टाटा मोटर्स का बड़ा दांव: इटली की इवेको ग्रुप को खरीदने का ऐलान, 3.82 बिलियन यूरो में होगी डीलएबीएन बिजनेस डेस्क। टाटा मोटर्स ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि उसने ट्यूरिन-मुख्यालय वाली Iveco Group N.V. के सभी कॉमन शेयरों को 14.10 यूरो प्रति शेयर की कीमत पर खरीदने के लिए पूरी तरह से कैश वाला वॉलंटरी टेंडर ऑफर पेश किया है। इससे इटैलियन कमर्शियल व्हीकल बनाने वाली कंपनी की वैल्यू लगभग 3.82 बिलियन यूरो आंकी गई है। इस प्रस्तावित विलय से Iveco और टाटा मोटर्स का कमर्शियल व्हीकल बिजनेस एक साथ आ जाएगा।संयुक्त कंपनी के सालाना 5,90,000 से ज़्यादा वाहन बेचने और लगभग 21 बिलियन यूरो (यानी 2,28,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा) का रेवेन्यू कमाने की उम्मीद है। कंपनी के बयान के अनुसार, Iveco और टाटा मोटर्स के कमर्शियल व्हीकल बिज़नेस का कुल रेवेन्यू 21 बिलियन यूरो (2,28,000 करोड़ रुपये) है, जो यूरोप (46%), भारत (32%), दक्षिण अमेरिका (8%) और बाकी दुनिया (14%) में फैला हुआ है। साथ ही, एशिया और अफ्रीका के उभरते बाजारों में भी इनकी स्थिति मज़बूत है। यह घटनाक्रम टाटा मोटर्स की एक स्टेप-डाउन सब्सिडियरी द्वारा ऑफर पेश किए जाने और उसके बाद इटैलियन मार्केट रेगुलेटर से मंज़ूरी मिलने के बाद हुआ है। ऑफर स्वीकार करने की अवधि 7 सितंबर, 2026 से 26 अक्टूबर, 2026 तक है।Exor N.V., जो Iveco Group की सबसे बड़ी शेयरहोल्डर है, ने पहले ही इस ऑफर का समर्थन करने और अपने शेयर (जो कॉमन शेयरों का लगभग 27.06% और सभी वोटिंग अधिकारों का 43.19% हैं) टेंडर करने का पक्का वादा किया है। Iveco Group के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने सर्वसम्मति से इस सौदे का समर्थन किया है और शेयरहोल्डर्स से ऑफर स्वीकार करने की सिफारिश की है। बोर्ड ने शेयरहोल्डर्स से यह भी आग्रह किया है कि वे 16 अक्टूबर, 2026 को होने वाली एक्स्ट्राऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) में ऑफर से जुड़े प्रस्तावों के पक्ष में वोट करें, ताकि शेयरहोल्डर्स से औपचारिक मंज़ूरी मिल सके।टाटा मोटर्स ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में कहा, इवेको ग्रुप के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने इस डील का सर्वसम्मति से समर्थन किया है। वे इवेको ग्रुप के शेयरहोल्डर्स से इस ऑफर को स्वीकार करने और EGM में ऑफ़र से जुड़े प्रस्तावों के पक्ष में वोट करने की सिफारिश करते हैं।इस घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए टाटा मोटर्स लिमिटेड के MD और CEO गिरीश वाघ ने कहा, टेंडर ऑफ़र की शुरुआत दो ऐसी कंपनियों को एक साथ लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है जो एक-दूसरे की खूबियों को पूरा करती हैं और उत्कृष्टता, इनोवेशन और ग्राहकों की सफलता के लिए समान रूप से प्रतिबद्ध हैं।वाघ ने कहा, अपनी-अपनी खूबियों, क्षमताओं और बाजार में मौजूदगी को मिलाकर, हमारे पास एक मज़बूत और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कमर्शियल व्हीकल बिज़नेस बनाने का मौका है। यह बिज़नेस ग्राहकों की बेहतर सेवा करने, भविष्य की टेक्नोलॉजी में निवेश करने और सभी स्टेकहोल्डर्स के लिए टिकाऊ मूल्य बनाने की बेहतर स्थिति में होगा।
एबीएन बिजनेस डेस्क। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के हाल ही में जारी आंकड़ों से पता चलता है कि भारत का अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) निवेश 2023-24 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 0.84 फीसदी को पार कर गया है, जो अब तक का उच्चतम स्तर है और इसके और बढ़ने की संभावना है। लगभग एक दशक से अनुसंधान एवं विकास की तीव्रता जीडीपी के 0.6 फीसदी से 0.7 फीसदी के बीच अटकी हुई थी। इस महत्त्वपूर्ण आंकड़े के भीतर एक और महत्त्वपूर्ण बदलाव छिपा है : निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 2020-21 में 32 फीसदी से बढ़कर मात्र तीन वर्षों में 45 फीसदी हो गयी है। स्वतंत्र भारत के इतिहास के अधिकांश समय में अनुसंधान सरकार का मामला रहा है। निजी क्षेत्र का इस गति से विकास, अर्थव्यवस्था के बढ़ते आत्मविश्वास और उद्योग जगत द्वारा अपने स्वयं के विचारों पर गंभीरता से दांव लगाने का संकेत देता है। वर्ष 1990 के बाद से केवल 34 मध्यम-आय वाली अर्थव्यवस्थाएं ही उच्च-आय वाली अर्थव्यवस्थाओं की श्रेणी में पहुंच पाई हैं जबकि 108 अभी भी वहीं अटकी हुई हैं। जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसी जिन अर्थव्यवस्थाओं ने तेल या खनिजों के अप्रत्याशित लाभ के बिना यह छलांग लगाई है, उनमें एक तरह का पैटर्न देखने को मिलता है। इन सभी ने अपनी आय के लगभग वर्तमान भारत के स्तर पर रहते हुए अनुसंधान में भारी निवेश किया और विकास के साथ-साथ इस निवेश को और भी बढ़ाया। एक तुलना सबसे महत्त्वपूर्ण है। वर्ष 2007 में चीन का प्रति व्यक्ति जीडीपी 2,700 डॉलर था, जो आज भारत के जीडीपी के लगभग बराबर है लेकिन इसकी अनुसंधान एवं विकास तीव्रता भारत की तुलना में लगभग दोगुनी यानी जीडीपी का 1.49 फीसदी थी। वर्ष 2007 और 2024 के बीच चीन का जीडीपी 5.5 गुना बढ़ा, लेकिन इसके निजी क्षेत्र के अनुसंधान एवं विकास में 10 गुना से अधिक की वृद्धि हुई। उद्योग ने विकास से आगे बढ़कर निवेश किया, जिसने चीन को आज की तकनीकी महाशक्ति में बदल दिया। भारत की विकसित भारत की महत्त्वाकांक्षा को साकार करने के लिए 2035 तक अनुसंधान एवं विकास को सकल घरेलू उत्पाद के 2 फीसदी तक लाना होगा, जिसमें उद्योग का योगदान 70 फीसदी होना चाहिए। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, 2030 तक एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करनी है: सकल घरेलू उत्पाद का 1.3 फीसदी, जिसमें कंपनियों की हिस्सेदारी बढ़कर कम से कम 60 फीसदी हो जाये। सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ाना शुरू कर दिया है। अनुसंधान नैशनल रिसर्च फंड (एएनआरएफ) और अनुसंधान, विकास एवं नवाचार कोष (आरडीआईएफ) प्रारंभिक चरण के अनुसंधान जोखिमों को कम करने और उद्योग को विकास के लिए उत्प्रेरक पूंजी प्रदान करने के लिए मौजूद हैं। यह एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन अंतिम लक्ष्य नहीं। अधिक खर्च करें। सरकार को अनुसंधान एवं विकास पर होने वाला खर्च 2030 तक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के कम से कम 0.5 फीसदी तक पहुंचाना होगा, और 2035 तक इसे 0.6 फीसदी तक ले जाना होगा, जो आज के लगभग 0.4 फीसदी से वास्तविक वृद्धि होगी। सही चीजों पर सही तरीके से व्यय करें। तीन एजेंसियां-रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), अंतरिक्ष विभाग (डीओएस) और परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई)- केंद्रीय वैज्ञानिक व्यय के 60 फीसदी से अधिक का उपयोग करती हैं, जिसमें से अधिकांश उनकी अपनी प्रयोगशालाओं में ही खर्च होता है। उच्च शिक्षा, जो मूलभूत अनुसंधान का आधार है और हर व्यावहारिक सफलता को जन्म देती है तथा प्रतिभाओं का विकास करती है, भारत के अनुसंधान एवं विकास व्यय का केवल 12.6 फीसदी ही प्राप्त करती है। सरकारी निधि को स्वतंत्र शोधकर्ताओं, स्टार्टअप और फर्मों की ओर निर्देशित किया जाना चाहिए, और महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए, जैसा कि डीआरडीओ के आईडेक्स कार्यक्रम से स्पष्ट होता है। इसके लिए खंडित अनुदानों के बजाय कम, बड़े, दीर्घकालिक, प्रौद्योगिकी क्षमता-केंद्रित राष्ट्रीय मिशनों की आवश्यकता है। उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए बजट आवंटन को बढ़ाकर 15-20 फीसदी करने की आवश्यकता है। उद्योग जगत के लिए ऐसी अनुकूल परिस्थितियां बनायें कि वे जोखिम उठा सकें। उद्योग-उन्मुख उपायों के संबंध में नीति गलत दिशा में चली गयी है। समाधान यह है कि अनुसंधान से जुड़े प्रोत्साहनों को अग्रिम बाजार प्रतिबद्धताओं के साथ जोड़ें जो प्रदर्शन मानकों को पूरा करने वाले उत्पादों के लिए सार्वजनिक खरीद को पूर्व-निर्धारित करती हैं। भारतीय उद्योग वास्तविक स्तर पर पहुंच रहा है, नये व्यापार समझौते वैश्विक बाजारों को खोल रहे हैं, और शुल्क बाधाएं कम हो रही हैं, जिसका अर्थ है वैश्विक मोर्चे पर प्रतिस्पर्धा करना, जिसके लिए उद्योग को नवाचार करना होगा और जोखिम भरे विचारों का समर्थन करना होगा। कुछ कंपनियां पहले ही दिखा चुकी हैं कि क्या संभव है। ग्लेनमार्क ने एक दशक से अधिक समय तक एक ही प्रोपराइटरी ऐंटीबॉडी प्लेटफॉर्म पर 1 अरब डॉलर का निरंतर निवेश किया। इससे आईएसबी 2001 का विकास हुआ, जो उन्नत रक्त कैंसर के इलाज के लिए एक ऐंटीबॉडी है, जिसका लाइसेंस 2025 में ऐबवी को 1.9 अरब डॉलर तक के मूल्य पर दिया गया। स्काईरूट एरोस्पेस ने अपनी रॉकेट प्रणोदन तकनीक को बिल्कुल नये सिरे से विकसित किया। इसका विक्रम-1 निजी तौर पर विकसित पहला भारतीय रॉकेट बना जिसने कक्षा में प्रवेश किया, जिससे भारत निजी क्षेत्र में प्रक्षेपण क्षमता वाला तीसरा देश बन गया। कंपनी का वर्तमान मूल्य 1.1 अरब डॉलर से अधिक है। कार्यप्रणाली मौजूद है। अब उद्योग को यह तय करना है कि इसका उपयोग करना है या नहीं। विकसित भारत की उम्मीदें अनुसंधान एवं विकास के उपयोग की मात्रा और तरीके पर टिकी हैं, जिसमें निजी क्षेत्र की भूमिका कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण है, जबकि सरकारी नीति और सार्वजनिक क्षेत्र भी अपना योगदान दे रहे हैं।
चीनी के बाद गुड़ भी हुआ कड़वा, कीमत 45 से बढ़कर हुआ 70/किलो एबीएन बिजनेस डेस्क। चीनी की बढ़ती कीमतों के बाद अब गुड़ भी कड़वा हो गया है यानी महंगा हो गया है। खुदरा बाजार में गुड़ के दाम बढ़कर 80 से 90 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गये हैं। कुछ समय पहले तक यही गुड़ 40 से 50 रुपये किलो के आसपास बिक रहा था यानी कम समय में इसकी कीमत करीब दोगुनी हो गयी है। गुड़ की कीमतों में तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह पुराने स्टॉक में कमी और नये पिराई सत्र में देरी बतायी जा रही है। पिछले पिराई सत्र का उपलब्ध गुड़ अब लगभग खत्म होने की स्थिति में है। ऐसे में बाजार में आपूर्ति सीमित होने से कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। चीनी महंगी होने से बढ़ी मांग चीनी के दाम बढ़ने का असर गुड़ की मांग पर भी पड़ा है। मिठास के लिए कई उपभोक्ता चीनी की जगह गुड़ का इस्तेमाल कर रहे हैं। मांग बढ़ने और उपलब्धता सीमित रहने से गुड़ की कीमतों में तेज उछाल आया है। एथेनॉल उत्पादन का भी असर गन्ने और उससे जुड़े उत्पादों का इस्तेमाल एथेनॉल उत्पादन में बढ़ने से गुड़ के लिए उपलब्ध कच्चे माल पर भी असर पड़ा है। गन्ने के इस्तेमाल में बदलाव से चीनी के साथ-साथ गुड़ के उत्पादन और आपूर्ति पर भी दबाव बन रहा है। भारत दुनिया का प्रमुख गुड़ उत्पादक भारत गुड़ के उत्पादन में दुनिया में अग्रणी है और वैश्विक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत बतायी जाती है। देश में उत्पादित गन्ने का एक बड़ा हिस्सा गुड़ बनाने में इस्तेमाल होता है। भारत घरेलू जरूरत पूरी करने के साथ गुड़ का निर्यात भी करता है। त्यौहारों से बढ़ सकती है मांग आने वाले त्यौहारों के कारण गुड़ की मांग में और तेजी आने की संभावना है। दक्षिण भारत में ओणम जैसे त्यौहारों के दौरान मिठाइयों और पारंपरिक व्यंजनों में गुड़ की खपत बढ़ जाती है। ऐसे में यदि नई फसल की पिराई और गुड़ की आपूर्ति समय पर नहीं बढ़ी तो आने वाले दिनों में कीमतों पर और दबाव देखने को मिल सकता है।
सेंसेक्स 210 अंक गिरकर 78,428 पर बंद, निफ्टी आया 24,620 के नीचे एबीएन बिजनेस डेस्क। मंगलवार को शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 210.08 अंक गिरकर 78,428.95 पर आ गया, जबकि निफ्टी 159.40 अंक की गिरावट के साथ 24,614.90 के स्तर पर बंद हुआ। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 504.12 अंक उछलकर 79,143.15 तक पहुंचा था जिससे फिर यह 931.28 प्वाइंट्स टूटकर 78,211.87 तक आ गया। बाजार में गिरावट के ये हैं कारण आईटी और प्राइवेट बैंकिंग स्टॉक्स में दबाव : मार्केट पर आज आईटी और हैवीवेट प्राइवेट बैंकिंग स्टॉक्स ने काफी दबाव बनाया जिनके निफ्टी इंडेक्स करीब डेढ़ फीसदी टूट गये। इसके अलावा निफ्टी रियल्टी में डेढ़ फीसदी से अधिक, निफ्टी एफएमसीजी में 1% से अधिक तो आॅटो और सरकारी बैंकों के निफ्टी इंडेक्स में आधे फीसदी की गिरावट है। सीएएस सिस्टम : कई ब्रोकर्स ने खुदरा निवेशकों को दोपहर 3 बजे तक अपनी पोजिशन स्क्वेयर आॅफ करने की सलाह दी है। ब्रोकरेजेज ने अपने क्लाइंट्स को सलाह दी है कि जब तक नये मैकेनिज्म सीएएस (क्लोजिंग आक्शन सेशन) में मार्केट ढल नहीं जाता है, अपनी पोजिशन 3 पीएम और 3:05 पीएम के बीच बंद कर दें। इससे मार्केट में बेयरेश माहौल बना है क्योंकि एक तरह से शेयरों के लेन-देन का समय कम हुआ है। कच्चे तेल में उछाल : ग्लोबल आयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1% से अधिक उछलकर प्रति बैरल $85 के करीब पहुंचा तो मार्केट पर इसकी आंच महसूस हुई।
कोल इंडिया का पहली तिमाही में पूंजीगत व्यय 16.64% बढ़कर 3,399 करोड़ रुपये पर एबीएन सेंट्रल डेस्क (नई दिल्ली)। कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने मंगलवार को कहा कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में उसका पूंजीगत व्यय 16.64 प्रतिशत बढ़कर 3,399 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 2,914 करोड़ रुपये था। देश की सबसे बड़ी कोयला कंपनी ने एक बयान में कहा कि अप्रैल-जून तिमाही में भूमि अधिग्रहण तथा पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (आरएंडआर) गतिविधियों पर 804 करोड़ रुपए खर्च हुए, जो कुल पूंजीगत व्यय का लगभग एक-चौथाई है। समय पर भूमि अधिग्रहण कोयला खनन के लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि इसके बगैर भले ही भंडार उपलब्ध हों, खनन परियोजनाएं शुरू नहीं हो सकतीं न ही उनका विस्तार हो सकता है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी सीआईएल ने कोयला निकासी अवसंरचना को मजबूत करने के लिए सहायक रेल पटरी बिछाने एवं गलियारे के विकास पर 754 करोड़ रुपये निवेश किये। इसके अलावा कोयला साज-संभाल संयंत्र, भंडारण और सड़कों पर 195 करोड़ रुपए खर्च किये गये, जिससे इस मद में कुल व्यय 949 करोड़ रुपये हो गया। संयंत्र एवं मशीनरी पर 819 करोड़ रुपये खर्च हुए, जिसमें भारी मशीनरी की खरीद और वॉशरी विस्तार शामिल है। कोल इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन बी. साईराम ने कहा, भूमि, अवसंरचना और मशीनरी पर निवेश कुल पूंजीगत व्यय का 75 प्रतिशत से अधिक है और इससे उत्पादन लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी। स्वच्छ ऊर्जा पहल के तहत सौर परियोजनाओं पर 278 करोड़ रुपये और संयुक्त उपक्रमों में 207 करोड़ रुपये निवेश किये गये।
बदलाव की आहट : अब बाजार में आ सकता है 10 किलो का सिलिंडरएलपीजी बाजार में होने वाला है बड़ा बदलाव, जल्द आ सकते हैं 10 किग्रा के कमर्शियल सिलेंडरएबीएन बिजनेस डेस्क। देश की सरकारी तेल विपणन कंपनियां इंडियन आॅयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कमर्शियल एलपीजी बाजार में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनियां जल्द ही 10 किलोग्राम क्षमता वाले हल्के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर बाजार में उतार सकती हैं। इस पहल का उद्देश्य छोटे कारोबारियों, रेस्तरां संचालकों और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के लिए गैस सिलेंडर का इस्तेमाल अधिक सुविधाजनक बनाना है।छोटे कारोबारियों की जरूरतों पर फोकसरिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित 10 किलो के सिलेंडर खास तौर पर उन लोगों के लिए होंगे, जिन्हें कम मात्रा में गैस की जरूरत होती है या जिनके पास बड़े 19 किलो के सिलेंडर रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं होती। इनमें स्ट्रीट वेंडर्स, कैफे, फूड कियोस्क, किराएदार, छात्र और प्रवासी मजदूर जैसे उपभोक्ता शामिल हैं।एचडीपी कंपोजिट सिलेंडर होंगे ज्यादा हल्केबताया जा रहा है कि नए सिलेंडर हाई-डेंसिटी पॉलीइथिलीन (एचडीपी) से बने कंपोजिट सिलेंडर होंगे। इन्हें गैस एजेंसियों और चुनिंदा रिटेल आउटलेट्स के जरिए कमर्शियल एलपीजी दरों पर उपलब्ध कराया जा सकता है।पहले से मौजूद हैं छोटे सिलेंडरफिलहाल सरकारी तेल कंपनियां घरेलू ग्राहकों के लिए हल्के कम्पोजिट सिलेंडर सीमित स्तर पर उपलब्ध कराती हैं। वहीं कमर्शियल ग्राहकों के लिए अभी 19 किलोग्राम, 5 किलोग्राम और 2 किलोग्राम क्षमता वाले सिलेंडर उपलब्ध हैं।
शेयर बाजार में लगातार चौथे दिन तेजी, सेंसेक्स 521 अंक चढ़ा, जानें वजह? एबीएन बिजनेस डेस्क। दिग्गज बैंक शेयरों में खरीदारी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बीच सोमवार को घरेलू शेयर बाजार लगातार चौथे कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ बंद हुए। सेंसेक्स में 521 अंक की तेजी रही जबकि निफ्टी 160 अंक चढ़ गया। विश्लेषकों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों के ताजा पूंजी प्रवाह ने भी घरेलू शेयर बाजार में सकारात्मक रुख को मजबूती दी। बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स 521.16 अंक यानी 0.67 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,285.07 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 634.15 अंक यानी 0.81 प्रतिशत चढ़कर 78,398.06 अंक तक पहुंच गया था। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी भी 159.50 अंक यानी 0.66 प्रतिशत बढ़कर 24,430.35 अंक पर बंद हुआ। यह घरेलू शेयर बाजार में तेजी का लगातार चौथा सत्र रहा। इन चार कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स कुल 1,806.4 अंक यानी 2.36 प्रतिशत चढ़ चुका है, जबकि निफ्टी में 564.6 अंक यानी 2.36 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है। सेंसेक्स की कंपनियों में एचडीएफसी बैंक का शेयर सर्वाधिक 3.59 प्रतिशत चढ़कर बंद हुआ। इसके अलावा महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज, आईसीआईसीआई बैंक और मारुति के शेयर भी बढ़त में रहे। दूसरी तरफ कोटक महिंद्रा बैंक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, बजाज फिनसर्व और पावर ग्रिड के शेयर नुकसान में रहे। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.82 प्रतिशत के नुकसान के साथ 71.53 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार को 1,355.33 करोड़ रुपए के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, वैश्विक संकेतकों के मिले-जुले रुख के बावजूद घरेलू शेयर बाजारों में सकारात्मक रुख के साथ कारोबार हुआ, जिसमें कच्चे तेल की स्थिर कीमतों से समर्थन मिला। कच्चे तेल में नरमी से मुद्रास्फीति, चालू खाते का संतुलन, पेट्रोलियम विपणन कंपनियों की लाभप्रदता और समग्र व्यापक आर्थिक स्थिरता को समर्थन मिलेगा। नायर ने कहा कि वैश्विक स्तर पर कृत्रिम मेधा (एआई) से जुड़े शेयरों में मुनाफावसूली का असर बाजारों पर दिखा, लेकिन विदेशी निवेश प्रवाह में सुधार से भारत का प्रदर्शन खासकर बड़ी कंपनियों के शेयरों में बेहतर रह सकता है। शेयर बाजार में लगातार चौथे दिन तेजी, सेंसेक्स 521 अंक चढ़ा, जानें वजह दिग्गज बैंक शेयरों में खरीदारी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बीच सोमवार को घरेलू शेयर बाजार लगातार चौथे कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ बंद हुए। सेंसेक्स में 521 अंक की तेजी रही जबकि निफ्टी 160 अंक चढ़ गया। विश्लेषकों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों के ताजा पूंजी प्रवाह ने भी घरेलू शेयर बाजार में सकारात्मक रुख को मजबूती दी। बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स 521.16 अंक यानी 0.67 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,285.07 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 634.15 अंक यानी 0.81 प्रतिशत चढ़कर 78,398.06 अंक तक पहुंच गया था। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी भी 159.50 अंक यानी 0.66 प्रतिशत बढ़कर 24,430.35 अंक पर बंद हुआ। यह घरेलू शेयर बाजार में तेजी का लगातार चौथा सत्र रहा। इन चार कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स कुल 1,806.4 अंक यानी 2.36 प्रतिशत चढ़ चुका है, जबकि निफ्टी में 564.6 अंक यानी 2.36 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गयी है। सेंसेक्स की कंपनियों में एचडीएफसी बैंक का शेयर सर्वाधिक 3.59 प्रतिशत चढ़कर बंद हुआ। इसके अलावा महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज, आईसीआईसीआई बैंक और मारुति के शेयर भी बढ़त में रहे।दूसरी तरफ कोटक महिंद्रा बैंक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, बजाज फिनसर्व और पावर ग्रिड के शेयर नुकसान में रहे। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.82 प्रतिशत के नुकसान के साथ 71.53 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार को 1,355.33 करोड़ रुपए के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की।जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, वैश्विक संकेतकों के मिले-जुले रुख के बावजूद घरेलू शेयर बाजारों में सकारात्मक रुख के साथ कारोबार हुआ, जिसमें कच्चे तेल की स्थिर कीमतों से समर्थन मिला। कच्चे तेल में नरमी से मुद्रास्फीति, चालू खाते का संतुलन, पेट्रोलियम विपणन कंपनियों की लाभप्रदता और समग्र व्यापक आर्थिक स्थिरता को समर्थन मिलेगा। नायर ने कहा कि वैश्विक स्तर पर कृत्रिम मेधा (एआई) से जुड़े शेयरों में मुनाफावसूली का असर बाजारों पर दिखा, लेकिन विदेशी निवेश प्रवाह में सुधार से भारत का प्रदर्शन खासकर बड़ी कंपनियों के शेयरों में बेहतर रह सकता है। एशिया के अन्य बाजारों में हांगकांग का हैंगसेंग बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की 225 और चीन के शंघाई कम्पोजिट में गिरावट आई। यूरोप के बाजार दोपहर के सत्र में मिले-जुले रुख के साथ कारोबार कर रहे थे। अमेरिकी शेयर बाजार शुक्रवार को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बंद रहे थे। शुक्रवार को सेंसेक्स 261.79 अंक बढ़कर 77,763.91 अंक पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 95.15 अंक चढ़कर 24,270.85 अंक पर रहा था। शेयर बाजार में तेजी की वजह.... कच्चे तेल में नरमी से मिला सहारा विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी बैंकिंग शेयरों में खरीदारी
शेयर बाजार में शानदार तेजी, इन 5 कारणों से उछला मार्केट एबीएन बिजनेस डेस्क। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और आईटी-प्राइवेट बैंकिंग स्टॉक्स में तेजी के दम पर घरेलू स्टॉक मार्केट में आज शानदार तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स 790.54 अंक उछल कर 76,991.22 और निफ्टी 197.55 अंक की तेजी के साथ 24,021.65 पर बंद हुआ। बाजार में तेजी की बड़ी वजहें.... कच्चे तेल में गिरावट : वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड नरम पड़ा तो मार्केट को सपोर्ट मिला। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1% फिसलकर चार महीने के निचले स्तर पर आ गया है। भू-राजनीतिक तनाव कम होने और आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद से तेल की कीमतों में गिरावट आई, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देशों के बाजारों को फायदा मिला। आईटी और प्राइवेट बैंक शेयरों ने संभाला बाजार : सेक्टरों में प्रदर्शन मिला-जुला रहा। मेटल और आॅटो शेयरों में कमजोरी देखने को मिली, लेकिन आईटी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी ने बाजार को मजबूती दी। निफ्टी आईटी इंडेक्स में करीब 1 प्रतिशत की तेजी रही। इसके अलावा प्राइवेट बैंक शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। आईटी और प्राइवेट बैंक शेयर : मेटल और आॅटो शेयरों में कमजोरी देखने को मिली लेकिन आईटी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी ने बाजार को मजबूती दी। निफ्टी आईटी इंडेक्स में करीब 1 प्रतिशत की तेजी रही। इसके अलावा प्राइवेट बैंक शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। एफआईआईएस की खरीदारी : विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआईएस) की हल्की खरीदारी से भी बाजार का सेंटीमेंट बेहतर हुआ। मंगलवार को विदेशी निवेशकों ने करीब 17.86 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की उम्मीद : भारत और अमेरिका के बीच संभावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक संकेतों ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया।
25 के बाद अब 29 को खुलेगा शेयर बाजारशेयर बाजार में लॉन्ग वीकेंड, 25 जून के बाद 29 जून को होगी ट्रेडिंगएबीएन बिजनेस डेस्क। अगर आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं तो आपके लिए यह खबर बेहद जरूरी है। आने वाले सप्ताह में शेयर बाजार में लॉन्ग वीकेंड रहने वाला है। 25 जून को कारोबारी दिन के बाद शेयर बाजार 29 जून को ओपन होगा। शुक्रवार, 26 जून को मुहर्रम के अवसर पर शेयर बाजारों में छुट्टी रहने वाली है। मुहर्रम के अवसर पर देश के दोनों प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज बीएसई और एनएसई में अधिकांश सेगमेंट्स में कारोबार बंद रहेगा। 27, 28 जून को शनिवार, रविवार होने के कारण शेयर बाजार बंद रहते हैं। वैसे तो शेयर बाजार में हर शनिवार और रविवार को छुट्टी रहती है लेकिन इसके अलावा कुछ दूसरे खास मौकों और सार्वजनिक अवकाशों पर भी मार्केट बंद रहता है।बीएसई पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, 26 जून को इक्विटी सेगमेंट, इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट, करेंसी डेरिवेटिव्स सेगमेंट्स, एनडीएस-आरएसटी ट्राई पार्टी रेपो सेगमेंट्स के लिए ट्रेडिंग नहीं होगी। हालांकि कमोडिटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीप्ट्स में शाम का सेशन ओपन रहने वाला है। बीएसई में भी स्थिति लगभग समान रहेगी।एक्सचेंज पर इक्विटी, इक्विटी डेरिवेटिव्स, करेंसी डेरिवेटिव्स, कॉरपोरेट बॉन्ड्स, म्यूचुअल फंड्स, सिक्योरिटी लेंडिंग एंड बॉरोइंग, इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीप्ट्स और अन्य प्रमुख सेगमेंट्स में कारोबार बंद रहेगा। हालांकि, कमोडिटी डेरिवेटिव्स में शाम के सत्र के दौरान ट्रेडिंग जारी रहेगी।2026 में बाजार की आगामी छुट्टियां14 सितंबर: गणेश चतुर्थी2 अक्टूबर: महात्मा गांधी जयंती20 अक्टूबर: दशहरा10 नवंबर: दिवाली-बलिप्रतिपदा24 नवंबर: प्रकाश पर्व श्री गुरु नानक देव25 दिसंबर: क्रिसमस
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