टीम एबीएन, रांची। झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार ने लोकभवन में लेखक दीपेश कुमार निराला की पुस्तक का विमोचन किया, जिसे झारखंड के प्रतिष्ठित क्राउन पब्लिकेशन ने प्रकाशित किया है और इसमें झारखंड पथ विक्रेता (आजीविका संरक्षण एवं विनियमन) नियमावली, 2015 एवं झारखंड पथ विक्रेता (आजीविका संरक्षण एवं विनियमन) योजना (स्कीम), 2017 तथा झारखंड नगरपालिका यातायात प्रबंधन विनिमावली, 2017 और नागरिक सुविधाओं के बारे में बताया गया है। यह पुस्तक खासकर फुटपाथ दुकानदारों (स्ट्रीट वेंडर्स), नगरपालिका नगर निगम से जुड़े लोगों तथा यातायात प्रबंधन से जुड़े लोगों और विधि के क्षेत्र से जुड़े वकील, जज और विधि विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए काफी लाभकारी होगी।
इस पुस्तक में मुख्य रूप से केंद्र सरकार द्वारा रेहड़ी लगाने वाले लोगों के लिए तथा उनसे जुड़े शिकायत निवारण एवं विवाद समाधान हेतु किये गये उपबंधों तथा उनकी आजीविका के संरक्षण और टाउन वेंडिंग समिति से संबंधित नियमों की जानकारी, पथ विक्रेताओं का सर्वेक्षण, निबंधन/पंजीकरण, इनका विक्रेता पहचान पत्र के नियम-कानून की जानकारी के साथ-साथ विक्रय स्थलों का चिन्हितीकरण, वर्गीकरण उनको सूचीबद्ध करने, विक्रय शुल्क निर्धारण से संबंधित नियमों का उल्लेख है।
साथ ही साथ झारखंड नगरपालिका यातायात प्रबंधन विनियमावली के तहत पार्किंग व्यवस्था, शहरी परिवहन निधि, पार्किंग दर, इनकी प्रक्रियाओं तथा दंड एवं शास्ति और अपील के प्रावधानों की जानकारी है। साथ ही साथ नागरिक सुविधाओं से जुड़े विभिन्न अधिसूचनाएं एवं सर्कुलर की जानकारी को यहां समाहित किया गया है, जोकि खासकर नगरपालिका शहरी क्षेत्र में लागू होती है।
पुस्तक विमोचन के अवसर पर दीपेश कुमार निराला, उमाशंकर सिंह और क्रॉउन पब्लिकेशन की ओर से प्रकाशक अमित आर्या मुख्य रूप से उपस्थित रहे, जिन्होंने कहा कि यह पुस्तक झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 के बाद झारखंड में बनी विभिन्न नियमावलियों की सुव्यवस्थित जानकारी एक जगह उपलब्ध कराती है।
यह पुस्तक हमारे अपर बाजार पुस्तक पथ और ईस्ट जेल रोड स्थित क्रॉउन पब्लिकेशन के दुकानों में उपलब्ध है, साथ ही आप इसे आनलाइन अमेजन से भी आर्डर कर सकते हैं। आम नागरिकों और पथ विक्रेताओं को ध्यान में रखकर इस पुस्तक की कीमत 220/ रुपये रखी गयी है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में निकाय चुनाव को लेकर निर्वाचन प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण बनाने के उद्देश्य से प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए नकदी, शराब अथवा अन्य वस्तुओं के वितरण को दंडनीय अपराध बताते हुए प्रशासन ने आम नागरिकों से सतर्क रहने और सहयोग करने की अपील की है।
प्रशासन के अनुसार, चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पर नजर रखने के लिए प्रत्येक थाना क्षेत्र में फ्लाइंग स्क्वॉड का गठन किया गया है। ये टीमें लगातार गश्त कर रही हैं और संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है, ताकि चुनाव को प्रभावित करने वाले प्रयासों पर समय रहते रोक लगाई जा सके।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि चुनाव अवधि के दौरान यदि कोई व्यक्ति किसी निर्वाचन क्षेत्र में बड़ी मात्रा में नकदी लेकर चलता पाया जाता है, तो उससे धन के स्रोत और उसके उपयोग से संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा जायेगा। संतोषजनक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने की स्थिति में नकदी को जब्त किया जा सकता है और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जायेगी।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई केवल आम लोगों पर ही नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों, उनके कार्यकर्ताओं और प्रत्याशियों पर भी समान रूप से लागू होगी। किसी भी स्तर पर चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।
नकदी के साथ-साथ शराब, उपहार सामग्री या अन्य किसी प्रकार की वस्तुओं का वितरण भी अपराध की श्रेणी में आयेगा। आम नागरिकों से अपील करते हुए प्रशासन ने कहा है कि वे अनावश्यक रूप से बड़ी मात्रा में नकदी लेकर यात्रा करने से बचें। यदि किसी कारणवश नकदी ले जाना आवश्यक हो, तो संबंधित दस्तावेज अपने पास अवश्य रखें, ताकि जांच के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो।
उनमें से पैन कार्ड और उसकी प्रति, व्यापार निबंधन प्रमाण पत्र (यदि लागू हो), बैंक पासबुक या बैंक स्टेटमेंट, जिसमें नकदी निकासी का विवरण हो, नियमित नकद लेन-देन वाले व्यवसाय के लिए कैश बुक की प्रति, धन के उपयोग से संबंधित प्रमाण, जैसे विवाह निमंत्रण पत्र या अस्पताल में भर्ती से जुड़े दस्तावेज जैसे दस्तावेज रखना जरूरी है।
प्रशासन ने लोगों से यह भी आग्रह किया है कि यदि कहीं मतदाताओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से नकदी, शराब या अन्य वस्तुओं का वितरण होता दिखायी दे, तो इसकी सूचना तत्काल स्थानीय पुलिस, निर्वाचन अधिकारियों या नियंत्रण कक्ष को दें। नागरिकों के सहयोग से ही स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित किया जा सकता है।
टीम एबीएन, रांची। रांची-लोहरदगा-टोरी रेलखंड पर यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों के लिए राहत की खबर है। कोयल नदी पर बने पुल में आई तकनीकी खामी के कारण प्रभावित रेल सेवाएं 15 मार्च के बाद दोबारा शुरू होने की उम्मीद है।
रेलवे ने पुल की मरम्मत और मजबूती का काम तेज कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि तय समयसीमा के भीतर कार्य पूरा कर लिया जाएगा। सुरक्षा मानकों की अंतिम जांच के बाद इस रूट पर ट्रेनों का संचालन पूर्ववत बहाल किया जाएगा।
रांची रेल मंडल अंतर्गत नागजुआ और लोहरदगा स्टेशन के बीच स्थित कोयल नदी पुल संख्या 115 में पिलर संख्या चार और पांच के बीच दरार पाए जाने के बाद एहतियातन इस मार्ग पर टोरी तक सीधी रेल सेवाएं रोक दी गई थीं।
कई ट्रेनों को वैकल्पिक मार्गों से चलाना पड़ा, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी हुई। रेलवे की शुरूआती जांच में पाया गया कि दोनों पिलर एक ओर झुकने लगे थे, जिससे पुल की संरचना पर दबाव बढ़ गया था। इसके बाद पहले से तय मरम्मत योजना में बदलाव करते हुए नई और आधुनिक तकनीक अपनाई गई।
अब पिलरों को सुरक्षित ढंग से काटने के लिए डायमंड कटर का इस्तेमाल किया जा रहा है। करीब 12.2 मीटर लंबे पिलरों पर काम के लिए रायपुर से 350 टन क्षमता वाली भारी क्रेन मंगाई गई है, ताकि जटिल मरम्मत के दौरान किसी तरह का जोखिम न रहे।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, मेदिनीनगर (पलामू)। क्षेत्रीय शिक्षा संयुक्त निदेशक कार्यालय के चतुर्थवर्गीय कर्मचारी लक्षमण राम का हृदयाघात के कारण 6 फरवरी 2025 को आकस्मिक निधन हो गया। वे 23 दिसंबर 1988 से निरंतर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए विभाग में अपनी सेवाएं प्रदान की।
कार्यालय के कर्मचारियों ने बताया कि स्वर्गीय लक्ष्मण राम अत्यंत सरल, कर्मठ एवं सज्जन स्वभाव के व्यक्ति थे।
उन्होंने अपने लंबे सेवाकाल के दौरान कार्यालय के प्रति पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी से कार्य किया, जिससे वे सभी के बीच सम्मान के पात्र बने रहे। वे मोहम्मदगंज के कादलकुर्मी गांव के निवासी थे। उनके आकस्मिक निधन की सूचना मिलते ही आज आयुक्त कार्यालय परिसर में शोकसभा का आयोजन किया गया।
शोकसभा में आयुक्त के सचिव बिजय वर्मा, जिला शिक्षा पदाधिकारी सह प्रभारी क्षेत्रीय शिक्षा संयुक्त निदेशक सौरभ प्रकाश सहित कार्यालय के कर्मचारी शीतलेश कुमार सिंह, नीरज कुमार सिन्हा, रंजीत कुमार, मनीष राज, राजेंद्र राम एवं अन्य सहकर्मी तथा आयुक्त कार्यालय, प्रमंडलीय जनसंपर्क कार्यालय, क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार कार्यालय, क्षेत्रीय शिक्षा संयुक्त निदेशक कार्यालय, उप निदेशक कल्याण कार्यालय सहित अन्य कार्यालयों के पदाधिकारी, कर्मीगण उपस्थित हुए और दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की।
आयुक्त के सचिव बिजय वर्मा एवं प्रभारी क्षेत्रीय शिक्षा संयुक्त निदेशक ने कहा कि लक्ष्मण राम जी के निधन से कार्यालय परिवार को अपूरणीय क्षति हुई है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें एवं शोक-संतप्त परिवार को इस दु:ख को सहन करने की शक्ति दें।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड सरकार मंईयां सम्मान योजना से जुड़ी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। राज्य सरकार 50 लाख महिला लाभुकों को स्वरोजगार के लिए बैंक के माध्यम से 20-20 हजार रुपये का ऋण उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही है। अगर यह प्रस्ताव सफल रहा तो इसे आगामी बजट में शामिल किया जा सकता है।
सूत्रों के अनुसार, इस योजना को लेकर शनिवार को वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की अध्यक्षता में बैंकों के साथ एक अहम बैठक हुई। बैठक में सभी बैंक प्रतिनिधियों ने योजना के क्रियान्वयन में सहयोग करने पर सहमति जताई और वरीय प्रबंधन से जल्द अनुमति लेने की बात कही। फिलहाल मंईयां सम्मान योजना के तहत महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की सहायता राशि दी जा रही है।
सरकार इसी राशि को आधार बनाकर महिलाओं को छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित करना चाहती है। वित्त मंत्री ने बैंकों के सामने प्रस्ताव रखा कि ऋण की किस्त महिलाओं को मिलने वाली सम्मान राशि से ही समायोजित की जा सकती है। उन्होंने कहा कि इस राशि को पूंजी के रूप में इस्तेमाल कर महिलाओं को उद्यमी बनाया जा सकता है।
सरकार इस योजना को औपचारिक रूप से 8 मार्च, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर शुरू करने पर विचार कर रही है। इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री की भी सहमति प्राप्त है। योजना के नाम को लेकर भी मुख्यमंत्री से विमर्श किया जाएगा। ऋण की अदायगी के लिए 12 से 24 महीने की समय-सीमा तय करने का सुझाव दिया गया है।
इस पर वित्त विभाग और बैंकों के प्रतिनिधि आपसी सहमति से अंतिम निर्णय लेंगे। यह भी प्रस्ताव है कि यदि कोई लाभुक समय पर ऋण चुका देती है, तो बैंक व्यवसाय का भौतिक सत्यापन कर उसकी ऋण सीमा बढ़ाकर 50 हजार रुपये तक कर सकते हैं। ऋण पर ब्याज दर केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) के मानकों के अनुरूप रखने पर विचार किया जा रहा है।
वित्त मंत्री ने बैंकों से आग्रह किया है कि ऋण प्रक्रिया को बेहद सरल रखा जाए। तय किया गया है कि केवल आधार कार्ड को अनिवार्य दस्तावेज बनाया जाए। आवेदन दस रुपये के रेवेन्यू स्टांप पर स्वीकार किया जा सकता है और सात दिनों के भीतर ऋण प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
योजना की निगरानी के लिए एक विशेष डिजिटल पोर्टल तैयार किया जाएगा। इस पोर्टल के जरिए ऋण वितरण और अदायगी की नियमित निगरानी की जाएगी। वित्त विभाग के अधिकारी बैंकों के साथ मिलकर पोर्टल की संरचना तैयार करेंगे।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। धनबाद नगर निकाय चुनाव में चुनाव चिन्ह आवंटन के बाद पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट हो गया है। एसएसपी प्रभात कुमार ने स्पष्ट किया है कि चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर 24×7 निगरानी रहेगी।
हेट स्पीच, अफवाह, भड़काऊ पोस्ट या फर्जी वीडियो फैलाने वालों पर सीधे मुकदमा दर्ज होगा। बिना अनुमति जुलूस, नियम उल्लंघन और आपत्तिजनक पोस्ट करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
व्हाट्सऐप ग्रुप एडमिन भी जिम्मेदार होंगे। आम नागरिकों ने से निर्भीक होकर मतदान करने और किसी भी शिकायत की सूचना कंट्रोल रूम नंबर 8210840901 पर देने की अपील की गई है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम और यूनाइटेड किंगडम की यात्रा के बाद झारखण्ड में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में निवेश और ग्रीन स्टील युग का शुभारंभ हो चुका है।
टाटा स्टील और नवीन जिंदल समूह के निवेश प्रस्ताव समेत स्टील और पावर सेक्टर, इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग, उन्नत कोटिंग और फिनिश्ड स्टील, ऑटोमोबाइल उद्योग और सीमेंट उद्योग के लिए विभिन्न निवेशकों ने झारखण्ड में निवेश के प्रति रुचि दिखाते हुए कुल 1 लाख 27 हजार करोड़ के निवेश का आशय पत्र उद्योग विभाग झारखण्ड सरकार को सौंपा गया है। इसमें नवीन जिंदल समूह का 70 हजार करोड़ तथा टाटा स्टील का 11 हजार करोड़ का निवेश भी प्रस्तावित है।
झारखण्ड सरकार और प्रमुख औद्योगिक समूहों जैसे टाटा स्टील एवं नवीन जिंदल समूह के बीच हुए ऐतिहासिक समझौतों के अतिरिक्त उड़ीसा एलॉय स्टील, रुंगटा माइन्स, अम्लगाम स्टील एंड पॉवर, बीएमडब्लू इंडस्ट्रीज लिमिटेड, जय सस्पेंशन लिमिटेड, अंबुजा सीमेंट लिमिटेड से प्राप्त आशय पत्र के बाद राज्य एक नए औद्योगिक युग के द्वार पर खड़ा है। 1 लाख 27 हजार करोड़ से अधिक का निवेश प्रस्ताव झारखण्ड को ना सिर्फ स्टील हब बनाएगा, बल्कि ग्रीन एनर्जी और अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित भी करेगा।
इस निवेश का मुख्य उद्देश्य जीरो कार्बन लक्ष्यों की प्राप्ति और उच्च-गुणवत्ता वाले फिनिश्ड उत्पादों का निर्माण है। राज्य अब केवल कच्चे माल का स्रोत नहीं, बल्कि अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से दुनिया को क्लीन स्टील और स्मार्ट ऑटो-कंपोनेंट्स की आपूर्ति करने के लिए दुनिया के सामने तैयार है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य के सभी जिलों में संतुलित विकास को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके तहत लातेहार में स्टील और पावर सेक्टर के क्षेत्र में उड़ीसा स्टील अलॉय लिमिटेड 25,000 करोड़ का निवेश से संबंधित आशय पत्र (LoI) प्रेषित किया है।
इसके तहत ब्लास्ट फर्नेस और डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (DRI) यूनिट्स स्थापित की जाएंगी। इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग के लिए सरायकेला खरसावां में रुंगटा समूह 10,000 करोड़ के निवेश से स्टील, पावर और सीमेंट प्लांट का निर्माण करेगा। इसके अतिरिक्त रुंगटा माइन्स लिमिटेड द्वारा 300 करोड़ का अलग निवेश भी प्रस्तावित है।
उन्नत कोटिंग और फिनिश्ड स्टील के लिए बोकारो में बीएमडब्लू (BMW) इंडस्ट्रीज लिमिटेड 1,070 करोड़ की लागत से कोल्ड रोल्ड फुल हार्ड कॉइल्स और Galvalume / ZAM कोटेड कॉइल्स का उत्पादन करेगी, जो जंग-रोधी और टिकाऊ समाधान प्रदान करेंगे। ऑटोमोटिव सेक्टर के तहत पूर्वी सिंहभूम के आदित्यपुर में जय सस्पेंशन द्वारा 255 करोड़ के निवेश से लीफ और पैराबोलिक स्प्रिंग्स का निर्माण किया जाएगा, जो ऑटोमोबाइल उद्योग को मजबूती देगा।
फिनिश्ड स्टील एवं पावर पूर्वी सिंहभूम के कांड्रा में अमलगम स्टील द्वारा 4,980 करोड़ का निवेश का प्रस्ताव है, जो फिनिश्ड स्टील उत्पादन पर केंद्रित होगा। इसी के साथ सनशाइन ग्लोबल कैपिटल, सिंगापुर का 10 मेगावाट एआई डेटा सेंटर का लगभग 3,000 करोड़ का निवेश भी प्रस्तावित है।
इस निवेश प्रस्ताव का सबसे बड़ा लाभ राज्य के राज्य के हुनरमंद युवाओं और स्थानीय लोगों को मिलेगा। अनुमान है कि इन प्रस्तावित परियोजनाओं से 46,555 हजार से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
इसमें उड़ीसा स्टील अलॉय से 20,000, रुंगटा से 6,200, अमलगम स्टील से 3,000 और बीएमडब्लू इंडस्ट्रीज से 1,415, जय सस्पेंशन से 2,500 से अधिक परिवार को सीधे तौर पर रोजगार मिलेगा।
अत्याधुनिक तकनीक का होगा उपयोग
टाटा स्टील, जिंदल और अन्य समूहों ने झारखण्ड में विश्व की सबसे उन्नत तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया है।
EASyMelt जैसे तकनीक से विद्युत ऊर्जा और सिनगैस के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में 50% की कमी होगी। Hisarna तकनीक स्थानीय निम्न-श्रेणी के लौह अयस्क का उपयोग कर उत्सर्जन को 80% तक कम कर सकती है। ग्रीन एनर्जी सोलर प्लांट और ग्रीन फील्ड न्यूक्लियर प्लांट के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा पर जोर दिया जाएगा।
सस्टेनेबल टिनप्लेट पर्यावरण अनुकूल मिथाइल सल्फोनिक एसिड और 85% वाटर रीसाइक्लिंग पर ध्यान केंद्रित करेगा। Galvanized, Galvalume, ZAM और कलर-कोटेड स्टील की उपयोगिता पर भी जोर दिया. ये उत्पाद ऑटोमोटिव, घरेलू उपकरणों और निर्माण कार्यों के लिए अत्यधिक टिकाऊ, जंग-रोधी और गर्मी सहने वाले समाधान प्रदान करेंगे।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर सरकार अब केवल समीक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि एक्शन मोड में नजर आ रही है। बीते दोनों सभी सिविल सर्जन को केवल चेतावनी दी गयी थी और आज अपर मुख्य सचिव ने सभी उप विकास एक्टों को पीएम अफीम और 15वें वित्त आयोग की राशि का निर्माण व खर्च में तेजी के निर्देश दिया।
दिनांक 2 फरवरी 2026 को अजय कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा की अध्यक्षता में सभी जिलों के सिविल सर्जनों के साथ समीक्षा बैठक हुई थी। इस बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), मुख्यमंत्री अस्पताल रखरखाव योजना, 15वां वित्त आयोग और पीएम-अभीम की प्रगति की गहन समीक्षा की गई।
आज 6 फरवरी 2026 को अपर मुख्य सचिव ने एक कदम आगे बढ़ते हुए सभी जिलों के उप विकास आयुक्तों (डीडीसी) के साथ 15वें वित्त आयोग और पीएम-अभीम की प्रगति की अलग से समीक्षा की।
इस बैठक में एचएससी, पीएचसी, बीपीएचयू, आईपीएच और यूएएम जैसी स्वास्थ्य इकाइयों के निर्माण कार्यों में हो रही देरी पर सख्त रुख अपनाया गया। अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि जहां भी निर्माण कार्य बाधित हैं, वहां तुरंत कारणों की पहचान कर उन्हें पूरा कराया जाए। बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा, अपर सचिव विद्यानंद शर्मा पंकज और उप सचिव ध्रुव प्रसाद के साथ केपीएमजी के लालमोहन उपस्थित थे।
अपर मुख्य सचिव ने यह भी सवाल उठाया कि कई स्थानों पर क्या ऐसे स्वास्थ्य केंद्र हैं जिनका निर्माण तो पूरा हो गया इसके बावजूद फंक्शनल नहीं हैं। ऐसे सभी मामलों में तत्काल स्थिति का आकलन कर केंद्रों को चालू करने का निर्देश दिया गया। साथ ही अन्य योजनाओं में पड़ी राशि को शीघ्र खर्च कर विकास कार्यों को पूरा करने पर जोर दिया गया।
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