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Published / 2026-03-25 21:23:59
आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति में लायें सुधार : कमिश्नर

  • आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति में लायें सुधार : कमिश्नर
  • बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने व स्वच्छता सुनिश्चित करने के दिये सख्त निर्देश
  • प्रमंडलीय आयुक्त ने आंगनबाड़ी केंद्रों का किया औचक निरीक्षण, समस्याओं पर हुई सख्त 
  • आयुष्मान आरोग्य मंदिर सिंगरा कला में अनुपस्थित मिले स्वास्थ्य कर्मी

एबीएन न्यूज नेटवर्क, मेदिनीनगर, (पलामू)। आंगनबाड़ी केन्द्र सरकार की महत्वपूर्ण योजना का हिस्सा है। इसके माध्यम से बच्चों को शिक्षा और माताओं के स्वास्थ्य एवं पोषण को मजबूत किया जाता है। ऐसे में किसी भी स्तर पर लापरवाही न केवल कर्तव्यहीनता है, बल्कि यह समाज के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। पलामू प्रमंडल के आंगनबाड़ी केन्द्रों की बदहाल स्थिति व कमियों को दूर करने के लिए सेविका, सहायिका, सीडीपीओ और पर्यवेक्षिका को जिम्मेदारी निभाने की आवश्यकता है।  

जिला समाज कल्याण पदाधिकारी भी समय-समय पर केन्द्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाएं दुरूस्त करने संबंधी कार्य करवाने में अपनी भूमिका निभाएं। यह बातें प्रमंडलीय आयुक्त कुमुद सहाय ने कही। आयुक्त आज शहरी क्षेत्र के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों का औचक निरीक्षण कर व्यवस्था का जायजा ले रहीं थी।
आयुक्त ने हमीदगंज-1, हमीदगंज-3, न्यू एरिया हमीदगंज-3, सिंगरा खुर्द टांड़ पर एवं सिंगरा कला आंगनबाड़ी केंद्र का औचक निरीक्षण किया। 

निरीक्षण के क्रम में आयुक्त ने पाया कि कई आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पहचान हेतु बोर्ड तक नहीं लगे हैं, जिससे केन्द्रों की जानकारी नहीं मिल पा रही है। उन्होंने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए तत्काल सभी केंद्रों पर स्पष्ट एवं मानक के अनुरूप बोर्ड लगाने का निर्देश दिया। इसके अलावा कई केन्द्रों में बच्चों की उपस्थिति बेहद कम पाई गई। इसपर आयुक्त ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों का मुख्य उद्देश्य बच्चों के पोषण, शिक्षा एवं सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना है, लेकिन कम उपस्थिति इस उद्देश्य को प्रभावित कर रही है। उन्होंने सेविका एवं सहायिका को अपने-अपने पोषक क्षेत्र में अवस्थित घरों में लोगों से संपर्क कर अभिभावकों को जागरूक करने और बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

निरीक्षण के दौरान बच्चों की साफ-सफाई की स्थिति भी संतोषजनक नहीं पायी गयी। इसपर आयुक्त ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से किसी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं की जायेगी। उन्होंने केन्द्रों में नियमित साफ-सफाई, बच्चों की व्यक्तिगत स्वच्छता एवं पोषण आहार की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया।

उन्होंने आंगनबाड़ी केन्द्र की सेविका एवं सहायिका के बीच बेहतर तालमेल व समन्वय बनाकर बच्चों एवं महिलाओं के हित में कार्य करना सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया। 
आयुक्त ने निरीक्षण के दौरान उपस्थित पर्यवेक्षिका एवं बाल विकास परियोजना पदाधिकारी को प्रत्यक्ष स्थिति की ओर इंगित करते स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि भविष्य में ऐसी ही स्थिति पाई गई, तो संबंधित सेविका एवं पदाधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जायेगी।

आयुक्त ने पदाधिकारियों को अपने अधीन के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों का नियमित भ्रमण एवं प्रवेक्षण सुनिश्चित करने तथा कमियों को शीघ्र दूर करने की व्यवस्था करने का सख्त निर्देश दिया। निरीक्षण के दौरान आयुक्त ने उपस्थित बच्चों से बातचीत की और उनके बीच टॉफी और बिस्किट का वितरण कर पढ़ाई के प्रति उनका हौसला बढ़ाया। 

सिंगरा कला स्थित आंगनबाड़ी केंद्र के निरीक्षण के दौरान इसी भवन में संचालित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में 11 बजे तक कोई भी स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित नहीं पाया गया। आयुक्त ने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह स्वास्थ्य कर्मियों को चेतावनी देते हुए कार्य में तत्परता बरतने का निर्देश दिया है। निरीक्षण के दौरान जिला समाज कल्याण. पदाधिकारी नीता चौहान एवं समाज कल्याण से जुड़े अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

Published / 2026-03-25 21:21:13
पूर्वी सिंहभूम : 200 किलो के ऐतिहासिक बम को सेना ने किया निष्क्रिय

  • पूर्वी सिंहभूम : 200 किलो के ऐतिहासिक बम को सेना ने किया निष्क्रिय
  • पूर्वी सिंहभूम में मिला द्वितीय विश्व युद्ध का 200 किलो का बम, सेना ने किया निष्क्रिय

टीम एबीएन, रांची। पूर्वी सिंहभूम जिले में भारतीय सेना ने एक बड़े खतरे को टाल दिया। यहां मिले द्वितीय विश्व युद्ध के समय के संदिग्ध बम को सेना के जवानों ने सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय कर दिया। राहत की बात यह है कि इस दौरान किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ।

अधिकारियों के अनुसार, यह करीब 200 किलो वजनी बम था, जो गैस सिलेंडर जैसा दिखता था। इसे पिछले सप्ताह बहरागोड़ा इलाके में पानीपाड़ा-नागुडसाई सड़क के पास रेत खुदाई के दौरान पाया गया था।

घटना की जानकारी मिलने के बाद सेना की टीम और रांची से बम निरोधक दस्ता मौके पर पहुंचा। टीम ने ड्रोन की मदद से पूरे इलाके की जांच की और फिर सावधानी से बम को निष्क्रिय कर दिया। झारखंड पुलिस ने इस काम के लिए पहले ही सेना से मदद मांगी थी। सेना की इस कार्रवाई से एक बड़ा हादसा होने से बच गया।

बिहार

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Published / 2026-03-18 20:32:53
सीएम हेमंत से मिले बिहार विधान परिषद के सदस्य

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बिहार विधान परिषद समिति के सदस्यों ने की मुलाकात 

टीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से झारखंड विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कक्ष में बिहार विधान परिषद की बाल संरक्षण एवं महिला सशक्तिकरण समिति के सदस्यों ने मुलाकात की। 

इस अवसर पर समिति के सदस्यों ने मुख्यमंत्री को बाल संरक्षण एवं महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में किये जा रहे अपने कार्यों से अवगत कराया। साथ ही उन्होंने बताया कि झारखंड विधानसभा के परिभ्रमण के दौरान यहां की महिला एवं बाल विकास समिति द्वारा किये जा रहे कार्यों की जानकारी प्राप्त हुई और दोनों राज्यों के अनुभवों का आदान-प्रदान भी किया गया। 

मौके पर कल्पना सोरेन, जो झारखंड विधानसभा की महिला एवं बाल विकास समिति की सभापति हैं, भी उपस्थित रहीं। मुख्यमंत्री से मुलाकात करने वालों में बिहार विधान परिषद की बाल संरक्षण और महिला सशक्तिकरण समिति की अध्यक्ष डॉ कुमुद वर्मा, सदस्य रीना यादव, मुन्नी देवी और निवेदिता सिंह सहित अन्य शामिल थे।

Published / 2026-03-08 15:44:14
बिहार में तो सिर्फ और सिर्फ नीतीशे कुमार...

बिहार में तो सिर्फ और सिर्फ नीतीशे कुमार...

त्रिवेणी दास 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। पिछला बिहार विधानसभा का चुनाव नवंबर 2025 को हुआ था। 243 विधानसभा क्षेत्र में 89 भाजपा, 85 जदयू और 19 एलजेपी (रामविलास) तथा अन्य एनडीए गठबंधन कुल 202 सीट जीत कर बहुमत का आंकड़ा प्राप्त किया और नीतीश कुमार 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बने। मात्र (3) सवा तीन (3:15) महीना के भीतर नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री का कुर्सी छोड़कर राज्यसभा के सांसद के रूप में दिल्ली जाने का निर्णय लिया जो अचंभित भी करता है और राजनीति के लिए आश्चर्यजनक है।

बताया यह जा रहा है कि नीतीश कुमार चारों सदन की सदस्यता का रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं इसीलिए उन्होंने स्वेच्छा से मुख्यमंत्री पद छोड़ना स्वीकार किया; परंतु सियासत एवं वक्त में एकदम से सीधा अनोनाश्रय रिश्ता होता है जो कभी भारी पड़ता है, कभी ढीला पड़ जाता है और कभी राजनीतिज्ञ को कमजोर बना देता है। 

वक्त को भारी पड़ते हुए देख राजनीति के ट्रैक में लाइन बदलने का निर्णय नीतीश कुमार के राजनीतिक परिपक्वता का परिचायक है। आजादी के बाद से भारतीय राजनीति में परिवारवाद का प्रचलन कोई अपवाद नहीं है, विशेष कर कांग्रेस एवं क्षेत्रीय दलों में तो यही परिपाटी रही है। इस परिपाटी का अनुपालन जदयू में भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है। 

नीतीश कुमार के सुपुत्र निशांत का जदयू के राजनीति में एंट्री हो चुका है। वह बकायदे सक्रिय हो चुके हैं और अपने बाबूजी की तरह अपनी राजनीतिक यात्रा बिहार के चंपारण से शुरू करने वाले हैं। पार्टी के जिला अध्यक्षों से उन्होंने लंबी मंत्रणा की है और पार्टी के युवा विधायकों के साथ जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के आवास पर लंबी चर्चा की है। 

इधर बिहार विधानसभा के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी लगातार अधिक सीट जीतने के बाद भी अधिकतम ऊंचाई उपमुख्यमंत्री तक ही सीमित रही है। सुशील कुमार मोदी की लंबी पारी के कारण भाजपा में कोई अन्य नेता उभर कर सामने नहीं आ पाया है। बिहार से नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर पहले ही दिल्ली बुला लिया गया और अब उन्हें राज्यसभा भेज कर उनका स्थाई निवास दिल्ली बना दिया जा रहा है। 

बीजेपी के पास बिहार के राजनीति की उच्चतम पद पर काबिज होने का यह सुनहरा मौका है और वह मुख्यमंत्री बनाने के अत्यंत करीब पहुंच भी चुकी है। भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री कौन होगा यह एक बड़ा सवाल है। हमेशा की तरह मोदीजी इस निर्णय पर भी चौंकाने का कार्य करेंगे? राजनीति के पंडितों के दिमाग में इसके उत्तर नहीं मिल पा रहे हैं। 

नीतीश कुमार का कद, काठी, प्रभाव और केंद्र की सरकार के टिकाऊ के लिए अत्यंत आवश्यक समर्थन को देखते हुए इतना तो तय है कि बिहार की राजनीति और सरकार में उनके सुपुत्र निशांत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाली है।

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