कानून व्यवस्था

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Published / 2026-04-22 21:57:12
मध्यस्थ की मध्यस्थता से गुलजार हुआ एक बिखरता हुआ परिवार

  • मध्यस्थ की मध्यस्थता से गुलजार हुआ एक बिखरता हुआ परिवार
  • बिरखने से बच गया एक घर, एक वर्ष से अलग रह रहे थे पति-पत्नी, अब हुए साथ
  • अधिवक्ता मध्यस्थ निलम शेखर ने वाद को सुलझाया

टीम एबीएन, रांची। मध्यस्थता केंद्र, रांची में मध्यस्थता के माध्यम से वाद संख्या ओएम 574/2025 को अधिवक्ता मध्यस्थ निलम शेखर व दोनों पक्षों के अधिवक्ता अपराजिता मिश्रा तथा प्रकाश रंजन की सुझबूझ से दो बैठक में समझौता संपन्न हुआ। उक्त वाद में दोनों पति-पत्नी एक वर्ष से अलग-अलग रह रहे थे। इनकी एक पांच वर्षीय बेटी है, जो मां के साथ नानी के घर में रह रही थी। 

पत्नी ने पति के विरूद्ध 498ए कंपलैन केस - 38911/2025 न्यायालय में दायर किया था तथा लड़का ने आरा के न्यायालय में डायबोर्स के लिए मुकदमा दायर किया था। परंतु मध्यस्थ नीलम शेखर की सूझबूझ तथा अथक प्रयास से मध्यस्थता के दौरान सारा वाद समाप्त करते हुए वैवाहिक जीवन पुनर्स्थापित हुआ।

ज्ञात हो कि उक्त वाद को मध्यस्थता हेतु मध्यस्थता केंद्र में मध्यस्थता के लिए भेजा गया था, जिसमें दो बैठक  आयोजित की गयी, जिसमें काफी गहराई से बातचीत हुई, जिसके फलस्वरूप वादी-प्रतिवादी स्वेच्छा से राजी हुए कि एक साथ मिलजुल रहेंगे। आगे कलह नहीं करेंगे और अच्छी तरह से अपनी बेटी का भविष्य संवारेंगे। इस प्रकार एक घर बिखरने से बच गया।

उक्त वाद को सुलझाने में अधिवक्ता मध्यस्थ निलम शेखर व अधिवक्ता अपराजिता मिश्रा तथा प्रकाश रंजन का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उक्त जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकार, रांची के सचिव ने दी।

Published / 2026-04-20 22:05:07
छी-छी : पोस्टमार्टम के लिए भी घूस, अब नपेंगे!

पोस्टमार्टम के लिए घूस लेने वाले कर्मचारियों पर गिरेगी गाज, हॉस्पिटल कमेटी ने शुरू की जांच 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, चतरा। जिले में पोस्टमार्टम के नाम पर परिजनों से अवैध वसूली का मामला सामने आया है। भोज्या गांव में तालाब में डूबने से मां और दो मासूम बेटियों की मौत हो गयी थी। पोस्टमार्टम के दौरान सदर अस्पताल में कर्मचारी ने मृतकों के परिजनों से ढाई हजार नगद और ढाई हजार रुपये आॅनलाइन लेकर कुल पांच हजार रुपये लिए। मामले की शिकायत मिलते ही डीसी रवि आनंद ने तुरंत संज्ञान लिया और इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के आदेश दे दिए। सिविल सर्जन सत्येंद्र सिंहा की प्रारंभिक जांच में अवैध वसूली की पुष्टि भी हो चुकी है। 

डीसी का सख्त रुख 

पुलिस ने मामले में सख्त रूख अपनाते हुए जांच शुरू कर दी है। डीसी रवि आनंद ने कहा कि शव के पोस्टमार्टम के बदले पीड़ित परिवार से पैसे वसूलना अत्यंतर अमानवीय कृत्य है। इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनायी जायेगी। रिपोर्ट में दोष साबित होने पर आरोपी के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही मामले में संलिप्त अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की भी पहचान कर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई की जायेगी। 

24 घंटे के भीतर रिपोर्ट सौंपेगी कमेटी  

डीसी ने सिविल सर्जन सत्येंद्र सिंहा के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी है, जिसमें सदर अस्पताल के उपाधीक्षक और अस्पताल प्रबंधक को भी शामिल किया गया है। कमेटी को 24 घंटे के अंदर विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिये गये हैं।

Published / 2026-04-16 18:40:19
झारखंड : 50 बेड तक वाले अस्पतालों को क्लिनिकल एक्ट से मिल सकती है छूट!

छोटे अस्पतालों को राहत की तैयारी 

टीम एबीएन, रांची। राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को सरल और सुलभ बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा संकेत दिया है। गुरुवार को अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग अजय कुमार सिंह के साथ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन झारखंड के प्रतिनिधिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें छोटे अस्पतालों को राहत देने सहित कई मुद्दों पर चर्चा हुई। 

क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में ढील की मांग 

एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने 50 बेड तक के अस्पतालों, नर्सिंग होम और एकल क्लीनिक को क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट से छूट देने का अनुरोध किया। उनका कहना था कि वर्तमान में अस्पतालों को 27 बिंदुओं पर अनुपालन करना पड़ता है, जिसमें पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और फायर विभाग से एनओसी, बिल्डिंग मैप की स्वीकृति और सिविल सर्जन से पंजीकरण जैसी जटिल प्रक्रियाएं शामिल हैं। 

इस पर अपर मुख्य सचिव ने कहा कि झारखंड के लिए अलग नियमावली तैयार की जायेगी। उसमें इस एक्ट से छूट देने पर विचार किया जायेगा। नियमों को आयुष्मान भारत- मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के अनुरूप सरल बनाया जायेगा। 

लंबित भुगतान पर 15 दिन में समाधान का आश्वासन 

बैठक में एसोसिएशन ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत निजी अस्पतालों के दो माह से लंबित भुगतान का मुद्दा उठाया। इस पर अपर मुख्य सचिव ने कहा कि भुगतान का कार्य प्रोसेस में है। प्रयास किया जा रहा है कि अगले 15 दिनों में भुगतान जारी कर दिये जायें। 

आटो कैंसिल केस होंगे रिवाइव 

प्रतिनिधिमंडल ने आटो कैंसिल केस के मामलों को पुनर्जीवित करने की मांग भी रखी। इस पर अपर मुख्य सचिव ने कहा कि जिला स्तर पर डीसी की अध्यक्षता वाली शिकायत निवारण समिति को सक्रिय किया जायेगा। ऐसी व्यवस्था की जायेगी कि यदि उपायुक्त बैठक में भाग नहीं ले पाएं तो वह अपने किसी प्रतिनिधि को नामित कर दें ताकि बैठक नियमित होती रहे और शिकायतों का समाधान होता रहे।  

एचईएम पोर्टल 2.0 में राहत के संकेत 

बैठक में नए आयुष्मान एचईएम पोर्टल 2.0 के तहत अस्पतालों को अप्रूवल में आ रही दिक्कतों का मुद्दा भी उठाया गया। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में बिल्डिंग मैप अप्रूवल की शर्त को लेकर चिंता जतायी गयी। इस पर अपर मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में मुखिया या जिला पंचायत सदस्य से प्रमाणित मैप को मान्य किया जायेगा। 

प्रतिनिधिमंडल में ये रहे शामिल 

आईएमए प्रतिनिधिमंडल में डॉ विमलेश सिंह, डॉ अजय कुमार सिंह (राज्य समन्वयक), प्रदीप सिंह (सचिव), डॉ शंभू प्रसाद सिंह, डॉ अनुपम सिंह (वीमेंस विंग अध्यक्ष) और डॉ मृत्युंजय शामिल थे।

Published / 2026-04-14 21:00:12
झारखंड : पूर्व मंत्री एनोस एक्का की सजा निलंबित

हाई कोर्ट ने सीबीआई कोर्ट के फैसले को किया खारिज 

टीम एबीएन, रांची। झारखंड के पूर्व मंत्री एनोस एक्का को हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। एनोस एक्का पर छोटा नागपुर काश्तकारी (सीएनटी) अधिनियम के उल्लंघन मामले में कथित भूमि अधिग्रहण मामले में जमानत दे दी गयी है। वहीं एनोस एक्का को सुनायी गयी सात साल कैद की सजा निलंबित कर दी। 

जो भ्रष्टाचार मामले उइक कोर्ट द्वारा में सुनायी गयी थी। हालांकि हाई कोर्ट ने भूमि अधिग्रहण मामले में एक्का से आदिवासियों की जमीन को उनके मूल स्वरूप में बहाल करने में सहयोग करने के लिए एक हलफनामा दाखिल करने को कहा है। 

एनोस एक्का को सीबीआई कोर्ट ने 7 साल की कठोर सजा सुनायी थी 

शीर्ष अदालत झारखंड हाई कोर्ट दिसंबर 2025 के उस आदेश के खिलाफ एक्का की अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली उनकी याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया गया था कि प्रथमदृष्टया सजा निलंबन का कोई मामला नहीं बनता है। इससे पहले रांची में सीबीआई अदालत ने 30 अगस्त 2025 को पूर्व मंत्री को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराधों के लिए सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनायी थी। 

न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि 2008 के एक मामले में एक्का के खिलाफ दो अलग-अलग आरोपपत्र दाखिल किये गये थे, जिनमें कहा गया था कि एक्का और एक अन्य पूर्व मंत्री ने आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित की थी। 

एक्का पर क्या था आरोप 

सीबीआई के अनुसार, एक्का और अन्य लोगों ने रांची जिले में आदिवासी भूमि पर अवैध रूप से कब्जा करने के लिए फर्जी पते दिये थे। उन्होंने ऐसा करते हुए अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों की रक्षा के लिए बनाए गए सीएनटी अधिनियम के प्रावधानों को दरकिनार कर दिया था।

Published / 2026-04-13 18:31:07
आइएएस विनय चौबे को सुप्रीम कोर्ट से सशर्त बेल

आइएएस विनय चौबे को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, मिली सशर्त जमानत 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। हजारीबाग के पूर्व डीसी और वर्तमान में जेल में बंद आईएएस अधिकारी विनय चौबे को सुप्रीम कोर्ट ने सशर्त जमानत दे दी। यह बेल न्यायालय ने गवाहों के प्रभावित नहीं करने और जांच में सहयोग करने की शर्त पर दी है। 

मिली जानकारी के अनुसार, यह सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश बीवी नागरथना और उज्जल भुयान की पीठ में हुई है। सुनवाई के दौरान विनय चौबे की ओर से दलील दी गई है कि इस मामले में विजय प्रताप सिंह और सुधीर कुमार सिंह को जमानत दी जा चुकी है। दोनों ही इस मामले में लाभार्थी हैं। यह मामला वर्ष 2009-10 का है।

उस वक्त वह जिले में उपायुक्त थे। इससे पहले झारखंड हाई कोर्ट की एकलपीठ, जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी कर रहे थे, ने 6 जनवरी को चौबे की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। उस समय अदालत ने आरोपों को गंभीर मानते हुए राहत देने से इनकार कर दिया था।  

मामले की शुरुआत अगस्त 2025 में दर्ज प्राथमिकी से हुई थी, जब एसीबी ने सेवायत भूमि की कथित अनियमित खरीद-बिक्री को लेकर केस संख्या 9/2025 के तहत जांच शुरू की। जांच एजेंसी ने चौबे के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल कर दी है, जिसमें उन पर पद के दुरुपयोग और नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाये गये हैं। ज्ञात हो कि विनय चौबे 20 मई 2025 से जेल में बंद हैं। 

इनकी गिरफ्तारी शराब घोटाला मामले में हुई थी। विनय चौबे पर एसीबी ने चार अलग अलग मामले दर्ज की है। शराब घोटाला और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में पूर्व में ही निलंबित आईएएस अधिकारी विनय चौबे को जमानत मिल चुकी है।

Published / 2026-04-10 17:42:23
नयी दिल्ली : आईपीएल के चार सट्टेबाज गिरफ्तार

  • दिल्ली में IPL के नाम पर सट्टेबाजी: ऑनलाइन सट्टा चलाने वाले गैंग का भंडफोड़, चार सट्टेबाजों को रंगे हाथों पकड़ा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। दिल्ली पुलिस ने राजधानी में शुक्रवार को अवैध सट्टेबाजी के आरोप में चार लोगों को पकड़ा है। जो आईपीएल के मैचों में सट्टा लगाते थे। पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि दिल्ली में चार लोगों को अवैध सट्टेबाजी के आरोप में पकड़ा गया है। आरोपियों को दिल्ली और गुजरात के बीच एक मैच पर सट्टा लगाते हुए पकड़ा गया। 

पुलिस ने बताया कि एक गुप्त सूचना पर कार्रवाई करते हुए टीम ने छापा मारा। यह छापा आठ अप्रैल को मध्य दिल्ली के करोल बाग इलाके में एक परिसर में मारा गया। वहां चार पुरुष सट्टेबाजी की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल पाए गए। पुलिस अधिकारी ने बताया कि मौके से दो मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। 

इन मोबाइल फोन का उपयोग सट्टा लगाने और रिकॉर्ड करने के लिए किया जा रहा था।
आरोपियों की पहचान हिमांशु (तीस), अमन जैन (चौंतीस), आकाश गर्ग (इकतीस) और आशीष कुमार (पैंतीस) के रूप में हुई है। 

पूछताछ के दौरान, आरोपियों ने खुलासा किया कि वे नियमित रूप से आईपीएल सट्टेबाजी में शामिल थे। वे सट्टेबाजी के लिए मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते थे। पुलिस ने बताया कि इस मामले में आगे की जांच चल रही है।

दिल्ली में सट्टेबाजी का खुलासा

पुलिस को अवैध सट्टेबाजी के संबंध में विशेष जानकारी मिली थी। इसी जानकारी के आधार पर पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई की। आठ अप्रैल को करोल बाग क्षेत्र में छापा मारा गया। 

छापेमारी के दौरान चार व्यक्ति सट्टेबाजी करते हुए रंगे हाथों पकड़े गए। यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस की सतर्कता को दर्शाती है। पुलिस ने मौके से दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इन फोन का इस्तेमाल सट्टेबाजी के रिकॉर्ड और लेनदेन के लिए होता था।

आरोपियों ने पूछताछ में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। उन्होंने बताया कि वे नियमित रूप से आईपीएल मैचों पर सट्टा लगाते थे। पुलिस अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है और आगे की जांच जारी है।

Published / 2026-04-09 21:14:55
हजारीबाग घोटाला : आठ साल से चल रहे घोटाले का अब हुआ पर्दाफांश

आठ साल तक चलता रहा हजारीबाग ट्रेजरी में घोटाला, अब खुला राज, तीन सिपाहियों ने ही किया खजाना खाली 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, हजारीबाग। जिले के ट्रेजरी से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी के मामले में राज्य सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में पुलिस ने तीन सिपाहियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। 

करीब 15.41 करोड़ रुपये की अवैध निकासी होने से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शंभू कुमार, रजनीश सिंह और धीरेंद्र सिंह के रूप में हुई है। प्रारंभिक पूछताछ में तीनों ने वित्तीय गड़बड़ी में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली है। 

जानकारी के अनुसार, वित्त विभाग द्वारा किये गये डेटा विश्लेषण के दौरान संदिग्ध लेन-देन का पता चला। इसके बाद हजारीबाग के अपर समाहर्ता की अगुवाई में चार सदस्यीय जांच दल का गठन किया गया। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने अस्थायी पे-आईडी बनाकर सरकारी खजाने से अवैध रूप से रकम निकाली और उसे विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया। 

जांच के बाद 21 संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है। इन खातों में मौजूद करीब 1.60 करोड़ रुपये की राशि को भी सुरक्षित कर लिया गया है। इस मामले में जिला कोषागार पदाधिकारी द्वारा लोहसिंगना थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है। 

यह मामला सिर्फ तीन सिपाहियों तक सीमित नहीं लगता, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। आखिर करीब 8 वर्षों तक इतनी बड़ी राशि की निकासी कैसे होती रही और किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी? 

गौरतलब है कि हाल ही में बोकारो जिले में भी इसी तरह का मामला सामने आया था, जहां पुलिस अधीक्षक कार्यालय के लेखा शाखा में पदस्थापित लेखपाल कौशल कुमार पांडेय ने सेवानिवृत्त हवलदार के नाम पर करीब 4.28 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की थी। 

लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने झारखंड की वित्तीय व्यवस्था और ट्रेजरी सिस्टम की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं। अब देखना यह होगा कि इस बड़े घोटाले में और किन-किन लोगों की संलिप्तता सामने आती है और प्रशासन इस पर कितनी सख्त कार्रवाई करता है। 

Published / 2026-04-07 19:34:47
100-200-500 के नोटों के करंसी पेपर का उत्पादन बढ़ा

100-200-500 के नोटों पर बड़ा अपडेट, जल्द होने वाला है ये काम 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। 100, 200 और 500 रुपए के नोटों को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है, जो आम लोगों से लेकर व्यापारियों तक के लिए राहत भरी खबर है। वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के बीच सरकार ने नकदी आपूर्ति को मजबूत करने की दिशा में कदम तेज कर दिये हैं। 

इसी के तहत करंसी पेपर का उत्पादन बढ़ाया गया है, जिससे जल्द ही बाजार में नए नोटों की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम स्थित प्रतिभूति कागज कारखाना (एसपीएम) ने उत्पादन बढ़ाकर हालात को संभालने का संकेत दिया है।  

कारखाने ने तय लक्ष्य से अधिक करंसी पेपर तैयार किया है, जिससे आने वाले समय में 100, 200 और 500 रुपए के नये नोट बाजार में उपलब्ध हो सकेंगे। इससे आम लोगों और व्यापारियों को लेनदेन में आसानी मिलने की उम्मीद है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक अनिश्चितता के चलते नकदी की मांग बढ़ सकती है। 

एसपीएम देश का प्रमुख करंसी पेपर उत्पादन केंद्र है, जहां भारतीय नोटों के लिए कागज तैयार किया जाता है। पहले भी नोटों की कमी के समय यहां 10 और 20 रुपये के नोटों के लिए कागज तैयार किया जा चुका है। 

लक्ष्य से ज्यादा उत्पादन 

कारखाने ने 31 मार्च 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच 7 मीट्रिक टन करंसी पेपर का उत्पादन किया, जबकि लक्ष्य 6 मीट्रिक टन का था। प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच बेहतर तालमेल के चलते यह उपलब्धि हासिल हुई है। नए वित्तीय वर्ष में भी उत्पादन लगातार जारी है, जिससे भविष्य में नोटों की आपूर्ति और मजबूत होने की संभावना है। 

कैश की बढ़ती जरूरत में मददगार 

विशेषज्ञों का कहना है कि 500 रुपये के नोट के बाद 100 रुपये के नोट का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है, जबकि 200 रुपये के नोट तीसरे स्थान पर आते हैं। यही कारण है कि एटीएम में इन नोटों की अधिक उपलब्धता जरूरी मानी जाती है। अगर वैश्विक हालात के चलते इंटरनेट सेवाओं या डिजिटल लेनदेन में कोई बाधा आती है, तो ये नये नोट नकद लेनदेन को सुचारू बनाये रखने में अहम भूमिका निभायेंगे। 

अर्थव्यवस्था को मजबूती 

प्रतिभूति कागज कारखाना देश की एक महत्वपूर्ण इकाई है, जिसने पहले 1000 रुपये के नोट के लिए भी कागज तैयार किया था। इसके अलावा पासपोर्ट और स्टांप पेपर के निर्माण में भी यह आत्मनिर्भरता को मजबूत करता है। कारखाने के अधिकारियों के अनुसार, हर परिस्थिति में काम करने की क्षमता और टीमवर्क के दम पर उत्पादन लक्ष्य से आगे निकलना संभव हुआ है। वहीं, बैंकिंग और व्यापार जगत के जानकारों का मानना है कि नये नोटों की उपलब्धता से बाजार में लेनदेन और सुचारू होगा, जिससे आमजन को सीधा फायदा मिलेगा।

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