगण में दुनिया की सबसे बड़ी शिवलिंग की स्थापना की गयी। यह मंदिर 120 एकड़ के प्रांगण में स्थापित किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह दुनिया का सबसे विराट रामायण मंदिर है। 

यह शिवलिंग तमिलनाडु के महाबलीपुरम से 2500 किमी और 40 दिन से ज्यादा की यात्रा तय करके बिहार आया है। इसे बनाने में 10 साल का वक्त लगा है, इस शिवलिंग को ग्रेनाइट पत्थर से बनाया गया है, जिसमें 1008 छोटे शिवलिंग को उकेरा गया है और इसे बनाने में 1008 कारीगरों ने अपना योगदान दिया है।

पूर्व आईपीएस और महावीर न्यास बोर्ड के पूर्व सचिव आचार्य कुणाल का सपना था यह विराट रामायण मंदिर। इसकी नींव उन्होंने अपने जीवन में रखी थी, लेकिन आज वह हमारे बीच नहीं है। लेकिन उनके बेटे सयान कुणाल से आज उनके सपने को पूरा करते हुए पूरे विधि विधान से इस शिवलिंग को मंदिर प्रांगण में स्थापित किया है। 

उन्होंने बताया है कि इस मंदिर के बनने से इस जगह का विकास भी तेजी से होगा। अयोध्या के बाद यह सबसे बड़ा धार्मिक स्थल बनेगा। यहां होटल्स, एयरपोर्ट और हाईवे बनेंगे और इस पूरे इलाके का विकास तेजी से होगा। इस विशाल शिवलिंग का वजन 200 मैट्रिक टन (2,00,000 किलोग्राम) है और जो 33 फीट लंबा है। 

इसे स्थापित करना बेहद ही मुश्किल कार्य था, लेकिन इंजीनियर्स की टीम ने इसे बेहद सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया है। इस शिवलिंग को 30 फीट से ऊंचे गुंबद पर स्थापित किया गया, जिसके बाद इसके कुल उचाई 60 फीट से भी ज्यादा हो गयी है। इसे स्थापित करने में लगभग आधे घंटे का वक्त लगा है और इसे 2 भारी-भरकम क्रेन की मदद से स्थापित किया गया है। 

शिवलिंग को क्रेन की मदद से पहले हवा में लिफ्ट किया गया, फिर ऊंचाई पर ले जाकर इसे स्थापित किया गया। शिवलिंग बनाने वाली टीम के मॉडरेटर वेंकटेश विनायक ने बताया कि इस शिवलिंग को 10 साल में बनाया गया और अब इसे विराट रामायण मंदिर के प्रांगण में स्थापित किया गया है।

Published / 2026-01-09 22:07:57
नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग

जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के सी त्यागी ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखी चिट्ठी 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। नीतीश कुमार ने पिछले साल नवंबर में दसवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर पदभार संभाला है। एक बार फिर सीएम बनने के बाद नीतीश कुमार का नाम सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेताओं में शुमार हो गया है। अब खबर आ रही है कि बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के सी त्यागी ने नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग कर रहे हैं।

 त्यागी ने ये मांग करते हुए बाकायदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भी लिखा है ।पत्र में त्यागी ने लिखा है कि नीतीश कुमार जैसे पिछले साल चौधरी चरण सिंह और कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न की उपाधि से नवाजा गया था, उसी तरह नीतीश कुमार भी इस उपाधि के पूरी तरह हकदार हैं।  

के सी त्यागी ने कहा कि बिहार और देश के प्रति नीतीश कुमार की सेवाओं को सम्मान देने का इससे अच्छा कदम नहीं हो सकता है। हालांकि ऐसा बहुत कम हुआ है जब किसी जीवित व्यक्ति को भारत रत्न दिया गया हो। त्यागी ने कहा कि करीब आधा दर्जन मामले ऐसे हैं जिसमें जीवित व्यक्ति को भी भारत रत्न दिया गया। इनमें जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, लता मंगेशकर और प्रणब मुखर्जी जैसे लोग शामिल हैं।  

आम तौर पर जनवरी में ही प्रधानमंत्री की तरफ से अलग अलग क्षेत्रों में विशेष योगदान देने के भारत रत्न दिए जाने का ऐलान किया जाता है। पिछले साल भी किसान नेता चौधरी चरण सिंह और महान समाजवादी नेता कर्पूरी ठाकुर की भारत रत्न दिए जाने का ऐलान किया गया था। कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न दिए जाने को तब बिहार चुनाव से जोड़कर देखा गया था क्योंकि ठाकुर अति पिछड़ी जाति से ताल्लुक रखते थे।  

पिछले साल नवंबर में नीतीश कुमार ने दसवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर पदभार संभाला है। सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेताओं में उनका शुमार होता है। पिछले साल हुए बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए ने नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़ते हुए 200 से ज्यादा सीटें जीती और प्रचंड जीत हासिल की। करीब 10 महीनों को छोड़कर नीतीश कुमार 2005 से लगातार बिहार के मुख्यमंत्री बने हुए हैं। हालांकि बार बार अपना राजनीतिक पाला बदलने के लिए उनकी आलोचना भी होती है।  

वैसे राजनीतिक गलियारों में के सी त्यागी की चिट्ठी के अलग अलग मायने भी लगाये जा रहे हैं। हाल ही में बांग्लादेश खिलाड़ी को आईपीएल से बाहर निकालने के फैसले पर त्यागी ने पार्टी से अलग लाइन लिया था और इस फैसले पर सवाल उठाया था। इतना ही नहीं, 2024 में फिलिस्तीन के मुद्दे पर भी त्यागी ने भारत सरकार से अलग स्टैंड लिया था जिसपर काफी हो हल्ला भी मचा था। माना जाता है कि इसी विवाद के चलते उन्होंने सितंबर 2024 में पार्टी के एकमात्र राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा भी देना पड़ा था। ऐसे भारत रत्न की मांग को डैमेज कंट्रोल के तौर पर भी देखा जा सकता है।

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