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Published / 2026-08-09 20:04:30
रांची : 700 महिलाओं ने मनाया जीण माता का सावन सिंधारा उत्सव

  • आज म्हारी माताजी फुटरा में प्यारी लागे भजन से गूंजा मारवाड़ी भवन
  • 700 महिलाओं ने मनाया जीण माता का सावन सिंधारा उत्सव

एबीएन सोशल डेस्क। श्री जीण माता प्रचार समिति, रांची के तत्वावधान में दुर्गा स्वरूपा आदि शक्ति श्री जीण माता का पावन सावन सिंधारा उत्सव रविवार, 9 अगस्त को हरमू रोड स्थित मारवाड़ी भवन परिसर में श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लास के साथ मनाया गया। विशेष रूप से महिला भक्तों के लिए आयोजित इस धार्मिक एवं भक्ति कार्यक्रम में लगभग 700 महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरे कार्यक्रम के दौरान परिसर माता के जयकारों एवं भजनों से भक्तिमय बना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ अपराह्न तीन बजे विधिवत रूप से भगवान श्री गणेश के आवाह्न एवं पूजन के साथ हुआ। इसके पश्चात उत्सव के मुख्य संयोजक विजय पालडीवाल एवं परिवार द्वारा विधि-विधान से श्री जीण माताजी की पावन ज्योत प्रज्ज्वलित की गई। ज्योत प्रज्ज्वलन के साथ ही पूरे परिसर में भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो गया तथा श्रद्धालु महिलाओं ने माता के जयकारे लगाए।

इसके बाद आयोजित भव्य भजन संध्या में गुजरात से पधारी सुप्रसिद्ध भजन गायिका दीदी आशा वैष्णव ने अपनी मधुर एवं भावपूर्ण वाणी से श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। उनके लोकप्रिय भजन “आज म्हारी माताजी फुटरा में प्यारी लागे” ने ऐसा भक्तिमय वातावरण बनाया कि पूरा मारवाड़ी भवन परिसर तालियों और जयकारों से गूंज उठा। 

भजन गायिका आशा वैष्णव का साथ पुरुलिया से पधारी दीदी शीतल कटारुका ने दिया। दोनों भजन गायिकाओं की शानदार प्रस्तुति पर महिलाएं भाव-विभोर होकर भक्ति में झूमती नजर आईं।उत्सव के दौरान श्री जीण माता के विभिन्न स्वरूपों पर आधारित मनमोहक झांकियों की प्रस्तुति भी की गई। 

इनमें माता का चौसठ योगिनी स्वरूप विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। झांकी की भव्यता और आध्यात्मिक भाव ने उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। इस अवसर पर माता को सुंदर चुनरी, गजरा एवं मेहंदी अर्पित कर विधिवत श्रृंगार किया गया। 

श्रद्धालुओं ने माता के समक्ष सुख-समृद्धि एवं परिवार की मंगलकामना के साथ श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की।लगातार कई घंटों तक चले भजन, कीर्तन एवं धार्मिक प्रस्तुतियों के बाद रात्रि आठ बजे पंडित रवि शास्त्री द्वारा विधिवत महाआरती की गई। महाआरती के दौरान पूरा परिसर “जय माता दी” के जयघोष से गूंज उठा। 

इसी के साथ भजन संध्या एवं सावन सिंधारा उत्सव का भक्तिमय समापन हुआ। कार्यक्रम को सफल बनाने में समिति के अध्यक्ष ओम प्रकाश अग्रवाल, उपाध्यक्ष विजय पालडीवाल, सचिव नारायण विजयवर्गीय, कोषाध्यक्ष बजरंग सोमानी, सह सचिव प्रदीप शर्मा सहित समिति के सभीपदाधिकारियों एवं सदस्यों का विशेष योगदान रहा। 

आयोजन की सफलता में संदीप शर्मा, रमेश सोमानी, विनोद अग्रवाल, सविता शर्मा, सुनीता मित्तल, कविता सोमानी, एकता शर्मा, नेहा शर्मा, शीतल अग्रवाल, नेहा सिंघानिया, संगीता अग्रवाल, निधि विजयवर्गीय, ऋतु शर्मा सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई।

समिति की ओर से आयोजित यह सावन सिंधारा उत्सव महिला शक्ति, धार्मिक आस्था और सामूहिक भक्ति का सुंदर संगम बनकर सामने आया। उत्सव ने उपस्थित सभी श्रद्धालुओं के मन में माता के प्रति श्रद्धा और भक्ति को और अधिक प्रगाढ़ किया। उक्त जानकारी श्री जीण माता प्रचार समिति के सचिव नारायण विजयवर्गीय ने दी।

Published / 2026-08-09 20:00:07
रांची में श्रीकृष्ण बीतक कथा महोत्सव का भक्तिमय समापन

  • श्रीकृष्ण बीतक कथा महोत्सव का भक्तिमय समापन
  • उद्धव संवाद से महामती प्राणनाथ-छत्रसाल के आध्यात्मिक मिलन तक गूंजा भक्ति संदेश
  • हजारों श्रद्धालुओं ने महा प्रसाद ग्रहण किया

टीम एबीएन, रांची। डॉ. संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज जी के पावन सानिध्य में एम.आर.एस. श्री कृष्ण प्रणामी सेवाधाम ट्रस्ट के तत्वावधान में रांची पुंदाग स्थित श्री कृष्ण प्रणामी मंदिर में आयोजित चार दिवसीय संगीतमय श्रीकृष्ण बीतक कथा महोत्सव का रविवार को श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के वातावरण में भव्य समापन हुआ। चार दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन में भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं, भक्ति, प्रेम, धर्म और सनातन संस्कृति के विभिन्न आध्यात्मिक प्रसंगों का संगीतमय एवं भावपूर्ण वर्णन किया गया।

कथा के अंतिम दिन वृंदावन से पधारीं सुप्रसिद्ध कथा वाचिका परम पूज्य विदुषी साध्वी मीना महाराज एवं विदुषी साध्वी पूर्णा महाराज के श्रीमुख से मधुर भजनों एवं संकीर्तन के साथ कथा का शुभारंभ हुआ। साध्वी मीना महाराज ने अंतिम दिवस के प्रसंगों में उद्धव संवाद, भक्त चरित्र तथा स्वामी महामती प्राणनाथ जी और राजा छत्रसाल के आध्यात्मिक मिलन का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया और इन प्रसंगों के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला।

उद्धव संवाद का वर्णन करते हुए साध्वी मीना महाराज ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने प्रिय सखा उद्धव को ब्रज भेजकर गोपियों एवं ब्रजवासियों को संदेश देने का प्रसंग प्रस्तुत किया। गोपियों की श्रीकृष्ण के प्रति निष्काम एवं अनन्य भक्ति यह संदेश देती है कि सच्ची भक्ति में सांसारिक स्वार्थ नहीं, बल्कि पूर्ण समर्पण और प्रेम सर्वोपरि होता है। उद्धव जैसे ज्ञानी के लिए भी ब्रज की प्रेममयी भक्ति एक महान आध्यात्मिक सीख बनी।

इसके बाद उन्होंने विभिन्न भक्त चरित्रों का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान अपने भक्तों के भाव से प्रसन्न होते हैं। भक्ति में जाति, पद, धन अथवा बाहरी आडंबर का कोई महत्व नहीं है। निर्मल हृदय और पूर्ण समर्पण ही ईश्वर प्राप्ति का सबसे सरल मार्ग है।कथा के विशेष प्रसंग स्वामी महामती प्राणनाथ जी एवं राजा छत्रसाल के आध्यात्मिक मिलन का वर्णन करते हुए साध्वी जी ने कहा कि यह मिलन धर्म, अध्यात्म, राष्ट्रधर्म और लोककल्याण की प्रेरणा देने वाला ऐतिहासिक प्रसंग है।

महामती प्राणनाथ जी की आध्यात्मिक चेतना और राजा छत्रसाल की धर्मनिष्ठा का संगम समाज को सत्य, धर्म, न्याय और मानव कल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। इस प्रसंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को गुरु-शिष्य परंपरा, आध्यात्मिक ज्ञान एवं धर्म के प्रति समर्पण का संदेश मिला।कथा के दौरान प्रस्तुत भजनों एवं संकीर्तन से मंदिर परिसर भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भक्ति संगीत में झूमते नजर आए।

 चार दिवसीय कथा के समापन अवसर पर विधिवत समापन आरती की गई।इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद का आयोजन हुआ। ट्रस्ट की ओर से तैयार वेजिटेबल खिचड़ी भोग, आलू चिप्स हजारों श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद स्वरूप वितरित किया गया। श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक महाप्रसाद ग्रहण किया और आयोजन की सफलता के लिए ट्रस्ट के प्रति आभार व्यक्त किया। 

ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि इस अवसर पर डूंगरमल अग्रवाल, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल छावनिका, विजय अग्रवाल, निर्मल जालान, पूरणमल सर्राफ, संजय सर्राफ, दीपेश निराला, नंदकिशोर चौधरी, मधुसूदन जाजोदिया, सुरेश अग्रवाल, मनीष जालान,विष्णु सोनी, मनीष सोनी, सुरेश भगत, ज्ञान प्रकाश शर्मा, अरविंद पांडे,विधा देवी अग्रवाल, बिमला जालान, संतोष देवी अग्रवाल, शोभा जालान, सरिता अग्रवाल, ललिता अग्रवाल,शकुन्तला केजरीवाल, रमा डोकानिया, उषा मोदी, नन्द रानी पाठक, रेखा पोद्दार, शीला मुरारका, रिंकु जालान, सुनीता अग्रवाल, प्रमिला पुरोहित, सुनीता देवी, आशा सिंह, गीता देवी शर्मा सहित ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारी, सदस्य एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। चार दिवसीय श्रीकृष्ण बीतक कथा महोत्सव ने श्रद्धालुओं के बीच भक्ति, संस्कार, सेवा, समर्पण एवं सनातन आध्यात्मिक मूल्यों का संदेश पहुंचाते हुए एक यादगार धार्मिक आयोजन का रूप लिया।

Published / 2026-08-08 20:25:19
श्रीकृष्ण बीतक कथा के तीसरे दिन कंस वध, मथुरा गमन और द्वारका लीला का हुआ भावपूर्ण वर्णन

कितनी भी शक्तिशाली अधर्म क्यों ना हो, अंतत: सत्य और धर्म की ही विजय होती है: मीणा महाराज 

एबीएन सोशल डेस्क। डॉ. संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज जी के पावन सानिध्य में एमआरएस श्री कृष्ण प्रणामी सेवाधाम ट्रस्ट के तत्वावधान में रांची पुंदाग स्थित श्री कृष्ण प्रणामी मंदिर में आयोजित चार दिवसीय संगीतमय श्रीकृष्ण बीतक कथा महोत्सव के तीसरे दिन श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। 

वृंदावन से पधारी सुप्रसिद्ध कथा वाचिका परम पूज्य विदुषी साध्वी मीना महाराज एवं विदुषी साध्वी पूर्णा महाराज के श्रीमुख से मधुर भजनों एवं संकीर्तन के साथ कथा का शुभारंभ हुआ। भक्ति संगीत की स्वर लहरियों से मंदिर परिसर श्रीकृष्णमय हो उठा और बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालु कथा के आध्यात्मिक प्रसंगों में भाव-विभोर होकर डूबे रहे। 

कथा के तीसरे दिन साध्वी मीना महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों का वर्णन करते हुए कंस वध, मथुरा गमन तथा द्वारका लीला के आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन अधर्म पर धर्म की विजय, अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष और सत्य की स्थापना का दिव्य संदेश देता है। 

कंस वध प्रसंग का वर्णन करते हुए साध्वी जी ने कहा कि मथुरा का राजा कंस अत्याचार और अहंकार का प्रतीक बन चुका था। आकाशवाणी से यह ज्ञात होने के बाद कि देवकी का आठवां पुत्र ही उसके विनाश का कारण बनेगा, कंस ने भय और अहंकार के वशीभूत होकर अनेक अत्याचार किये। भगवान श्रीकृष्ण ने समय आने पर मथुरा पहुंचकर कंस का वध किया और उसके अत्याचार से प्रजा को मुक्ति दिलायी। 

यह प्रसंग संदेश देता है कि कितना भी शक्तिशाली अधर्म क्यों न हो, अंतत: सत्य और धर्म की ही विजय होती है। इसके बाद मथुरा गमन का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का गोकुल और वृंदावन से मथुरा जाना उनके जीवन की महत्वपूर्ण लीला थी। वृंदावन की प्रेममयी लीलाओं के बाद भगवान ने अपने जन्मस्थान मथुरा में अत्याचार का अंत कर धर्म की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया। 

इस प्रसंग में श्रीकृष्ण के प्रति माता यशोदा, नंद बाबा, गोप-गोपियों और ब्रजवासियों के वात्सल्य एवं प्रेम का भी भावपूर्ण वर्णन किया गया।कथा के क्रम में द्वारका लीला का वर्णन करते हुए साध्वी मीना महाराज ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म, नीति, सुशासन और लोककल्याण की स्थापना के लिए द्वारका नगरी को अपनी कर्मभूमि बनाया। 

द्वारका लीला भगवान के उस स्वरूप को दर्शाती है, जिसमें वे केवल भक्तों के आराध्य ही नहीं, बल्कि कुशल मार्गदर्शक, नीति-निपुण शासक और लोक कल्याणकारी पुरुषोत्तम के रूप में भी दिखाई देते हैं। कथा के दौरान भजनों एवं संकीर्तन की प्रस्तुति ने वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया। 

श्रद्धालु श्रीकृष्ण की लीलाओं का श्रवण करते हुए भाव-विभोर हो उठे और पूरा मंदिर परिसर राधे-राधे तथा जय श्रीकृष्ण के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालुओं ने सामूहिक आरती की एवं प्रसाद ग्रहण किया। ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि रविवार को कथा के अंतिम दिन उद्धव संवाद, भक्त चरित्र,  समापन महाआरती एवं महाप्रसाद का आयोजन किया गया है।

मौके पर ट्रस्ट के अध्यक्ष डूंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, पुजारी अरविंद पांडे, सुरेश अग्रवाल, ज्ञान प्रकाश शर्मा, संजय सर्राफ, विधा देवी अग्रवाल, बिमला जालान, संतोष देवी अग्रवाल, शोभा जालान, सरिता अग्रवाल, ललिता अग्रवाल, शकुंतला केजरीवाल, रमा डोकानियां, उषा मोदी, नंद रानी पाठक, रेखा पोद्दार, शीला मुरारका, रिंकु जालान, सुनीता अग्रवाल, प्रमिला पुरोहित, सुनीता देवी, आशा सिंह, गीता देवी शर्मा सहित ट्रस्ट के अन्य सदस्य एवं श्रद्धालुगण उपस्थित थे।

Published / 2026-08-07 22:04:33
श्रीकृष्ण बीतक कथा के दूसरे दिन गोवर्धन लीला और रासलीला का हुआ दिव्य वर्णन, भक्तिरस में डूबे श्रद्धालु

रासलीला सांसारिक प्रेम का नहीं, बल्कि जीवात्मा और परमात्मा के दिव्य मिलन का है प्रतीक: मीणा महाराज 

एबीएन सोशल डेस्क। डॉ. संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज जी के पावन सानिध्य में एम.आर.एस. श्री कृष्ण प्रणामी सेवाधाम ट्रस्ट के तत्वावधान में पुंदाग स्थित श्री कृष्ण प्रणामी मंदिर में आयोजित चार दिवसीय संगीतमय श्रीकृष्ण बीतक कथा महोत्सव के दूसरे दिन श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला। वृंदावन से पधारी सुप्रसिद्ध कथा वाचिका परम पूज्य विदुषी साध्वी मीना महाराज एवं विदुषी साध्वी पूर्णा महाराज ने मधुर भजनों, संकीर्तन और मंगलाचरण के साथ कथा का शुभारंभ किया। 

उनकी मधुर वाणी और भक्तिमय प्रस्तुति से पूरा मंदिर परिसर श्रीकृष्णमय हो उठा।कथा के दूसरे दिवस साध्वी मीना महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल एवं किशोर लीलाओं का अत्यंत मार्मिक एवं भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि श्रीकृष्ण की प्रत्येक लीला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मानव जीवन को धर्म, प्रेम, सेवा और समर्पण का मार्ग दिखाने वाली दिव्य प्रेरणा है। 

उन्होंने माखन चोरी लीला का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का माखन चुराना सांसारिक अर्थों में चोरी नहीं, बल्कि भक्तों के निर्मल, निष्कलुष और प्रेममय हृदय को अपनाने का प्रतीक है। जिस प्रकार माखन दूध का सार होता है, उसी प्रकार भगवान अपने भक्तों के प्रेम रूपी सार को स्वीकार करते हैं। यह लीला हमें अहंकार त्यागकर निष्कपट भक्ति का संदेश देती है। 

इसके उपरांत गोवर्धन लीला का वर्णन करते हुए साध्वी जी ने बताया कि जब देवराज इन्द्र अपने अहंकार में ब्रजवासियों पर प्रलयंकारी वर्षा करने लगे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठिका अंगुली पर गोवर्धन पर्वत धारण कर समस्त ब्रजवासियों और गौवंश की रक्षा की। यह लीला सिखाती है कि ईश्वर अपने भक्तों की सदैव रक्षा करते हैं तथा अहंकार का अंत निश्चित है। साथ ही प्रकृति, गौसेवा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी इसी प्रसंग में निहित है।

कथा के अंत में रासलीला का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया। साध्वी मीना महाराज ने कहा कि रासलीला सांसारिक प्रेम का नहीं, बल्कि जीवात्मा और परमात्मा के दिव्य मिलन का प्रतीक है। गोपियों का श्रीकृष्ण के प्रति पूर्ण समर्पण प्रत्येक साधक को निष्काम प्रेम, अटूट श्रद्धा और परम भक्ति का संदेश देता है। कथा के साथ प्रस्तुत मनमोहक जीवंत झांकियों और भक्तिमय भजनों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि श्री कृष्ण कथा के तीसरे दिन कंस वध, मथुरा गमन, तथा द्वारका लीला का भावपूर्ण वर्णन किया जाएगा।

 इस अवसर पर डूंगरमल अग्रवाल, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, पूरणमल सर्राफ, मधुसूदन जाजोदिया, सुरेश अग्रवाल, शिव भगवान अग्रवाल, मनीष जालान, विष्णु सोनी,अरविंद पांडे, मनीष सोनी, अरविंद अग्रवाल पवन पोद्दार, संजय सर्राफ, ज्ञान प्रकाश शर्मा सुरेश भगत, हरीश सोनी, विधा देवी अग्रवाल,बिमला जालान, शोभा जालान, सरिता अग्रवाल ललिता अग्रवाल, शकुन्तला केजरीवाल,रमा डोकानिया, उषा मोदी, नन्द रानी पाठक, रेखा पोद्दार,शिला मुरारका, रिंकु जालान,सुनीता अग्रवाल, प्रमिला पुरोहित, सुनीता देवी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

Published / 2026-08-07 22:03:09
चार-पांच सितंबर को धूमधाम से श्री माहेश्वरी भवन, रांची में मनेगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी

  • श्री माहेश्वरी भवन, रांची में आयोजन समिति की हुई बैठक में निर्णय लिया गया 
  • श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव 4 व 5 सितंबर को 
  • जन्माष्टमी पर दो दिनों तक श्री कृष्ण भक्ति में डूबेगी रांची : संजय सेठ 
  • श्री कृष्ण जन्मोत्सव समिति, रांची के सानिध्य में 16 वर्षो से राजधानी के मुख्यमार्ग पर श्री कृष्ण जन्मोत्सव का आनंद उठा रहे राजधानीवासी 

टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण जन्मोत्सव समिति, रांची के सानिध्य में अलबर्ट एक्का चौक, मेन रोड में 4 व 5 सितंबर को  श्री कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जायेगा । उपरोक्त निर्णय आज माहेश्वरी भवन, रांची के सभागार में आयोजन समिति की उपस्थिति में समिति के संरक्षक अजय मारू की अध्यक्षता में लिया गया। 

वर्तमान में श्री कृष्ण जन्मोत्सव समिति, रांची के संरक्षक माननीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, सी पी सिंह व अजय मारू  है। समिति के संरक्षक अजय मारू, अध्यक्ष मुकेश काबरा  ने कहा कि 4 व 5 सितंबर को श्री कृष्ण जन्मोत्सव  समिति, रांची की ओर से अलबर्ट एक्का चौक, मेन रोड मै श्री कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जायेगा। समिति के द्वारा 16 वर्षों से यह महोत्सव हम मनाते आ रहे हैं। 

प्रथम दिवस 4 सितंबर को संध्या 6 बजे श्री कृष्ण के बाल रूप की  झांकी यानि बाल गोपाल सजाओ प्रतियोगिता  व झांकी प्रतियोगिता का आयोजन रखा गया है। जिसमें 10 वर्ष तक के बच्चे श्री कृष्ण के विभिन्न रूपों के साथ बच्चे, बच्चियां इस प्रतियोगिता में भाग ले सकेंगे। साथ ही द्वितीय दिवस  5 सितंबर को संध्या 7 बजे  से दही-हांडी फोड़ प्रतियोगिता सह भजन संध्या सहित नृत्य नाटिका का भव्य विशाल व आयोजन रखा गया है। 

दही हांडी प्रतियोगिता में पुरुष गोविंदा टीम व महिला गोविंदा टीम भाग ले सकेंगे। जिसका रजिस्ट्रेशन समिति में गोबिंदाओ की टीम को  करवाना अनिवार्य होगा। श्री काबरा ने  बताया प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय, तृतीय व सांत्वना पुरस्कार भी दिया जायेगा। बताते चलें कि दही हांडी  फोड़ो प्रतियोगित में कुछ नियम व शर्ते भी समिति द्वारा रखी गयी है। जिसके तहत बाल गोपाल प्रतियोगिता एवं दही हांडी फोड़ो प्रतियोगिता का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा।

रजिस्ट्रेशन के लिए मेन रोड स्थित केडिया साइकिल में राजेंद्र केडिया एवं स्टेशन रोड, पटेल चौक पतंजलि के बाबा रामदेव के सेंटर में सतीश सिन्हा से प्रतियोगिता के फार्म प्राप्त किये जा सकते हैं। सतीश सिन्हा के मोबाइल नम्बर 9431101328 है। जिस पर संपर्क किया जा सकता है। इस अवसर पर श्री कृष्ण के कई बाल रूप की झांकियों का भी अवलोकन कृष्ण भक्त आयोजन स्थल पर कर सकेंगे। 

संरक्षक अजय मारू व अध्यक्ष मुंकेश काबरा ने  कहा कि अगली बैठक में समिति के अन्य पदों व कार्यो के लिए सदस्यो के नाम देकर समिति का बृहत् विस्तार किया जायेगा। आयोजन को सफल बनाने में काफी संख्या में सदस्य लगे हुए हैं। दूसरी बैठक जल्द ही हमारे  संरक्षक व रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ की अध्यक्षता में होगी। 

आज की बैठक में संरक्षक अजय मारू, अध्यक्ष मुकेश काबरा, रविन्द्र मोदी,राज वर्मा, प्रमोद सारस्वत, संजय जयसवाल, ललित ओझा, विजय ओझा, भीष्म सिंह, शंकर दुबे, नरेंद्र लखोटिया, किशन साबू, रतन अग्रवाल, बबलू चौधरी,सोनू भारद्वाज,ओम प्रकाश शर्मा,सतीश सिन्हा, संतोष सेठ, रामाशंकर बगड़िया, नीरज चौधरी, ललन श्रीवास्तव, राजीव वर्मा, जितेंद सिंह, नीतू सिंह, संजना शर्मा, मनोज तिवारी, अशोक पुरोहित, अमित चौधरी, संजय गोयल, मनीष लोधा, राहुल सिंह चंकी, विकास कुमार, राजीव सिंह, सहित काफी संख्या में लोग उपस्थित थे। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी प्रमोद सारस्वत ने दी।

Published / 2026-08-06 20:12:01
बीतक कथा महोत्सव में श्रद्धालुओं ने किया श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की दिव्य लीला का दर्शन

श्री कृष्ण प्रणामी मंदिर में चार दिवसीय संगीतमय श्रीकृष्ण बीतक कथा महोत्सव का हुआ शुभारंभ 

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की दिव्य लीलाओं से भाव-विभोर हुए श्रद्धालु 

एबीएन सोशल डेस्क। एमआरएस श्री कृष्ण प्रणामी सेवाधाम ट्रस्ट के तत्वावधान में रांची पुंदाग स्थित श्री कृष्ण प्रणामी मंदिर में आयोजित चार दिवसीय संगीतमय श्रीकृष्ण बीतक कथा महोत्सव का गुरुवार को श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ भव्य शुभारंभ हुआ। यह दिव्य आयोजन ट्रस्ट के संस्थापक डॉ संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज जी के पावन सान्निध्य में प्रारंभ हुआ। 

कथा का वाचन वृंदावन से पधारी सुप्रसिद्ध कथा वाचिका परम पूज्य विदुषी साध्वी मीना महाराज एवं विदुषी साध्वी पूर्णा महाराज के श्रीमुख से प्रारंभ हुआ, जिनकी मधुर वाणी, संगीतमय प्रस्तुति और आध्यात्मिक भावधारा ने श्रद्धालुओं को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के अध्यक्ष डूंगरमल अग्रवाल ने दोनों पूज्य कथा वाचिकाओं को अंगवस्त्र ओढ़ाकर एवं पुष्प अर्पित कर सम्मानित करने के साथ किया। 

उन्होंने कहा कि चार दिवसीय श्रीकृष्ण बीतक कथा के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य जीवन, उनकी अलौकिक लीलाओं, धर्म, प्रेम, करुणा तथा सनातन संस्कृति के महान आदर्शों का भावपूर्ण एवं संगीतमय वर्णन किया जायेगा। उन्होंने कहा कि ऐसी कथाएं समाज में आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति के प्रति आस्था को सुदृढ़ करने का कार्य करती हैं। 

कथा के प्रथम दिवस परम पूज्य साध्वी मीना महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव, उनके दिव्य बाल स्वरूप तथा गोकुल और वृंदावन की मनोहारी बाल लीलाओं का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान प्रस्तुत भक्तिमय भजन, संकीर्तन एवं श्रीकृष्ण की जीवंत झांकियों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। पूरा मंदिर परिसर राधे-राधे और जय श्रीकृष्ण के जयघोष से गुंजायमान हो उठा तथा वातावरण पूर्णत: भक्तिमय बन गया। 

ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि यह संगीतमय श्रीकृष्ण बीतक कथा महोत्सव 6 से 9 अगस्त तक प्रतिदिन अपराह्न 2:30 बजे से सायं 5 बजे तक आयोजित होगा। उन्होंने रांची एवं आसपास के सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर कथा श्रवण करने तथा इस आध्यात्मिक महोत्सव का पुण्य लाभ प्राप्त करने की अपील की। 

इस अवसर पर डुंगरमल अग्रवाल, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, बिष्णु सोनी, ज्ञान चंद्र शर्मा, संजय सर्राफ, विधा देवी अग्रवाल, बिमला जालान, शोभा जालान, सरिता अग्रवाल, ललिता अग्रवाल, शकुंतला केजरीवाल, रमा डोकानिया, उषा मोदी, नंद रानी पाठक, रेखा पोद्दार, शिला मुरारका, रिंकु जालान, सुनीता अग्रवाल सहित ट्रस्ट के अनेक सदस्य एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

Published / 2026-08-04 21:53:14
रांची : चार दिवसीय संगीतमय श्री कृष्ण बीतक कथा 6 से

एबीएन सोशल डेस्क। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर पुंदाग रांची मे परमहंस डॉ० संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज के सानिध्य में 6 अगस्त से 9 अगस्त तक मंदिर परिसर में चार दिवसीय संगीतमय श्रीकृष्ण बीतक कथा (श्री कृष्ण कथा) का भव्य आयोजन किया गया है। जो आध्यात्मिक श्रद्धालुओं के लिए एक अनुपम अवसर होगा। 

ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि श्री कृष्ण बीतक कथा की तैयारीयां पूरी कर ली गयी है। इस आयोजन में वृंदावन से पधार रही सुप्रसिद्ध कथावाचक विदुषी साध्वी मीणा महाराज एवं विदुषी साध्वी पूर्णा महाराज 6 अगस्त बृहस्पतिवार से 9 अगस्त रविवार तक प्रतिदिन समय अपराह्न- 2:30 बजे से संध्या 5 बजे तक दोनों साध्वी माता जी अपनी मधुर वाणी, गहन आध्यात्मिक अनुभव और श्रद्धा से परिपूर्ण भावों के माध्यम से श्रीकृष्ण लीला, रासोत्सव, भक्ति योग एवं जीवन दर्शन की व्याख्या करेंगी। 

श्रीकृष्ण बीतक कथा, केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह आत्मा के शुद्धिकरण, मन की शांति और सामाजिक समरसता का संदेश देने वाला एक महायज्ञ है। इस कथा में भगवान श्रीकृष्ण के बाल्यकाल, युवावस्था, गीता ज्ञान, रासलीला एवं उनके अद्भुत चरित्र की व्याख्या की जाएगी। विशेषकर आज के युग में श्रीकृष्ण के उपदेश, धर्म के प्रति उनका समर्पण और निष्काम कर्म की भावना युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती है। 

कथा के उपरांत प्रतिदिन सामूहिक आरती व प्रसाद वितरण किया जायेगा। श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गयी हैं। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं, भक्तों एवं आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस आध्यात्मिक महोत्सव में सपरिवार पधारकर पुण्य लाभ अर्जित करें और भक्ति रस में सराबोर हों।

Published / 2026-08-04 18:05:21
जैन धर्म के संस्कारों का दीप जला रही है ज्ञानशाला : बछराज जी बेताला

टीम एबीएन, रांची। तेरापंथ सभा, तेरापंथ युवक परिषद, एवं तेरापंथ महिला मंडल, रांची के संयुक्त तत्वावधान में ज्ञानशाला जागरूकता एवं प्रेरणा कार्यक्रम का आयोजन श्रद्धा, उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ नमस्कार महामंत्र के सामूहिक जाप से हुआ। 
कार्यक्रम में ज्ञानशाला उड़ीसा-झारखंड क्षेत्र के आंचलिक प्रभारी बछराज बेतला का सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया। 

अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में उन्होंने कहा कि ज्ञानशाला जैन धर्म के संस्कारों का दीप जला रही है। उन्होंने कहा कि बच्चों में नैतिक मूल्यों, धार्मिक संस्कारों, अनुशासन एवं व्यक्तित्व निर्माण के लिए ज्ञानशाला एक सशक्त माध्यम है। प्रत्येक परिवार को अपने बच्चों को ज्ञानशाला से जोड़ना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ी संस्कारवान एवं चरित्रवान बन सके। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता तेरापंथ सभा, रांची के अध्यक्ष अमरचंद जी बेगानी ने की। उन्होंने अपने संबोधन में ज्ञानशाला के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सभी श्रावक-श्राविकाओं से इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। 

मौके पर तेरापंथ सभा के मंत्री विनोद बेगवानी, तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष पंकज बोहरा, मंत्री ललित सेठिया, तेरापंथ महिला मंडल की अध्यक्ष सरिता दस्सानी, मंत्री पूजा नाहटा, संजय सिंघी, विजय बोथरा, कोमल गेल्डा, आकाश बेगानी, लालचंद बोथरा, बिमल दस्सानी, रूबी बांठिया, सोनू संचेती, नेहा बेगानी, सरिता सिंघी, अर्पिता बेगानी सहित अनेक श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे। 

कार्यक्रम का प्रभावी एवं गरिमापूर्ण संचालन कमलेश संचेती एवं रिद्धि बांठिया ने किया। अंत में सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए ज्ञानशाला के प्रचार-प्रसार एवं अधिकाधिक बच्चों को इससे जोड़ने का संकल्प लिया गया।

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