एबीएन बिजनेस डेस्क। दिग्गज बैंक शेयरों में खरीदारी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बीच सोमवार को घरेलू शेयर बाजार लगातार चौथे कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ बंद हुए। सेंसेक्स में 521 अंक की तेजी रही जबकि निफ्टी 160 अंक चढ़ गया। विश्लेषकों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों के ताजा पूंजी प्रवाह ने भी घरेलू शेयर बाजार में सकारात्मक रुख को मजबूती दी। बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स 521.16 अंक यानी 0.67 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,285.07 अंक पर बंद हुआ।
कारोबार के दौरान यह 634.15 अंक यानी 0.81 प्रतिशत चढ़कर 78,398.06 अंक तक पहुंच गया था। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी भी 159.50 अंक यानी 0.66 प्रतिशत बढ़कर 24,430.35 अंक पर बंद हुआ। यह घरेलू शेयर बाजार में तेजी का लगातार चौथा सत्र रहा। इन चार कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स कुल 1,806.4 अंक यानी 2.36 प्रतिशत चढ़ चुका है, जबकि निफ्टी में 564.6 अंक यानी 2.36 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है।
सेंसेक्स की कंपनियों में एचडीएफसी बैंक का शेयर सर्वाधिक 3.59 प्रतिशत चढ़कर बंद हुआ। इसके अलावा महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज, आईसीआईसीआई बैंक और मारुति के शेयर भी बढ़त में रहे। दूसरी तरफ कोटक महिंद्रा बैंक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, बजाज फिनसर्व और पावर ग्रिड के शेयर नुकसान में रहे। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.82 प्रतिशत के नुकसान के साथ 71.53 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार को 1,355.33 करोड़ रुपए के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, वैश्विक संकेतकों के मिले-जुले रुख के बावजूद घरेलू शेयर बाजारों में सकारात्मक रुख के साथ कारोबार हुआ, जिसमें कच्चे तेल की स्थिर कीमतों से समर्थन मिला।
कच्चे तेल में नरमी से मुद्रास्फीति, चालू खाते का संतुलन, पेट्रोलियम विपणन कंपनियों की लाभप्रदता और समग्र व्यापक आर्थिक स्थिरता को समर्थन मिलेगा। नायर ने कहा कि वैश्विक स्तर पर कृत्रिम मेधा (एआई) से जुड़े शेयरों में मुनाफावसूली का असर बाजारों पर दिखा, लेकिन विदेशी निवेश प्रवाह में सुधार से भारत का प्रदर्शन खासकर बड़ी कंपनियों के शेयरों में बेहतर रह सकता है।
दिग्गज बैंक शेयरों में खरीदारी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बीच सोमवार को घरेलू शेयर बाजार लगातार चौथे कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ बंद हुए। सेंसेक्स में 521 अंक की तेजी रही जबकि निफ्टी 160 अंक चढ़ गया।
विश्लेषकों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों के ताजा पूंजी प्रवाह ने भी घरेलू शेयर बाजार में सकारात्मक रुख को मजबूती दी। बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स 521.16 अंक यानी 0.67 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,285.07 अंक पर बंद हुआ।
कारोबार के दौरान यह 634.15 अंक यानी 0.81 प्रतिशत चढ़कर 78,398.06 अंक तक पहुंच गया था। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी भी 159.50 अंक यानी 0.66 प्रतिशत बढ़कर 24,430.35 अंक पर बंद हुआ।
यह घरेलू शेयर बाजार में तेजी का लगातार चौथा सत्र रहा। इन चार कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स कुल 1,806.4 अंक यानी 2.36 प्रतिशत चढ़ चुका है, जबकि निफ्टी में 564.6 अंक यानी 2.36 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गयी है।
सेंसेक्स की कंपनियों में एचडीएफसी बैंक का शेयर सर्वाधिक 3.59 प्रतिशत चढ़कर बंद हुआ। इसके अलावा महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज, आईसीआईसीआई बैंक और मारुति के शेयर भी बढ़त में रहे।
दूसरी तरफ कोटक महिंद्रा बैंक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, बजाज फिनसर्व और पावर ग्रिड के शेयर नुकसान में रहे। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.82 प्रतिशत के नुकसान के साथ 71.53 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार को 1,355.33 करोड़ रुपए के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, वैश्विक संकेतकों के मिले-जुले रुख के बावजूद घरेलू शेयर बाजारों में सकारात्मक रुख के साथ कारोबार हुआ, जिसमें कच्चे तेल की स्थिर कीमतों से समर्थन मिला।
कच्चे तेल में नरमी से मुद्रास्फीति, चालू खाते का संतुलन, पेट्रोलियम विपणन कंपनियों की लाभप्रदता और समग्र व्यापक आर्थिक स्थिरता को समर्थन मिलेगा। नायर ने कहा कि वैश्विक स्तर पर कृत्रिम मेधा (एआई) से जुड़े शेयरों में मुनाफावसूली का असर बाजारों पर दिखा, लेकिन विदेशी निवेश प्रवाह में सुधार से भारत का प्रदर्शन खासकर बड़ी कंपनियों के शेयरों में बेहतर रह सकता है।
एशिया के अन्य बाजारों में हांगकांग का हैंगसेंग बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की 225 और चीन के शंघाई कम्पोजिट में गिरावट आई। यूरोप के बाजार दोपहर के सत्र में मिले-जुले रुख के साथ कारोबार कर रहे थे। अमेरिकी शेयर बाजार शुक्रवार को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बंद रहे थे। शुक्रवार को सेंसेक्स 261.79 अंक बढ़कर 77,763.91 अंक पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 95.15 अंक चढ़कर 24,270.85 अंक पर रहा था।
एबीएन बिजनेस डेस्क। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और आईटी-प्राइवेट बैंकिंग स्टॉक्स में तेजी के दम पर घरेलू स्टॉक मार्केट में आज शानदार तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स 790.54 अंक उछल कर 76,991.22 और निफ्टी 197.55 अंक की तेजी के साथ 24,021.65 पर बंद हुआ।
एबीएन बिजनेस डेस्क। अगर आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं तो आपके लिए यह खबर बेहद जरूरी है। आने वाले सप्ताह में शेयर बाजार में लॉन्ग वीकेंड रहने वाला है। 25 जून को कारोबारी दिन के बाद शेयर बाजार 29 जून को ओपन होगा। शुक्रवार, 26 जून को मुहर्रम के अवसर पर शेयर बाजारों में छुट्टी रहने वाली है।
मुहर्रम के अवसर पर देश के दोनों प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज बीएसई और एनएसई में अधिकांश सेगमेंट्स में कारोबार बंद रहेगा। 27, 28 जून को शनिवार, रविवार होने के कारण शेयर बाजार बंद रहते हैं। वैसे तो शेयर बाजार में हर शनिवार और रविवार को छुट्टी रहती है लेकिन इसके अलावा कुछ दूसरे खास मौकों और सार्वजनिक अवकाशों पर भी मार्केट बंद रहता है।
बीएसई पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, 26 जून को इक्विटी सेगमेंट, इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट, करेंसी डेरिवेटिव्स सेगमेंट्स, एनडीएस-आरएसटी ट्राई पार्टी रेपो सेगमेंट्स के लिए ट्रेडिंग नहीं होगी। हालांकि कमोडिटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीप्ट्स में शाम का सेशन ओपन रहने वाला है। बीएसई में भी स्थिति लगभग समान रहेगी।
एक्सचेंज पर इक्विटी, इक्विटी डेरिवेटिव्स, करेंसी डेरिवेटिव्स, कॉरपोरेट बॉन्ड्स, म्यूचुअल फंड्स, सिक्योरिटी लेंडिंग एंड बॉरोइंग, इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीप्ट्स और अन्य प्रमुख सेगमेंट्स में कारोबार बंद रहेगा। हालांकि, कमोडिटी डेरिवेटिव्स में शाम के सत्र के दौरान ट्रेडिंग जारी रहेगी।
एबीएन बिजनेस डेस्क। भारतीय शेयर बाजार में आज बड़ी गिरावट देखने को मिली। अमेरिकी बाजार में एक्सेंचर (Accenture) के रेवेन्यू अनुमान घटाने और उसका शेयर 19% टूटने के बाद घरेलू आईटी शेयरों में दबाव देखने को मिला।
इसके चलते Nifty IT इंडेक्स करीब 6% तक गिर गया। वहीं, दिग्गज कंपनी इंफोसिस (Infosys) का शेयर 8.3% और टीसीएस (TCS) 6.5% से ज्यादा टूट गया। एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, विप्रो और अन्य आईटी स्टॉक्स भी 4% से 7% तक टूट गए। इससे निवेशकों की वेल्थ में 1.35 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि Accenture की कमजोर टिप्पणी ने वैश्विक स्तर पर आईटी सेवाओं की मांग में सुस्ती की आशंका को बढ़ा दिया है। चूंकि भारतीय आईटी कंपनियों की बड़ी कमाई उत्तरी अमेरिका से आती है, इसलिए इस सेक्टर पर सीधा असर पड़ा है।
यह गिरावट सिर्फ शेयर बाजार के आंकड़ों तक सीमित नहीं रही, बल्कि आईटी और टेक सेक्टर में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों के बीच नौकरी सुरक्षा, वेतन वृद्धि और बोनस को लेकर चिंता भी बढ़ गई है। भारत के आईटी सेक्टर में 50 लाख से अधिक लोग कार्यरत हैं।
एबीएन बिजनेस डेस्क। सेंसेक्स और निफ्टी ने वीरवार को कमजोर शुरुआत की, हालांकि भू-राजनीतिक मोर्चे पर सकारात्मक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के चलते वे जल्द वापसी कर बढ़त में कारोबार करने लगे। बीएसई सेंसेक्स शुरूआती कारोबार में 111.23 अंक टूटकर 77,044.39 अंक पर जबकि एनएसई निफ्टी 26.85 अंक फिसलकर 24,058.85 अंक पर पहुंच गया।
हालांकि बाद में दोनों सूचकांकों ने शुरूआती नुकसान की भरपाई कर ली और बढ़त में कारोबार करने लगे। बीएसई सेंसेक्स 108.95 अंक चढ़कर 77,264.57 अंक पर जबकि निफ्टी 44.25 अंक की बढ़त के साथ 24,132.60 अंक पर कारोबार कर रहा था।
सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में से इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, रिलायंस इंडस्ट्रीज और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर सबसे अधिक नुकसान में रहे। वहीं ट्रेंट, भारत लेक्ट्रॉनिक्स, एचडीएफसी बैंक और लार्सन एंड टुब्रो के शेयर बढ़त में रहे। सेंसेक्स पिछले चार कारोबारी सत्रों में 3,323.07 अंक यानी 4.50 प्रतिशत जबकि निफ्टी 924.1 अंक यानी 3.98 प्रतिशत चढ़ा है।
एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी और जापान का निक्की 225 बढ़त में रहे जबकि चीन का एसएसई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग गिरावट में रहे। अमेरिकी बाजार बुधवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 1.66 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78.23 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा।
शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बुधवार को शुद्ध लिवाल रहे थे और उन्होंने 101.59 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। सेंसेक्स बुधवार को 347.14 अंक और निफ्टी 96.55 अंक की बढ़त के साथ बंद हुआ था।
एबीएन बिजनेस डेस्क। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी के बीच भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स करीब 1300 प्वाइंट्स उछल पड़ा तो निफ्टी भी 24000 के पार पहुंच गया।
कारोबार के अंत में सेंसेक्स 736.38 अंक की तेजी के साथ 76,264.33 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 231 अंक की बढ़त रही, ये 23,853.90 पर बंद हुआ।
एबीएन बिजनेस डेस्क। खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों में वृद्धि से देश में खुदरा महंगाई दर बढ़कर मई महीने में 3.93% पर पहुंच गयी है। महंगाई में तेजी के बावजूद यह लगातार 16वें महीने में आरबीआई की सीमा 4% से नीचे बनी रही। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं। देश में महंगाई ने एक बार फिर आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ाया है। मई महीने में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.93 फीसदी हो गयी है।
यह पिछले महीने अप्रैल की 3.48 फीसदी से अधिक है। मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि इसका कारण बनी है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खाद्य महंगाई मई में 4.78 फीसदी रही। अप्रैल में यह 4.2 फीसदी थी। यह वृद्धि सीधे तौर पर रसोई के बजट को प्रभावित कर रही है।
शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को अधिक खर्च करना पड़ रहा है। खासकर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर इसका अधिक असर दिख रहा है। महंगाई का यह आंकड़ा भारतीय रिजर्व बैंक के लक्ष्य के करीब पहुंच रहा है।
सरकार ने रिजर्व बैंक को महंगाई को चार फीसदी पर रखने का लक्ष्य दिया है। इसमें दो फीसदी ऊपर या नीचे का मार्जिन भी शामिल है। यह लक्ष्य अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनाये रखने के लिए महत्वपूर्ण है। बढ़ती महंगाई से आर्थिक विकास पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
कीमती धातु के आभूषण, टमाटर और अदरक उन पांच वस्तुओं में शामिल हैं। किशमिश और मुनक्का भी अधिक महंगाई वाली वस्तुओं की सूची में हैं। इन वस्तुओं की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है। यह सीधे तौर पर उपभोक्ताओं के खर्च को बढ़ा रहा है। विशेष रूप से टमाटर और अदरक जैसी रोजमर्रा की सब्जियों की कीमतों में वृद्धि चिंताजनक है। इससे दैनिक जीवन की लागत बढ़ गयी है।
दूसरी ओर, कुछ वस्तुओं की कीमतों में कम वृद्धि देखी गयी। आलू, मटर, मोटर कार और जीप की महंगाई कम रही। जीरा और मोटरसाइकिल तथा स्कूटर भी कम महंगाई वाली शीर्ष पांच वस्तुओं में शामिल थे। यह आंकड़ा अखिल भारतीय स्तर पर संयुक्त रूप से दर्ज किया गया है। यह दर्शाता है कि कुछ क्षेत्रों में कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई हैं।
एबीएन बिजनेस डेस्क। दक्षिण कोरिया की इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एलजी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) ल्यू जे-चोल ने कहा कि कंपनी भारत सहित तीन उच्च संभावनाओं वाले ग्लोबल साउथ बाजारों से अपना कुल राजस्व साल 2030 तक दोगुना करने की योजना बना रही है।
उन्होंने कहा कि भारत में मजबूत वृहद आर्थिक वृद्धि, ब्रांड के प्रति उपभोक्ताओं की पसंद तथा रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन और एयर कंडीशनर जैसी प्रमुख श्रेणियों में घरेलू उपकरणों की अपेक्षाकृत कम पहुंच के कारण बड़े अवसर मौजूद हैं।
एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के सीईओ ने कहा कि भारत, सऊदी अरब और ब्राजील कंपनी की दीर्घकालिक वृद्धि की रणनीति के केंद्र में हैं। कंपनी का लक्ष्य 2030 तक इन तीनों बाजारों से संयुक्त राजस्व को दोगुना करना है और इसके लिए वह इन उच्च संभावनाओं वाले बाजारों में अपने कारोबार का तेजी से विस्तार कर रही है।
जे-चोल ने कहा, 2025 में इन क्षेत्रों से हमारा संयुक्त राजस्व 6.2 लाख करोड़ कोरियाई वॉन रहा, जो 2023 की तुलना में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाता है। यह कंपनी की वैश्विक वृद्धि से दोगुना से भी अधिक है।
एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स का 2025 में एकीकृत राजस्व 89.2 लाख करोड़ कोरियाई वॉन रहा। उन्होंने कहा कि भारत जैसे प्रमुख उभरते बाजारों में तेज वृद्धि केवल कारोबार का विस्तार नहीं, बल्कि दक्षिण कोरिया, उत्तरी अमेरिका और यूरोप में कंपनी की मजबूत उपस्थिति के पूरक के रूप में संतुलित और मजबूत क्षेत्रीय पोर्टफोलियो तैयार करने की रणनीति का हिस्सा है।
कंपनी की ग्लोबल साउथ रणनीति के तहत अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के जरिये उत्पाद नेतृत्व को मजबूत करने तथा सह-विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला के अनुकूलन के माध्यम से लागत प्रतिस्पर्धा बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
कंपनी की मध्यम से दीर्घावधि की रणनीति के बारे में विस्तार से बताते हुए, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स की निवेशक संबंध (आईआर) संचार टीम के प्रमुख एयरोन किम ने कहा कि कंपनी अपने मुख्य कारोबार को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है, जिसमें घरेलू उपकरण, वाहन तथा मीडिया एवं मनोरंजन समाधान शामिल हैं।
भारत में योजनाओं के बारे में किम ने कहा कि कंपनी यहां अपनी उत्पादन क्षमता दोगुनी करेगी और अतिरिक्त क्षमता का उपयोग निर्यात बढ़ाने के लिए किया जायेगा। वर्तमान में एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के कुल राजस्व में निर्यात की हिस्सेदारी छह से सात प्रतिशत है और कंपनी एशिया तथा अफ्रीका के बाजारों को सेवाएं दे रही है।
कंपनी दोहरे बाजार और दोहरे खंड वाले निर्यात मॉडल पर काम कर रही है, जिसके तहत विकसित देशों को प्रीमियम उत्पाद तथा उभरते बाजारों को भारत में डिजाइन किये गये एसेंशियल सीरीज उत्पाद भेजे जायेंगे।
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