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Published / 2026-06-12 21:05:05
लोहरदगा में हिंडाल्को कंपनी अपने कुकर्मों से बाज नहीं आ रही है : सूरज अग्रवाल

एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। झारखंड प्रदेश के नेता जनप्रतिनिधि जो हमेशा जनता को बेवकूफ बनाने के लिए स्थानीय एवं डोमिसाइल नीति का ढोलकी पीटते रहते हैं। उन नेताओं को शायद जानकारी नहीं होगी कि लोहरदगा के हिंडालको कंपनी में कार्यरत चतुर्थवर्गीय कर्मचारी में कुछ ही कर्मचारी स्थानीय है जिससे फाइल इधर-उधर कराना, चाय पिलाना, पानी पिलाना, चाय का जूठा गिलास उठाना आदि काम कराया जाता है। 

जो तृतीय वर्ग एवं द्वितीय वर्ग के स्थानीय कर्मचारी थे, उन्हें इतना परेशान किया गया कि वे अपने नौकरी से त्याग पत्र देकर हिंडालको से हट जा रहा है। स्थानीय का प्रमोशन रोककर बाहरी लोगों का प्रमोशन होता है, जिससे स्थानीय कर्मचारी काफी आहत है। लोहरदगा में हिंडाल्को कंपनी सभी द्वितीय एवं तृतीय वर्ग के कर्मचारी के रूप में उड़ीसा के लोगों को अधिक से अधिक प्राथमिकता दी जा रही है। 

कई बाहर के स्टेट के लोगों को नौकरी दी जा रही है। धीरे-धीरे कंपनी सभी बाहरी लोग को लोहरदगा में नौकरी देकर अपना उल्लू सीधा कर रही है। जबकि अगर झारखंड के लोग किसी दूसरे प्रदेश में कार्य करने जाते हैं, तो उनका विरोध किया जाता है। लेकिन वाह रे हिंडालको कंपनी आप यहां बाहरी लोग को बसा रहे हैं। पहले तो स्थानीय लोग को रैजिंग का कार्य भी दिया जाता था, लेकिन अब सभी रैजिंग करने वाले ठेकेदार बाहर से लाया गया है। 

उनसे अधिकारी कमीशन लेते हैं। चूंकि स्थानीय से कमीशन लेने पर इनका भंडाफोड़ हो जायेगा, इससे बचते हुए बाहरी लोगों को ज्यादा रेजिंग कार्य दिया जा रहा है। कुछ अधिकारी जो ईमानदारी से अपना कार्य कर रहे थे वे भी तंग होकर हिंडालको छोड़कर दूसरी कंपनी में चले गये। क्योंकि कंपनी के बड़े कुर्सी में एक ऐसे अधिकारी बैठे हैं, जिनकी सोच है कि तुम भी खाओ और मुझे भी खिलाओ। 

पूर्व में उड़ीसा में रेजिंग कार्य की शुरुआत करने को लेकर इस बड़े कुर्सी वाले अधिकारी की कुटाई हो चुकी है, तो कुटाई से बचने के लिए उड़ीसा के लोगों को झारखंड में लाया जा रहा है। ताकि उड़ीसा में फिर से रेजिंग शुरू किया जा सके और इस खाने खिलाने के चक्कर में भंडाफोड़ ना हो जाये। इसलिए स्थानीय को भगाओ और मस्ती से मलाई खाओ जो जनप्रतिनिधि बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। 

उन्हें रबड़ी मलाई खिलाकर उन्हें भी संतुष्ट कर दिया जा रहा है और हिंडाल्को करोड़ो का मुनाफा यहां से कर रही है। स्थानीय नीति की बात करने वाले नेता हिंडालको जाएं और वहां सर्वे करा कर देख ले कि जितने भी कर्मचारी हैं वह कहां के हैं क्या सिर्फ उड़ीसा के लोगों में योग्यता है। हमारे झारखंड के लोगों में योग्यता की कमी है। लोहरदगा में एक कंपनी पहले कार्य करती थी इंडाल जिसने स्थानीय को प्राथमिकता दिया था। 

उसे भी हिंडालको हड़प कर वहां के कई स्थानीय लोगों को बेरोजगार कर चुकी है। एक जनप्रतिनिधि तो अदानी और अंबानी को पानी पी पीकर गाली बकते रहते हैं, तो थोड़ा हिंडाल्को को भी गरिया लिया जाए। ताकि स्थानीय लोगों का कुछ भला हो सके।

पर मुझे पता है ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि यह पब्लिक है सब जानती है और अगर ऐसा जनप्रतिनिधि नहीं करते हैं तो इनका स्थानीय को लेकर झूठा ढोल नगाड़ा बजाना आंख में धूल झोंकना है। जागो रे हिंडाल्को को बॉक्साइट निकालने के लिए जमीन देने वाले जमींदारों...।

Published / 2026-06-12 21:01:29
अग्रवाल सभा चुनाव : नामांकन वापसी के बाद 31 उम्मीदवार मैदान में

उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी 

टीम एबीएन, रांची। अग्रवाल सभा रांची के सत्र 2026-28 की कार्यकारिणी के चुनाव को लेकर चुनावी प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ रही है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अशोक कुमार नारसरिया ने बताया कि निर्धारित तिथि तक कुल 36 नामांकन-पत्र प्राप्त हुए थे। 

सभी नामांकन-पत्रों की विधिवत जांच की गयी, जिसमें सभी नामांकन वैध पाये गये। उन्होंने बताया कि नामांकन-पत्र वापसी के अंतिम दिन पांच उम्मीदवारों ने स्वेच्छा से अपना नाम वापस ले लिया। इसके बाद चुनाव मैदान में कुल 31 उम्मीदवार शेष रह गये हैं। निर्वाचन समिति द्वारा इन सभी प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी कर दी गयी है। 

जारी सूची के अनुसार चुनाव मैदान में शामिल उम्मीदवारों के नाम इस प्रकार हैं : अजय कुमार खेतान, अजय कुमार डिडवानिया, अनिल अग्रवाल, अमर अग्रवाल, अरुण भरतिया, अशोक कुमार लाठ, किशन कुमार पोद्दार, कौशल कुमार राजगढ़िया, जितेश अग्रवाल, नरेश कुमार बंका, निकुंज पोद्दार, निर्मल कुमार बुधिया, विजय कुमार खोवाल, विनोद कुमार टिबड़ेवाल, मनोज कुमार चौधरी, मनोज कुमार ढाढनिया, मुकेश जाजोदिया, राजकुमार मित्तल, रामाशंकर बगड़िया, रौनक झुनझुनवाला, विकास अग्रवाल, शारदा ड्रोलिया, सज्जन कुमार पाड़िया, संजय बजाज, संजय सर्राफ, सुनील कुमार केडिया, सुनील कुमार पोद्दार, सुभाष चंद्र पटवारी, सुरेश कुमार चौधरी, सुरेश कुमार पोद्दार एवं सौरभ बजाज। 

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री नारसरिया ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया पूर्णत: पारदर्शी एवं निर्धारित नियमों के अनुरूप संपन्न कराई जा रही है। नामांकन, जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होने के बाद अब आगे की तैयारियां होगी। 

महाराजा अग्रसेन भवन में अंतिम सूची जारी किये जाने के अवसर पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अशोक कुमार नारसरिया के साथ निर्वाचन पदाधिकारी राजेंद्र केडिया एवं नंदकिशोर पाटोदिया भी उपस्थित थे। तीनों पदाधिकारियों ने निष्पक्ष एवं सुव्यवस्थित चुनाव कराने की अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी। उक्त जानकारी चुनाव के निर्वाचन पदाधिकारी राजेंद्र केडिया (9431701059) ने दी।

बिहार

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Published / 2026-05-12 20:21:01
गोपालगंज : आर्केस्ट्रा से 40 नाबालिग मुक्त, 22 गिरफ्तार

गोपालगंज में आर्केस्ट्रा समूहों से मुक्त करायी गयी 40 से ज्यादा नाबालिग लड़कियां, 22 गिरफ्तार 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। बिहार के गोपालगंज जिले में आर्केस्ट्रा समूहों में नाबालिग लड़कियों के शोषण व उत्पीड़न के खिलाफ हालिया समय की सबसे बड़ी छापे की कार्रवाई में 40 से ज्यादा नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया गया। जिले के कुचायकोट थानाक्षेत्र में रात एक बजे से सुबह सात बजे तक तकरीबन 15 आर्केस्ट्रा समूहों पर हुई इस कार्रवाई में ट्रैफिकिंग व बच्चों के शोषण के आरोप में 22 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। 

यह पूरा अभियान अपर पुलिस महानिदेशक (कमजोर वर्ग) अमित जैन व गोपालगंज के पुलिस अधीक्षक विनय तिवारी की देखरेख में कुचायकोट पुलिस, एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन, नारायणी सेवा संस्थान व पटना स्थित बिहार पुलिस मुख्यालय ने संयुक्त रूप से चलाया। छापे की इस कार्रवाई में शामिल एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन और नारायणी सेवा संस्थान बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठन हैं। 

मुक्त करायी गयी लड़कियों की काउंसलिंग के बाद उनको सुरक्षित जगह भेज दिया गया और उनकी उम्र के सत्यापन की प्रक्रिया व अन्य कानूनी कार्रवाई जारी है। मुक्त करायी गयी लड़कियों की उम्र 10 से 17 साल है। फिलहाल मिली जानकारी के अनुसार इन बच्चियों को झांसा देकर ट्रैफिकिंग के जरिए पश्चिम बंगाल, असम, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से लाया गया था।  

बिहार में ट्रैफिकिंग गिरोहों व आर्केस्ट्रा समूहों के बीच गहरी सांठ-गांठ की ओर संकेत करते हुए एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन के वरिष्ठ निदेशक मनीष शर्मा ने कहा, इस अभियान ने एक बार इस तथ्य को उजागर किया है कि कितने बड़े पैमाने पर लड़कियों की ट्रैफिकिंग कर उन्हें राज्य के विभिन्न हिस्सों में चल रहे आर्केस्ट्रा समूहों में धकेला जा रहा है। इन लड़कियों को बहला-फुसलाकर यौन शोषण व उत्पीड़न के अंतहीन दलदल में धकेल दिया जाता है। हमें ट्रैफिकिंग के संगठित अपराध और आर्केस्ट्रा समूहों की मिलीभगत के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने की जरूरत है। 

इन्हें सख्त सजा देने के साथ ही पीड़ित बच्चियों के पुनर्वास व पर्याप्त मुआवजे की तत्काल आवश्यकता है। न्याय में किसी भी तरह की देरी इन बच्चों को दोबारा निराश कर सकती है। एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन और नारायणी सेवा संस्थान पिछले एक महीने से इन आर्केस्ट्रा समूहों की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे।

उन्होंने पाया कि आर्केस्ट्रा समूह शादी-ब्याह के समय ट्रैफिकिंग के जरिए पड़ोसी राज्यों से नाबालिग बच्चियों को लाते हैं और इन्हें विवाह समारोहों में भोजपुरी गानों पर अश्लील नृत्य के लिए मजबूर किया जाता है। हालांकि इनके यौन उत्पीड़न का सिलसिला समारोह खत्म होने के बाद भी जारी रहता है। चूंकि शादी-ब्याह का मौसम कुछ ही दिनों में खत्म होने वाला है, इसलिए छापे के लिए जानबूझ कर ऐसा दिन चुना गया जब कोई लग्न नहीं हो और ये सभी लड़कियां अपने ठिकानों पर मौजूद रहें।     

मुक्त कराये जाने के बाद काउंसलिंग के दौरान भयभीत दिख रही कई लड़कियों ने बताया कि उन्हें उनके कथित प्रेमी ने बेच दिया या फिर पैसे, नाम व बेहतर जिंदगी का लालच देकर शोषण के दलदल में धकेल दिया। कुछ लड़कियों ने बताया कि उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि अगर वे आर्केस्ट्रा से जुड़ी रहेंगी तो उन्हें भोजपुरी फिल्मों में काम करने का अवसर भी मिलेगा।   

ऐसे मामलों में जवाबदेही व तत्काल कार्रवाइयों की जरूरत पर जोर देते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के राष्ट्रीय संयोजक रवि कांत ने कहा, यह देखना दुखद है कि संगठित ट्रैफिकिंग गिरोह आर्केस्ट्रा समूहों के जरिए शोषण के इरादे से विभिन्न राज्यों में बच्चों को निशाना बना रहे हैं। यह कोई इकलौती घटना नहीं है बल्कि एक संगठित आपराधिक तंत्र की ओर इशारा करती है जो बच्चों की लाचारी, आर्केस्ट्रा जैसे धंधों में उनकी मांग और कानूनी सख्ती में कमी की वजह से फल-फूल रहा है। 

भारत में बच्चों की सुरक्षा के लिए काफी कड़े कानून हैं और हालिया समय में बिहार पुलिस की सख्ती बताती है कि वे ट्रैफिकिंग और बच्चों के शोषण के खात्मे के लिए गंभीर हैं। फिर भी राज्यों में आपसी समन्वय, शादी-ब्याह के मौसमों के दौरान इन पर सख्त निगरानी व जवाबदेही तंत्र को और मजबूत बनाने की जरूरत है ताकि इसका हमेशा के लिए खात्मा किया जा सके। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क कर सकते हैं।

Published / 2026-04-07 19:28:02
किशनगंज : नाबालिग की पिटाई कर जबरन बाल विवाह कराया, सात पर एफआईआर

एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। बिहार के किशनगंज जिले में एक 17 वर्षीय नाबालिग को मारपीट कर उसका 20 साल की युवती से जबरन विवाह करा दिया गया। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने सात आरोपियों के खिलाफ बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम सहित कई धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है। 

पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार घटना की रात रिजवान (बदला हुआ नाम) अपनी मां के साथ घर में था और पिता मजदूरी के लिए बाहर गये हुए थे। रात करीब नौ बजे आधा दर्जन लोगों ने दरवाजा खटखटाया और रिजवान की मां को धमकाते हुए उसका विवाह 20 साल की एक युवती से करने को कहा। 

मां के इनकार से नाराज आरोपी रिजवान को जबरन उठाकर एक होटल में ले गए। वहां उसे बंद कर मारा-पीटा गया इससे डरकर वह बेहोश हो गया। इसी दौरान बेहोशी की हालत में शादी की रस्में पूरी की गयीं। होश आने पर लड़के ने आरोपियों से उसका विवाह नहीं कराने की विनती की लेकिन इसी बीच उन्होंने मौलवी को बुलाकर जबरन निकाह पढ़ा दिया और निकाहनामे पर दस्तखत भी करा लिये। 

दबाव बनाने की गर्ज से आरोपियों ने पीड़ित परिवार से छह लाख रुपए की रंगदारी भी मांगी और पैसे नहीं देने पर झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी। रिजवान की मां अपने बेटे के जबरन बाल विवाह की शिकायत लेकर बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन जन निर्माण केंद्र तक पहुंची। संगठन ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत जिले के एसडीएम अनिकेत कुमार को सूचित किया। 

प्रशासन ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों के खिलाफ बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006, किशोर न्याय अधिनियम 2015 और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की। फिलहाल लड़का अपनी मां के पास सुरक्षित है और पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है। 

बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठन जन निर्माण केंद्र के राकेश कुमार ने कहा बाल विवाह की बहस हमेशा लड़कियों के इर्द-गिर्द घूमती है और यह गलत भी नहीं, क्योंकि वे सबसे बड़ी पीड़ित होती हैं। लेकिन लड़कों के साथ होने वाले ऐसे मामले अक्सर सुर्खियों से बाहर रह जाते हैं। 

समाज सोचता है लड़का है, झेल लेगा। जबकि बच्चा तो बच्चा होता है, चाहे बेटा हो या बेटी। बिहार में एक दौर जबरन विवाहों जिसे पकड़ुआ विवाह कहते हैं, का भी रहा है। ऐसे में जरूरी है कि प्रशासन चौकस रहे क्योंकि आम तौर पर इसके पीड़ित नाबालिग किशोर ही होते हैं। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क कर सकते हैं।

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