बिहार

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Published / 2026-03-18 20:32:53
सीएम हेमंत से मिले बिहार विधान परिषद के सदस्य

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बिहार विधान परिषद समिति के सदस्यों ने की मुलाकात 

टीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से झारखंड विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कक्ष में बिहार विधान परिषद की बाल संरक्षण एवं महिला सशक्तिकरण समिति के सदस्यों ने मुलाकात की। 

इस अवसर पर समिति के सदस्यों ने मुख्यमंत्री को बाल संरक्षण एवं महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में किये जा रहे अपने कार्यों से अवगत कराया। साथ ही उन्होंने बताया कि झारखंड विधानसभा के परिभ्रमण के दौरान यहां की महिला एवं बाल विकास समिति द्वारा किये जा रहे कार्यों की जानकारी प्राप्त हुई और दोनों राज्यों के अनुभवों का आदान-प्रदान भी किया गया। 

मौके पर कल्पना सोरेन, जो झारखंड विधानसभा की महिला एवं बाल विकास समिति की सभापति हैं, भी उपस्थित रहीं। मुख्यमंत्री से मुलाकात करने वालों में बिहार विधान परिषद की बाल संरक्षण और महिला सशक्तिकरण समिति की अध्यक्ष डॉ कुमुद वर्मा, सदस्य रीना यादव, मुन्नी देवी और निवेदिता सिंह सहित अन्य शामिल थे।

Published / 2026-03-16 21:56:13
बिहार राज्यसभा चुनाव में विपक्ष चारों खाने चित्त

बिहार में तेजस्वी यादव की फिर हार, कांग्रेस का साथ बेकार; राज्यसभा चुनाव परिणाम से क्या संकेत? 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। 14 नवंबर 2025 मंगलवार था। 16 मार्च 2026 सोमवार है। दिन अलग है। परिणाम एक। अंतराल 120 दिन करीब। कुछ बदला नहीं तेजस्वी यादव के लिए। विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हारे। राज्यसभा चुनाव भी। संकेत सोचने को मजबूर कर रहा। बिहार में विपक्ष को अब सोचना ही पड़ेगा। खासकर, तेजस्वी यादव और कांग्रेस को। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणाम में साफ दिख गया कि राजद-कांग्रेस के साथ होने का कोई फायदा नहीं है। 

अब राज्यसभा चुनाव 2026 के परिणाम से यह साफ हो रहा है कि कांग्रेस को साथ रखने पर राजद को विचारना ही पड़ेगा। तेजस्वी यादव ने पांच में से राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए वह भी कर दिया, जो विधानसभा में नहीं किया था- अकटकट को साथ लाना। फिर भी, हार का सिलसिला नहीं थमा। एक सीट तेजस्वी जीत जाते तो उनके लिए बड़ी जीत होती, लेकिन अपने एक और कांग्रेस के तीन विधायकों ने उनके वजूद पर सवाल खड़ा कर दिया है। 

अपने एक विधायक पर काबू नहीं रख पाये तेजस्वी 

चुनाव में धन-बल का प्रयोग होगा, यह पहले ही कहा जा रहा था। पांचवीं सीट पर जीत के लिए किसी भी पक्ष को मैनेज करना ही था। तेजस्वी यादव ने असद्दुदीन ओवैसी की पार्टी के पांच और मायावती की बहुजन समाज पार्टी के इकलौते विधायक को साथ कर लिया। इसके बाद उन्हें सिर्फ पहले से महागठबंधन में रहे अपने विधायकों को साथ रखना था। वह अपने एक विधायक पर काबू नहीं कर सके। इसके साथ ही कांग्रेस के तीन विधायक गायब रहे। मतलब, होटल में नजर के सामने रखने की पूरी योजना बेकार गयी। नतीजा हार।  

जानिये, तेजस्वी यादव और एडी सिंह ने क्या कहा? 

हार के बाद तेजस्वी यादव ने कहा था कि हमारे चार विधायक वोट देने नहीं आये, यह बात पूरे बिहार को पता है कि वो लोग क्यों नहीं आए। संख्या कम होने के बावजूद हमलोगों ने अंतिम सांस तक लड़ाई लड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा धनतंत्र और मशीन तंत्र का उपयोग करती है। विधानसभा चुनाव में क्या हुआ था? 

इसे सबने देखा। आज तो भाजपा का धनतंत्र जीत गया लेकिन एक वक्त आएगा जब भाजपा का यह सब हथकंडा नहीं चल पायेगा। हमलोग हमेशा भाजपा के खिलाफ लड़ते रहेंगे। जब तब जीतेंगे नहीं तब तक छोड़ेंगे नहीं। वहीं राजद के उम्मीवार अमरेंद्र धारी सिंह ने कहा कि पूरी तरह से खरीद-फरोख्त की गई है। भाजपा ने सत्ता का दुरुपयोग किया। धनबल का गलत प्रयोग किया गया है।  

हार के बाद राजद विधायक ने क्या कहा? 

महागठबंधन की ओर से राजद विधायक कुमार सर्वजीत ने कहा कि अब तो पूरा देश जान गया कि कौन धनबल का प्रयोग करता है? भाजपा ने धनबल का प्रयोग किया है। यह छल किया गया है। यह जनता का अपमान है। महागठबंधन के चार विधायकों के नहीं पहुंचने पर कुमार सर्वजीत ने कहा कि मतदान प्रक्रिया में भाग नहीं लेने वालों विधायकों ने जनता के साथ धोखा दिया है। उनके ऊपर जिंदगी भर एक्स एमएलए का टैग लग जायेगा।

Published / 2026-03-08 16:15:06
बिहार : जदयू में अब आज से निशांत युग की शुरुआत

  • JDU में आज निशांत युग का आगाज, पार्टी में शामिल हुए नीतीश के बेटे

एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार रविवार को औपचारिक रूप से जनता दल (यूनाइटेड) में शामिल हो गए है। वहीं इसी के साथ ही पार्टी में निशांत युग का आगाज हो गया है। वहीं निशांत के बिहार की सरकार में बतौर डिप्टी सीएम पद संभालने की भी चर्चा है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले के बाद जदयू नेताओं और कार्यकर्ताओं की तरफ से निशांत को सक्रिय राजनीति में लाने की मांग तेज हो गई थी। पिछले तीन दिनों तक पार्टी के अंदर हुई मशक्कत और विधायकों की बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिली सहमति के बाद आज निशांत कुमार ने जदयू की सदस्यता ग्रहण कर ली है। 

निशांत को जदयू के प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक भव्य समारोह में पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस अवसर पर पार्टी के शीर्ष नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद थे। कार्यकर्ताओं ने उत्साह और उम्मीद के साथ इस समारोह को एक ऐतिहासिक क्षण बना दिया और आशा व्यक्त की कि संसद के उच्च सदन में नीतीश कुमार के जाने के बाद निशांत पार्टी की नई ताकत और ऊर्जा बनेंगे।

जदयू की सदस्यता ग्रहण करने के बाद निशांत ने पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे पार्टी को मजबूत बनाने के लिए अपनी पूरी कोशिश करेंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले से कार्यकर्ताओं के बीच पैदा हुई निराशा और पीड़ा को कम करने की कोशिश करते हुए उन्होंने कहा कि यह उनका व्यक्तिगत निर्णय है। निशांत ने कहा कि वह अपने पिता के राज्यसभा जाने के फैसले को स्वीकार करते है।

 उन्होंने कहा कि उनके पिता ने पिछले 20 वर्षों में मुख्यमंत्री के रूप में बिहार के विकास के लिए बहुत काम किया है और उनकी कोशिश होगी कि अपने पिता के प्रयासों का प्रचार करें और उसे आगे बढ़ाने की कोशिश करें। उन्होंने कहा कि वह प्रदेश की जनता को मुख्यमंत्री के रूप में किए गए नीतीश कुमार के कार्यों और उपलब्धियों से अवगत कराएंगे। निशांत ने कहा कि वह नेताओं, कार्यकर्ताओं और अन्य लोगों के भरोसे पर खरे उतरने की कोशिश करेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अपने पिता पर गर्व महसूस होता है। प्रदेश पार्टी कार्यालय में इस अवसर का गवाह बनने के लिए जदयू के वरिष्ठ नेता राजीव रंजन सिंह उफर् ललन सिंह, विजय कुमार चौधरी, उमेश कुशवाहा और श्रवण कुमार सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता मौजूद थे।

बता दें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा चुनाव के लिए अपने नामांकन पत्र दाखिल किए थे। हरनौत से जद(यू) के विधायक हरि नारायण सिंह ने दावा किया कि निशांत को अगले महीने राज्य विधान परिषद का सदस्य निर्वाचित किया जाएगा।

Published / 2026-03-08 15:44:14
बिहार में तो सिर्फ और सिर्फ नीतीशे कुमार...

बिहार में तो सिर्फ और सिर्फ नीतीशे कुमार...

त्रिवेणी दास 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। पिछला बिहार विधानसभा का चुनाव नवंबर 2025 को हुआ था। 243 विधानसभा क्षेत्र में 89 भाजपा, 85 जदयू और 19 एलजेपी (रामविलास) तथा अन्य एनडीए गठबंधन कुल 202 सीट जीत कर बहुमत का आंकड़ा प्राप्त किया और नीतीश कुमार 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बने। मात्र (3) सवा तीन (3:15) महीना के भीतर नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री का कुर्सी छोड़कर राज्यसभा के सांसद के रूप में दिल्ली जाने का निर्णय लिया जो अचंभित भी करता है और राजनीति के लिए आश्चर्यजनक है।

बताया यह जा रहा है कि नीतीश कुमार चारों सदन की सदस्यता का रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं इसीलिए उन्होंने स्वेच्छा से मुख्यमंत्री पद छोड़ना स्वीकार किया; परंतु सियासत एवं वक्त में एकदम से सीधा अनोनाश्रय रिश्ता होता है जो कभी भारी पड़ता है, कभी ढीला पड़ जाता है और कभी राजनीतिज्ञ को कमजोर बना देता है। 

वक्त को भारी पड़ते हुए देख राजनीति के ट्रैक में लाइन बदलने का निर्णय नीतीश कुमार के राजनीतिक परिपक्वता का परिचायक है। आजादी के बाद से भारतीय राजनीति में परिवारवाद का प्रचलन कोई अपवाद नहीं है, विशेष कर कांग्रेस एवं क्षेत्रीय दलों में तो यही परिपाटी रही है। इस परिपाटी का अनुपालन जदयू में भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है। 

नीतीश कुमार के सुपुत्र निशांत का जदयू के राजनीति में एंट्री हो चुका है। वह बकायदे सक्रिय हो चुके हैं और अपने बाबूजी की तरह अपनी राजनीतिक यात्रा बिहार के चंपारण से शुरू करने वाले हैं। पार्टी के जिला अध्यक्षों से उन्होंने लंबी मंत्रणा की है और पार्टी के युवा विधायकों के साथ जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के आवास पर लंबी चर्चा की है। 

इधर बिहार विधानसभा के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी लगातार अधिक सीट जीतने के बाद भी अधिकतम ऊंचाई उपमुख्यमंत्री तक ही सीमित रही है। सुशील कुमार मोदी की लंबी पारी के कारण भाजपा में कोई अन्य नेता उभर कर सामने नहीं आ पाया है। बिहार से नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर पहले ही दिल्ली बुला लिया गया और अब उन्हें राज्यसभा भेज कर उनका स्थाई निवास दिल्ली बना दिया जा रहा है। 

बीजेपी के पास बिहार के राजनीति की उच्चतम पद पर काबिज होने का यह सुनहरा मौका है और वह मुख्यमंत्री बनाने के अत्यंत करीब पहुंच भी चुकी है। भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री कौन होगा यह एक बड़ा सवाल है। हमेशा की तरह मोदीजी इस निर्णय पर भी चौंकाने का कार्य करेंगे? राजनीति के पंडितों के दिमाग में इसके उत्तर नहीं मिल पा रहे हैं। 

नीतीश कुमार का कद, काठी, प्रभाव और केंद्र की सरकार के टिकाऊ के लिए अत्यंत आवश्यक समर्थन को देखते हुए इतना तो तय है कि बिहार की राजनीति और सरकार में उनके सुपुत्र निशांत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाली है।

Published / 2026-03-05 18:16:44
बाबूलाल ने नीतीश कुमार के योगदान को सुशासन के लिए बताया सर्वोच्च

  • नीतिश कुमार के ट्वीट पर बाबूलाल मरांडी का जवाब
  • कहा- सुशासन की स्थापना में आपका योगदान सर्वोच्च

टीम एबीएन, रांची। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के ट्वीट पर जवाब दिया है। मरांडी ने लिखा, नीतिश कुमार, पिछले तीन-चार दशकों से आप बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे हैं।

मरांडी ने आगे लिखा, बिहार को जंगलराज से बाहर निकालकर सुशासन की स्थापना में आपका योगदान सर्वोच्च रहा है। आपके नेतृत्व में राज्य ने प्रशासनिक स्थिरता, विकास और व्यवस्था की एक नई दिशा प्राप्त की। मरांडी ने लिखा, सार्वजनिक जीवन में आपने हमेशा सुचिता, सम्मान और नैतिकता के मूल्यों को स्थापित किया है। बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में आपका कार्यकाल राज्य के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में याद किया जाएगा।

मरांडी ने कहा कि अब राज्यसभा सदस्य के रूप में भी सदन आपके अनुभव, द्दष्टि और नेतृत्व से निश्चित रूप से गौरवान्वित होगा। आपके उज्ज्वल भविष्य और इस नई पारी के लिए हार्दिक शुभकामनाएं। विकसित भारत के निर्माण में आपका अनुभव और योगदान देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगा।

Published / 2026-02-23 13:18:11
हीरो राजन कुमार को मिला दानवीर कर्ण राष्ट्रीय सम्मान

हीरो राजन कुमार को मिला दानवीर कर्ण राष्ट्रीय सम्मान

एबीएन न्यूज नेटवर्क, भागलपुर (बिहार)। भागलपुर के स्थानीय गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र भागलपुर में युग चेतना फाउंडेशन, अंग-जन-गण, अंग मदद फाउंडेशन और अंगिका सभा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में विश्व मातृभाषा दिवस के उपलक्ष्य में रविवार को आयोजित दानवीर कर्ण राष्ट्रीय सम्मान समारोह में हीरो राजन कुमार को दानवीर कर्ण राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया गया

यह सम्मान शहर के प्रख्यात चिकित्सक डॉ. डी.पी. सिंह के द्वारा प्रदान किया गया। यह सम्मान जिला परिषद के पूर्व अध्यक्ष समाजसेवी डॉ. शंभू दयाल खेतान, शहर के जाने-माने चिकित्सक प्रो. डॉ. रतन कुमार मंडल, डॉ. रमेश आत्मविश्वास समेत अन्य प्रतिष्ठित अतिथियों की उपस्थिति में दिया गया।

यह आयोजन विश्व मातृभाषा दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित अंग अंगिका साहित्य महोत्सव मातृभाषा के सम्मान, संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। 
दानवीर कर्ण, जो महाभारत के प्रमुख पात्रों में से एक हैं, त्याग, दान और मानवीय मूल्यों के प्रतीक माने जाते हैं।

हीरो राजन कुमार कर्ण की भूमिका में कर्ण जीवंत स्वरूप अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया। उनके नाम पर दिया जाने वाला यह सम्मान साहित्य और समाज में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को समर्पित है। बिहार के मुंगेर निवासी हीरो राजन कुमार  जिन्हें चार्ली चैपलिन-2 के नाम से जाना जाता है।

उनका चार्ली चैपलिन-द्वितीय लाइव प्रस्तुति की ऊर्जा और प्रत्यक्ष संपर्क दर्शकों के साथ एक गहरा असर डालता है। जब भारतीय अभिनेता हीरो राजन कुमार मंच पर जीते-जागते भावों के साथ चार्ली चैपलिन-द्वितीय का अभिनय करते हैं, तो दर्शक सीधे उनसे जुड़ते हैं। 

यही रंगमंच की जादुई ताकत है, जो आज भी लोगों को बांधे रखती है। लाइव परफॉरमेंस की वह ऊर्जा, पल-पल का कनेक्शन,सब कुछ दर्शकों को सीधे दिल से जोड़ देता है। हीरो राजन कुमार जब चार्ली चैपलिन-2 बनकर स्टेज पर आते हैं, तो रंगमंच का जादू सच में सबके रोंगटे खड़े कर देता है।

यहीं तो ख़ासियत है रंगमंच की,वह डिजिटल दुनिया से परे एक अलग ही अनुभव देता है।वह एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं,जो अभिनेता, कलाविद, कवि, सामाजिक कार्यकर्ता और किसान भी हैं। उन्होंने चार्ली चैपलिन के रूप में सबसे ज़्यादा लाइव शो करने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने 5157 से अधिक सजीव प्रस्तुतियाँ दी हैं।

26 जनवरी 2025 को गणतंत्र दिवस परेड में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने अपनी कविता जय हो का पाठ किया, जिसे काफी सराहना मिली। वे बिहार फिल्म एंड टेलीविजन आर्टिस्ट एसोसिएशन (BAFTA) ट्रस्ट, मुंगेर, बिहार से जुड़े हैं और उन्होंने गणतंत्र दिवस परेड में अपनी टीम का नेतृत्व भी किया था। 

उन्होंने कई हिंदी फिल्मों और टेली - फिल्म्स में काम किया है। जिनमें नमस्ते बिहार, शहर मसीहा नहीं, लहरिया कट और हाल ही में आखिर शामिल हैं। वह अपनी साइलेंट कॉमेडी के लिए भी जाने जाते हैं। 

इससे पहले उन्हें प्रतिष्ठित आचार्य लक्ष्मीकांत मिश्र राष्ट्रीय सम्मान से भी परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें डॉ. कलाम यूथ रत्न अवॉर्ड 2025 से सम्मानित किया गया है। वह एक बहुत ही प्रतिभाशाली और प्रसिद्ध कलाकार हैं, जो अपनी कला और सामाजिक कार्यों के लिए जाने जाते हैं।

Published / 2026-02-13 22:02:40
सारण : देर रात छापों में छह आर्केस्ट्रा समूहों से 15 लड़कियों को मुक्त कराया, सात गिरफ्तार

  • सारण : देर रात छापों में छह आर्केस्ट्रा समूहों से 15 लड़कियों को मुक्त कराया, सात गिरफ्तार

एबीएन न्यूज नेटवर्क, सारण। बिहार के सारण में महज दस किलोमीटर के दायरे में देर रात हुई छापों की कार्रवाई में छह आर्केस्ट्रा समूहों से 15 नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया। बिहार पुलिस की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग इकाई और गैरसरकारी संगठनों एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन (एवीए) व नारायणी सेवा संस्थान की पांच घंटे तक चली संयुक्त कार्रवाई में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। 

मुक्त कराई गई ज्यादातर लड़कियों के शरीर पर चोट के निशान थे। इन लड़कियों को ट्रैफिकिंग के जरिए पंजाब, ओडिशा, असम, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश से लाया गया था। इस दौरान एक गाड़ी को जब्त किया गया और मुक्त कराई गई लड़कियों को आश्रय गृह भेज दिया गया। एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन और नारायणी सेवा संस्थान बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी ज्यादा नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) के सहयोगी संगठन हैं।  

यह कार्रवाई बिहार के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कमजोर वर्ग, सीआईडी, बिहार पुलिस मुख्यालय) डॉ. अमित कुमार जैन के दिशानिर्देशों के बाद सारण के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के आदेश पर हुई। छापे की कार्रवाई आधी रात शुरू हुई और भोर तक जारी रही। इसमें विभिन्न आर्केस्ट्रा परिसरों से 12 लड़कियों को मुक्त कराया गया जबकि खुशी आर्केस्ट्रा के मालिक ने तीन लड़कियों को कार में लेकर भागने की कोशिश की। आठ किलोमीटर तक पीछा करने के बाद उसे पकड़ लिया गया और तीनों नाबालिग लड़कियों को मुक्त करा लिया गया।

मुक्त कराई गई सभी लड़कियों ने बताया कि उन्हें शारीरिक प्रताड़ना व यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ता था और अश्लील गानों पर नाचने को मजबूर किया जाता था। एफआईआर के अनुसार, इन लड़कियों को रात में भीड़ के सामने अश्लील गानों पर जबरन नृत्य कराया जाता था। इन्हें पूरी तनख्वाह नहीं दी जाती थी और इनका शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न किया जाता था।

लड़कियों के शरीर पर दिख रहे चोटों के निशान बता रहे थे कि आर्केस्ट्रा मालिकों ने उन पर कितना अत्याचार किया था। जिन आर्केस्ट्रा समूहों पर छापे मारे गए उनमें काजल आर्केस्ट्रा, सुर संगम आर्केस्ट्रा, कोपा चट्टी आर्केस्ट्रा, खुशी आर्केस्ट्रा, श्याम आर्केस्ट्रा और दिया आर्केस्ट्रा शामिल थे।

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और बिहार पुलिस टीम की इस त्वरित कार्रवाई की सराहना करते एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन के वरिष्ठ निदेशक मनीष शर्मा ने कहा, बिहार पुलिस ने जिस तरह आर्केस्ट्रा समूहों पर शिकंजा कसा है, वह एक नजीर है। ये आर्केस्ट्रा समूह बड़े ट्रैफिकिंग गिरोहों के लिए एक अहम कड़ी हैं। ये गिरोह कमजोर पृष्ठभूमि की लड़कियों को जाल में फांसते हैं और उन्हें शोषण व उत्पीड़न के अंतहीन चक्र में धकेल देते हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि स्थानीय पुलिस इसे संगठित आपराधिक गिरोहों से जुड़ा मामला समझ कर इसकी छानबीन करे और उसी के अनुरूप कानूनी कार्रवाई करे। साथ ही, हमें इन नाबालिग बच्चियों का तत्काल पुनर्वास सुनिश्चित करना होगा ताकि ये फिर से समाज की मुख्य धारा में लौट सकें।

पुलिस ने सातों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की प्रासंगिक धाराओं, पॉक्सो अधिनियम, 2012; किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल व संरक्षण) अधिनियम, 2015 और बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। सभी नाबालिग लड़कियों को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया जहां से उन्हें काउंसलिंग व पुनर्वास के लिए आश्रय गृह भेज दिया गया।

और जानकारी के लिए संपर्क करें
जितेंद्र परमार
8595950825

Published / 2026-02-04 21:19:06
दरभंगा : गांव के सभी ब्राह्मणों पर एक साथ केस

  • दिल्ली में काम करने वाले भी बने आरोपी, बिहार में अनोखा मामला 
  • दरभंगा के एक गांव में लगभग हर ब्राह्मण परिवार को आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने 70 नामजद लोगों और 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि पूरे ब्राह्मण समुदाय ने मिलकर एक परिवार का शोषण किया। 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। बिहार के दरभंगा में कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र के हरिनगर गांव में दर्ज एक प्राथमिकी आजकल चर्चा का विषय बनी हुई है। इसका कारण यह है कि इस एक ही प्राथमिकी में पूरे गांव के ब्राह्मण समुदाय के सभी सदस्यों को आरोपी बनाया गया है। हैरानी की बात यह है कि इनमें से कई लोग सालों से अपने परिवार का पेट पालने के लिए दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में काम कर रहे हैं, फिर भी उनके नाम भी आरोपियों की लिस्ट में शामिल हैं। 

एक प्राथमिकी, पूरा गांव कटघरे में 

दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान थाने में दर्ज इस प्राथमिकी में हरिनगर गांव के करीब 70 ब्राह्मणों के नाम हैं, जबकि 100 से 150 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। शिकायतकर्ता, असरफी पासवान का आरोप है कि पूरे गांव ने मिलकर उनके परिवार पर हमला किया और उन्हें परेशान किया। इसी आधार पर पुलिस ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम सहित कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। 
जैसे ही यह मामला सामने आया, गांव में हंगामा मच गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली बार है कि किसी विवाद में पूरे समुदाय को आरोपी बनाया गया है। 

दिल्ली और मुंबई में काम करने वाले भी आरोपी 

इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि आवेदन में जिन लोगों के नाम हैं, उनमें से कई सालों से गांव में नहीं रह रहे हैं। कुछ दिल्ली और मुंबई में मजदूरी करते हैं, जबकि कुछ प्राइवेट कंपनियों में नौकरी करते हैं। परिवार वालों का कहना है कि घटना के समय ये लोग गांव में मौजूद नहीं थे, फिर भी उन्हें आरोपी बनाया गया है।

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