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Published / 2026-05-18 22:58:49
लापता अदिति की तलाशी के लिए होगा जोरदार आंदोलन : देवेंद्रनाथ महतो

  • लापता अदिति की तलाशी के लिए होगा जोरदार आंदोलन : देवेंद्रनाथ महतो
  • कोकर की लापता 18 माह की मासूम अदिति पांडे की सकुशल बरामदगी हेतु आंदोलन तेज होगा : देवेन्द्र नाथ महतो
  • अदिति पांडे के सकुशल वापसी की मांग को लेकर 20 मई 2026 को सदर थाना के समक्ष शांतिपूर्ण प्रदर्शन

टीम एबीएन, रांची। रांची के कोकर क्षेत्र से 18 माह की मासूम अदिति पांडे के पिछले 10 दिनों से लापता रहने की घटना अत्यंत पीड़ादायक एवं चिंताजनक है। 

आज झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के केन्द्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेन्द्र नाथ महतो ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर मां अंकिता पांडे एवं पिता मनीष पांडे का दु:ख साझा किया तथा परिवार को हरसंभव सहयोग और न्याय दिलाने का भरोसा दिया। इस दौरान श्री महतो ने कहा कि एक मासूम बच्ची का इतने दिनों तक लापता रहना कानून-व्यवस्था एवं जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। 

परिवार की उम्मीद धीरे-धीरे टूट रही है, लेकिन समाज और प्रशासन को मिलकर अदिति की सकुशल वापसी के लिए पूरी संवेदनशीलता और गंभीरता से कार्य करना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि मामले की उच्चस्तरीय निगरानी में तेजी से जांच कर मासूम अदिति पांडे की अविलंब सकुशल बरामदगी सुनिश्चित की जाये तथा दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो।

इसी मांग को लेकर 20 मई 2026, समय - 3 बजे अपराह्न, सदर थाना के समक्ष शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित किया जायेगा। इसमें आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों एवं युवाओं से शामिल होकर एक मासूम की आवाज बनने की अपील की गयी है। अंत में श्री महतो ने कहा कि मासूम अदिति की सकुशल वापसी केवल एक परिवार की नहीं, पूरे समाज की जिम्मेदारी है।

Published / 2026-05-18 21:32:55
धनबाद : मनरेगा कर्मचारी की हड़ताल 68वें दिन भी जारी

  • धनबाद : मनरेगा कर्मचारी की हड़ताल 68वें दिन भी जारी
  • 68वें दिन भी हड़ताल पर डटे मनरेगा कर्मचारी, ग्रेडपे की मांग को लेकर धनबाद में प्रदर्शन

एबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। झारखंड के मनरेगा कर्मचारी अपनी विभिन्न मांगों, खासकर ग्रेड पे लागू करने की मांग को लेकर पिछले 68 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। 

सोमवार को धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर कर्मचारियों ने धरना-प्रदर्शन कर राज्य सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित किया। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।

 इस हड़ताल का असर अब गांवों में चल रही विकास योजनाओं पर साफ दिखाई देने लगा है। धरना स्थल पर बड़ी संख्या में जुटे मनरेगा कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी लंबित मांगों को जल्द पूरा करने की अपील की। 

जिलाध्यक्ष यासीन अंसारी ने बताया कि 12 मार्च 2026 से पूरे राज्य के मनरेगा कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2007 से मनरेगा कर्मी सिर्फ मनरेगा ही नहीं, बल्कि कई कल्याणकारी योजनाओं के संचालन में अहम भूमिका निभाते आ रहे हैं। इसके बावजूद कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती गयी है।

उन्होंने दावा किया कि अब तक 155 मनरेगा कर्मचारियों की मौत हो चुकी है। फिर भी अब तक उनके आश्रितों को न तो नौकरी दी गयी और न ही किसी प्रकार की आर्थिक सहायता उपलब्ध करायी गयी। ऐसे परिवारों की स्थिति बेहद चिंताजनक है।

हड़ताल कर रहे मनरेगा कर्मचारियों का कहना है कि सरकार उनकी मांगों पर जल्द निर्णय ले, ताकि वे काम पर लौट सकें और ग्रामीण विकास की योजनाएं फिर से गति पकड़ सके। बता दें कि धनबाद जिला में कुल 304 मनरेगा कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि पूरे झारखंड में इनकी संख्या करीब 5,000 है। सभी कर्मचारी इस आंदोलन में शामिल हैं।

हड़ताल के कारण मनरेगा के तहत चलने वाली कुआं, तालाब, डोभा निर्माण और प्रधानमंत्री आवास योजना सहित कई विकास कार्य प्रभावित हो गये हैं। मजदूरों को काम नहीं मिल पा रहा है और अनेक योजनाएं अधूरी पड़ी हैं।

बिहार

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Published / 2026-05-12 20:21:01
गोपालगंज : आर्केस्ट्रा से 40 नाबालिग मुक्त, 22 गिरफ्तार

गोपालगंज में आर्केस्ट्रा समूहों से मुक्त करायी गयी 40 से ज्यादा नाबालिग लड़कियां, 22 गिरफ्तार 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। बिहार के गोपालगंज जिले में आर्केस्ट्रा समूहों में नाबालिग लड़कियों के शोषण व उत्पीड़न के खिलाफ हालिया समय की सबसे बड़ी छापे की कार्रवाई में 40 से ज्यादा नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया गया। जिले के कुचायकोट थानाक्षेत्र में रात एक बजे से सुबह सात बजे तक तकरीबन 15 आर्केस्ट्रा समूहों पर हुई इस कार्रवाई में ट्रैफिकिंग व बच्चों के शोषण के आरोप में 22 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। 

यह पूरा अभियान अपर पुलिस महानिदेशक (कमजोर वर्ग) अमित जैन व गोपालगंज के पुलिस अधीक्षक विनय तिवारी की देखरेख में कुचायकोट पुलिस, एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन, नारायणी सेवा संस्थान व पटना स्थित बिहार पुलिस मुख्यालय ने संयुक्त रूप से चलाया। छापे की इस कार्रवाई में शामिल एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन और नारायणी सेवा संस्थान बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठन हैं। 

मुक्त करायी गयी लड़कियों की काउंसलिंग के बाद उनको सुरक्षित जगह भेज दिया गया और उनकी उम्र के सत्यापन की प्रक्रिया व अन्य कानूनी कार्रवाई जारी है। मुक्त करायी गयी लड़कियों की उम्र 10 से 17 साल है। फिलहाल मिली जानकारी के अनुसार इन बच्चियों को झांसा देकर ट्रैफिकिंग के जरिए पश्चिम बंगाल, असम, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से लाया गया था।  

बिहार में ट्रैफिकिंग गिरोहों व आर्केस्ट्रा समूहों के बीच गहरी सांठ-गांठ की ओर संकेत करते हुए एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन के वरिष्ठ निदेशक मनीष शर्मा ने कहा, इस अभियान ने एक बार इस तथ्य को उजागर किया है कि कितने बड़े पैमाने पर लड़कियों की ट्रैफिकिंग कर उन्हें राज्य के विभिन्न हिस्सों में चल रहे आर्केस्ट्रा समूहों में धकेला जा रहा है। इन लड़कियों को बहला-फुसलाकर यौन शोषण व उत्पीड़न के अंतहीन दलदल में धकेल दिया जाता है। हमें ट्रैफिकिंग के संगठित अपराध और आर्केस्ट्रा समूहों की मिलीभगत के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने की जरूरत है। 

इन्हें सख्त सजा देने के साथ ही पीड़ित बच्चियों के पुनर्वास व पर्याप्त मुआवजे की तत्काल आवश्यकता है। न्याय में किसी भी तरह की देरी इन बच्चों को दोबारा निराश कर सकती है। एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन और नारायणी सेवा संस्थान पिछले एक महीने से इन आर्केस्ट्रा समूहों की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे।

उन्होंने पाया कि आर्केस्ट्रा समूह शादी-ब्याह के समय ट्रैफिकिंग के जरिए पड़ोसी राज्यों से नाबालिग बच्चियों को लाते हैं और इन्हें विवाह समारोहों में भोजपुरी गानों पर अश्लील नृत्य के लिए मजबूर किया जाता है। हालांकि इनके यौन उत्पीड़न का सिलसिला समारोह खत्म होने के बाद भी जारी रहता है। चूंकि शादी-ब्याह का मौसम कुछ ही दिनों में खत्म होने वाला है, इसलिए छापे के लिए जानबूझ कर ऐसा दिन चुना गया जब कोई लग्न नहीं हो और ये सभी लड़कियां अपने ठिकानों पर मौजूद रहें।     

मुक्त कराये जाने के बाद काउंसलिंग के दौरान भयभीत दिख रही कई लड़कियों ने बताया कि उन्हें उनके कथित प्रेमी ने बेच दिया या फिर पैसे, नाम व बेहतर जिंदगी का लालच देकर शोषण के दलदल में धकेल दिया। कुछ लड़कियों ने बताया कि उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि अगर वे आर्केस्ट्रा से जुड़ी रहेंगी तो उन्हें भोजपुरी फिल्मों में काम करने का अवसर भी मिलेगा।   

ऐसे मामलों में जवाबदेही व तत्काल कार्रवाइयों की जरूरत पर जोर देते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के राष्ट्रीय संयोजक रवि कांत ने कहा, यह देखना दुखद है कि संगठित ट्रैफिकिंग गिरोह आर्केस्ट्रा समूहों के जरिए शोषण के इरादे से विभिन्न राज्यों में बच्चों को निशाना बना रहे हैं। यह कोई इकलौती घटना नहीं है बल्कि एक संगठित आपराधिक तंत्र की ओर इशारा करती है जो बच्चों की लाचारी, आर्केस्ट्रा जैसे धंधों में उनकी मांग और कानूनी सख्ती में कमी की वजह से फल-फूल रहा है। 

भारत में बच्चों की सुरक्षा के लिए काफी कड़े कानून हैं और हालिया समय में बिहार पुलिस की सख्ती बताती है कि वे ट्रैफिकिंग और बच्चों के शोषण के खात्मे के लिए गंभीर हैं। फिर भी राज्यों में आपसी समन्वय, शादी-ब्याह के मौसमों के दौरान इन पर सख्त निगरानी व जवाबदेही तंत्र को और मजबूत बनाने की जरूरत है ताकि इसका हमेशा के लिए खात्मा किया जा सके। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क कर सकते हैं।

Published / 2026-04-07 19:28:02
किशनगंज : नाबालिग की पिटाई कर जबरन बाल विवाह कराया, सात पर एफआईआर

एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। बिहार के किशनगंज जिले में एक 17 वर्षीय नाबालिग को मारपीट कर उसका 20 साल की युवती से जबरन विवाह करा दिया गया। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने सात आरोपियों के खिलाफ बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम सहित कई धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है। 

पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार घटना की रात रिजवान (बदला हुआ नाम) अपनी मां के साथ घर में था और पिता मजदूरी के लिए बाहर गये हुए थे। रात करीब नौ बजे आधा दर्जन लोगों ने दरवाजा खटखटाया और रिजवान की मां को धमकाते हुए उसका विवाह 20 साल की एक युवती से करने को कहा। 

मां के इनकार से नाराज आरोपी रिजवान को जबरन उठाकर एक होटल में ले गए। वहां उसे बंद कर मारा-पीटा गया इससे डरकर वह बेहोश हो गया। इसी दौरान बेहोशी की हालत में शादी की रस्में पूरी की गयीं। होश आने पर लड़के ने आरोपियों से उसका विवाह नहीं कराने की विनती की लेकिन इसी बीच उन्होंने मौलवी को बुलाकर जबरन निकाह पढ़ा दिया और निकाहनामे पर दस्तखत भी करा लिये। 

दबाव बनाने की गर्ज से आरोपियों ने पीड़ित परिवार से छह लाख रुपए की रंगदारी भी मांगी और पैसे नहीं देने पर झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी। रिजवान की मां अपने बेटे के जबरन बाल विवाह की शिकायत लेकर बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन जन निर्माण केंद्र तक पहुंची। संगठन ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत जिले के एसडीएम अनिकेत कुमार को सूचित किया। 

प्रशासन ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों के खिलाफ बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006, किशोर न्याय अधिनियम 2015 और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की। फिलहाल लड़का अपनी मां के पास सुरक्षित है और पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है। 

बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठन जन निर्माण केंद्र के राकेश कुमार ने कहा बाल विवाह की बहस हमेशा लड़कियों के इर्द-गिर्द घूमती है और यह गलत भी नहीं, क्योंकि वे सबसे बड़ी पीड़ित होती हैं। लेकिन लड़कों के साथ होने वाले ऐसे मामले अक्सर सुर्खियों से बाहर रह जाते हैं। 

समाज सोचता है लड़का है, झेल लेगा। जबकि बच्चा तो बच्चा होता है, चाहे बेटा हो या बेटी। बिहार में एक दौर जबरन विवाहों जिसे पकड़ुआ विवाह कहते हैं, का भी रहा है। ऐसे में जरूरी है कि प्रशासन चौकस रहे क्योंकि आम तौर पर इसके पीड़ित नाबालिग किशोर ही होते हैं। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क कर सकते हैं।

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