टीम एबीएन, रांची। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सामाजिक संस्था नवा बिहान – नर्चरिंग इनिशिएटिव्स द्वारा राँची के होचर, रिंग रोड क्षेत्र में वृक्षारोपण सह गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों एवं प्रतिष्ठित महाविद्यालयों से इंटर्नशिप के लिए आए छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
कार्यक्रम का शुभारंभ अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत, राँची जिला इकाई के अध्यक्ष आलोक कुमार पांडे एवं उपाध्यक्ष बृज मोहन ओझा द्वारा नीम एवं कदम के पौधे लगाकर किया गया। दोनों अतिथियों ने पर्यावरण संरक्षण को वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए लोगों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने तथा पौधों की नियमित देखभाल करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राँची जिला पुलिस के सार्जेंट मेजर आनन्द राज खालको ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष 2026 के विश्व पर्यावरण दिवस का मुख्य विषय जलवायु परिवर्तन : पृथ्वी के संकेत और हमारी प्रतिक्रिया है। उन्होंने कहा कि पृथ्वी लगातार हमें बढ़ते तापमान, असामान्य मौसम, जल संकट तथा जैव विविधता में कमी के रूप में चेतावनी दे रही है। ऐसे समय में प्रत्येक नागरिक, विशेषकर युवाओं की जिम्मेदारी है कि वे पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के वैश्विक अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अभियान सभी लोगों से आगे बढ़कर अधिक प्रयास करने तथा पहले से ही गतिमान दुनिया को सही दिशा देने का आह्वान करता है। उन्होंने कहा कि केवल सरकारों के प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी से ही जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना किया जा सकता है।
नवा बिहान के जिला अध्यक्ष गौतम तिवारी के संरक्षण में होचर, रिंग रोड क्षेत्र में वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। इस दौरान लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल एवं संरक्षण की जिम्मेदारी भी स्थानीय स्तर पर सुनिश्चित की गई। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित पर्यावरण प्रदान करने का संकल्प है। उन्होंने सभी युवाओं से अपने जीवन में कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करने का आग्रह किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नवा बिहान के संस्थापक आर. अजय ने कहा कि देशभर से आए इंटर्नशिप के छात्र-छात्राएं विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि भारत की युवा शक्ति ही विकसित भारत के भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी है। युवाओं के पास ऊर्जा, नवाचार और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि केवल आर्थिक विकास ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति जागरूकता भी उतनी ही आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि नवा बिहान द्वारा संचालित सामुदायिक विकास कार्यक्रम के अंतर्गत शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास, स्वास्थ्य, आजीविका संवर्धन एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में लगातार कार्य किया जा रहा है। संस्था का उद्देश्य युवाओं को समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करना तथा उन्हें सेवा, नेतृत्व और सतत विकास की भावना से जोड़ना है।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने पर्यावरण संरक्षण की शपथ लेते हुए प्लास्टिक के उपयोग को कम करने, अधिक से अधिक वृक्ष लगाने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने तथा स्वच्छ और हरित भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया। विद्यार्थियों ने सामुदायिक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने और पर्यावरण संबंधी गतिविधियों में निरंतर भागीदारी निभाने का भी संकल्प व्यक्त किया।
कार्यक्रम में विभिन्न महाविद्यालयों से आए इंटर्नशिप के प्रतिभागियों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां उन्हें केवल व्यावहारिक अनुभव ही नहीं प्रदान करतीं, बल्कि समाज और पर्यावरण के प्रति उत्तरदायित्व की भावना भी विकसित करती हैं। उन्होंने नवा बिहान द्वारा प्रदान किए जा रहे सामुदायिक विकास एवं पर्यावरण संरक्षण के अवसरों की सराहना की।
कार्यक्रम का समापन एक पेड़ माँ के नाम, पेड़ लगाओ–भविष्य बचाओ तथा हरित भारत, विकसित भारत के संदेश के साथ किया गया। सभी प्रतिभागियों ने पौधों की सुरक्षा एवं संरक्षण का संकल्प लेते हुए पर्यावरण संरक्षण के इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में कृतिका लकड़ा, स्वीटी भेंगरा, किरण नागौवर, सृष्टि कुमारी मुण्डा, शुभम कुमार, रौशन कुमार, अंकित भगत, सौरभ कुमार महतो, आयुष कुमार, मनोहर ओरांव, तन्मय जयसवाल, साक्षी जसवाल, रोहित कुमार, अमन राज, प्रिया तांशू मुन्डा, आर्यन केरकेट्टा, श्रेष्ठा जयसवाल, कृषिका अग्रवाल, अमन कुमार, प्रवीण कुमार केरकेट्टा, सुमंत कुमार यादव, कुमार तनिष्क, आर्यन, निरंजन और एस कुमार का सहयोग सहराणीय रहा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। जब पर्यावरण संरक्षण की चर्चा भी आम नहीं थी, तब पलामू की धरती से एक युवा ने प्रकृति को बचाने का संकल्प लिया। वर्ष 1966 के भीषण अकाल ने उसके मन पर ऐसी छाप छोड़ी कि उसने अपना जीवन जंगल लगाने, वृक्ष बचाने और पर्यावरण जागरूकता के लिए समर्पित कर दिया। वह युवा आज देश-विदेश में पर्यावरणविद के रूप में पहचान बना चुके डॉ. कौशल किशोर जायसवाल हैं, जिनके वनराखी मूवमेंट ने इस वर्ष अपने गौरवशाली 50 वर्ष पूरे कर लिए हैं।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर देशभर में वनराखी आंदोलन की स्वर्ण जयंती समारोह श्रृंखला आयोजित की जा रही है। पर्यावरण धर्म और वृक्ष संरक्षण को जन-आंदोलन का स्वरूप देने वाले डॉ. कौशल का अभियान आज सीमाओं को लांघकर अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुका है।
डॉ. कौशल बताते हैं कि 1966 के महाअकाल ने उन्हें प्रकृति और मानव जीवन के गहरे संबंध को समझने का अवसर दिया। उन्होंने महसूस किया कि जल, जंगल और पर्यावरण के बिना मानव सभ्यता का अस्तित्व संभव नहीं है। इसी सोच ने उन्हें पर्यावरण धर्म और वनराखी मूवमेंट की स्थापना के लिए प्रेरित किया। उनका मानना है कि ऊपर सूर्य देव और नीचे वृक्ष देव हैं। यदि ये दोनों नहीं रहेंगे तो पृथ्वी पर जीवन की कल्पना भी संभव नहीं होगी।
पिछले छह दशकों में डॉ. कौशल ने देश के 26 राज्यों के 181 जिलों के साथ-साथ नेपाल, भूटान, म्यांमार, सिंगापुर, मलेशिया, अजरबैजान, थाईलैंड, इंडोनेशिया, जापान और वियतनाम सहित कई देशों में पर्यावरण संरक्षण का संदेश पहुंचाया है।
उनके नेतृत्व में अब तक लगभग 59 लाख पौधों का नि:शुल्क वितरण एवं रोपण किया जा चुका है। वहीं 26 लाख से अधिक वृक्षों पर रक्षाबंधन कर उन्हें संरक्षण का प्रतीक बनाया गया है। उनका मानना है कि वृक्ष केवल प्रकृति का हिस्सा नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य हैं और उनकी रक्षा हमारा नैतिक दायित्व है।
पलामू जिले के छतरपुर अनुमंडल अंतर्गत ग्राम पंचायत डाली आज डॉ. कौशल की तपस्या का सजीव उदाहरण है। जहां कभी बंजर भूमि थी, वहां आज हरियाली का विस्तृत संसार विकसित हो चुका है।
डाली स्थित मोहनलाल खुर्जा-पार्वती देवी पार्क में 22 देशों की 200 से अधिक प्रजातियों के पौधे लगाये गये हैं, जिनमें अनेक दुर्लभ एवं औषधीय प्रजातियां शामिल हैं। यह क्षेत्र आज पर्यावरण प्रेमियों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए अध्ययन एवं प्रेरणा का केंद्र बन गया है।
डॉ. कौशल की सोच केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं रही। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने का प्रयास किया। इसी दिशा में 12 फरवरी 2026 को डाली में दुनिया के पहले पर्यावरण धर्म ज्ञान वृक्ष देव मंदिर का उद्घाटन किया गया। इस अनूठे मंदिर की विशेषता यह है कि यहां ईंट-पत्थर की पारंपरिक संरचना नहीं, बल्कि वृक्ष ही देवस्वरूप माने जाते हैं।
मंदिर का उद्घाटन अमेरिका के शोधकर्ता जॉर्ज जेम्स, कर्नाटक के प्रसिद्ध पर्यावरणविद एवं आपीको आंदोलन के नेता पांडुरंग हेगड़े सहित विभिन्न राज्यों से आए पर्यावरण विशेषज्ञों की उपस्थिति में किया गया। आज प्रतिदिन सैकड़ों लोग यहां पहुंचकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश सीख रहे हैं और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझ रहे हैं।
डॉ. कौशल के संघर्ष का प्रारंभिक दौर आसान नहीं था। जब वे अपनी गाड़ी में पौधे लेकर गांव-गांव जाते थे, तब कई लोग उनका मजाक उड़ाते थे। उन्हें पागल तक कहा जाता था। लेकिन उन्होंने आलोचनाओं की परवाह किए बिना अपना अभियान जारी रखा।
कोरोना महामारी के दौरान जब आॅक्सीजन की कमी ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया, तब लोगों को उनके वर्षों पुराने संदेश का महत्व समझ में आया। डॉ. कौशल कहते हैं कि जब मैं जल संकट और आॅक्सीजन संकट की बात करता था, तब लोग हंसते थे। लेकिन कोरोना ने बता दिया कि जीवन के लिए सबसे आवश्यक क्या है।
डॉ. कौशल ने दशकों पहले किसानों को वृक्ष आधारित खेती का महत्व समझाया। उनका कहना है कि वृक्ष किसानों के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट की तरह होते हैं। सूखा, बाढ़ या विपरीत परिस्थितियों में भी वृक्ष भविष्य की आर्थिक सुरक्षा प्रदान करते हैं। वे कहते हैं कि वन राष्ट्र की अमूल्य संपत्ति हैं। इन्हें काटना ही नहीं, अनावश्यक क्षति पहुंचाना भी प्रकृति के प्रति अपराध है।
डॉ. कौशल के पर्यावरणीय योगदान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। उनकी जीवनी सीबीएसई बोर्ड की कक्षा आठ और आईसीएसई बोर्ड की कक्षा छह के पाठ्यक्रम में शामिल की जा चुकी है। झारखंड के कई शैक्षणिक कार्यक्रमों में भी उनके कार्यों का अध्ययन कराया जाता है।
उनके जीवन और कार्यों पर आधारित प्रश्न विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं तथा लोकप्रिय ज्ञान कार्यक्रमों में भी पूछे जा चुके हैं। अब तक उन्हें लगभग 80 सम्मान प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें 10 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी शामिल हैं।
वनराखी आंदोलन की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि यह किसी संस्था या सरकार का अभियान नहीं, बल्कि एक व्यक्ति के संकल्प से शुरू होकर जन-आंदोलन में परिवर्तित हुआ है। आज हजारों लोग इस अभियान से जुड़कर वृक्ष संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन का कार्य कर रहे हैं।
स्वर्ण जयंती वर्ष में प्रवेश कर चुका यह आंदोलन आने वाली पीढ़ियों के लिए संदेश देता है कि यदि संकल्प दृढ़ हो तो एक अकेला व्यक्ति भी समाज और प्रकृति दोनों की दिशा बदल सकता है।
विश्व पर्यावरण दिवस केवल पौधे लगाने का अवसर नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति अपने दायित्व को समझने का दिन है। डॉ. कौशल किशोर जायसवाल की जीवन यात्रा हमें बताती है कि पर्यावरण संरक्षण कोई सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जीवन जीने की संस्कृति है।
आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और जल संकट जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, तब वनराखी आंदोलन जैसी पहलें आशा की नयी किरण बनकर उभर रही हैं। प्रकृति की रक्षा ही मानवता की रक्षा है, और यही संदेश डॉ. कौशल के पांच दशक लंबे संघर्ष की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि विश्व पर्यावरण दिवस हर वर्ष 5 जून को पूरे विश्व में मनाया जाता है। यह दिवस पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा पृथ्वी को सुरक्षित एवं स्वच्छ बनाने के लिए लोगों को प्रेरित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
इसकी शुरुआत वर्ष 1972 में आयोजित संयुक्त राष्ट्र मानव पर्यावरण सम्मेलन के निर्णय के बाद हुई थी। वर्ष 1973 से इसे नियमित रूप से मनाया जाने लगा। वर्तमान में यह दिवस संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) के नेतृत्व में विश्व के 150 से अधिक देशों में मनाया जाता है।आज पर्यावरण संरक्षण पूरी मानवता के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।
बढ़ता प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई, जैव विविधता का ह्रास, ग्लोबल वार्मिंग तथा प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन पृथ्वी के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। ऐसे समय में विश्व पर्यावरण दिवस हमें प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का बोध कराता है। विश्व पर्यावरण दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें प्रकृति के संरक्षण के लिए सक्रिय भागीदारी हेतु प्रेरित करना है।
यह दिवस मानव और प्रकृति के बीच संतुलन बनाये रखने का संदेश देता है। इसके माध्यम से सरकारों, सामाजिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और आम नागरिकों को पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान हेतु एक मंच प्रदान किया जाता है। पर्यावरण मानव जीवन का आधार है। स्वच्छ वायु, शुद्ध जल, उपजाऊ भूमि और स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र के बिना जीवन संभव नहीं है।
पर्यावरण दिवस हमें यह समझाता है कि यदि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण नहीं किया गया तो भविष्य में जल संकट, खाद्य संकट, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और प्राकृतिक आपदाएं और अधिक बढ़ सकती हैं। यह दिवस लोगों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करता है तथा उन्हें प्रकृति के अनुकूल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करता है। साथ ही यह सतत विकास की अवधारणा को भी मजबूत बनाता है।
वर्तमान समय में औद्योगिकीकरण, शहरीकरण और जनसंख्या वृद्धि के कारण पर्यावरण पर अत्यधिक दबाव बढ़ रहा है नदियां प्रदूषित हो रही हैं, जंगलों का क्षेत्र घट रहा है और पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है। इन समस्याओं से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। वृक्षारोपण, जल संरक्षण, ऊर्जा की बचत, प्लास्टिक का कम उपयोग और कचरे के पुनर्चक्रण जैसे उपाय पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व भी है। यदि हर व्यक्ति एक पौधा लगाए, जल एवं बिजली की बचत करे, प्लास्टिक का उपयोग कम करे तथा स्वच्छता को अपनाए, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा परिवर्तन संभव है। विश्व पर्यावरण दिवस प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उसके संरक्षण का संकल्प लेने का अवसर है।
यह दिवस हमें याद दिलाता है कि पृथ्वी हमारी साझा धरोहर है और इसे सुरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता, सहभागिता और सतत प्रयासों के माध्यम से ही एक स्वच्छ, हरित और सुरक्षित भविष्य का निर्माण किया जा सकता है। यही विश्व पर्यावरण दिवस का मूल संदेश है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के अधिकतर हिस्सों में अगले पांच दिनों में लू की स्थिति से राहत मिलने की संभावना है, क्योंकि अधिकतम तापमान में चार डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है। अधिकरियों ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 20 जिलों में गरज के साथ बारिश की आशंका को लेकर आॅरेंज अलर्ट जारी किया है। रांची मौसम विज्ञान केंद्र के उप निदेशक अभिषेक आनंद ने कहा, राज्य के कई हिस्सों में पिछले 24 घंटों में अधिकतम तापमान में एक से दो डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। अगले दो दिनों में इसमें चार डिग्री सेल्सियस तक की और गिरावट आने की संभावना है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के उत्तर-पश्चिम से लेकर ओडिशा के दक्षिणी तटीय क्षेत्र तक और दक्षिण बिहार से लेकर आंध्र प्रदेश के उत्तरी तटीय क्षेत्र तक फैली दो निम्न दबाव प्रणालियों के कारण लू की स्थिति में राहत मिलने की उम्मीद है।
पिछले कुछ दिनों में झारखंड के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया था। बुधवार को डाल्टनगंज में राज्य का सबसे अधिक तापमान 43.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि मंगलवार को यह 44.8 डिग्री सेल्सियस था।
मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, राज्य की राजधानी रांची में मंगलवार को तापमान 39.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, हालांकि बुधवार को इसमें कुछ गिरावट आयी और यह 37 डिग्री सेल्सियस पर आ गया।
टीम एबीएन, रांची। भीषण गर्मी और उमस से परेशान झारखंडवासियों को शुक्रवार सुबह बड़ी राहत मिली। सुबह से ही मौसम का मिजाज बदला-बदला नजर आया। तेज और ठंडी हवाओं के साथ हुई रिमझिम बारिश ने राजधानी रांची समेत राज्य के कई जिलों का मौसम पूरी तरह सुहाना बना दिया।
आसमान में छाये बादलों और हल्की फुहारों ने लोगों को शिमला-मनाली जैसी ठंडक का एहसास कराया। लंबे समय से पड़ रही चिलचिलाती धूप और उमस भरी गर्मी से बेहाल लोग इस खुशनुमा मौसम का जमकर आनंद लेते नजर आये। सुबह करीब आठ बजे के बाद कई इलाकों में हल्की बारिश शुरू हुई, जिसके बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गयी।
सड़कों, पार्कों और बाजारों में लोगों के चेहरे पर राहत साफ दिखाई दी। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने मौसम के इस बदले मिजाज का आनंद लिया। कई लोग घरों की छतों और बालकनियों में खड़े होकर बारिश का आनंद लेते दिखे, जबकि कुछ लोग गर्म चाय और पकौड़ों के साथ मौसम का लुत्फ उठाते नजर आये।
इधर, मौसम विभाग ने राज्य के कई जिलों के लिए आॅरेंज अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार 29 और 30 मई को झारखंड के अधिकांश हिस्सों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।
इसके साथ गरज-चमक, बारिश और वज्रपात की भी संभावना जतायी गयी है। रांची, बोकारो, गुमला, हजारीबाग, खूंटी, रामगढ़, लोहरदगा, धनबाद, देवघर, दुमका, गिरिडीह और पूर्वी-पश्चिमी सिंहभूम समेत कई जिलों में मौसम का असर देखने को मिल सकता है।
मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की अपील की है। विभाग ने खुले मैदान, पेड़ों के नीचे और बिजली के खंभों के पास खड़े नहीं होने की सलाह दी है। किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।
प्रशासन ने संभावित आपदा से निपटने के लिए संबंधित विभागों को अलर्ट मोड में रहने का निर्देश दिया है। मौसम में अचानक हुए बदलाव को देखते हुए आपदा प्रबंधन टीमों को भी सतर्क रहने के लिए कहा गया है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के अधिकतर हिस्सों में अगले पांच दिनों में लू की स्थिति से राहत मिलने की संभावना है, क्योंकि अधिकतम तापमान में चार डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है। अधिकरियों ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने 20 जिलों में 30 मई तक गरज के साथ बारिश की आशंका को लेकर आॅरेंज अलर्ट जारी किया है। रांची मौसम विज्ञान केंद्र के उप निदेशक अभिषेक आनंद ने कहा, राज्य के कई हिस्सों में पिछले 24 घंटों में अधिकतम तापमान में एक से दो डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गयी है।
अगले दो दिनों में इसमें चार डिग्री सेल्सियस तक की और गिरावट आने की संभावना है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के उत्तर-पश्चिम से लेकर ओडिशा के दक्षिणी तटीय क्षेत्र तक और दक्षिण बिहार से लेकर आंध्र प्रदेश के उत्तरी तटीय क्षेत्र तक फैली दो निम्न दबाव प्रणालियों के कारण लू की स्थिति में राहत मिलने की उम्मीद है। पिछले कुछ दिनों में झारखंड के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया था।
बुधवार को डाल्टनगंज में राज्य का सबसे अधिक तापमान 43.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि मंगलवार को यह 44.8 डिग्री सेल्सियस था। मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, राज्य की राजधानी रांची में मंगलवार को तापमान 39.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, हालांकि बुधवार को इसमें कुछ गिरावट आयी और यह 37 डिग्री सेल्सियस पर आ गया।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में पड़ रही भीषण गर्मी ने लोगों का जीवन मुश्किल कर दिया है। राज्य के शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। हीटवेव के बीच लोगों को पानी के लिए घंटों मशक्कत करनी पड़ रही है, जबकि सरकार की कई योजनाएं जमीनी स्तर पर दम तोड़ती नजर आ रही हैं।
रांची समेत कई शहरों में नगर निगम द्वारा वाटर टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जा रही है, लेकिन बढ़ती मांग के मुकाबले यह व्यवस्था फेल साबित हो रही है। जल जीवन मिशन के तहत बिछायी गयी पाइपलाइनें कई जगहों पर केवल शोभा की वस्तु बनकर रह गयी हैं।
शहरों में लगाए गए डीप बोरिंग भी बड़ी संख्या में खराब पड़े हैं। नामकुम प्रखंड के टुंगरीटोली में ग्रामीण आज भी चुआ से पानी भरने को मजबूर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति और गंभीर बनी हुई है। पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगाये गये सोलर जलमीनार, सोलर पंप और हजारों हैंडपंप खराब पड़े हैं। कई गांवों में लोग नदी, झरना और कुएं के सहारे प्यास बुझा रहे हैं।
चाईबासा में 2554 सोलर आधारित जल योजनाओं में से 245 योजनाएं खराब पायी गयी हैं। कहीं पंप धंस गए हैं तो कहीं बोरिंग फेल हो चुकी है। इसके कारण ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दुमका के पहाड़िया टोला में दो सोलर टंकियों में से एक पूरी तरह बंद पड़ी है, जबकि पांचों चापाकल वर्षों से खराब हैं। यहां करीब 50 आदिवासी परिवार एक किलोमीटर दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं।
घाटशिला के बृंदावानपुर गांव में एक साल से खराब पड़ी सोलर जलमीनार के कारण ग्रामीण गंभीर जल संकट झेल रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार राज्य में 52 हजार से अधिक हैंडपंप खराब पड़े हैं। विभाग मिस्त्रियों की कमी और तकनीकी समस्याओं का हवाला दे रहा है, लेकिन भीषण गर्मी में आम जनता भगवान भरोसे नजर आ रही है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में गर्मी अब लोगों को झुलसाने लगी है। सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों का हाल बेहाल कर दिया है। राजधानी रांची समेत राज्य के कई जिले इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में हैं। हालात ऐसे हैं कि दोपहर के समय सड़कें सूनी नजर आ रही हैं और लोग घरों में रहने को मजबूर हैं।
मौसम विभाग ने दो दिनों तक कई जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी की है। रांची का अधिकतम तापमान 38.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पिछले 24 घंटे की तुलना में 0.4 डिग्री अधिक रहा।
वहीं जमशेदपुर में तापमान 43.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। चाईबासा में 41.8 डिग्री और बोकारो में 41.1 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। तेज धूप और उमस भरी गर्मी के कारण लोगों को दिनभर परेशानियों का सामना करना पड़ा।
मौसम विभाग के अनुसार अभी को भी गर्मी से राहत मिलने की संभावना कम है। रांची, गुमला, सिमडेगा, रामगढ़, गिरिडीह, धनबाद, देवघर समेत कई जिलों में दोपहर तक तेज धूप पड़ने की संभावना है।
हालांकि शाम के समय कुछ इलाकों में तेज हवा और हल्की बारिश हो सकती है, जिससे लोगों को थोड़ी राहत मिलने के आसार हैं। इस बार सबसे ज्यादा गर्मी मेदिनीनगर में रिकॉर्ड की गयी, जहां तापमान 45.2 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। मौसम विभाग ने गढ़वा, पलामू और चतरा के लोगों को विशेष सतर्क रहने की सलाह दी है।
इधर, हीट स्ट्रोक के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है। अस्पतालों में ओआरएस, दवाइयों, अतिरिक्त बेड और कूलिंग सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।
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