एबीएन बिजनेस डेस्क। हर व्यक्ति को वित्तीय साक्षरता (Financial Literacy) और वित्तीय ज्ञान (Financial Knowledge) जरूर बढ़ाना चाहिए।क्योंकि पैसा कमाना जितना ज़रूरी है,
उतना ही ज़रूरी है पैसे को सही तरीके से संभालना, बढ़ाना और सुरक्षित रखना। उक्त बातें वित्त विशेषज्ञ योगेंद्र साहू ने कही। वे एबीएन से खास बातचीत में अपने विचार रख रहे थे।
(लेखक वित्त विभाग के विशेषज्ञ हैं)
एबीएन बिजनेस डेस्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ धमकी और फ्रांस द्वारा पीस बोर्ड में शामिल होने से इनकार के चलते एक बार फिर वैश्विक शेयर बाजारों में हाहाकार मच गया है। इस वैश्विक उथल-पुथल का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला।
मंगलवार को सेंसेक्स 1065.71 की गिरावट के साथ 82,180.47 पर बंद हुआ। लगातार दो कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स कुल मिलाकर 1,300 अंकों से अधिक टूट चुका है। वहीं निफ्टी 50 में 353 अंकों की गिरावट आयी।
इस गिरावट के साथ निफ्टी 25,232.50 अंक पर बंद हुआ। इस भारी गिरावट के चलते मंगलवार को ही निवेशकों के करीब 9 लाख करोड़ रुपए डूब गए, जबकि दो दिनों में कुल नुकसान 11.50 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया।
शेयर बाजार में आयी गिरावट से निवेशकों को बड़ा नुकसान हुआ है। बीएसई का कुल मार्केट कैप सोमवार के 4,65,68,777 करोड़ रुपये से घटकर मंगलवार को 4,57,15,068 करोड़ रुपये रह गया यानी एक ही दिन में निवेशकों को करीब 9,02,669 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। वहीं दो दिनों की गिरावट में निवेशकों की कुल चपत 11.50 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा पहुंच चुकी है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बजट आएगा, लेकिन इस बार 1 तारीख को रविवार है जिस वजह से शेयर बाजार (Share Market) के खुलने पर संस्पेंस बना हुआ था।
अब BSE और NSE ने इस सस्पेंस को खत्म करते हुए बजट वाले दिन के लिए शेड्यूल जारी कर दिया है। शेयर बाजार में ट्रेडिंग और निवेश करने वाले लोगों के लिए बड़ी खबर है। वैसे तो आमतौर पर रविवार को बाजार बंद रहता है।
लेकिन इस बार 1 फरवरी 2026 को रविवार होने के बावजूद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने ये फैसला लिया है कि बजट वाले दिन बाकी दिनों की तरह ही ट्रेडिंग के लिए बाजार खुला रहेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि इस दिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण केंद्रीय बजट पेश करेंगी।
बीएसई और एनएसई दोनों ने आज अलग-अलग सर्कुलर जारी कर बताया कि बजट वाले दिन लाइव ट्रेडिंग सेशन होगा। ट्रेडिंग का समय सामान्य दिनों जैसा ही रहेगा। प्री-ओपन मार्केट सुबह 9 बजे से 9:08 बजे तक खुलेगा, जबकि सामान्य ट्रेडिंग सुबह 9:15 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक चलेगी।
बीएसई ने अपने सर्कुलर में कहा, ट्रेडिंग मेंबर्स ध्यान दें कि T+0 सेटलमेंट सेशन और सेटलमेंट डिफॉल्ट के लिए ऑक्शन सेशन रविवार, 1 फरवरी 2026 को नहीं होंगे। इक्विटी सेगमेंट के अलावा, F&O (डेरिवेटिव्स) और कमोडिटी डेरिवेटिव्स में भी ट्रेडिंग होगी।
एबीएन बिजनेस डेस्क। शेयर बाजार में आज, 14 जनवरी को गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स 244 अंक गिरकर 83,382 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी भी करीब 66 अंकों की गिरावट के साथ 25,665 के स्तर पर बंद हुआ।
शेयर बाजार पर सबसे बड़ा दबाव विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से आ रहा है। एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, मंगलवार को एफआईआईएस ने 1,499.81 करोड़ के शेयर बेचे। यह जनवरी में लगातार 7वां दिन रहा जब विदेशी निवेशकों ने शुद्ध बिकवाली की। डीलरों के मुताबिक, विदेशी फंड्स की यह लगातार निकासी खासतौर पर लार्ज-कैप शेयरों पर असर डाल रही है, जिससे बाजार में मजबूती नहीं बन पा रही है।
एशियाई बाजारों से भी निवेशकों को कोई खास सहारा नहीं मिला। चीन का शंघाई एसएसई कंपोजिट इंडेक्स गिरावट में रहा। अमेरिकी बाजार भी रातभर कमजोरी के साथ बंद हुए और वॉल स्ट्रीट फ्यूचर्स भी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे, जिससे अमेरिका में कमजोर शुरूआत के संकेत मिले।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, टैरिफ को लेकर अनिश्चितता और ऋकक बिकवाली की वजह से वैश्विक माहौल फिलहाल अनुकूल नहीं है। इसी कारण भारतीय बाजार पर भी दबाव बना हुआ है।
निवेशकों की चिंता अमेरिका की टैरिफ नीति को लेकर भी बनी हुई है। 14 जनवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में उन टैरिफ पर फैसला आने की संभावना है, जिन्हें पिछले साल अप्रैल में ट्रंप प्रशासन ने लागू किया था। ये टैरिफ 10% से 50% के बीच हैं और कई बड़े देशों पर लगाए गए थे।
इन टैरिफ को अदालत में यह कहकर चुनौती दी गई है कि ये राष्ट्रपति की अधिकार सीमा से बाहर हैं। अगर टैरिफ बने रहते हैं, तो इससे वैश्विक व्यापार पर असर पड़ सकता है और उभरते बाजारों, जैसे भारत, में पूंजी निवेश प्रभावित हो सकता है।
इसके अलावा, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा है कि जो देश ईरान के साथ व्यापार करेंगे, उन पर अमेरिका 25% टैरिफ लगा सकता है। ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर ईरान में प्रदर्शनकारियों को फांसी दी गयी, तो अमेरिका सख्त कदम उठायेगा। इन बयानों से निवेशकों की चिंता और बढ़ गयी है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। भारतीय शेयर बाजार लगातार चौथे सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ। इस क्षेत्र में, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, तेल और गैस, आईटी, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम और धातु क्षेत्र मजबूत बने रहे, जबकि रियल एस्टेट, निजी बैंक, वित्तीय सेवाएं, एफएमसीजी और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं में कमजोरी देखी गयी।
बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी में करीब एक प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी। शुरुआती कारोबार में थोड़ी तेजी के बाद, 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 604.72 अंक या 0.72 प्रतिशत गिरकर 83,576.24 अंक पर बंद हुआ।
दिन भर में इसमें 778.68 अंक या 0.92 प्रतिशत की गिरावट आयी और यह 83,402.28 पर बंद हआ। वहीं 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 193.55 अंक या 0.75 प्रतिशत गिरकर 25,683.30 पर बंद हुआ। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 26 पैसे गिरकर 90.16 (अस्थायी) पर आ गया।
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से एनटीपीसी, आईसीआईसीआई बैंक, अदानी पोर्ट्स, भारती एयरटेल, सन फार्मा और बजाज फाइनेंस सबसे पिछड़ने वाली कंपनियों में शामिल थीं। वहीं, एशियन पेंट्स, एचसीएल टेक, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और रिलायंस इंडस्ट्रीज लाभ कमाने वाली कंपनियों में शामिल थीं।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा कि अमेरिका-भारत टैरिफ वार्ता को लेकर अनिश्चितता और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच घरेलू बाजार में जोखिम से बचने की भावना तेज हो गयी है।
आनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा टैरिफ संबंधी नये बयानों के बाद वैश्विक व्यापार अनिश्चितता बढ़ने के कारण भारतीय शेयर बाजार पूरे सप्ताह लगातार दबाव में रहे।
एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक, जापान का निक्केई 225 सूचकांक, शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक उच्च स्तर पर बंद हुए। यूरोप के बाजारों में सकारात्मक रुझान देखने को मिला। गुरुवार को अमेरिकी बाजार मिले-जुले रुख के साथ बंद हुए।
एबीएन बिजनेस डेस्क। रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचडीएफसी बैंक जैसे ब्लू-चिप शेयरों में भारी बिकवाली और भारत के खिलाफ टैरिफ में और वृद्धि करने की अमेरिका की नयी चेतावनी की चिंताओं के कारण शेयर बाजार लगातार दूसरे दिन यानी मंगलावर को गिरावट के साथ बंद हुए।
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से, टाटा समूह की रिटेल कंपनी के दिसंबर तिमाही में राजस्व वृद्धि से निवेशकों में उत्साह की कमी आने के बाद ट्रेंट के शेयरों में 8.62 प्रतिशत की गिरावट आयी।
रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में 4.42 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी, जबकि आईटीसी, कोटक महिंद्रा बैंक, इंटरग्लोब एविएशन और एचडीएफसी बैंक भी पिछड़ने वाले शेयरों में शामिल थे। वहीं आईसीआईसीआई बैंक, सन फार्मा, हिंदुस्तान यूनिलीवर और स्टेट बैंक आफ इंडिया को लाभ हुआ।
ट्रंप ने टैरिफ को दोबारा बढ़ाने की धमकी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पता था कि भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद से मैं खुश नहीं था और वाशिंगटन नई दिल्ली पर बहुत जल्द टैरिफ बढ़ा सकता है। ट्रंप ने ये टिप्पणियां रविवार को फ्लोरिडा से वाशिंगटन डीसी जाते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए कीं।
इस बीच, मंगलवार को जारी एक मासिक सर्वेक्षण के अनुसार, दिसंबर में भारत के सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर में कमी आयी, क्योंकि नये काम और उत्पादन में विस्तार की दर 11 महीनों में सबसे धीमी हो गयी और कंपनियों ने अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती से परहेज किया। मौसमी रूप से समायोजित एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स नवंबर में 59.8 से गिरकर दिसंबर में 58.0 हो गया, जो जनवरी के बाद से विस्तार की सबसे धीमी दर को दर्शाता है।
परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) की शब्दावली में, 50 से ऊपर का स्कोर विस्तार को दर्शाता है, जबकि 50 से नीचे का स्कोर संकुचन को दर्शाता है। सर्वेक्षण के अनुसार, कंपनियां विकास की संभावनाओं को लेकर आशावादी बनी रहीं, लेकिन समग्र भावना लगभग साढ़े तीन वर्षों में अपने सबसे निचले स्तर पर गिर गयी।
यूरोपीय बाजारों का रहा मिला-जुला हाल
एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक, जापान का निक्केई 225 सूचकांक, शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक काफी अधिक बढ़त के साथ बंद हुए। यूरोप के बाजारों में मिला-जुला रूख देखने को मिला। अमेरिकी बाजार सोमवार को बढ़त के साथ बंद हुए।
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.28 प्रतिशत बढ़कर 61.93 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गया। बाजार विनिमय आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने एक दिन की राहत के बाद सोमवार को 36.25 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 1,764.07 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
सोमवार को सेंसेक्स 322.39 अंक या 0.38 प्रतिशत गिरकर 85,439.62 पर बंद हुआ। दिन के दौरान रिकॉर्ड ऊंचाई 26,373.20 पर पहुंचने के बाद निफ्टी उस तेजी को बरकरार नहीं रख सका और 78.25 अंक या 0.30 प्रतिशत गिरकर 26,250.30 पर समाप्त हुआ।
एबीएन बिजनेस डेस्क। मंगलवार को स्टेट बैंक आफ इंडिया (एसबीआई) का शेयर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर 2 फीसदी की तेजी के साथ 1,024 के नये रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। भारी ट्रेडिंग वॉल्यूम के बीच शेयर में यह उछाल देखा गया। वहीं, इसी दौरान निफ्टी 50 इंडेक्स 0.30 फीसदी गिरकर 26,171.30 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
एसबीआई का शेयर लगातार छह ट्रेडिंग सेशंस से मजबूती दिखा रहा है और इस दौरान इसमें करीब 6 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है। पिछले छह महीनों में एसबीआई ने बाजार से बेहतर प्रदर्शन किया है। इस अवधि में एसबीआई का शेयर 27 फीसदी चढ़ा है, जबकि निफ्टी 50 में सिर्फ 2.7 फीसदी की तेजी आयी है।
10 ट्रिलियन मार्केट कैप के करीब एसबीआई
शेयर में आयी तेजी के चलते एसबीआई का मार्केट कैपिटलाइजेशन अब 9.45 ट्रिलियन के आसपास पहुंच गया है। बैंक अब 10 ट्रिलियन के ऐतिहासिक आंकड़े से सिर्फ 11 फीसदी दूर है। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए एसबीआई के शेयर का भाव 1,100 के स्तर को पार करना जरूरी है।
बैंकिंग सेक्टर में इस समय एचडीएफसी बैंक सबसे ऊपर बना हुआ है, जिसका मार्केट कैप 14.87 ट्रिलियन है। दूसरे नंबर पर आईसीआईसीआई बैंक है, जिसका मार्केट कैप 10.07 ट्रिलियन है। इन दोनों के बाद रइक तीसरे स्थान पर बना हुआ है।
ब्रोकरेज हाउस क्यों हैं एसबीआई पर बुलिश ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने एसबीआई को सेक्टर में अपना पसंदीदा इव स्टॉक बताया है और इसका टारगेट प्राइस 1,100 रखा है। ब्रोकरेज का कहना है कि बैंक का बिजनेस और कमाई लगातार मजबूत हो रही है, जबकि के्रडिट कॉस्ट नियंत्रण में है। बैंक को एफवाई 26 में 13-14 फीसदी लोन ग्रोथ की उम्मीद है, जो मुख्य रूप से रिटेल, कृषि और टरटए सेगमेंट से आयेगी।
एसबीआई की कमाई पर अब ज्यादा दबाव नहीं है। बैंक को लोन और जमा पर जो फायदा (मार्जिन) मिलता है, वह अब लगभग ठीक स्तर पर आ गया है। बैंक को उम्मीद है कि आगे भी उसकी कमाई का मार्जिन 3 फीसदी से ऊपर बना रहेगा।
दिसंबर 2025 में अगर आरबीआई ब्याज दर थोड़ी कम (0.25%) भी करता है, तो इसका रइक पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। इसका कारण यह है कि सरकार और आरबीआई ने सीआरआर में कटौती की है, जिससे बैंक को कुछ राहत मिलेगी और नुकसान की भरपाई हो जायेगी।
एसबीआई के लोन की हालत अभी अच्छी और सुरक्षित बनी हुई है। जिन ग्राहकों के लोन बदले गये हैं (रीस्ट्रक्चर्ड लोन), उन पर बैंक कड़ी नजर रख रहा है। ब्रोकरेज का मानना है कि अगले कुछ सालों में बैंक को बैड लोन से ज्यादा नुकसान नहीं होगा। एफवाई 26 से एफवाई 28 के बीच लोन पर होने वाला खर्च कम ही रहेगा। इसकी वजह से एसबीआई की कमाई आने वाले समय में हर साल करीब 10 फीसदी की रफ्तार से बढ़ सकती है।
आईसीआईसीआई सेक्यूरिटिजी ने भी रइक के शेयर पर भरोसा जताया है और क्यू 2 नतीजों के बाद इसका टारगेट बढ़ाकर 1,120 कर दिया है, जो पहले 940 था। ब्रोकरेज ने स्टैंडअलोन बैंक को करीब 1.4 गुना वैल्यूएशन पर आंका है और शेयर पर इव रेटिंग बरकरार रखी है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचडीएफसी बैंक जैसे ब्लू-चिप शेयरों में भारी बिकवाली और भारत के खिलाफ टैरिफ में और वृद्धि करने की अमेरिका की नयी चेतावनी की चिंताओं के कारण शेयर बाजार लगातार दूसरे दिन यानी मंगलावर को गिरावट के साथ बंद हुए।
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से, टाटा समूह की रिटेल कंपनी के दिसंबर तिमाही में राजस्व वृद्धि से निवेशकों में उत्साह की कमी आने के बाद ट्रेंट के शेयरों में 8.62 प्रतिशत की गिरावट आयी।
रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में 4.42 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी, जबकि आईटीसी, कोटक महिंद्रा बैंक, इंटरग्लोब एविएशन और एचडीएफसी बैंक भी पिछड़ने वाले शेयरों में शामिल थे। वहीं आईसीआईसीआई बैंक, सन फार्मा, हिंदुस्तान यूनिलीवर और स्टेट बैंक आॅफ इंडिया को लाभ हुआ।
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