एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। आगामी 18/19/20 मई 2026 को आयोजित तीन दिवसीय विशु सेंदरा में ग्रामीणों की उपस्थिति सुनिश्चित हो इसके लिए पांच पडहा वरंदा भरनो सिसई में सुधु पहान की अध्यक्षता में बैठक किया गया।
इस बैठक में जिला राजी पड़हा व्यवस्था के वेल लक्ष्मीनारायण भगत, मीडिया प्रमुख जगदीप भगत, उप वेल बुद्धेश्वर उरांव ने संयुक्त रूप से कहा कि सामाजिक, सांकृतिक, विधि विधान की जानकारी के लिए आदिवासी समाज खास कर आदिवासी छात्र छात्राओं को सामाजिक बैठक में उपस्थिति सुनिश्चित करना होगा।
इसके लिए परिवार के अभिभावक अपने बच्चों को विशेष रूप से बैठक में उपस्थित होने के लिए प्रेरित करना होगा ताकि आदिवासी समाज में हो रही कुरीति एवं बदलाव और होने वाले दूरगामी परिणाम से अवगत कराया जा सके। बैठक में पहाड़केसा के संजय उरांव, कपिल उरांव, बच्चू उरांव, दुखिया उरांव, बुधवा उरांव जतरगढ़ी के जयराम उरांव, कृष्णा मुंडा, कार्तिक उरांव, प्रमोद उरांव, रुसुवा उरांव, फगुवा उरांव, बंधना उरांव आदि ग्रामीण उपस्थित थे
टीम एबीएन, रांची। रांची जिलांतर्गत कांके प्रखंड समन्वय के तहत गायत्री प्रज्ञा केंद्र में अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा आयोजित वार्षिक महोत्सव बाल संस्कारशाला कांके में भव्य रूप से मनाया। संस्कारशाला के बच्चों द्वारा उद्देश्यपूर्ण अभिनय जैसे आॅपरेशन सिंदूर नाटक, नशा मुक्त भारत नाटक, मोबाईल उपयोगी शो जैसी प्रस्तुति की गई।
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हेजेल डेविस (रोटरी क्लब आॅफ रांची नार्थ सदस्य, संजुक्ता विश्वास काम आलाप संगीत संस्थान की संस्थापक एवं शास्त्रीय संगीत की शिक्षका) और मेरी आवाज, मेरी पहचान के संचालक एवं मुख्य सदस्यगण तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में भी निरंजन सिंह (परिव्राजक गायत्री परिवार, टाटानगर) उपस्थित थे। सभी बच्चों का मनोबल बढ़ाते हुए उन्हें बाल संस्कारशाला कांके की ओर से मेडल तथा पारितोषिक वितरण किया गया।
इसकी संचालिका सुलोचना शाहदेव, सहायक में कृति शाहदेव, सुरुचि रंजन, रेणु श्रीवास्तव सहित टीम सदस्यों ने खूबसूरत ढंग से मनाया। इसके अतिरिक्त इस अवसर पर बहुत से कार्यक्रम हुए, जिसमें संगीत, नृत्य, नाटक, प्रज्ञा योग जैसे कार्यक्रम में बच्चों ने भाग लिया और उनके प्रोत्साहन के लिए उन्हें पुरस्कार और उपहार देकर उनका मनोबल बढ़ाया गया। इस अवसर पर अखंड दीप प्रज्ज्वलित कर गुरुसत्ता, मातृ सत्ता का ध्यान, गायत्री महामंत्र का सस्वर पाठ व वंदना सहित बच्चों में सुसंस्कारिता संवर्धन प्रकरण पर प्रकाश डाला गया। सुलोचना शाहदेव ने बताया कि कुसंस्कारों को हटाकर नये संस्कार स्थापित करना है।
युग परिवर्तन की इस पवित्र बेला में यह अति आवश्यक हो गया है कि हमारी नयी पीढ़ी सुसंस्कारवान बने। बताया गया कि सही संस्कार व परामर्श सही समय पर मिले तो उसका परिणाम श्रेष्ठ निकलता है। इसके लिए यह संजीवनी विद्यायुक्त संस्कार विभूति सबके लिए है। इसका लाभ सबको मिले, यही हमारे बाल संस्कार का लक्ष्य है। समाज में अनगढ़ लोग बहुत रहते हैं और सुयोग्यों की कमी पायी जाती है।
विचार क्रान्ति अभियान अंतर्गत शिशु, बालक, माता-पिता, कुल परिवार, तथा समाज के लिए विडंबना न बने, बल्कि सौभाग्य व गौरव का कारण बने। आज उनके शारीरिक, बौद्धिक, नैतिक तथा भावनात्मक नव-निर्माण व विकास के लिए शिशुओं में संस्कार प्रकरण व संस्कारवान बनना आवश्यक है। उक्त जानकारी गायत्री परिवार की जिला महिला युवा समन्वयक सुलोचना शाहदेव और जय नारायण प्रसाद ने दी।
एबीएन सोशल डेस्क। बुंडु सब डिविजन के तमाड़ प्रखंड की गायत्री प्रज्ञापीठ परिसर में नवयुग सृजन अभियान अंतर्गत ग्रामे ग्रामे यज्ञ और गृहे गृहे गायत्री उपासना प्रचार-प्रसार क्रम और सजल श्रद्धा स्वरूपा गुरुमाता भगवती देवी के पावन जन्म शताब्दी वर्ष, दिव्य अखंड ज्योति सह गुरुवरश्रीपूज्यवर के 24-24 लाख की 24 के महापुरश्चक्रण के शताब्दी वर्ष अनुयाज प्रक्रिया में चल रहे साधक-शिष्यों के सामूहिक 40 दिवसीय जप- अनुष्ठान पुरश्चक्रण अभियान के अंतर्गत शान्तिकुञ्ज गंगा तटीय क्षेत्र बैरागी द्वीप में लिये संकल्प अनुसार स्थानीय स्तर पर सामूहिक जप-अनुष्ठान पुरश्चक्रण की सामूहिक देव दक्षिणा पूर्णाहूति तमाड़ गायत्री प्रज्ञापीठ में दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजन 4 प्रखंड बुंडु, राहे, सोनाहातू और तमाड़ का संयुक्त साधक-शिष्य परिवारों ने सोल्लास संपन्न किये।
प्रथम दिवस तीसरे पहर आंधी-तूफान जैसे विपरीत मौसम में भी गायत्रीपरिवार रैली टीम ने ऐ नशा! भारत छोड़ो-व्यसन से मुंह मोड़ो, व्यसन से बचाओ- सृजन में लगाओ, जैसे अनेक सद्वाक्यों के पोस्टर व बैनर तले रैली निकाली, जयघोषों, सद्वाक्यों, सद्विचारों तथा प्रज्ञगीतों एवं माइकमाध्यम की गूंज से ग्रामीण वासियों को ध्यानाकर्षित कर नशा की हानि नुकसान पर विशेष सुनाया और बताया। फिर रात्रि पहर दीपयज्ञ विधान किए, छोटे छोटे संकल्प सूत्र पाठ कर बताये और कराये।
बिहान 5 कुंडीय महायज्ञ आयोजित किये। कल सायंकाल इस पावन अवसर पर रांची जिला समन्वयक ने गुरुसत्ता द्वय के युग निर्माण योजना एवं विचार क्रांति अभियान अंतर्गत बताया कि भगवान के साथ साझेदारी एवं श्रेय व सौभाग्य के वरण का यह दुर्लभ अवसर और सुयोग आया है। कहा कि जो अवसर को पहचानेंगे, भगवान को सहयोगी बनेंगे, वे धन्य धन्य, श्रेय सौभाग्य पायेंगे।
घर, परिवार, गांव, मुहल्ला दिव्यता और सुसंस्कारिता के नव सृजन में व्यसन मुक्त और संस्कार युक्त परिवार का निर्माण करेंगे। युवा वर्ग, छात्र तथा नयी पीढ़ी जीवन में उत्कृष्ट योगदान करेंगे। इसके लिए हर समय सजग, सक्रिय कर्मठ बन सनातन मान्यताओं के प्रति आस्थावान, आध्यात्मिक जीवन शैली के लिए प्रेरित किये गये।
चारों प्रखंड के समन्वय समिति सदस्यगणों, विगत दिव्य ज्योति-कलश रथ के यात्रा में प्रखंड ग्रामीण क्षेत्र में सहयोगी, रूटचार्ट व सुरक्षा व्यवस्था में रहे संलग्न व योगदान किए जनों को आशीवार्दी दीक्षा पत्र तथा कलशरथ के आशीवार्दी सहित अन्य कई स्वाध्यायी पुस्तक, स्टीकर्स, कैलेंडर स्टैंड, विशेष पत्रिका व मंत्र पट्टा आदि से सम्मानित किये गये।
आगे की अनुयाज योजना को मिल जुलकर स्नेह-सौहार्द संवर्धन सहित गतिशील करने का प्रस्ताव पेश किये गये। अंत में सबके लिए स्वस्थ-सुखद व उज्ज्वल भविष्य की मंगलमय स्वस्तिवाचन व शान्ति-पाठ कर सम्मान गोष्ठी समापन किये गये। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के विजय कुमार और जय नारायण ने दी।
एबीएन सोशल डेस्क। झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता सह हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष संजय सर्राफ ने कहा है विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस प्रतिवर्ष 3 मई को पूरे विश्व में मनाया जाता है। यह दिवस स्वतंत्र, निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के महत्व को रेखांकित करने के लिए समर्पित है।संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 1993 में यूनेस्को की सिफारिश पर इस दिवस को मनाने की घोषणा की थी।
इसका उद्देश्य प्रेस की स्वतंत्रता के महत्व के प्रति जन जागरूकता बढ़ाना तथा उन पत्रकारों को सम्मान देना है, जिन्होंने सत्य को सामने लाने के लिए कठिन परिस्थितियों में कार्य किया। लोकतंत्र में प्रेस को चौथा स्तंभ माना जाता है। सरकार, समाज और जनता के बीच सही सूचना पहुंचाने का सबसे प्रभावी माध्यम मीडिया ही है। प्रेस जनता की आवाज़ बनकर शासन-प्रशासन की नीतियों निर्णयों और कार्य प्रणाली पर निगरानी रखता है।
यदि प्रेस स्वतंत्र होगा, तभी समाज में पारदर्शिता, जवाबदेही और न्याय की भावना मजबूत होगी। विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करना तथा मीडिया पर होने वाले हमलों, सेंसरशिप और दबाव के खिलाफ आवाज़ उठाना है। आज दुनिया के कई देशों में पत्रकारों को धमकियां, हिंसा, गिरफ्तारी और जान का खतरा झेलना पड़ता है। ऐसे में यह दिवस स्वतंत्र पत्रकारिता के समर्थन का वैश्विक मंच प्रदान करता है।
इस दिवस की विशेषता यह है कि हर वर्ष एक विशेष थीम के साथ कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। विभिन्न देशों में संगोष्ठियां, विचार गोष्ठियां, सम्मान समारोह, कार्यशालाएं और जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। मीडिया संस्थान, सामाजिक संगठन और शिक्षण संस्थान प्रेस की भूमिका पर चर्चा करते हैं और लोकतंत्र में उसकी आवश्यकता को समझाते हैं।
आज के डिजिटल युग में प्रेस की भूमिका और भी बढ़ गई है। सोशल मीडिया, ऑनलाइन पोर्टल और त्वरित समाचार माध्यमों के दौर में सही और तथ्यात्मक जानकारी देना बड़ी चुनौती बन गया है। फेक न्यूज, अफवाह और भ्रामक सूचनाओं से बचाने में जिम्मेदार पत्रकारिता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस हमें यह संदेश देता है कि स्वतंत्र प्रेस केवल पत्रकारों का अधिकार नहीं, बल्कि हर नागरिक का अधिकार है। जब मीडिया स्वतंत्र रहेगा, तभी समाज जागरूक, सशक्त और लोकतंत्र मजबूत बनेगा। इसलिए हमें सत्यनिष्ठ पत्रकारिता का सम्मान करते हुए प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सदैव सजग रहना चाहिए।
एबीएन एडिटोरियल डेस्क । वर्तमान युग का दौर अत्यंत तेज गति वाली है, जिसकी अनुभूति तथा अनुसरण प्राय: हर कोई करता दिखाई दे रहा है। एक तो आवागमन का तेज संसाधन, दूसरा सूचना की तेज गति वाले उपकरण और भावनाओं संवेदनाओं तथा मन मस्तिष्क को तेजी से अपने नियंत्रण में लेने वाले वर्चुअल/आभासी एवं प्रत्यक्ष परिदृश्य के दबाव में मानव समाज दबा हुआ है। कोई भी कब और कैसे तनाव एवं अवसाद से ग्रसित हो जा रहा है उसे पता ही नहीं चल पता है।
खान-पान, रहन-सहन और व्यवहार प्रकृति के सानिध्य से लगभग परे हो कर प्रदूषित हो गए हैं। शारीरिक मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य के मध्य संतुलन का बिखराव रोग तथा शोक का कारण बना हुआ है।
अनियंत्रित जीवनशैली से वास्तविक सफलता कहीं देखने को नहीं मिल रही है। ऊंचे पद पर बैठे हुए किसी व्यक्ति को देखकर उसकी सफलता का अनुमान लगाया जाता है परंतु वह सफल व्यक्ति भी भारी दबाव वाली जीवनशैली के कारण सफलता का आनंद नहीं ले पाता है।
जीवन में सक्रियता, परिश्रम आवश्यक है तो उससे कहीं अधिक अनुशासन, एकाग्रता और मर्यादा की सीमा का अनुपालन आवश्यक है। भारतीय जीवनशैली में व्यक्तित्व के परिशोधन के नियम निर्धारित हैं जिनके द्वारा ही आधुनिक तेज गति वाली जीवन शैली के दबाव से मुक्त हुआ जा सकता है।
टीम एबीएन, रांची । परमहंस डा० संत शिरोमणी श्री श्री 108 स्वामी सदानंद जी महाराज के सानिध्य मे एम.आर.एस.श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट रांची के द्वारा संचालित विगत 2 वर्षों से चल रहे पीड़ित मानव सेवा के पावन तीर्थ स्थल श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम पुंदाग के प्रांगण में सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम (सत्य-प्रेम सभागार) राँची में आज अभिषेक नेमानी एवं उनके परिवार के सौजन्य से कार्यक्रम किया गया ।
आश्रम में रह रहे 48 मंदबुद्धि दिव्यांग निराश्रित प्रभु जी एवं आश्रम में रहकर उनकी सेवा करने वाले सेवादार साथियों के बीच विभिन्न व्यंजनों के साथ अन्नपूर्णा सेवा भोजन प्रसादी का विधिवत आश्रम के किचन में भोजन बनवाकर भोजन खिलाया गया। सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि 16 अप्रैल से 30 अप्रैल तक 15 दिनों मे 3290 निराश्रित प्रभुजी एवं उनकी देखभाल करने वाले सेवादार साथियों के बीच अन्नपूर्णा सेवा भोजन प्रसाद का वितरण किया गया।
मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम सदगुरू कृपा अपना घर (सत्य-प्रेम सभागार) में-विष्णु गोयल, विपिन बिहारी लाल, विद्या देवी अग्रवाल, तारा रानी सिन्हा, ओम प्रकाश अग्रवाल, शेखर जयसवाल, शिव बच्चन शर्मा, अरुण कुमार महतो, अभिनव कुमार,आयुष अग्रवाल, मधु छावनिका,आशा अग्रवाल, नवनीत शर्मा, विजय जैन, नीलम गुप्ता,कविता गाड़ोदिया के सौजन्य से सभी निराश्रित प्रभुजी को भोजन प्रसादी खिलाकर सेवा की गई।
सभी ने ट्रस्ट के सदस्यों को बहुत बहुत धन्यवाद एवं अपना अमूल्य आशीर्वाद दिया। ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि इसके अलावे कई लोगों द्वारा आश्रम में रह रहे निराश्रितो, मंदबुद्धि, दीनबंधुओं के लिए खाद्य सामग्री एवं जरूरत के समान प्रदान किया गया। उन्होंने कहा कि सेवा कार्यों को समाज के हर वर्ग का सहयोग और प्रोत्साहन मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि मानव प्रभु सेवा से बढ़कर कोई सेवा नहीं है।
अन्नपूर्णा सेवा के पुनीत कार्य में ट्रस्ट के अध्यक्ष डुंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल जालान, मनोज कुमार चौधरी, निर्मल छावनिका, सज्जन पाड़िया, पुजारी अरविंद पांडे, पुरणमल सर्राफ, शिव भगवान अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, नन्द किशोर चौधरी, संजय सर्राफ, विशाल जालान, सुनील पोद्दार,मधुसूदन जाजोदिया, विष्णु सोनी, सुरेश चौधरी, सुरेश भगत, पवन पोद्दार सहित अन्य सदस्यगण उपस्थित थे। उक्त जानकारी श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।
टीम एबीएन, रांची । झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता सह हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष संजय सर्राफ ने कहा है कि अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस जिसे मई दिवस भी कहा जाता है जो प्रतिवर्ष 1 मई को पूरे विश्व में मनाया जाता है। यह दिवस श्रमिकों,मजदूरों और कामगारों के सम्मान, उनके अधिकारों की रक्षा तथा समाज निर्माण में उनके योगदान को स्मरण करने के लिए समर्पित है। श्रमिक वर्ग किसी भी राष्ट्र की आर्थिक प्रगति की रीढ़ होता है, इसलिए यह दिन उनके परिश्रम, संघर्ष और उपलब्धियों को सम्मान देने का अवसर प्रदान करता है।
अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस मनाने की शुरुआत वर्ष 1886 में अमेरिका के शिकागो शहर से हुई थी। उस समय मजदूरों से 12 से 16 घंटे तक कठोर कार्य कराया जाता था। श्रमिकों ने प्रतिदिन 8 घंटे कार्य, उचित वेतन और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग को लेकर आंदोलन किया। इस आंदोलन के दौरान कई मजदूरों ने अपने प्राणों की आहुति दी।
उनके संघर्ष और बलिदान की स्मृति में वर्ष 1889 में पेरिस में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन में 1 मई को श्रमिक दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। तभी से यह दिवस विश्वभर में मनाया जाने लगा।भारत में भी श्रम दिवस का विशेष महत्व है। भारत में पहली बार वर्ष 1923 में चेन्नई में मई दिवस मनाया गया था। इसके बाद से यह दिवस देशभर में विभिन्न श्रमिक संगठनों, उद्योगों, संस्थानों और सामाजिक संगठनों द्वारा मनाया जाता है।
कई राज्यों में 1 मई को सार्वजनिक अवकाश भी घोषित किया जाता है। इस दिवस की सबसे बड़ी महत्ता यह है कि यह समाज को श्रमिकों के अधिकारों के प्रति जागरूक करता है। मजदूर वर्ग खेतों, कारखानों, निर्माण स्थलों, परिवहन, सफाई, खदानों और अनेक क्षेत्रों में कठिन परिश्रम करके राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देता है।
श्रम दिवस हमें याद दिलाता है कि श्रमिकों के बिना विकास की कल्पना अधूरी है।मई दिवस की विशेषता यह है कि इस दिन श्रमिक एकता, समानता और न्याय का संदेश दिया जाता है। विभिन्न स्थानों पर रैलियां, सभाएं, सम्मान समारोह, संगोष्ठियां और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
श्रमिक संगठनों द्वारा बेहतर मजदूरी, सुरक्षित कार्यस्थल, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और सम्मानजनक व्यवहार की मांग उठाई जाती है। इस दिवस का प्रमुख उद्देश्य श्रमिकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना, बाल श्रम और शोषण को समाप्त करना, सुरक्षित कार्य वातावरण उपलब्ध कराना तथा श्रम के सम्मान की भावना विकसित करना है।
साथ ही यह दिन समाज को यह संदेश देता है कि हर प्रकार का श्रम पूजनीय है और हर श्रमिक सम्मान का अधिकारी है।आज के आधुनिक युग में तकनीक के विकास के बावजूद श्रमिकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण बनी हुई है। चाहे किसान हो,मजदूर हो, चालक हो, सफाईकर्मी हो या फैक्ट्री कर्मचारी-हर श्रमिक समाज को गति देता है।
इसलिए हमें श्रमिकों के प्रति सम्मान, संवेदना और सहयोग की भावना रखनी चाहिए, अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि श्रमिकों के संघर्ष, अधिकार और सम्मान का प्रतीक है। यह दिन हमें प्रेरणा देता है कि हम श्रम का सम्मान करें और एक न्यायपूर्ण, समानतापूर्ण तथा समृद्ध समाज के निर्माण में योगदान दें।
टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद झारखंड सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भगवान श्री नरसिंह जयंती हिंदू धर्म का एक अत्यंत पावन और श्रद्धापूर्ण पर्व है। यह जयंती भगवान विष्णु के चौथे अवतार श्री नरसिंह भगवान के प्राकट्य दिवस के रूप में मनायी जाती है।
इस वर्ष श्री नरसिंह जयंती 30 अप्रैल दिन गुरुवार को मनाई जायेगी। यह पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने भक्त प्रह्लाद की रक्षा तथा अत्याचारी हिरण्यकश्यप के अंत हेतु नरसिंह रूप में अवतार लिया था। भगवान नरसिंह का स्वरूप अत्यंत अद्भुत और दिव्य है। उनका आधा शरीर मनुष्य का तथा मुख सिंह का है।
यह रूप इस बात का प्रतीक है कि जब-जब संसार में अधर्म, अन्याय और अत्याचार बढ़ता है, तब ईश्वर किसी भी रूप में प्रकट होकर धर्म की रक्षा करते हैं। भगवान नरसिंह शक्ति, साहस, निर्भयता और भक्तवत्सलता के प्रतीक माने जाते हैं। पुराणों के अनुसार हिरण्यकशिपु नामक राक्षस राजा ने कठोर तप कर वरदान प्राप्त किया था कि उसे न कोई मनुष्य मार सके, न पशु, न दिन में, न रात में, न घर में, न बाहर; न अस्त्र से, न शस्त्र से।
वरदान के अहंकार में उसने स्वयं को ईश्वर घोषित कर दिया और सबको अपनी पूजा करने का आदेश दिया। परंतु उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था।जब हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद को अनेक यातनाएं दीं और पूछा कि तेरा भगवान कहाँ है, तब प्रह्लाद ने कहा-भगवान सर्वत्र हैं। क्रोधित होकर उसने महल के स्तंभ पर प्रहार किया, तभी स्तंभ से भगवान नरसिंह प्रकट हुए।
उन्होंने संध्या समय, द्वार की चौखट पर, अपनी जंघा पर बैठाकर नखों से हिरण्यकशिपु का वध किया और भक्त प्रह्लाद की रक्षा की। इस प्रकार भगवान ने वरदान की सभी शर्तों को पूर्ण करते हुए अधर्म का नाश किया। यह पर्व हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति, विश्वास और धर्म की सदैव विजय होती है। जो व्यक्ति भगवान पर अटूट श्रद्धा रखता है, उसकी रक्षा स्वयं ईश्वर करते हैं।
यह दिन भय, संकट, शत्रु बाधा और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति देने वाला माना गया है। अनेक श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर भगवान नरसिंह की पूजा करते हैं। नरसिंह जयंती पर प्रात: स्नान कर व्रत का संकल्प लिया जाता है। भगवान विष्णु और नरसिंह भगवान की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर विधिवत पूजा, मंत्र जाप, आरती और कथा श्रवण किया जाता है। फलाहार कर रात्रि जागरण भी किया जाता है।
मंदिरों में विशेष भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण होता है। इस जयंती का मुख्य उद्देश्य समाज में धर्म, सत्य, साहस और ईश्वर भक्ति का संदेश देना है। यह पर्व बताता है कि चाहे अन्याय कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंतत: सत्य की ही विजय होती है। भगवान नरसिंह जयंती हमें निर्भय होकर धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
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