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Published / 2026-05-27 19:11:26
लोहरदगा : जनसमस्या लेकर ग्रामीण पहुंचे सांसद आवास, मिला समाधान का भरोसा

दर्जनों ग्रामीण जनसमस्याओं पर लेकर पहुंचे सांसद सुखदेव भगत आवास, सांसद ने दिया त्वरित समाधान का भरोसा 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। लोकसभा सांसद सुखदेव भगत  बुधवार को अपने लोहरदगा स्थित आवास पर क्षेत्र के विभिन्न गांवों से आए लोगों की सड़क, बिजली, पेयजल, चिकित्सा सहित अनेक  समस्याएं सुनीं। सांसद ने एक-एक कर सभी जनता से मुलाकात की और उनकी शिकायतों का निदान करने का प्रयास किया। 

करचा टोली के ग्रामीणों ने लोहरदगा रेलवे क्वार्टर के पीछे आम जनता को आने जाने के लिए रास्ता दिलाने, भंडरा, आकाशी, खारु माटू, गुड्डीबाघी के ग्रामीणों ने जले ट्रांसफार्मर को बदलने, मनहो -बाघा पथ में रास्ता नहीं होने के बावजूद पुल का निर्माण कराकर सरकारी राशि का दुरुपयोग करने सहित असाध्य रोग के कई मरीज सांसद से मिलकर उनका निदान करने की मांग की। 

सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि गर्मी में पानी और बिजली जीवन की सबसे बड़ी जरूरत है। इस पर अधिकारियों की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को जले ट्रांसफार्मर बदलने एवं खराब चापाकल को शीघ्र मरम्मत करने का निर्देश दिया। 

जरूरत पड़ने पर सांसद निधि से जल मीनार भी लगवाये जायेंगे। रास्ता नहीं होने के बावजूद मनहो बाघा पथ में पुल का निर्माण करवाया गया, जिसका उपयोग नहीं हो रहा है। इसकी जांच करवा कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जायेगी। श्री भगत ने कहा कि अभी तक दर्जनों असाध्य रोग के मरीजों को प्रधानमंत्री राहत कोष से राशि दिलवायी गयी है। गरीबों का इलाज हो जाये इससे बड़ी मानव सेवा क्या हो सकती है? 

जनता की सेवा ही मेरा पहला धर्म 

सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि उनका मकसद सिर्फ दिल्ली में संसद जाना नहीं, बल्कि गांव-गांव जाकर लोगों का दुख-दर्द बांटना है। चुनाव के समय ही नहीं, हर समय जनता के बीच रहकर लोगों की समस्याओं का निदान किया जायेगा।

सांसद ने कहा कि जनता के बीच रहकर उनकी समस्या सुनना और समाधान करना मेरी पहली प्राथमिकता है। मौके पर उपस्थित ग्रामीणों को सांसद ने उनके समस्याओं का निदान प्राथमिकता के आधार पर करने का आश्वासन दिया।

Published / 2026-05-27 19:09:24
गढ़वा : स्नान करने गयी दो बच्चियां तालाब में डूबीं, मौत

तालाब में नहाने गयी दो बच्चियों की डूबकर दर्दनाक मौत, गांव में पसरा मातम 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, गढ़वा। जिले के नगर उंटारी थाना क्षेत्र अंतर्गत कुंबा गांव में तालाब में डूबने से दो मासूम बच्चियों की दर्दनाक मौत हो गयी। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गयी है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शवों को कब्जे में लेते हुए पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।  

रातभर आसपास के इलाकों बच्चियों को तलाश रहे थे परिजन  

पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पतरिहा कलां गांव के हरिजन टोला निवासी राजू राम की बेटी प्रियांशु कुमारी (8) और परमेश्वर राम की बेटी रेशमा कुमारी (10) मंगलवार सुबह करीब नौ बजे घर से बहवा पहाड़ की ओर लकड़ी चुनने निकली थीं। शाम तक दोनों बच्चियां घर नहीं लौटीं तो परिजनों की चिंता बढ़ गयी। इसके बाद ग्रामीणों और परिजनों ने रातभर आसपास के इलाकों में उनकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। 

तालाब में मिले दोनों बच्चियों के शव

बुधवार सुबह करीब छह बजे गांव के कुछ बच्चों की नजर तालाब में दोनों बच्चियों पर पड़ी। बच्चों ने तत्काल इसकी सूचना ग्रामीणों को दी। देखते ही देखते मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गयी। ग्रामीणों की मदद से दोनों बच्चियों के शव तालाब से बाहर निकाले गये। घटना की सूचना मिलते ही नगर उंटारी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। 

जानिये घटना पर क्या बोली पुलिस  

स्थानीय लोगों ने बताया कि दोनों बच्चियां लकड़ी चुनने के लिए गयी थीं। भीषण गर्मी के कारण वे तालाब में नहाने उतर गयीं। इसी दौरान दोनों गहरे पानी में चली गईं और डूबने से उनकी मौत हो गयी। ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले भी इस तालाब में डूबने की कई घटनाएं हो चुकी हैं। 

घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से तालाब के चारों ओर घेराबंदी कराने, सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने और चेतावनी बोडर् लगाने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। वहीं एसडीपीओ सतेंद्र सिंह ने बताया कि तालाब में डूबने से दो बच्चियों की मौत हुई है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया की जा रही है।

बिहार

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Published / 2026-05-12 20:21:01
गोपालगंज : आर्केस्ट्रा से 40 नाबालिग मुक्त, 22 गिरफ्तार

गोपालगंज में आर्केस्ट्रा समूहों से मुक्त करायी गयी 40 से ज्यादा नाबालिग लड़कियां, 22 गिरफ्तार 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। बिहार के गोपालगंज जिले में आर्केस्ट्रा समूहों में नाबालिग लड़कियों के शोषण व उत्पीड़न के खिलाफ हालिया समय की सबसे बड़ी छापे की कार्रवाई में 40 से ज्यादा नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया गया। जिले के कुचायकोट थानाक्षेत्र में रात एक बजे से सुबह सात बजे तक तकरीबन 15 आर्केस्ट्रा समूहों पर हुई इस कार्रवाई में ट्रैफिकिंग व बच्चों के शोषण के आरोप में 22 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। 

यह पूरा अभियान अपर पुलिस महानिदेशक (कमजोर वर्ग) अमित जैन व गोपालगंज के पुलिस अधीक्षक विनय तिवारी की देखरेख में कुचायकोट पुलिस, एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन, नारायणी सेवा संस्थान व पटना स्थित बिहार पुलिस मुख्यालय ने संयुक्त रूप से चलाया। छापे की इस कार्रवाई में शामिल एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन और नारायणी सेवा संस्थान बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठन हैं। 

मुक्त करायी गयी लड़कियों की काउंसलिंग के बाद उनको सुरक्षित जगह भेज दिया गया और उनकी उम्र के सत्यापन की प्रक्रिया व अन्य कानूनी कार्रवाई जारी है। मुक्त करायी गयी लड़कियों की उम्र 10 से 17 साल है। फिलहाल मिली जानकारी के अनुसार इन बच्चियों को झांसा देकर ट्रैफिकिंग के जरिए पश्चिम बंगाल, असम, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से लाया गया था।  

बिहार में ट्रैफिकिंग गिरोहों व आर्केस्ट्रा समूहों के बीच गहरी सांठ-गांठ की ओर संकेत करते हुए एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन के वरिष्ठ निदेशक मनीष शर्मा ने कहा, इस अभियान ने एक बार इस तथ्य को उजागर किया है कि कितने बड़े पैमाने पर लड़कियों की ट्रैफिकिंग कर उन्हें राज्य के विभिन्न हिस्सों में चल रहे आर्केस्ट्रा समूहों में धकेला जा रहा है। इन लड़कियों को बहला-फुसलाकर यौन शोषण व उत्पीड़न के अंतहीन दलदल में धकेल दिया जाता है। हमें ट्रैफिकिंग के संगठित अपराध और आर्केस्ट्रा समूहों की मिलीभगत के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने की जरूरत है। 

इन्हें सख्त सजा देने के साथ ही पीड़ित बच्चियों के पुनर्वास व पर्याप्त मुआवजे की तत्काल आवश्यकता है। न्याय में किसी भी तरह की देरी इन बच्चों को दोबारा निराश कर सकती है। एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन और नारायणी सेवा संस्थान पिछले एक महीने से इन आर्केस्ट्रा समूहों की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे।

उन्होंने पाया कि आर्केस्ट्रा समूह शादी-ब्याह के समय ट्रैफिकिंग के जरिए पड़ोसी राज्यों से नाबालिग बच्चियों को लाते हैं और इन्हें विवाह समारोहों में भोजपुरी गानों पर अश्लील नृत्य के लिए मजबूर किया जाता है। हालांकि इनके यौन उत्पीड़न का सिलसिला समारोह खत्म होने के बाद भी जारी रहता है। चूंकि शादी-ब्याह का मौसम कुछ ही दिनों में खत्म होने वाला है, इसलिए छापे के लिए जानबूझ कर ऐसा दिन चुना गया जब कोई लग्न नहीं हो और ये सभी लड़कियां अपने ठिकानों पर मौजूद रहें।     

मुक्त कराये जाने के बाद काउंसलिंग के दौरान भयभीत दिख रही कई लड़कियों ने बताया कि उन्हें उनके कथित प्रेमी ने बेच दिया या फिर पैसे, नाम व बेहतर जिंदगी का लालच देकर शोषण के दलदल में धकेल दिया। कुछ लड़कियों ने बताया कि उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि अगर वे आर्केस्ट्रा से जुड़ी रहेंगी तो उन्हें भोजपुरी फिल्मों में काम करने का अवसर भी मिलेगा।   

ऐसे मामलों में जवाबदेही व तत्काल कार्रवाइयों की जरूरत पर जोर देते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के राष्ट्रीय संयोजक रवि कांत ने कहा, यह देखना दुखद है कि संगठित ट्रैफिकिंग गिरोह आर्केस्ट्रा समूहों के जरिए शोषण के इरादे से विभिन्न राज्यों में बच्चों को निशाना बना रहे हैं। यह कोई इकलौती घटना नहीं है बल्कि एक संगठित आपराधिक तंत्र की ओर इशारा करती है जो बच्चों की लाचारी, आर्केस्ट्रा जैसे धंधों में उनकी मांग और कानूनी सख्ती में कमी की वजह से फल-फूल रहा है। 

भारत में बच्चों की सुरक्षा के लिए काफी कड़े कानून हैं और हालिया समय में बिहार पुलिस की सख्ती बताती है कि वे ट्रैफिकिंग और बच्चों के शोषण के खात्मे के लिए गंभीर हैं। फिर भी राज्यों में आपसी समन्वय, शादी-ब्याह के मौसमों के दौरान इन पर सख्त निगरानी व जवाबदेही तंत्र को और मजबूत बनाने की जरूरत है ताकि इसका हमेशा के लिए खात्मा किया जा सके। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क कर सकते हैं।

Published / 2026-04-07 19:28:02
किशनगंज : नाबालिग की पिटाई कर जबरन बाल विवाह कराया, सात पर एफआईआर

एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। बिहार के किशनगंज जिले में एक 17 वर्षीय नाबालिग को मारपीट कर उसका 20 साल की युवती से जबरन विवाह करा दिया गया। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने सात आरोपियों के खिलाफ बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम सहित कई धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है। 

पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार घटना की रात रिजवान (बदला हुआ नाम) अपनी मां के साथ घर में था और पिता मजदूरी के लिए बाहर गये हुए थे। रात करीब नौ बजे आधा दर्जन लोगों ने दरवाजा खटखटाया और रिजवान की मां को धमकाते हुए उसका विवाह 20 साल की एक युवती से करने को कहा। 

मां के इनकार से नाराज आरोपी रिजवान को जबरन उठाकर एक होटल में ले गए। वहां उसे बंद कर मारा-पीटा गया इससे डरकर वह बेहोश हो गया। इसी दौरान बेहोशी की हालत में शादी की रस्में पूरी की गयीं। होश आने पर लड़के ने आरोपियों से उसका विवाह नहीं कराने की विनती की लेकिन इसी बीच उन्होंने मौलवी को बुलाकर जबरन निकाह पढ़ा दिया और निकाहनामे पर दस्तखत भी करा लिये। 

दबाव बनाने की गर्ज से आरोपियों ने पीड़ित परिवार से छह लाख रुपए की रंगदारी भी मांगी और पैसे नहीं देने पर झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी। रिजवान की मां अपने बेटे के जबरन बाल विवाह की शिकायत लेकर बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन जन निर्माण केंद्र तक पहुंची। संगठन ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत जिले के एसडीएम अनिकेत कुमार को सूचित किया। 

प्रशासन ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों के खिलाफ बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006, किशोर न्याय अधिनियम 2015 और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की। फिलहाल लड़का अपनी मां के पास सुरक्षित है और पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है। 

बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठन जन निर्माण केंद्र के राकेश कुमार ने कहा बाल विवाह की बहस हमेशा लड़कियों के इर्द-गिर्द घूमती है और यह गलत भी नहीं, क्योंकि वे सबसे बड़ी पीड़ित होती हैं। लेकिन लड़कों के साथ होने वाले ऐसे मामले अक्सर सुर्खियों से बाहर रह जाते हैं। 

समाज सोचता है लड़का है, झेल लेगा। जबकि बच्चा तो बच्चा होता है, चाहे बेटा हो या बेटी। बिहार में एक दौर जबरन विवाहों जिसे पकड़ुआ विवाह कहते हैं, का भी रहा है। ऐसे में जरूरी है कि प्रशासन चौकस रहे क्योंकि आम तौर पर इसके पीड़ित नाबालिग किशोर ही होते हैं। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क कर सकते हैं।

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