टीम एबीएन, रांची। जेपीएससी परीक्षा अनियमितता मामले में सीआईडी ने जांच का दायरा और बढ़ाते हुए राज्य के पांच जिलों में 18 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई रांची, पलामू, हजारीबाग, बोकारो और धनबाद में की गयी। छापेमारी के दौरान सीआईडी ने कई अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किये हैं।
इनमें लैपटॉप, मोबाइल फोन, विभिन्न बैंकों की पासबुक और चेकबुक, अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट्स की कार्बन कॉपी, एडमिट कार्ड, मार्कशीट समेत अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं। जांच एजेंसी अब 31 अन्य अभ्यर्थियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
इसके अलावा वर्ष 2013 से 2025 के बीच आयोजित कई भर्ती परीक्षाओं को भी जांच के दायरे में शामिल किया गया है। संबंधित अभ्यर्थियों से उनके आवेदन पत्र, ओएमआर शीट, शैक्षणिक दस्तावेज और अन्य प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।
सीआईडी की जांच में मुख्य आरोपी अभय कुमार तिवारी की भूमिका भी सामने आयी है। जांच एजेंसी के अनुसार, अभय तिवारी ने न केवल राज्य स्तर की कई प्रतियोगी परीक्षाओं में हिस्सा लिया, बल्कि केंद्रीय स्तर की कई प्रतियोगी परीक्षाएं भी उत्तीर्ण की थीं।
अब सीआईडी इस बात की भी जांच कर रही है कि इन परीक्षाओं में उनकी सफलता के पीछे किसी संगठित सिंडिकेट या अन्य अनियमितताओं की भूमिका तो नहीं थी।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के कार्यालय में मंगलवार को सीआईडी और रांची पुलिस की संयुक्त टीम ने छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान पूरे जेपीएससी कार्यालय को पुलिस ने घेर लिया और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किये गये।
मौके पर सिटी एसपी के नेतृत्व में कई डीएसपी, इंस्पेक्टर और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। जेपीएससी कार्यालय में कथित अनियमितताओं की शिकायतों के आधार पर जांच टीम महत्वपूर्ण दस्तावेजों की गहन पड़ताल कर रही है।
गौरतलब है कि 14वीं जेपीएससी परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल उठे हैं। विशेष रूप से कटऑफ अंक सार्वजनिक नहीं किये जाने को लेकर अभ्यर्थियों में नाराजगी और विरोध देखने को मिला था। इस पूरे मामले को लेकर राज्यपाल और मुख्यमंत्री से भी शिकायत की गयी है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के चर्चित उत्पाद सिपाही परीक्षा धांधली मामले में रांची पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। पुलिस 2400 पन्नों की दाखिल चार्जशईट में 169 अभियुक्तों को नामजद किया है। पुलिस ने तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आरोप पत्र तैयार किया है।
पुलिस ने इस चार्जशीट में हरेक आरोपी के खिलाफ पुख्ता सुबूत पेश किये हैं। पुलिस ने चार्जशीट में साफ-साफ जिक्र किया है कि किस स्तर पर परीक्षा को प्रभावित करने का खेल रचा गया था।
तमाड़ के रड़गांव में एक अर्धनिर्मित भवन में अभ्यर्थियों को जमा किया गया था। 11 अप्रैल की रात सूचना मिली थी कि रड़गांव में एक अर्धनिर्मित भवन पर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों का जमावड़ा लगा हुआ है। जिसको लेकर विशेष छापेमारी दल ने 11अप्रैल की देर रात धावा बोला। जहां अर्धनिर्मित भवन के बाहर गाड़ियों का जमावड़ा लगा था।
भवन के पास जैसे ही छापेमारी दल पहुंचा, लोग इधर-उधर भागने लगे लेकिन कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 166 लोगों को धर दबोचा था। बाद में भी कई और लोगों को गिरफ्तार किया गया था। मामले में तमाड़ थाना में कांड संख्या 21/2026 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गयी थी। पुलिस मामले में जल्द आरोप पत्र दाखिल करेगी।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के कथित शराब घोटाला मामले में पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस विधायक रामेश्वर उरांव मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय के रांची स्थित कार्यालय पहुंचे, जहां उनसे पूछताछ की जा रही है। ईडी ने उन्हें पहले समन जारी कर 30 जून को उपस्थित होने को कहा था, लेकिन उन्होंने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए तीन सप्ताह का समय मांगा था। इसके बाद एजेंसी ने एक सप्ताह की मोहलत देते हुए उन्हें सात जुलाई को पेश होने का निर्देश दिया था।
ईडी की जांच वर्ष 2020 के बाद झारखंड में लागू नयी शराब नीति, उसके निर्माण, क्रियान्वयन और वित्त विभाग की भूमिका पर केंद्रित है। एजेंसी यह जानना चाहती है कि नीति बनाने और लागू करने की प्रक्रिया में किन स्तरों पर निर्णय लिये गये, वित्त विभाग ने क्या भूमिका निभाई और क्या किसी स्तर पर आपत्तियां दर्ज की गयी थीं।
इससे एक दिन पहले ईडी ने रामेश्वर उरांव के बेटे रोहित उरांव से कई घंटों तक पूछताछ की थी। अधिकारियों ने अगस्त 2023 में बरामद 30 लाख रुपये की नकदी के स्रोत, उसे घर में रखने के कारण, बैंक खातों में हुए लेनदेन तथा कारोबारी प्रेम प्रकाश के साथ कथित वित्तीय संबंधों को लेकर सवाल किये थे।
अब जांच एजेंसी रोहित उरांव और रामेश्वर उरांव के बयानों का मिलान कर मामले की विभिन्न कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है। सूत्रों के अनुसार, ईडी कथित शराब घोटाले से जुड़े वित्तीय लेनदेन, नीति निर्माण और संभावित अनियमितताओं की जांच कर रही है। माना जा रहा है कि रामेश्वर उरांव का बयान इस मामले की जांच की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकता है।
टीम एबीएन, रांची। इंडियन एसोसिएशन आॅफ लॉयर्स आईएएल झारखंड चैप्टर हॉफमैन लॉ एसोसिएट्स के तत्वावधान में भारतीय संविधान की प्रस्तावना और नागरिक विषय पर एक राज्य स्तरीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। रविवार को आयोजित इस एक दिवसीय सेमिनार में राज्य भर के वकीलों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम कामिल बुल्के पथ पुरुलिया रोड स्थित एक्सआईएसएस के सभागार में सुबह 11 बजे दीप प्रज्वलित और संविधान के प्रस्तावना के पाठ के साथ आंरभ हुआ।
कार्यक्रम का आंरभ करते हुए राज्य के एडवोकेट जनरल रोहितेश्य राय ने कहा कि संविधान आम आदमी के अधिकारों का वकालत करता है। देश के नामी वकीलों ने देश में आम नागरिकों के अधिकार की सुरक्षा के लिए काम किया है। हमारे सभी अधिकारों की सुरक्षा हमारे संविधान की प्रस्तावना में निहित है।
इस अवसर पर सेवा निवृत न्यायधीश झारखंड हाई कोर्ट माननीय एसएन पाठक ने संविधान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संविधान देश की आजादी से लेकर आज तक आम लोगों के अधिकारों को लेकर वैसे ही खड़ा है जैसे सीमा पर देश की रक्षा के लिये हमारे जवान खड़ें हैं। अपने सारगर्भित संबोधन श्री पाठक ने कहा कि आज के सोशल मीडिया, एआई और साइबर सिक्यूरिटी के युग में संविधान का प्रस्तावना का मूल अपने उदेश्य पर खरा उतरा है और इसमें हर जन की सुरक्षा के उदेश्य में कमी नहीं आयी है।
संविधान की बात करते हुए उन्होंने राज्य केन्द्र संबंधों के मतांतरण में संविधान की भूमिका का उल्लेख करते हुए केशवानंद भारती के चर्चित केस का उदाहरण भी दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान का प्रस्तावना कभी पुराना नहीं हो सकता, यह बात कुछ खास वर्ग द्धारा फैलायी जा रही है लेकिन यह पूरी तरह से गलत परिकल्पना है। न्याय और विधि से जुडे लोगों का जीवन आम लोगों के लिये समर्पित रहता है।
मौके पर झारखंड स्टेट बार काउंसिल के सदस्य सह इंडियन एसोसिएशन आॅफ लायर्स के सचिव एडवोकेट एके रसीदी ने कहा कि हम इस गौरवपूर्ण सेमिनार में केवल स्मरण नहीं कर रहें है बल्कि गणतंत्र के आधारशिला की गहराई से जुड़ रहे हैं। भारतीय संविधान की प्रस्तावना हमारे सामूहिक संकल्प की घोषणा है।
प्रस्तावना में हमारे मौलिक अधिकार विशेष रुप स ेअनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानताएं अनुच्छेद 19 अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार और अनुच्छेद 22 गिरफ्तारी के विरूद्ध सुरक्षा का एक व्यवहारिक स्वरुप है। उन्होंने आज के दिन को रांची डिक्लिीयरेशन 2026 घोषित करते हुए वकीलों के लिए एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्अ को विधानसभा और संसद से पास कराने की मांग की। आज की स्थिति में वकील निडर होकर अपने पेशेगत कार्य को संपादित कर सके यह न्याय की सुरक्षा के लिए अतिआवश्यक है।
आज संयुक्त राष्ट संघ ने वकीलों के योगदान को न्याय की बुनियादी सिद्धांत के तौर पर अनुपालन करने जो र दे रहा है। वकीलों के साथ हो रहे दुर्भाग्यपूर्ण व्यवहार को रोका जाना अति आवश्यक हो गया है। जूनियर वकीलों को आर्थिक संरक्षण और सहयोग के साथ ही मार्गदर्शन की भी आवश्यकता है। सीनियर वकीलों को बिना लाइसेंस सरेंडर किये पेंशन की व्यवस्था भी किया जाना आज की समय की मांग है।
इस अवसर पर पूर्व सेवा निवृत न्यायधीश झारखंड हाई कोर्ट रत्नाकर भेंगरा ने कहा कि आज संविधान समाज के सभी जाति, धर्म और संप्रदाय के लोगों की सुरक्षा की गांरटी है। कुछ संगठन संविधान पर प्रहार कर रहें हैं और इ्रसके दायरे पर सवाल खड़ा कर रहें है जो बहुत गलत है। हमारा संविधान की देश के सम्मान का प्रतीक है। समाज में सुरक्षा की गांरटी अगर कुछ है तो सबसे बड़ा टूल्स संविधान ही है जिसके सहारे हमारा समाज एक जुट होकर रहता है। किसी भी वर्ग का उदरदायित्व उसी वर्ग द्धारा संचालित व्यवस्था से ही होने की व्यवस्था का दूसरा नाम संविधान और उसके अंगीकार किये गये प्रस्तावना है।
इस अवसर राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन ने कहा कि न्याय व्यवस्था बेहतर चले इसमें वकीलों का बड़ा योगदान है। वो चीजों को सुलझाने और देश की विधि व्यवस्था को बेहतर करने की दिशा में ठोस काम करते हैं। उनके कल्याण के लिये वर्तमान हेमंत सरकान ने स्वास्थ्य बीमा सहित कई कार्यक्रम लागू किेये हैं और भविष्य में भी लागू करेगी। रांची जिला बार एसोसिएशन के महासचिव संजय विद्राही ने कहा आज समय ऐसा है कि शिष्टाचार भ्रष्टाचार में तब्दील हो गया है।
अपने ओजस्वी भाषण में उन्होंने कहा कि क्या हमारे आर्दश संविधान के पुस्तक के पन्नों में सिमट कर रह जायेंगे? उन्होंने सवाल किया कि क्या हम संविधान की मूल भावना को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहचाने में सफल हुए है? आज वकालत को समाज के हित में एक बेहतरीन प्रोफेसन के रुप में स्थापित करने का समय आ गया है इसके लिए हम सब को प्रयास करना चाहिए। हमें न्याय, समता और वंधुत्व का दीप जलाने की जरूरत है।
कार्यक्रम को राज्य भर से आये अधिवक्ताओं ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर हजारीबाग, बोकारो, धनबाद, जमशेदपुर, मेदनीनगर, रामगढ़ गिरिडीह सहित पूरे राज्य के अधिवक्ताओं ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया। विभिन्न नव निर्वाचित सदस्यों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में कार्यक्रम में नागरिक के अधिकार, संविधान के प्रस्तावना, अधिवक्ताओं के कल्याण, संरक्षण और न्याय तक समान पहुंच विषय पर विमर्श किया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों की सुरक्षा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को बढ़ावा देने वाले इंस्टाग्राम विज्ञापनों के मामले में मेटा को तलब किया जाये। सरकार इस पूरे मामले में कंपनी से जवाब मांगने की तैयारी कर रही है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभी सवाल खड़े हो गये हैं। आरोप है कि इंस्टाग्राम के विज्ञापन सिस्टम का इस्तेमाल कथित तौर पर चाइल्ड सेक्सुअल एब्स्यूज मटेरियल से जुड़े अकाउंट्स और वेबसाइट्स को प्रमोट करने के लिए किया गया। अब सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय इस मामले में मेटा से स्पष्टीकरण मांगेगा।
सूत्रों के अनुसार, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मेटा अधिकारियों को मेटा को तलब करने और पूरे मामले पर विस्तृत जवाब मांगने के निर्देश दिये हैं। सरकार यह जानना चाहती है कि ऐसे विज्ञापन प्लेटफॉर्म तक कैसे पहुंचे और उन्हें रोकने के लिए मेटा ने क्या सुरक्षा व्यवस्था लागू की थी।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, पूर्वी सिंहभूम। झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के बिष्टुपुर थाना क्षेत्र के डबल डाउन बार में हुई चाकूबाजी की घटना में घायल युवक हिमांशु की इलाज के दौरान मौत के बाद पूर्वी सिंहभूम पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। एसएसपी पीयूष पांडे ने ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में गश्ती दल के तीन पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
निलंबित पुलिसकर्मियों में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (एएसआई) रतन कुमार दास, एएसआई राजेश कुमार रंजन और आरक्षी संख्या 913 मनोज कुमार शामिल हैं। एसएसपी ने मामले की जांच के लिए डीएसपी स्तर के अधिकारियों की टीम गठित की थी।
प्रारंभिक जांच में पाया गया कि घटना के समय मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी यदि समय रहते सूझबूझ और जिम्मेदारी से कार्रवाई करते, तो युवक की जान बचायी जा सकती थी। इसी आधार पर तीनों पुलिसकर्मियों पर निलंबन की कार्रवाई की गयी। एसएसपी ने कहा कि मामले की जांच जारी है और जो भी दोषी पाया जायेगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी।
ज्ञातव्य है कि 27 जून की रात बिष्टुपुर स्थित डबल डाउन बार में दो गुटों के बीच विवाद के बाद मारपीट शुरू हो गयी थी। विवाद बढ़ने पर दोनों गुट बार के बाहर आ गये। इस दौरान अपनी जान बचाने के लिए हिमांशु वहां मौजूद पीसीआर वाहन में घुस गया, लेकिन आरोप है कि दूसरे गुट के युवकों ने पुलिस के सामने ही उसे वाहन से बाहर खींच लिया और चाकू से हमला कर दिया। हमले में हिमांशु समेत दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
दोनों को इलाज के लिए टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) में भर्ती कराया गया, जहां सोमवार देर शाम हिमांशु की मौत हो गयी। युवक की मौत के बाद आक्रोशित लोगों ने बिष्टुपुर थाना के सामने सड़क जाम कर पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और घटना को अंजाम देने वाले आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। धनबाद में एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर की दो अलग-अलग गाड़ियां मिलने का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। मामला सामने आने के बाद वाहन मालिक ने तत्काल इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है। यदि आरोप सही साबित होता है तो यह फर्जी नंबर प्लेट, वाहन दस्तावेजों में हेराफेरी या किसी बड़े वाहन रैकेट का मामला भी हो सकता है।
जानकारी के अनुसार झरिया के जोड़ापोखर थाना क्षेत्र अंतर्गत जामाडोबा को-आॅपरेटिव कॉलोनी निवासी मुकेश कुमार सिंह को उनके चालक ने सूचना दी कि पुटकी थाना क्षेत्र स्थित एसबीआई बैंक के पास एक ऐसी कार खड़ी है जिस पर उनकी गाड़ी का ही रजिस्ट्रेशन नंबर लगा हुआ है। यह जानकारी मिलते ही मुकेश कुमार सिंह हैरान रह गये और उन्होंने तत्काल पास के जोड़ापोखर थाना से संपर्क कर पूरे मामले की जानकारी दी।
शिकायत मिलने के बाद जोड़ापोखर थाना प्रभारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुटकी थाना को सूचित किया। पुलिस ने दोनों वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबर, वाहन के चेसिस और इंजन नंबर सहित अन्य दस्तावेजों की जांच शुरू करने की बात कही है।
इस संबंध में मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि उनकी गाड़ी का नंबर किसी दूसरी गाड़ी पर इस्तेमाल किया जाना बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने आशंका जतायी कि यदि फर्जी नंबर प्लेट लगाकर किसी आपराधिक घटना को अंजाम दिया जाता है तो उसकी जिम्मेदारी उनके ऊपर भी आ सकती है। इसलिए उन्होंने पुलिस से निष्पक्ष और त्वरित जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पायेगा कि यह फर्जी नंबर प्लेट का मामला है, दस्तावेजों में किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है या फिर वाहन पंजीकरण से जुड़ी कोई तकनीकी त्रुटि है। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है।
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