एबीएन सेंट्रल डेस्क। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक अस्पताल पर पाकिस्तानी हवाई हमले में 400 लोगों की मौत हो गयी। अफगानिस्तान सरकार के उप प्रवक्ता ने मंगलवार तड़के बताया कि अफगान राजधानी काबुल में नशा मुक्ति उपचार करने वाले एक अस्पताल पर पाकिस्तान के हवाई हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 400 हो गयी है।
हामदुल्लाह फितरत ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि सोमवार रात हुए इस हमले में अस्पताल का बड़ा हिस्सा नष्ट हो गया। उन्होंने बताया कि अब तक 400 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 250 से अधिक लोग घायल हुए हैं। फितरत के अनुसार, बचाव दल इमारत में लगी आग पर काबू पाने और मलबे से शव निकालने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि पाकिस्तान ने पहले ही इन आरोपों से इनकार किया है। पाकिस्तान का कहना है कि काबुल और पूर्वी अफगानिस्तान में सोमवार को किए गए उसके हमलों में किसी भी नागरिक स्थल को निशाना नहीं बनाया गया। अफगानिस्तान ने सोमवार को पाकिस्तान की सेना पर आरोप लगाया था कि उसने हवाई हमलों में काबुल के उस अस्पताल को निशाना बनाया, जहां नशे के आदी लोगों का इलाज किया जाता है। उस समय अफगानिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था कि हमले में 200 से अधिक लोगों की मौत हुई है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता शराफत जमान ने स्थानीय मीडिया को दिये एक टेलीविजन इंटरव्यू में बताया कि ड्रग उपचार अस्पताल का लगभग पूरा ढांचा नष्ट हो गया है। अफगानिस्तान सरकार के प्रवक्ता जबिउल्लाह मुजाहिद ने भी एक्स पर इस इंटरव्यू का वीडियो साझा किया। स्थानीय टीवी चैनलों पर दिखायी गयी फुटेज में दमकलकर्मी मलबे के बीच लगी आग बुझाने की कोशिश करते नजर आये।
यह कथित हमला उस समय हुआ जब अफगान अधिकारियों ने बताया कि दोनों देशों के बीच सीमा पर गोलीबारी हुई थी। इस गोलीबारी में अफगानिस्तान में चार लोगों की मौत हो गई। पड़ोसी देशों के बीच हाल के वर्षों की सबसे भीषण लड़ाई अब तीसरे सप्ताह में पहुंच गयी है। मुजाहिद ने पहले ही इस हमले की निंदा करते हुए कहा था कि यह अफगानिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि मरने और घायल होने वालों में अधिकांश लोग अस्पताल में इलाज करा रहे मरीज थे।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के प्रवक्ता मोशर्रफ जैदी ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि काबुल में किसी अस्पताल को निशाना नहीं बनाया गया। पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट में कहा कि हमलों में काबुल और नंगरहार में सैन्य ठिकानों और आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाया गया। मंत्रालय के अनुसार ये ठिकाने पाकिस्तान के नागरिकों के खिलाफ हमलों के लिए इस्तेमाल किये जा रहे थे।
मंत्रालय ने कहा कि हमले बेहद सटीक तरीके से किये गये ताकि किसी तरह का अतिरिक्त नुकसान न हो। साथ ही उसने अफगान प्रवक्ता के आरोपों को भ्रामक और गलत बताया। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अफगानिस्तान की तालिबान सरकार से आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई तेज करने का आह्वान किया। सुरक्षा परिषद ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र के राजनीतिक मिशन यूएनएएमए के कार्यकाल को तीन महीने के लिए बढ़ा दिया।
पाकिस्तान लंबे समय से अफगानिस्तान पर आरोप लगाता रहा है कि वहां की तालिबान सरकार पाकिस्तानी तालिबान और अन्य उग्रवादी संगठनों को सुरक्षित पनाह देती है, जो पाकिस्तान में हमले करते हैं। काबुल इन आरोपों से इनकार करता है।
इससे पहले अफगान अधिकारियों ने बताया था कि सोमवार को सीमा पर हुई गोलीबारी में दो बच्चों सहित चार लोग मारे गये और 10 अन्य घायल हो गए। अफगानिस्तान के खोस्त प्रांत के प्रवक्ता मुस्तघफर गुरबाज ने कहा कि पाकिस्तान से दागे गये मोर्टार गोले गांवों पर गिरे और कई घरों को नुकसान पहुंचा।
दूसरी ओर पाकिस्तान ने कहा कि रविवार को अफगानिस्तान की ओर से दागा गया मोर्टार गोला उत्तर-पश्चिमी बाजौर जिले में एक घर पर गिरा, जिसमें एक परिवार के चार सदस्य मारे गए और दो अन्य घायल हुए। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कहा कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पिछले सप्ताह पाकिस्तान में ड्रोन हमले कर रेड लाइन पार कर दी है। इसके जवाब में पाकिस्तान वायुसेना ने सप्ताहांत में अफगानिस्तान के कंधार प्रांत में उपकरण भंडारण और तकनीकी ढांचे पर हमले किये।
काबुल में अफगानिस्तान के प्रशासनिक उप प्रधानमंत्री अब्दुल सलाम हनफी ने कहा कि देश की संप्रभुता की रक्षा करना सभी नागरिकों का कर्तव्य है। उन्होंने हालिया पाकिस्तानी हमलों में नागरिकों की मौत पर दुख जताया और कहा कि यह युद्ध अफगानिस्तान पर थोपा गया है। यह संघर्ष फरवरी के अंत में शुरू हुआ जब पाकिस्तान के हवाई हमलों के जवाब में अफगानिस्तान ने सीमा पार हमले किये। इससे पहले कतर की मध्यस्थता में अक्टूबर में युद्धविराम हुआ था।
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने रविवार को दावा किया कि पाकिस्तान की सेना ने 684 अफगान तालिबान लड़ाकों को मार गिराया है। हालांकि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि वास्तविक संख्या इससे कहीं कम है। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने भी दावा किया है कि अफगान बलों ने 100 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। आईएमएफ अक्सर इस वित्तीय अंतर को कम करने के लिए बिजली दरें बढ़ाने पर जोर देता रहा है। लेकिन केवल दरें बढ़ाने से उस प्रणाली की समस्या हल नहीं होगी। पाकिस्तान और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के बीच एक अरब डॉलर की किस्त जारी करने को लेकर चल रही बातचीत एक बार फिर ठप पड़ गयी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसकी वजह मौजूदा बजट की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवाल और टैक्स कलेक्शन का कम होना है। कराची के अखबार बिजनेस रिकॉर्डर के अनुसार, आईएमएफ ने एक बार फिर पाकिस्तान के टैक्स सिस्टम पर सवाल उठाए हैं। आईएमएफ का कहना है कि राजस्व लक्ष्य हासिल होना मुश्किल दिखाई देता है।
रिपोर्ट के कहा गया है कि यह चिंता जायज है। पाकिस्तान की टैक्स सिस्टम लंबे समय से कमजोर प्रदर्शन करती रही है। देश का टैक्स-टू-जीडीपी अनुपात 9-10 प्रतिशत के आसपास ही अटका है, जो समान उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में सबसे कम है। कर दायरा सीमित है, अनौपचारिक अर्थव्यवस्था बहुत बड़ी है और कर अनुपालन भी कमजोर है।
दशकों से हर आईएमएफ कार्यक्रम में पाकिस्तान से कर प्रशासन सुधारने, कर आधार बढ़ाने और राजस्व लक्ष्य बढ़ाने की मांग की जाती रही है, लेकिन इन प्रयासों के बावजूद नतीजे सीमित ही रहे हैं। औपचारिक क्षेत्र अभी भी कर का अधिकांश बोझ उठाता है, जबकि संपत्ति के बड़े हिस्से, खासतौर पर खुदरा कारोबार, कृषि और अन्य क्षेत्रों पर बहुत कम कर लगता है या वे पूरी तरह व्यवस्था से बाहर हैं। अनौपचारिक अर्थव्यवस्था, जिसे अक्सर जीडीपी का लगभग 40 प्रतिशत माना जाता है, काफी हद तक कर प्रणाली की पकड़ से बाहर है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की वित्तीय समस्या केवल इतनी नहीं है कि सरकार बहुत कम राजस्व जुटाती है। उतनी ही बड़ी समस्या यह भी है कि सार्वजनिक क्षेत्र में भारी वित्तीय घाटा जारी है और इस पर निर्णायक सुधार नहीं हो पाए हैं। इसका सबसे स्पष्ट उदाहरण घाटे में चलने वाले सार्वजनिक उपक्रमों से होने वाला लगातार नुकसान है। पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) और पाकिस्तान स्टील मिल्स जैसी संस्थाओं ने वर्षों में भारी घाटा जमा किया है।
इनकी देनदारियों का बोझ राष्ट्रीय खजाने पर पड़ता है, जिसे सब्सिडी, गारंटी और कर्ज पुनर्गठन के माध्यम से वहन किया जाता है।
ये संस्थान मुख्य रूप से इसलिए जीवित हैं क्योंकि सरकारें इनके पुनर्गठन या निजीकरण से जुड़े राजनीतिक जोखिमों का सामना करने से हिचकती हैं। फिर भी इनके वित्तीय नुकसान हर साल सैकड़ों अरब रुपए तक पहुंच जाते हैं, जो चुपचाप सार्वजनिक संसाधनों को खत्म करते रहते हैं।
रिपोर्ट में आगे लिखा गया है कि, अजीब बात यह है कि जहां आईएमएफ कार्यक्रम राजस्व लक्ष्यों पर बहुत जोर देते हैं, वहीं सार्वजनिक उपक्रमों में सुधार की तत्काल आवश्यकता उतनी मजबूत नहीं दिखाई देती। निजीकरण की योजनाएं धीमी गति से आगे बढ़ती हैं, पुनर्गठन की समय-सीमा बार-बार टलती है और घाटे में चल रही संस्थाओं को सरकारी वित्तीय सहायता मिलती रहती है। पाकिस्तान के ऊर्जा क्षेत्र में एक और बड़ा वित्तीय संकट मौजूद है। देश का सर्कुलर डेब्ट (बिजली व्यवस्था के भीतर बकाया भुगतान की जटिल श्रृंखला) कई लाख करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है।
आईएमएफ अक्सर इस वित्तीय अंतर को कम करने के लिए बिजली दरें बढ़ाने पर जोर देता रहा है। लेकिन केवल दरें बढ़ाने से उस प्रणाली की समस्या हल नहीं होगी जो अक्षमता और कमजोर प्रशासन से ग्रस्त है। बिजली वितरण कंपनियों के गहरे पुनर्गठन और बेहतर प्रबंधन के बिना यह सर्कुलर डेब्ट फिर से बढ़ जाता है। लेख में यह भी कहा गया कि एक अन्य पहलू जिस पर लगातार पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता, वह है गैर-उत्पादक या अत्यधिक सार्वजनिक खर्च।
केंद्र और प्रांतीय बजटों में अब भी भारी प्रशासनिक खर्च, गलत तरीके से दी जा रही सब्सिडी और राजनीतिक कारणों से शुरू की गई विकास योजनाएं शामिल हैं, जिनका आर्थिक लाभ सीमित होता है। लेख के अनुसार, वित्तीय अनुशासन केवल अधिक राजस्व जुटाने से हासिल नहीं हो सकता। इसके लिए यह भी जरूरी है कि सार्वजनिक धन कैसे खर्च किया जा रहा है, इसकी गंभीर समीक्षा की जाए।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनी एनवीडिया के संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) जेनसन हुआंग ने कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) मानव इतिहास में सबसे बड़े अवसंरचना निर्माण को गति दे रही है, जिसके लिए खरबों डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी और कुशल श्रमिकों की भारी मांग उत्पन्न होगी। हुआंग ने हाल ही में प्रकाशित एक ब्लॉग लेख में कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) अब केवल एक साधारण अनुप्रयोग या एकल मॉडल तक सीमित नहीं रही है, बल्कि इसे बिजली एवं इंटरनेट की तरह एक आवश्यक अवसंरचना के रूप में देखना चाहिए।
उन्होंने लिखा, हमने अभी इस निर्माण की शुरूआत ही की है। अब तक इसमें कुछ सौ अरब डॉलर का निवेश हुआ है, जबकि अब भी खरबों डॉलर की अवसंरचना तैयार की जानी बाकी है। दुनिया भर में अभूतपूर्व स्तर पर चिप कारखाने, कंप्यूटर असेंबल संयंत्र और कृत्रिम मेधा (एआई) कारखाने बनाए जा रहे हैं। यह मानव इतिहास का सबसे बड़ा अवसंरचना निर्माण बनता जा रहा है।
हुआंग ने कृत्रिम मेधा (एआई) का पांच परतों वाले ढांचे के रूप उल्लेख किया जिसमें ऊर्जा, चिप, अवसंरचना, मॉडल और अनुप्रयोग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ऊर्जा इसकी आधारभूत परत है और यह इस बात की प्रमुख सीमा तय करती है कि कोई प्रणाली कितनी बुद्धिमत्ता उत्पन्न कर सकती है। एनवीडिया प्रमुख ने कहा कि यह विशाल औद्योगिक बदलाव पारंपरिक प्रौद्योगिकी क्षेत्र के बाहर भी बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन करेगा।
उन्होंने कहा, इस निर्माण को समर्थन देने के लिए श्रम की जरूरत बहुत अधिक है। कृत्रिम मेधा (एआई) कारखानों को बिजली मिस्त्री, प्लंबर, पाइप फिट करने वाले कारीगर, इस्पात कर्मी, नेटवर्क तकनीशियन, संयोजन करने वाले कर्मचारी और संचालक चाहिए होंगे। ये सभी कुशल और अच्छे वेतन वाली नौकरियां हैं, जिनकी अभी कमी है।
इस बदलाव में भाग लेने के लिए कंप्यूटर विज्ञान में पीएचडी करने की आवश्यकता नहीं है। हुआंग ने बताया कि कृत्रिम मेधा (एआई) ने पारंपरिक कंप्यूटिंग मॉडल को बदल दिया है, जो पहले संरचित आंकड़ों और सटीक प्रश्नों पर आधारित था। उन्होंने कहा, अब हर उत्तर नया होता है। हर जवाब आपके संदर्भ पर निर्भर करता है। यह ऐसा सॉफ्टवेयर नहीं है जो केवल संग्रहित निदेर्शों को पेश करे बल्कि यह मांग के अनुसार तर्क करके बुद्धिमत्ता प्रदान करता है।
ब्लॉग में यह भी कहा गया कि पिछले वर्ष कृत्रिम मेधा (एआई) ने एक महत्वपूर्ण चरण पार कर लिया है क्योंकि मॉडल बड़े पैमाने पर अत्यधिक उपयोगी हो गये हैं और दवा खोज, लॉजिस्टिक, ग्राहक सेवा, सॉफ्टवेयर विकास तथा विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में वास्तविक आर्थिक मूल्य उत्पन्न कर रहे हैं। हुआंग ने मुक्त स्रोत मॉडल, विशेष रूप से डीपसीक-आर1 का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे अनुप्रयोग स्तर पर अपनाने की गति तेज हुई है जिसके परिणामस्वरूप अवसंरचना एवं ऊर्जा सहित पूरी कंप्यूटिंग प्रणाली में मांग बढ़ रही है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने वैश्विक तेल बाजार को लेकर एक कड़ी चेतावनी जारी की है। ईरान का कहना है कि अगर उसके पड़ोसी देश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर अंकुश लगाने में विफल रहते हैं, तो कच्चे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के एक प्रवक्ता ने सख्त लहजे में पड़ोसी देशों को संबोधित करते हुए कहा, यदि आप 200 डॉलर प्रति बैरल से अधिक की तेल कीमतों को सहन कर सकते हैं, तो इस खेल को जारी रखें। इस बयान ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ा दी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक शनिवार को इजरायल ने ईरान के करीब 30 फ्यूल डिपो को निशाना बनाकर बड़ा हमला किया। इस हमले के बाद तेहरान के कई इलाकों में भीषण आग लग गई और कई किलोमीटर दूर तक धुएं के गुबार दिखाई दिये। बताया जा रहा है कि इजरायल ने हमले की जानकारी पहले अमेरिका को दी थी लेकिन अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि हमले का पैमाना उनकी उम्मीद से कहीं बड़ा था।
अमेरिका ने इस कार्रवाई को लेकर चिंता जताई है। अमेरिकी अधिकारियों को डर है कि अगर ईरान के ऊर्जा ढांचे पर इस तरह के हमले जारी रहे तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ेगा। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में तेल से जुड़े ढांचे पर हमला होने से आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ जाती है, जिससे कीमतों में तेजी आ सकती है।
इजरायल का कहना है कि जिन फ्यूल डिपो को निशाना बनाया गया, उनका इस्तेमाल ईरानी सेना और उससे जुड़े सैन्य ढांचे को ईंधन उपलब्ध कराने के लिए किया जाता था। हालांकि इस हमले के बाद अमेरिका और इजरायल के बीच रणनीतिक मतभेद भी सामने आए हैं। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ऐसे हमले ईरान के अंदर सरकार के खिलाफ गुस्सा कम करने के बजाय लोगों को और अधिक एकजुट कर सकते हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ईरान और इजरायल, अमेरिका के बीच युद्ध को आज सात दिन चुके हैं। इस युद्ध को लेकर खबर सामने आई है कि ईरान में मरने वालों की संख्या 1332 हो गई है, जबकि 3,000 से ज्यादा घर तबाह हुए हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका-इजराईल जंग से बढ़े तनाव के बीच ईरान ने दुनिया की तेल लाइफलाइन होर्मुज क्षेत्र पर कब्जा करने का दावा किया है। होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक कच्चे तेल की बड़ी आपूर्ति गुजरती है।
ईरान की इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बयान जारी कर कहा कि अगर दुश्मन देशों के जहाज इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधि करेंगे तो उन्हें मिसाइल और ड्रोन से उड़ा दिया जाएगा। यह चेतावनी सीधे तौर पर स्ट्रेट ऑफ हार्मोस में जहाजरानी की सुरक्षा से जुड़ी है। यहां किसी भी टकराव का असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ सकता है।
ईरान आधारित चैनल ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, 56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई को देश की एक्सपर्ट असेंबली द्वारा नया सर्वोच्च नेता चुना गया है।
वे दिवंगत नेता अयातुल्लाह अली खमेनेई के दूसरे सबसे बड़े बेटे बताए जाते हैं। हालांकि इस नेतृत्व परिवर्तन की आधिकारिक पुष्टि ईरानी राज्य संस्थानों की ओर से स्पष्ट रूप से सामने आना बाकी है। ईरान में सुप्रीम लीडर का चयन असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स द्वारा किया जाता है।
मिसाइल और ड्रोन हमले दोनों ओर से जारी है । ईरान में 1000 से अधिक मौतों के दावा किया जा रहा है। 180 से ज्यादा बच्चों की मौत की रिपोर्ट है। मृतकों के आंकड़ों की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा पूर्ण पुष्टि अभी जारी है, लेकिन मानवीय संकट गहराता दिख रहा है।
अगर होर्मुज मार्ग बाधित होता है, तो एशिया और यूरोप की ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा असर पड़ सकता है। ईरान की चेतावनी और नेतृत्व बदलाव की खबरें इस संघर्ष को सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि राजनीतिक और आर्थिक संकट में बदल सकती हैं। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका बेहद अहम होगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम एशिया की धरती पर जंग की आहट अब और तेज हो गई है। इस्राइल और अमेरिका के ईरान पर लगातार हमले और ईरान की जवाबी कार्रवाई पांचवें दिन भी जारी है। बमबारी तेज है और ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि यह अभियान कई हफ्तों तक चल सकता है।
ऐसे में हालात बिगड़ते देख अमेरिकी गृह विभाग ने पश्चिम एशिया छोड़ना चाहने वाले अमेरिकियों के लिए तैयारी शुरू कर दी है। ईरान के सुप्रीम लीडर रहे खामेनेई के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने ANI को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि हम युद्ध रोकने के लिए तैयार हैं।
हम बातचीत के लिए तैयार हैं। लेकिन बातचीत सम्मान के साथ होनी चाहिए, ईरान के खिलाफ कुछ हुक्म देने के लिए नहीं। हम अपना बचाव कर रहे हैं। हम अपना हक ढूंढ रहे हैं और कुछ नहीं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। मिडल ईस्ट में बढ़ते युद्ध तनाव के बीच चीन ने स्पष्ट शब्दों में अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई की आलोचना की है।बीजिंग ने इन हमलों को ईरान की संप्रभुता और सुरक्षा का गंभीर उल्लंघन बताया और कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
मिनिस्ट्री ऑफ फॉरेन अफेयर्स ऑफ द पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि चीन को हमलों की पूर्व जानकारी नहीं दी गई थी। यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने ओमान के विदेश मंत्री बद्र बिन हमद अल बुसैदी और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की।
उन्होंने खाड़ी देशों से अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करने और विदेशी हस्तक्षेप का विरोध करने का आह्वान किया। रॉयटर्स के अनुसार, तेहरान पर हमलों में एक चीनी नागरिक की मौत हुई है। चीन के विदेश मंत्रालय ने बताया कि 2 मार्च तक 3,000 से अधिक चीनी नागरिकों को ईरान से सुरक्षित निकाला जा चुका है।
बता दें कि अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी से ईरान पर हमले शुरू किए, जिनमें ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत हुई। ईरान और उसके सहयोगी संगठनों, जैसे हिजबुल्लाह, ने जवाबी हमले किए हैं। संघर्ष अब खाड़ी के कई बड़े शहरों दुबई, अबू धाबी और दोहा तक फैल चुका है।
वांग यी ने अपने बयान में कहा कि हालिया अमेरिकी कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और ईरान की लाल रेखाओं को पार करती है। लेकिन क्षेत्रीय शांति के लिए बातचीत जरूरी है। चीन ने संकेत दिया है कि वह तनाव कम करने में सकारात्मक भूमिका” निभाना चाहता है।
अमेरिका-इजरायल की सैन्य कार्रवाई का विरोध कर रहा है, लेकिन साथ ही क्षेत्रीय देशों से संयम और वार्ता का रास्ता अपनाने की अपील भी कर रहा है। बीजिंग के लिए यह सिर्फ कूटनीति नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और अरबों डॉलर के आर्थिक हितों का सवाल भी है।
चीन ईरान और कई खाड़ी देशों का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। ऊर्जा आयात का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से लेता है। वैश्विक व्यापार मार्गों और तेल आपूर्ति पर निर्भर है। ओमान जो होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित है, लंबे समय से अमेरिका-ईरान वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है।ओमान ने 2015 के ज्वाइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (JCPOA) समझौते के दौरान भी अहम भूमिका निभाई थी।
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