एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूरोप में इस समय बहुत तेज गर्मी पड़ रही है। कई जगह तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है। ऐसे में गर्म देशों से आने वाले लोगों के मन में एक सवाल उठता है कि यूरोप के इतने सारे घरों, विद्यालयं और यहां तक कि अस्पतालों में भी एयर कंडीशनर (एसी) क्यों नहीं हैं?
वॉल स्ट्रीट जर्नल (डब्ल्यूएसजे) की एक रिपोर्ट में इस बात की पड़ताल की गई है कि यूरोप में लंबे समय से एसी लगाने को क्यों नापसंदगी रही है। इसके पीछे जलवायु (क्लाइमेट) से जुड़े लक्ष्य, पुरानी ऐतिहासिक इमारतों को सुरक्षित रखना, शोर की शिकायतें और शहरों की योजना (अर्बन प्लानिंग) जैसे कई कारण हैं।
अब इस सवाल पर और चर्चा होने लगी है, क्योंकि हाल की भीषण गर्मी ने यूरोप की व्यवस्था पर बहुत दबाव डाल दिया है। सड़कें पिघल गयी हैं, ट्राम की पटरियां टेढ़ी हो गयी हैं, ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुई हैं, बिजली व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है और अस्पतालों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कई देशों में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ी है। इसके बावजूद एसी के यूरोप का संबंध जटिल बना हुआ है।
यूरोप के कई शहरों के योजनाकारों का मानना है कि इमारतों के बाहर लगी एसी की बड़ी-बड़ी मशीनें देखने में अच्छी नहीं लगतीं और ऐतिहासिक इलाकों की सुंदरता खराब कर देती हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, पेरिस की डिप्टी-मेयर आॅद्रे पुलवार ने कहा, हम ऐसा नहीं चाहते कि हमारे शहर कुछ इटली, ब्राजील या अमेरिका के शहरों जैसे दिखें, जहां इमारतों के बाहर एसी की लंबी-लंबी कतारें लगी हों, जो बहुत शोर करती हों और गर्मी व जहरीली गैसें छोड़ती हों।
पेरिस जैसे शहरों में अगर किसी इमारत के बाहर दिखाई देने वाला एसी वहां की प्रसिद्ध पुरानी चूना-पत्थर वाली इमारतों की सुंदरता बिगाड़ता है, तो उसे लगाने की अनुमति नहीं मिलती।
यूरोप के कुछ हिस्सों में एसी लगाना केवल घर के मालिक का फैसला नहीं होता। अपार्टमेंट में रहने वाले लोगों को पहले अपने पड़ोसियों की मंजूरी लेनी पड़ सकती है। इसके अलावा, स्थानीय प्रशासन भी निर्माण के नियमों, ऊर्जा बचत के लक्ष्यों या शोर की वजह से दखल दे सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस के कानून में इमारतों की सोसायटी को यह अधिकार है कि अगर एसी तय सीमा से ज्यादा आवाज करता है, तो वे उसका विरोध कर सकते हैं।
यह सीमा लगभग हल्की हवा की आवाज के बराबर है। शोर से जुड़े मामलों के वकील क्रिस्टोफ सैंसन ने बताया कि उनकी कंपनी अब एसी से जुड़े 100 से ज्यादा मामलों को संभाल रही है। उन्होंने कहा, यह ऐसी आवाज है जो कंक्रीट की दीवारों के पार भी सुनाई दे सकती है। यह बहुत तेज होती है और लोगों को काफी परेशान कर सकती है।
32 साल के लूका फुनारो को एक दुर्लभ आनुवंशिक (जेनेटिक) बीमारी है। वह पिछले दो साल से पेरिस के मरे इलाके में अपने अपार्टमेंट की इमारत के आंगन में एसी लगाने की अनुमति लेने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन उनके पड़ोसी बार-बार यह कहकर विरोध कर रहे हैं कि एसी बहुत शोर करेगा।
यूरोप लंबे समय से एसी को ऐसी मशीन मानता रहा है, जो बहुत ज्यादा बिजली खर्च करती है और जलवायु संबंधी लक्ष्यों को नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए वहां की सरकारों ने बेहतर इन्सुलेशन (दीवारों और छतों को ऐसा बनाना जिससे गर्मी कम आए), प्राकृतिक हवा, खिड़कियों पर शटर, ज्यादा पेड़ लगाने और शहरों को हराभरा बनाने जैसे उपायों को बढ़ावा दिया।
लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (आईपीसीसी) का मानना है कि भीषण गर्मी के समय लोगों की सुरक्षा के लिए एसी सबसे प्रभावी उपायों में से एक है। वहीं, शहरों में हरियाली बढ़ाने या केवल वेंटिलेशन जैसी व्यवस्थाओं को लंबे समय तक चलने वाली गर्मी में कम प्रभावी माना गया है।
आॅक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की जलवायु वैज्ञानिक राधिका खोसला ने कहा कि देशों को बेहतर इमारतों की डिजाइन और एसी दोनों का इस्तेमाल करना चाहिए, केवल किसी एक पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा, एसी का इस्तेमाल वहीं करना चाहिए, जहां उसकी सच में जरूरत हो। इसे हर समस्या का पहला समाधान नहीं बनाना चाहिए।
फ्रांस की जलवायु मंत्री मोनिक बारबू ने भी कहा कि हर जगह एसी लगाना संभव नहीं है। उन्होंने कहा, जो लोग कहते हैं कि हर जगह एसी लगा दो, यह सुनकर मुझे हैरानी होती है। क्या आपको लगता है कि इससे जंगलों में लगने वाली आग रुक जायेगी? क्या इससे फसलें सूखने से बच जायेंगी?
यूरोप की ज्यादातर सड़कें, इमारतें और दूसरी व्यवस्थाएं उस समय बनायी गयी थीं, जब वहां 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर का तापमान बहुत कम होता था। रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस में केवल करीब 25 प्रतिशत घरों में एसी है, जबकि ब्रिटेन में यह संख्या केवल पांच प्रतिशत है। वहीं, इटली में लगभग 56 प्रतिशत घरों में एसी है।
हाल की भीषण गर्मी के दौरान हजारों विद्यालय बंद करने पड़े, कई कारोबारों ने अपना काम कम कर दिया और रेल सेवाएं प्रभावित हुईं। आईएनजी (आईएनजी) के अर्थशास्त्रियों ने कहा कि इन हालात ने उन्हें कोविड महामारी के लॉकडाउन की याद दिला दी। पिछले हफ्ते पेरिस में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया।
19वीं सदी से पेरिस में तापमान का आधिकारिक रिकॉर्ड रखा जा रहा है। तब से लेकर अब तक केवल चार बार ही तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचा है। आॅद्रे पुलवार ने कहा, हम हमेशा सोचते थे कि ऐसी स्थिति शायद 2030 के बाद आयेगी। लेकिन अब हमें समझ आ गया है कि हम तो पहले ही उस दौर में पहुंच चुके हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य में शनिवार को एक वाणिज्यिक टैंकर पर हमला हुआ। यह घटना ऐसे समय हुई है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखायी दे रहा है। ब्रिटेन की सेना के यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड आॅपरेशंस ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि हमले में जहाज के सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं और पर्यावरण को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचा है।
हालांकि, हमले की प्रकृति, इस्तेमाल किए गए हथियार और टैंकर को हुई क्षति के बारे में तत्काल विस्तृत जानकारी जारी नहीं की गयी है। समाचार लिखे जाने तक किसी संगठन या देश ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि घटना के पीछे कौन था। बहरीन के आरोप के बीच हुई घटना।
यह हमला ऐसे समय हुआ है जब खाड़ी देश बहरीन ने आरोप लगाया है कि ईरान ने उसे निशाना बनाकर कई ड्रोन भेजे। ईरान ने इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। इससे पहले बृहस्पतिवार को भी ओमान तट के पास, फारस की खाड़ी से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे एक जहाज पर हमला हुआ था।
विभिन्न रिपोर्टों में उस घटना के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराने के आरोप लगाये गये थे, हालांकि उन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और ईरान की ओर से आधिकारिक स्वीकारोक्ति भी सामने नहीं आयी। बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे रणनीतिक समुद्री मार्गों में गिना जाता है। दुनिया के समुद्री मार्ग से होने वाले कच्चे तेल के बड़े हिस्से का परिवहन इसी रास्ते से होता है।
सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर, इराक और ईरान के तेल और गैस निर्यात के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सैन्य या सुरक्षा घटना का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के उद्देश्य से अंतरिम समझ की खबरें आयी थीं और दोनों पक्ष व्यापक समझौते की दिशा में बातचीत की इच्छा जता चुके हैं। हालांकि, समुद्री हमलों और क्षेत्रीय सुरक्षा घटनाओं से यह संकेत मिलता है कि पश्चिम एशिया में हालात अब भी पूरी तरह स्थिर नहीं हुए हैं और किसी भी नई घटना से तनाव फिर बढ़ सकता है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कश्मीर के कई इलाकों में भूकंप के झटके महसूस किये गये हैं। बताया जा रहा है कि भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान में था। कश्मीर के अलावा अफगानिस्तान में भी लोगों ने भूकंप के झटके महसूस किये, जिसकी तीव्रता 6.2 बतायी जा रही है।
चंडीगढ़ में भी शनिवार शाम को भूकंप के झटके महसूस किये गये। इसके चलते कई इलाकों के निवासी एहतियात के तौर पर अपने घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आये। हालांकि तत्काल किसी के हताहत होने या संपत्ति को नुकसान पहुंचने की कोई खबर नहीं है।
चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा के साथ ही हिमाचल प्रदेश में भी भूकंप के झटके महसूस किये गये।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। वेनेजुएला की राजधानी कराकास में कुछ ही सेकंड के अंतराल पर दो बड़े भूकंप आये। पहला भूकंप 7.2 तीव्रता का था, जबकि दूसरा 7.5 तीव्रता का था। इस भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़कर 164 हो गयी है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स और एएफपी के अनुसार, वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रॉड्रिगेज ने कहा है कि बुधवार रात देश में आये भूकंप से मरने वालों की संख्या अब 164 हो गयी है।
इस हादसे में अब तक करीब एक हजार लोगों से घायल होने की भी सूचना है। हालांकि भूकंप से इससे कहीं भारी जनहानि और व्यापक तबाही की आशंका जतायी जा रही है। यूनाइटेड स्टेट्स जीयोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, इस बात की 44% आशंका है कि मृतकों की संख्या 10 हजार से ज्यादा हो सकती है। वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रॉड्रिगेज ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए आपातकाल की घोषणा कर दी है।
वेनेजुएला में बिजली कटौती की समस्या काफी आम है और भूकंप के बाद प्रभावित इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी पर भी असर पड़ा है, इसलिए भूकंप से प्रभावित लोगों और इसके असर की जानकारी मिलने में भी काफी परेशानी हो रही है। बुधवार शाम एक मिनट से भी कम समय के अंतराल में दो शक्तिशाली भूकंप आये।
पहला भूकंप 7.2 तीव्रता का था, जिसका केंद्र याराकुई राज्य के सैन फेलिपे में था। इसके सिर्फ 39 सेकंड बाद दूसरा और अधिक शक्तिशाली भूकंप आया, जिसकी तीव्रता 7.5 दर्ज की गयी। कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रॉड्रिगेज ने अब तक 164 लोगों की मौत की पुष्टि की है। आशंका है कि दूसरे बड़े भूकंप के बाद मृतकों की संख्या 10,000 से अधिक हो सकती है।
राजधानी काराकास में भी तेज झटके महसूस किये गये, जहां कई इमारतें गिर गयी हैं, पेट्रोल की आपूर्ति बाधित हो गयी है और मलबे के नीचे फंसे लोगों को बचाने की कोशिश जारी है। गृह मंत्री ने लोगों से अपने घर तुरंत खाली करने की अपील की है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूरोप इस समय रिकॉर्डतोड़ गर्मी की चपेट में है। फ्रांस के दक्षिणी शहर कारपेंट्रास में सोमवार को दो और चार साल के दो बच्चों के शव एक कार से बरामद किये गये। प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि अत्यधिक गर्मी उनकी मौत की सबसे संभावित वजह है। जांचकर्ताओं के अनुसार, बच्चों के शव एक आवासीय पार्किंग क्षेत्र में खड़ी पारिवारिक कार के अंदर मिले।
बताया जाता है कि मां को मालूम नहीं था कि उनके बच्चे कार में चुपके से चढ़ गये हैं। मां कार से उतरकर घर के अंदर चली गयी और उसे लॉक कर दिया। बाद में जब खोजबीन शुरू हुई तो दोनों बच्चे कार के अंदर मृत मिले। घटना ने पूरे फ्रांस को झकझोर दिया है और हीटवेव के खतरों को लेकर नयी चिंता पैदा कर दी है।
मौसम एजेंसी मीटियो फ्रांस के अनुसार, फ्रांस का औसत तापमान जून महीने के लिए अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। देश में दिन और रात का औसत तापमान 29.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पिछले रिकॉर्ड से अधिक है। कई इलाकों में तापमान 40 से 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए फ्रांस में 1,350 से अधिक स्कूल बंद कर दिए गए हैं, जबकि लगभग 3.9 करोड़ लोग रेड अलर्ट वाले क्षेत्रों में रह रहे हैं।
फ्रांसीसी सरकार ने लोगों को नदियों और झीलों जैसे असुरक्षित जल स्रोतों में तैरने से बचने की चेतावनी दी है। सप्ताहांत में देशभर में डूबने से 13 लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक 13 वर्षीय लड़की भी शामिल थी। उधर, जर्मनी में भी सप्ताहांत के दौरान तैराकी दुर्घटनाओं में पांच लोगों की मौत की खबर है। ब्रिटेन की मौसम एजेंसी मेट आफिस ने अत्यधिक गर्मी को लेकर दुर्लभ रेड वार्निंग जारी की है।
यह एजेंसी का सबसे उच्च स्तर का चेतावनी अलर्ट है, जो जीवन और बुनियादी ढांचे के लिए गंभीर खतरे का संकेत देता है। ब्रिटेन में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना जतायी गयी है। कई स्कूलों ने समय से पहले छुट्टी देने का फैसला किया है, जबकि रेल सेवाओं पर भी असर पड़ा है।
फ्रांस की राजधानी पेरिस में कई अभिभावकों ने शिकायत की है कि स्कूलों के कक्षाओं में तापमान असहनीय हो गया है। एक अभिभावक ने बताया कि अत्यधिक गर्मी के कारण कई बच्चों को उल्टी और चक्कर आने जैसी समस्याएं हुईं, जिसके बाद आपातकालीन सेवाओं को बुलाना पड़ा। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ रही हीटवेव क्लाईमेट चेंज का स्पष्ट संकेत है।
वैज्ञानिकों के अनुसार भविष्य में ऐसी गर्मी की लहरें और अधिक बार, अधिक लंबी अवधि तक तथा अधिक तीव्रता के साथ देखने को मिल सकती हैं। यूरोप के कई देशों में प्रशासन लोगों से घरों में रहने, पर्याप्त पानी पीने और बुजुर्गों व बच्चों का विशेष ध्यान रखने की अपील कर रहा है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। चीन का किंगहाई प्रांत मंगलवार को तेज भूकंप के झटकों से दहल उठा। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 6.3 मापी गयी है। इस शक्तिशाली झटके के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। लोग डर के मारे अपने घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आये। भूकंप का केंद्र हैक्सी प्रांत में था। चीनी प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव दल को अलर्ट मोड पर डाल दिया है।
स्थानीय आपदा प्रबंधन और चीनी मीडिया के हवाले से बेहद चौंकाने वाले आंकड़े सामने आ रहे हैं। चीनी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, महज 40 मिनट के भीतर इलाके में करीब आठ बार भूकंप के तेज झटके महसूस किये गये। बार-बार हिलती धरती के कारण राहत और बचाव कार्य में जुटे कर्मियों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोग लगातार हो रहे इन आफ्टरशॉक्स के कारण खौफ में हैं और खुले आसमान के नीचे वक्त बिता रहे हैं। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, हैक्सी प्रान्त में आये इस शक्तिशाली भूकंप के कारण कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गयी है। वहीं, चार अन्य लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की खबर है।
भूकंपीय वेधशाला के अनुसार, यह भूकंप स्थानीय समयानुसार शाम करीब 5:06 बजे आया। धरती के भीतर महज 10 किलोमीटर की गहराई पर इसका केंद्र था। गहराई कम होने की वजह से झटके बेहद तेज महसूस किये गये। भूकंप का केंद्र हैक्सी प्रांत का पहाड़ी और सुदूर इलाका है। झटका इतना तेज था कि आसपास के कई जिलों में भी धरती हिलने की खबर है। शुरुआती झटके के बाद लोग काफी देर तक सहमे रहे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16 महीनों के बाद एक बार फिर मुलाकात करेंगे। यह मुलाकात फ्रांस में होगी। व्हाइट हाउस ने इसकी पुष्टि की है। यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है, अमेरिका पश्चिम एशिया में जारी जंग में शामिल है।
शनिवार को फ्रांस और स्लोवाकिया की एक सप्ताह की आधिकारिक यात्रा पर रवाना हुए। प्रस्थान से पहले जारी अपने बयान में उन्होंने भारत-फ्रांस संबंधों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि फ्रांस, भारत के रणनीतिक दृष्टिकोण में एक विशेष स्थान रखता है।
प्रधानमंत्री ने कहा, भारत के रणनीतिक विजन में फ्रांस का एक खास स्थान है। इस वर्ष की शुरुआत में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत का दौरा किया था। उस दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को और मजबूत करते हुए विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक आगे बढ़ाया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका-ईरान संघर्ष थमने के संकेतों के बीच वैश्विक बाजारों में तेजी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने से शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजारों में जोरदार उछाल आया। सेंसेक्स 1,695 अंक से अधिक चढ़ गया जबकि निफ्टी में करीब 461 अंक की तेजी दर्ज की गयी।
बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स 1,695.40 अंक यानी 2.30 प्रतिशत उछलकर 75,527.95 अंक पर बंद हुआ। मार्केट की इस शानदार तेजी से निवेशकों की दौलत में 10 लाख करोड़ से अधिक का इजाफा हुआ।
कारोबार के दौरान एक समय यह 1,775.47 अंक यानी 2.40 प्रतिशत चढ़कर 75,608.02 अंक तक पहुंच गया। इसी तरह, एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 461.30 अंक यानी 1.99 प्रतिशत बढ़कर 23,622.90 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 483.75 अंक प्रतिशत चढ़कर 23,645.35 तक पहुंच गया था।
विश्लेषकों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सकारात्मक बयान से शेयर बाजार में तेजी का रुझान रहा। ट्रंप ने ईरान के साथ युद्ध समाप्त होने और दोनों देशों के बीच समझौते को लेकर सहमति बनने की बात कही है। इससे वैश्विक स्तर पर तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ी और निवेशकों की धारणा मजबूत हुई।
11 जून 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप 4,51,83,025.178 करोड़ था। आज यानी 12 जून 2026 को यह उछलकर 4,62,00,318.80 करोड़ पर पहुंच गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज 10,17,293.622 करोड़ का इजाफा हुआ है।
सेंसेक्स के समूह में शामिल कंपनियों में से बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो, इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो), टाइटन, इटर्नल और एचडीएफसी बैंक के शेयर प्रमुख रूप से लाभ में रहे। दूसरी तरफ, सेंसेक्स में शामिल टेक महिंद्रा और पावर ग्रिड ही नुकसान में रहने वाली कंपनियों में शामिल रहीं। सकारात्मक वैश्विक संकेतों से वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 3.98 प्रतिशत गिरकर 86.78 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
एशिया के अन्य बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी 4.63 प्रतिशत और जापान का निक्की सूचकांक 2.81 प्रतिशत चढ़ा। चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग सूचकांक भी बढ़त में रहे। यूरोपीय बाजार भी बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे।
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