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Published / 2026-03-17 21:19:35
अदाणी एंटरप्राइजेज खरीदेगी जयप्रकाश एसोसिएट्स, एनसीएलटी से मिली मंजूरी

  • जयप्रकाश एसोसिएट्स ने कहा कि इस योजना में शेयरधारकों को कोई पैसा नहीं मिलेगा। कंपनी की संपत्ति का मूल्य इतना नहीं है कि कर्जदाताओं का पूरा पैसा चुकाया जा सके

एबीएन बिजनेस डेस्क। अदाणी एंटरप्राइजेज ने बताया कि नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने जयप्रकाश एसोसिएट्स के लिए उसके समाधान योजना को मंजूरी दे दी है। यह कर्ज में डूबी कंपनी की दिवालिया प्रक्रिया में एक बड़ा कदम है। 

अदाणी एंटरप्राइजेज ने मंगलवार को बाजार बंद होने के बाद एक्सचेंज फाईलिंग में बताया कि यह मंजूरी 17 मार्च 2026 को मौखिक आदेश के जरिए दी गयी है। कंपनी ने कहा है कि लिखित आदेश आने के बाद पूरी जानकारी दी जायेगी। 

बता दें कि अदाणी एंटरप्राइजेज को पहले ही सफल बोलीदाता चुना जा चुका था। उसकी योजना को नवंबर 2025 में कर्जदाताओं की समिति ने मंजूरी दे दी थी। कंपनी ने कहा कि इस योजना को अदाणी एंटरप्राइजेज खुद, उसकी समूह कंपनियां या विशेष उद्देश्य वाली इकाइयों के जरिए लागू किया जा सकता है।

दूसरी ओर, जयप्रकाश एसोसिएट्स ने कहा कि इस योजना में शेयरधारकों को कोई पैसा नहीं मिलेगा। कंपनी की संपत्ति का मूल्य इतना नहीं है कि कर्जदाताओं का पूरा पैसा चुकाया जा सके। इसलिए शेयरधारकों के लिए बाहर निकलने की कीमत शून्य रखी गश्र है। 

जयप्रकाश एसोसिएट्स जयपी समूह की प्रमुख कंपनी है। कंपनी पर कुल 57,185 करोड़ रुपये का कर्ज है। इसके प्रमुख कर्जदाताओं में नैशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी भी शामिल है। कंपनी को जून 2024 में दिवालिया प्रक्रिया में शामिल किया गया था। इस बीच, अदाणी एंटरप्राइजेज के शेयर मंगलवार को बीएसई पर मामूली गिरावट के साथ 1,975 रुपये पर बंद हुए। 

जयप्रकाश एसोसिएट्स को लेकर क्या है मामला? 

जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड, जिसे जेपी ग्रुप की प्रमुख कंपनी माना जाता है, सीमेंट, पावर, होटल, कंस्ट्रक्शन और रियल एस्टेट जैसे बिजनेस में सक्रिय है। यह कंपनी भारी कर्ज के चलते इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (कइउ), 2016 के तहत दिवालिया प्रक्रिया में शामिल की गई है। राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण इलाहाबाद बेंच ने 3 जून 2024 को इसे लेकर आदेश दिया था।

Published / 2026-03-13 18:12:06
शेयर बाजार धड़ाम, लगातार बिकवाली से चिंतित हैं निवेशक

  • बाजार धड़ाम; लगातार बिकवाली से निवेशक चिंता में

एबीएन बिजनेस डेस्क। पश्चिमी एशिया में बढ़ते संघर्ष और तेल की बढ़ती कीमतों के कारण शुक्रवार को शेयर बाजार के बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा, वैश्विक बाजारों में भारी बिकवाली, विदेशी निधियों की लगातार निकासी और रुपये की कमजोरी ने भी निवेशकों के मनोबल को प्रभावित किया। बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी में करीब दो प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। 

लगातार तीसरे दिन गिरावट दर्ज करते हुए, 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स इंट्रा-डे ट्रेडिंग के दौरान 1,579.82 अंक या 2 प्रतिशत गिरकर 74,454.60 पर आ गया। अंततः बेंचमार्क 1,470.50 अंक या 1.93 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,563.92 पर बंद हुआ। 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 488.05 अंक या 2.06 प्रतिशत गिरकर 23,151.10 पर बंद हुआ। 

रुपया 20 पैसे गिरकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.45 (अस्थायी) के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ। तेज बिकवाली के चलते बीएसई में सूचीबद्ध सभी कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण से करीब 10 लाख करोड़ रुपये साफ हो गए।

सेंसेक्स की कंपनियों का हाल

सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में से लार्सन एंड टुब्रो, टाटा स्टील, एसबीआई, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, मारुति और अल्ट्राटेक सीमेंट प्रमुख रूप से पिछड़ने वाली कंपनियों में से थीं। हिंदुस्तान यूनिलीवर और भारती एयरटेल को लाभ हुआ।

Published / 2026-03-11 20:20:04
खाड़ी देशों में वैश्विक तनाव से उबर नहीं पा रहा है शेयर मार्केट

वैश्विक तनाव से नहीं उबर पा रहा बाजार; सेंसेक्स 1342 अंक फिसला, निफ्टी 23900 से नीचे 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बाद एक दिन की राहत के बाद बुधवार को शेयर बाजार के बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी लगभग दो प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। इसके अलावा, विदेशी निधियों की निरंतर निकासी और ब्लू-चिप बैंक शेयरों की बिकवाली ने भी बाजारों को नीचे धकेल दिया। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 16 पैसे गिरकर 92.01 पर बंद हुआ। 

30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,342.27 अंक या 1.72 प्रतिशत गिरकर 76,863.71 पर बंद हुआ। दिन के दौरान इसमें 1,446.72 अंक या 1.84 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 76,759.26 पर पहुंचा। 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 394.75 अंक या 1.63 प्रतिशत गिरकर 23,866.85 पर बंद हुआ।  

सेंसेक्स की कंपनियों का हाल 

सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक, बजाज फिनसर्व, महिंद्रा एंड महिंद्रा, मारुति, ट्रेंट, भारती एयरटेल और कोटक महिंद्रा बैंक प्रमुख रूप से पिछड़ने वाली कंपनियों में शामिल थीं। सन फार्मा और एनटीपीसी को लाभ हुआ। 

बाजार में सतर्कता बनी हुई है 

आनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि हालांकि मंगलवार को शेयर बाजारों में तकनीकी रूप से सुधार देखने को मिला, लेकिन अंतर्निहित भावना सतर्कता बनी हुई है क्योंकि पश्चिम एशिया में गहराता संकट ऊर्जा की बढ़ती कीमतों, प्रमुख शिपिंग मार्गों में व्यवधान और निवेशकों की जोखिम लेने की प्रवृत्ति में बदलाव के माध्यम से वैश्विक वित्तीय बाजारों को प्रभावित करना शुरू कर रहा है। 

उन्होंने आगे कहा कि इक्विटी बाजार के दृष्टिकोण से, इस तरह की भू-राजनीतिक उथल-पुथल से अस्थिरता के तीव्र दौर उत्पन्न होते हैं क्योंकि वैश्विक निवेशक सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख करते हैं और जोखिम-संवेदनशील बाजारों में अपना जोखिम कम करते हैं। लिवेलॉन्ग वेल्थ के रिसर्च एनालिस्ट और संस्थापक हरिप्रसाद के ने कहा कि वैश्विक संकेत मिले-जुले बने हुए हैं क्योंकि निवेशक पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रमों और कच्चे तेल की कीमतों में हो रहे तीव्र उतार-चढ़ाव पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। 

यूरोपीय बाजारों में दिखी गिरावट  

एशियाई बाजारों में, जापान का निक्केई 225 सूचकांक 1.43 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक 1.40 प्रतिशत चढ़ गया। शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक भी सकारात्मक दायरे में बंद हुआ, जबकि हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक गिरावट के साथ समाप्त हुआ। यूरोप के बाजारों में गिरावट देखी गयी। अमेरिकी बाजार मंगलवार को स्थिर रुख के साथ बंद हुआ। 

तेल की कीमतों में हुआ उछाल 

भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के कारण वैश्विक बेंचमार्क में तेजी आने से बुधवार को वायदा कारोबार में कच्चे तेल की कीमतें 460 रुपये बढ़कर 7,881 रुपये प्रति बैरल हो गयीं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर, मार्च डिलीवरी के लिए कच्चे तेल की कीमत 460 रुपये या 6.2 प्रतिशत बढ़कर 7,881 रुपये प्रति बैरल हो गयी, जिसमें 16,930 लॉट का कारोबार हुआ। इसी प्रकार, अप्रैल अनुबंध में भी 462 रुपये या लगभग 6.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 7,833 लॉट में 7,815 रुपये प्रति बैरल पर पहुंच गया। 

ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 92.86 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा 

वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड में 5.76 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 92.86 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। बाजार विनिमय आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने मंगलवार को 4,672.64 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 6,333.26 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

Published / 2026-03-07 19:56:47
युद्ध का असर शुरू : घरेलू गैस सिलिंडर 60 रुपये महंगा हुआ

घरेलू एलपीजी की कीमत 60 रुपये बढ़ी, कमर्शियल सिलेंडर 115 रुपये महंगा 

एबीएन बिजनेस डेस्क। घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत शनिवार, 7 मार्च से बढ़ा दी गयी है, जिससे देश भर में 14.2 किलो वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमत 60 रुपये बढ़ गयी है। 

इसी तरह 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत भी आज से 115 रुपये बढ़ा दी गई है, जिससे होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कमर्शियल प्रतिष्ठानों जैसे बिजनेस पर असर पड़ा है। 

दिल्ली में 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 853 रुपये से बढ़कर 913 रुपये हो गयी है। मुंबई में घरेलू एलपीजी सिलेंडर का नया रेट अब 912.50 रुपये हो गया है जो पहले 852.50 रुपये था। 

इससे पहले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत अप्रैल 2025 से ही स्थिर रही जब दिल्ली में बिना सब्सिडी वाला रेट 853 रुपये था। नवीनतम संशोधन घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ उन कमर्शियल उपयोगकर्ताओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण वृद्धि दर्शाता है जो दैनिक कार्यों के लिए एलपीजी पर निर्भर हैं। 

यह बढ़ोतरी भारत की एनर्जी सप्लाई और फ्यूल की उपलब्धता पर चर्चा के बीच हुई है। केंद्रीय पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पहले भरोसा दिलाया था कि देश में एनर्जी की कोई कमी नहीं है। कंज्यूमर्स को सप्लाई में रुकावट की चिंता करने की जरूरत नहीं है।

Published / 2026-03-06 21:07:00
आज फिर औंधे मुंह गिरा शेयर मार्केट

  • एक दिन की राहत के बाद आज फिर औंधे मुंह गिरा बाजार
  • इन 5 कारणों से आई भारी गिरावट

एबीएन बिजनेस डेस्क। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजारों में शुक्रवार, 6 मार्च को फिर से गिरावट लौट आई। एक दिन की राहत के बाद बाजार दबाव में आ गया और कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 1085 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी 24,450 के नीचे फिसल गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और कमजोर वैश्विक संकेतों ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया। 

कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स

1097.00 अंक यानी 1.37% की गिरावट के साथ 78,918.90 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 315.45 अंक या 1.27% टूटकर 24,450.45 के स्तर पर आ गया। 

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को कमजोर किया है। इस संघर्ष से ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने और कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आने की आशंका बढ़ गई है, जिससे वैश्विक महंगाई पर दबाव बन सकता है।

कमजोर ग्लोबल संकेत

इसके अलावा एशियाई बाजारों में कमजोरी और अमेरिकी बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों का असर भी भारतीय बाजार पर पड़ा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स एक प्रतिशत से अधिक गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया, जिससे एशियाई बाजारों में दबाव का माहौल बना रहा।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली 

विदेशी संस्थागत निवेशक भी लगातार बिकवाली कर रहे हैं। गुरुवार को एफआईआई ने 3,752.52 करोड़ रुपए के शेयर बेचे, जबकि मार्च महीने में अब तक करीब 16,000 करोड़ रुपये की बिकवाली हो चुकी है। इससे बाजार की धारणा और कमजोर हुई है।

कच्चे तेल में तेजी

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी बाजार के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत गुरुवार को करीब 5% उछलकर 86.28 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो लगभग 20 महीनों का उच्च स्तर है। हालांकि शुक्रवार सुबह यह करीब 84.4 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रही थी।

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतें बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। अगर ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाता है, तो इसका असर दुनियाभर के शेयर बाजारों पर पड़ सकता है।

बैंकिंग शेयरों में बिकवाली

बैंकिंग शेयरों में भी आज भारी बिकवाली देखने को मिली। बैंक निफ्टी करीब 1% तक टूट गया, जबकि निफ्टी पीएसयू बैंक और प्राइवेट बैंक इंडेक्स भी एक प्रतिशत से अधिक गिरावट में रहे। विश्लेषकों के अनुसार तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई बढ़ सकती है, जिससे ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो जाती है और इसका असर बैंकिंग सेक्टर के प्रदर्शन पर पड़ता है।

Published / 2026-02-26 21:14:46
अब रांची के बाजारों में नौलखा हार की उपलब्धता!

रांची के बाजारों में आ गया गरीबों का नौलखा हार! कम कीमत, शानदार कारीगरी से महिलाएं हो रहीं आकर्षित 

टीम एबीएन, रांची। रांची के बाजारों में इन दिनों बेंत से बना एक बेहद खूबसूरत हार लोगों का ध्यान खींच रहा है। इस हार की कारीगरी इतनी शानदार है कि जो भी इसे देखता है, एक बार रुककर जरूर निहारता है। खास बात यह है कि यह हार पूरी तरह से असली नेकलेस जैसा दिखता है, लेकिन इसे बेंत से तैयार किया गया है। इसकी कीमत 150 से 300 के बीच है, जिससे यह हर बजट में आसानी से मिल जाता है। 

3 से 4 घंटे में तैयार होता है एक हार 

इस हार को बनाने वाले कलाकार संदीप बताते हैं कि एक हार तैयार करने में करीब 3 से 4 घंटे का समय लगता है। यह स्थानीय कला का बेहतरीन उदाहरण है। हार को इस तरह से गूंथा जाता है कि पहली नजर में यह असली गहने जैसा लगता है। इसमें बीच-बीच में सुंदर मोती लगाए गए हैं, जो इसकी खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं। लोग इसे गरीबों का नौलखा हार भी कह रहे हैं, क्योंकि कम कीमत में यह बहुत ही आकर्षक लुक देता है। साथ ही यह इको-फ्रेंडली भी है, जिससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होता। 

पूरा सेट उपलब्ध हार, ब्रेसलेट और इयररिंग्स 

यहां सिर्फ हार ही नहीं, बल्कि पूरा सेट उपलब्ध है। बेंत से बने ब्रेसलेट और इयररिंग्स भी खूब पसंद किये जा रहे हैं। इयररिंग्स में भी सुंदर मोती और लटकन लगे हैं, जो इसे और खास बनाते हैं। अगर कोई इस पूरे सेट को पहन ले, तो उसका पूरा लुक बदल जाता है। हार की पांच वैरायटी उपलब्ध हैं- रानी हार, नेकलेस, पट्टी हार और सिंपल डिजाइन। खासतौर पर महिलाएं इयररिंग्स और हार की खरीदारी में ज्यादा रुचि दिखा रही हैं। 

ग्राहकों को पसंद आ रहा यूनिक और बजट फ्रेंडली गहना 

शॉपिंग करने आयी ग्राहक अर्चना ने बताया कि उन्होंने पहली बार बेंत से बना इतना सुंदर हार देखा है। उनका कहना है कि यह यूनिक भी है, इको-फ्रेंडली भी और बजट में भी है। किसी खास कार्यक्रम में पहनने के लिए यह एक बेहतरीन विकल्प है, क्योंकि इसे पहनने से अलग और आकर्षक लुक मिलता है। कम कीमत, शानदार कारीगरी और पर्यावरण के प्रति जागरूकता इन्हीं खूबियों की वजह से रांची की मार्केट में यह बेंत का हार लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है।

Published / 2026-02-20 20:54:00
मजबूती से कारोबार करता दिखा शेयर मार्केट

500 अंक उछला सेंसेक्स, निफ्टी 25,600 के पार, मेटल-बैंकिंग शेयरों में खरीदारी 

टीम एबीएन, रांची। 20 फरवरी को घरेलू शेयर बाजार मजबूती के साथ कारोबार करता दिखा। सेंसेक्स करीब 586.13 अंकों की तेजी के साथ 83,084.27 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 193.40 अंक चढ़कर 25,647.75 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। आज के सत्र में मेटल और सरकारी बैंकों के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिल रही है, जबकि आईटी सेक्टर दबाव में है। 

निफ्टी के अहम लेवल 

मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक निफ्टी हाल ही में 2026 के शुरुआती निचले स्तरों तक फिसल चुका है। ऐसे में मौजूदा स्तर बेहद अहम माने जा रहे हैं। 
सपोर्ट: 25,300 

रेजिस्टेंस: 25,600-25,700 (50-डे मूविंग एवरेज के आसपास) 

मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट आनंद जेम्स के अनुसार, यदि निफ्टी 25,500 के ऊपर टिकता है तो यह तेजी 25,650 तक बढ़ सकती है। यह स्तर फिबोनाची रिट्रेसमेंट जोन के आसपास है और इंडेक्स के लिए निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।

Published / 2026-02-19 18:40:10
अचानक औंधे मुंह गिरा शेयर मार्केट

अचानक क्रैश हुआ शेयर बाजार

 इन कारणों से औंधे मुंह गिरा मार्केट

एबीएन बिजनेस डेस्क। सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को शेयर बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। मजबूत शुरुआत के बाद अचानक बिकवाली हावी हो गई और बाजार के प्रमुख सूचकांक बुरी तरह फिसल गए। 

कारोबार के दौरान BSE Sensex 1448 अंकों से ज्यादा टूट कर 83,000 के अहम स्तर के नीचे आ गया। वहीं, निफ्टी में 421 अंक की गिरावट आई। कोराबर बंद होने पर सेंसेक्स 1236.11 अंक लुढ़क कर 82,498.14 के स्तर पर बंद हुआ। Nifty 365.00 अंक गिरकर 25,454.35 के लेवल पर आ गया।

गिरावट के तीन बड़े कारण

1. मुनाफा वसूली का दबाव

पिछले तीन सत्रों से बाजार में जारी तेजी के बाद निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे सूचकांकों पर दबाव बढ़ा।

2. IT शेयरों में विदेशी बिकवाली

आईटी सेक्टर पर एआई से जुड़ी अनिश्चितताओं का असर बना हुआ है। NSDL के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने इस महीने के शुरुआती 15 दिनों में आईटी शेयरों में 10,956 करोड़ रुपये की बिकवाली की है। उनकी होल्डिंग में करीब 16% की गिरावट दर्ज की गई।

3. US-Iran तनाव और कच्चे तेल में उछाल

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखा। Brent Crude में 1% से ज्यादा की तेजी आई और कीमत 71 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। तेल की बढ़ती कीमतें आयातक देशों जैसे भारत के लिए चिंता का विषय हैं।

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