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Published / 2026-03-18 23:06:53
धनबाद : स्कूल में मिड डे मील बंद

धनबाद : स्कूल में मिड डे मील बंद, चावल की कमी से छात्र भूखे लौटे घर

एबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। जिले के एक मध्य विद्यालय में चावल खत्म होने के कारण छात्रों को मध्याह्न भोजन नहीं मिल पा रहा है। इससे सैकड़ों बच्चों को बिना खाना खाए ही घर लौटना पड़ रहा है, जिससे उनकी पढ़ाई और सेहत दोनों पर असर पड़ सकता है।

दो दिनों से बच्चों को खाना नहीं मिल रहा

जिले के मध्य विद्यालय सेंद्रा बांसजोड़ा में बुधवार को बच्चों को मध्याह्न भोजन (एमडीएम) नहीं मिला। स्कूल में मंगलवार को ही चावल खत्म हो गया था। इसकी जानकारी पहले ही शिक्षा विभाग को दे दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद चावल नहीं पहुंचा। 

इस स्कूल में कक्षा 1 से 8 तक करीब 270 छात्र पढ़ते हैं। हर महीने स्कूल में 4 से 5 क्विंटल चावल की जरूरत होती है। चावल नहीं होने की वजह से दो दिनों से बच्चों को खाना नहीं मिल रहा है। कई बच्चों ने बताया कि वे स्कूल में मिलने वाले भोजन पर ही निर्भर रहते हैं।

आने वाले दिनों में बच्चों को मध्याह्न भोजन नहीं मिल पाएगा

विद्यालय प्रबंध समिति की अध्यक्ष उमा देवी ने बताया कि चावल की कमी के कारण फिलहाल मध्याह्न भोजन बंद रखना पड़ रहा है। इस बारे में शिक्षा विभाग के अधिकारियों को पत्र लिखकर जानकारी दे दी गई है। स्कूल के प्रभारी सुनील कुमार राय ने भी कहा कि चावल पूरी तरह खत्म हो चुका है। 

विभाग से बात करने पर बताया गया कि इस वित्तीय वर्ष के लिए जो चावल मिलना था, वह पहले ही दिया जा चुका है। अब स्थिति यह है कि जनवरी के अंत तक भोजन मिलने की संभावना नहीं है। अप्रैल में नया आवंटन कब होगा, यह भी साफ नहीं है। ऐसे में आने वाले दिनों में बच्चों को मध्याह्न भोजन नहीं मिल पाएगा।

Published / 2026-03-18 23:01:56
कपड़ा उद्योग कंपनी में देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में सफल आंदोलन

पांच सूत्री मांगों पर बनी लिखित सहमति 

टीम एबीएन, रांची। लंबे समय से लंबित वेतन भुगतान एवं अन्य समस्याओं को लेकर आज श्रमिकों द्वारा जोरदार आंदोलन किया गया। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के वरीय उपाध्यक्ष देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व एवं समर्थन में अस्टाइलेक्चर अप्रैल प्राइवेट लिमिटेड,कुल्ही के समक्ष धरना-प्रदर्शन हुआ। 

इस दौरान श्रमिकों ने कंपनी प्रबंधन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। सूचना मिलते ही स्थानीय औरमांझी थाना प्रशासन मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रित किया। काफी देर तक चली वार्ता के पश्चात श्रमिकों और कंपनी प्रबंधक गौरव सिंह के बीच पांच सूत्री मांगों पर सामूहिक रूप से लिखित सहमति बनी। 

वार्ता के दौरान देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि किसी भी कंपनी की रीढ़ उसके मजदूर होते हैं, इसलिए उनके न्यायोचित अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती। उन्होंने स्पष्ट किया कि मजदूर अधिनियम-1948 के तहत न्यूनतम मजदूरी दर के अनुरूप श्रमिकों को सम्मानपूर्वक भुगतान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

बिहार

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Published / 2026-03-18 20:32:53
सीएम हेमंत से मिले बिहार विधान परिषद के सदस्य

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बिहार विधान परिषद समिति के सदस्यों ने की मुलाकात 

टीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से झारखंड विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कक्ष में बिहार विधान परिषद की बाल संरक्षण एवं महिला सशक्तिकरण समिति के सदस्यों ने मुलाकात की। 

इस अवसर पर समिति के सदस्यों ने मुख्यमंत्री को बाल संरक्षण एवं महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में किये जा रहे अपने कार्यों से अवगत कराया। साथ ही उन्होंने बताया कि झारखंड विधानसभा के परिभ्रमण के दौरान यहां की महिला एवं बाल विकास समिति द्वारा किये जा रहे कार्यों की जानकारी प्राप्त हुई और दोनों राज्यों के अनुभवों का आदान-प्रदान भी किया गया। 

मौके पर कल्पना सोरेन, जो झारखंड विधानसभा की महिला एवं बाल विकास समिति की सभापति हैं, भी उपस्थित रहीं। मुख्यमंत्री से मुलाकात करने वालों में बिहार विधान परिषद की बाल संरक्षण और महिला सशक्तिकरण समिति की अध्यक्ष डॉ कुमुद वर्मा, सदस्य रीना यादव, मुन्नी देवी और निवेदिता सिंह सहित अन्य शामिल थे।

Published / 2026-03-08 15:44:14
बिहार में तो सिर्फ और सिर्फ नीतीशे कुमार...

बिहार में तो सिर्फ और सिर्फ नीतीशे कुमार...

त्रिवेणी दास 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। पिछला बिहार विधानसभा का चुनाव नवंबर 2025 को हुआ था। 243 विधानसभा क्षेत्र में 89 भाजपा, 85 जदयू और 19 एलजेपी (रामविलास) तथा अन्य एनडीए गठबंधन कुल 202 सीट जीत कर बहुमत का आंकड़ा प्राप्त किया और नीतीश कुमार 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बने। मात्र (3) सवा तीन (3:15) महीना के भीतर नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री का कुर्सी छोड़कर राज्यसभा के सांसद के रूप में दिल्ली जाने का निर्णय लिया जो अचंभित भी करता है और राजनीति के लिए आश्चर्यजनक है।

बताया यह जा रहा है कि नीतीश कुमार चारों सदन की सदस्यता का रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं इसीलिए उन्होंने स्वेच्छा से मुख्यमंत्री पद छोड़ना स्वीकार किया; परंतु सियासत एवं वक्त में एकदम से सीधा अनोनाश्रय रिश्ता होता है जो कभी भारी पड़ता है, कभी ढीला पड़ जाता है और कभी राजनीतिज्ञ को कमजोर बना देता है। 

वक्त को भारी पड़ते हुए देख राजनीति के ट्रैक में लाइन बदलने का निर्णय नीतीश कुमार के राजनीतिक परिपक्वता का परिचायक है। आजादी के बाद से भारतीय राजनीति में परिवारवाद का प्रचलन कोई अपवाद नहीं है, विशेष कर कांग्रेस एवं क्षेत्रीय दलों में तो यही परिपाटी रही है। इस परिपाटी का अनुपालन जदयू में भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है। 

नीतीश कुमार के सुपुत्र निशांत का जदयू के राजनीति में एंट्री हो चुका है। वह बकायदे सक्रिय हो चुके हैं और अपने बाबूजी की तरह अपनी राजनीतिक यात्रा बिहार के चंपारण से शुरू करने वाले हैं। पार्टी के जिला अध्यक्षों से उन्होंने लंबी मंत्रणा की है और पार्टी के युवा विधायकों के साथ जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के आवास पर लंबी चर्चा की है। 

इधर बिहार विधानसभा के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी लगातार अधिक सीट जीतने के बाद भी अधिकतम ऊंचाई उपमुख्यमंत्री तक ही सीमित रही है। सुशील कुमार मोदी की लंबी पारी के कारण भाजपा में कोई अन्य नेता उभर कर सामने नहीं आ पाया है। बिहार से नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर पहले ही दिल्ली बुला लिया गया और अब उन्हें राज्यसभा भेज कर उनका स्थाई निवास दिल्ली बना दिया जा रहा है। 

बीजेपी के पास बिहार के राजनीति की उच्चतम पद पर काबिज होने का यह सुनहरा मौका है और वह मुख्यमंत्री बनाने के अत्यंत करीब पहुंच भी चुकी है। भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री कौन होगा यह एक बड़ा सवाल है। हमेशा की तरह मोदीजी इस निर्णय पर भी चौंकाने का कार्य करेंगे? राजनीति के पंडितों के दिमाग में इसके उत्तर नहीं मिल पा रहे हैं। 

नीतीश कुमार का कद, काठी, प्रभाव और केंद्र की सरकार के टिकाऊ के लिए अत्यंत आवश्यक समर्थन को देखते हुए इतना तो तय है कि बिहार की राजनीति और सरकार में उनके सुपुत्र निशांत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाली है।

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