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Published / 2026-05-29 21:04:43
भीषण गर्मी में महिला चेतना मंच ने बांटा तरबूज

टीम एबीएन, रांची। भीषण गर्मी एवं बढ़ते तापमान को देखते हुए महिला चेतना मंच के तत्वावधान में रांची के रातू रोड स्थित बीजेपी कार्यालय के समीप राहगीरों के बीच तरबूज का वितरण किया गया। सामाजिक सरोकार से जुड़े इस सेवा कार्य में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया तथा राहगीरों को गर्मी से राहत पहुंचाने का प्रयास किया गया। 

मंच की अध्यक्ष उषा मंत्री एवं सचिव किरण गाड़ोदिया ने संयुक्त रूप से बताया कि लगातार पड़ रही तेज गर्मी को ध्यान में रखते हुए लगभग 100 किलो तरबूज का वितरण किया गया। 

उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडक एवं ऊर्जा प्रदान करने वाले फलों का सेवन अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से राह चलते लोगों, मजदूरों, रिक्शा चालकों एवं आम नागरिकों के बीच तरबूज बांटकर उन्हें राहत पहुंचाने का प्रयास किया गया। 

उन्होंने कहा कि महिला चेतना मंच द्वारा समय-समय पर विभिन्न सामाजिक एवं जनहितकारी कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। संस्था हमेशा जरूरतमंदों की सहायता, सेवा एवं समाज कल्याण के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाती रही है।

मंच की ओर से भविष्य में भी इसी प्रकार के सेवा कार्य जारी रखने की बात कही गई। इस अवसर पर मंच की सदस्य शारदा केडिया, सरोज पेड़ीवाल, उर्मिला राठी, कंचन पोद्दार, सिंपल चौधरी, बिंदु, ज्योति, लक्ष्मी, मोनिका, रेखा, हिमा सहित कई महिलाओं ने सक्रिय सहयोग किया। 

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने महिला चेतना मंच के इस सेवा कार्य की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक पहल बताया। उक्त जानकारी महिला चेतना मंच के सचिव किरण गाड़ोदिया ने दी। 

Published / 2026-05-29 20:59:38
राज्यसभा चुनाव : चार वोट के लिए बड़े खेल की तैयारी में भाजपा

राज्यसभा की चुनाव में कौन मारेगा बाजी? दो सीटों को लेकर सियासत तेज, चार वोट की जुगाड़ में भाजपा 

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर 18 जून को होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गयी है। सत्ता पक्ष जहां दोनों सीटों पर जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रहा है। वहीं भाजपा भी मजबूती के साथ चुनाव लड़ने की रणनीति में जुटी हुई है। 

विधानसभा में मौजूदा संख्या बल को देखते हुए भाजपा को जीत के लिए अतिरिक्त चार वोटों की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में पार्टी की नजर संभावित क्रॉस वोटिंग और सहयोगी दलों के समर्थन पर टिकी हुई है। 

सत्ता पक्ष में उम्मीदवारों को लेकर चर्चा तेज 

सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से संभावित उम्मीदवारों के नामों को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। झामुमो की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की पुत्री और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की बड़ी बहन नेमनी सोरेन का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। इसके अलावा झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य और विधायक कल्पना सोरेन के नामों की भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा है। 

भाजपा में कई बड़े नामों पर मंथन 

वहीं, एनडीए खेमे में भाजपा की ओर से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, रघुवर दास और सीता सोरेन के नामों पर मंथन चल रहा है। इसके साथ ही एक आईआरएस अधिकारी निशा उरांव का नाम भी चर्चा में है। निशा उरांव कांग्रेस विधायक रामेश्वर उरांव की पुत्री हैं, जिससे राजनीतिक हलकों में इस नाम को लेकर भी कई तरह की अटकलें लगायी जा रही हैं। 

कांग्रेस में भी दावेदारों की हलचल 

कांग्रेस में भी संभावित उम्मीदवारों को लेकर हलचल तेज हो गयी है। पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप बलमुचु और राजेश ठाकुर के नाम प्रमुख दावेदारों में बताये जा रहे हैं। पार्टी नेतृत्व संभावित समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों के चयन पर मंथन कर रहा है। 

बाबूलाल मरांडी के बयान से बढ़ी सियासी चर्चा 

इस बीच विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि भाजपा के भीतर कई योग्य नाम सामने आये हैं और प्रदेश इकाई सभी संभावित उम्मीदवारों की सूची केंद्रीय नेतृत्व को भेजेगी। अंतिम फैसला दिल्ली स्तर पर लिया जायेगा। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी और जीत सुनिश्चित करने की दिशा में काम करेगी। 

अंतरात्मा की आवाज पर मतदान करने की अपील  

राजनीतिक गलियारों में बाबूलाल मरांडी के उस बयान की भी चर्चा है, जिसमें उन्होंने विधायकों से अंतरात्मा की आवाज पर मतदान करने की अपील की थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा संभावित क्रॉस वोटिंग की उम्मीद के साथ रणनीति तैयार कर रही है। यही कारण है कि पार्टी सभी राजनीतिक समीकरणों को साधने में जुटी हुई है। 

केंद्रीय नेतृत्व के फैसले पर टिकी निगाहें 

राज्यसभा चुनाव को लेकर भाजपा के भीतर जारी मंथन और नेताओं की बढ़ती सक्रियता ने झारखंड की राजनीति को एक बार फिर गर्मा दिया है। अब सबकी नजरें केंद्रीय नेतृत्व के फैसले पर टिकी हैं, जो आने वाले दिनों में उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम मुहर लगायेगा।

बिहार

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Published / 2026-05-12 20:21:01
गोपालगंज : आर्केस्ट्रा से 40 नाबालिग मुक्त, 22 गिरफ्तार

गोपालगंज में आर्केस्ट्रा समूहों से मुक्त करायी गयी 40 से ज्यादा नाबालिग लड़कियां, 22 गिरफ्तार 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। बिहार के गोपालगंज जिले में आर्केस्ट्रा समूहों में नाबालिग लड़कियों के शोषण व उत्पीड़न के खिलाफ हालिया समय की सबसे बड़ी छापे की कार्रवाई में 40 से ज्यादा नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया गया। जिले के कुचायकोट थानाक्षेत्र में रात एक बजे से सुबह सात बजे तक तकरीबन 15 आर्केस्ट्रा समूहों पर हुई इस कार्रवाई में ट्रैफिकिंग व बच्चों के शोषण के आरोप में 22 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। 

यह पूरा अभियान अपर पुलिस महानिदेशक (कमजोर वर्ग) अमित जैन व गोपालगंज के पुलिस अधीक्षक विनय तिवारी की देखरेख में कुचायकोट पुलिस, एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन, नारायणी सेवा संस्थान व पटना स्थित बिहार पुलिस मुख्यालय ने संयुक्त रूप से चलाया। छापे की इस कार्रवाई में शामिल एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन और नारायणी सेवा संस्थान बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठन हैं। 

मुक्त करायी गयी लड़कियों की काउंसलिंग के बाद उनको सुरक्षित जगह भेज दिया गया और उनकी उम्र के सत्यापन की प्रक्रिया व अन्य कानूनी कार्रवाई जारी है। मुक्त करायी गयी लड़कियों की उम्र 10 से 17 साल है। फिलहाल मिली जानकारी के अनुसार इन बच्चियों को झांसा देकर ट्रैफिकिंग के जरिए पश्चिम बंगाल, असम, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से लाया गया था।  

बिहार में ट्रैफिकिंग गिरोहों व आर्केस्ट्रा समूहों के बीच गहरी सांठ-गांठ की ओर संकेत करते हुए एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन के वरिष्ठ निदेशक मनीष शर्मा ने कहा, इस अभियान ने एक बार इस तथ्य को उजागर किया है कि कितने बड़े पैमाने पर लड़कियों की ट्रैफिकिंग कर उन्हें राज्य के विभिन्न हिस्सों में चल रहे आर्केस्ट्रा समूहों में धकेला जा रहा है। इन लड़कियों को बहला-फुसलाकर यौन शोषण व उत्पीड़न के अंतहीन दलदल में धकेल दिया जाता है। हमें ट्रैफिकिंग के संगठित अपराध और आर्केस्ट्रा समूहों की मिलीभगत के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने की जरूरत है। 

इन्हें सख्त सजा देने के साथ ही पीड़ित बच्चियों के पुनर्वास व पर्याप्त मुआवजे की तत्काल आवश्यकता है। न्याय में किसी भी तरह की देरी इन बच्चों को दोबारा निराश कर सकती है। एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन और नारायणी सेवा संस्थान पिछले एक महीने से इन आर्केस्ट्रा समूहों की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे।

उन्होंने पाया कि आर्केस्ट्रा समूह शादी-ब्याह के समय ट्रैफिकिंग के जरिए पड़ोसी राज्यों से नाबालिग बच्चियों को लाते हैं और इन्हें विवाह समारोहों में भोजपुरी गानों पर अश्लील नृत्य के लिए मजबूर किया जाता है। हालांकि इनके यौन उत्पीड़न का सिलसिला समारोह खत्म होने के बाद भी जारी रहता है। चूंकि शादी-ब्याह का मौसम कुछ ही दिनों में खत्म होने वाला है, इसलिए छापे के लिए जानबूझ कर ऐसा दिन चुना गया जब कोई लग्न नहीं हो और ये सभी लड़कियां अपने ठिकानों पर मौजूद रहें।     

मुक्त कराये जाने के बाद काउंसलिंग के दौरान भयभीत दिख रही कई लड़कियों ने बताया कि उन्हें उनके कथित प्रेमी ने बेच दिया या फिर पैसे, नाम व बेहतर जिंदगी का लालच देकर शोषण के दलदल में धकेल दिया। कुछ लड़कियों ने बताया कि उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि अगर वे आर्केस्ट्रा से जुड़ी रहेंगी तो उन्हें भोजपुरी फिल्मों में काम करने का अवसर भी मिलेगा।   

ऐसे मामलों में जवाबदेही व तत्काल कार्रवाइयों की जरूरत पर जोर देते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के राष्ट्रीय संयोजक रवि कांत ने कहा, यह देखना दुखद है कि संगठित ट्रैफिकिंग गिरोह आर्केस्ट्रा समूहों के जरिए शोषण के इरादे से विभिन्न राज्यों में बच्चों को निशाना बना रहे हैं। यह कोई इकलौती घटना नहीं है बल्कि एक संगठित आपराधिक तंत्र की ओर इशारा करती है जो बच्चों की लाचारी, आर्केस्ट्रा जैसे धंधों में उनकी मांग और कानूनी सख्ती में कमी की वजह से फल-फूल रहा है। 

भारत में बच्चों की सुरक्षा के लिए काफी कड़े कानून हैं और हालिया समय में बिहार पुलिस की सख्ती बताती है कि वे ट्रैफिकिंग और बच्चों के शोषण के खात्मे के लिए गंभीर हैं। फिर भी राज्यों में आपसी समन्वय, शादी-ब्याह के मौसमों के दौरान इन पर सख्त निगरानी व जवाबदेही तंत्र को और मजबूत बनाने की जरूरत है ताकि इसका हमेशा के लिए खात्मा किया जा सके। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क कर सकते हैं।

Published / 2026-04-07 19:28:02
किशनगंज : नाबालिग की पिटाई कर जबरन बाल विवाह कराया, सात पर एफआईआर

एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। बिहार के किशनगंज जिले में एक 17 वर्षीय नाबालिग को मारपीट कर उसका 20 साल की युवती से जबरन विवाह करा दिया गया। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने सात आरोपियों के खिलाफ बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम सहित कई धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है। 

पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार घटना की रात रिजवान (बदला हुआ नाम) अपनी मां के साथ घर में था और पिता मजदूरी के लिए बाहर गये हुए थे। रात करीब नौ बजे आधा दर्जन लोगों ने दरवाजा खटखटाया और रिजवान की मां को धमकाते हुए उसका विवाह 20 साल की एक युवती से करने को कहा। 

मां के इनकार से नाराज आरोपी रिजवान को जबरन उठाकर एक होटल में ले गए। वहां उसे बंद कर मारा-पीटा गया इससे डरकर वह बेहोश हो गया। इसी दौरान बेहोशी की हालत में शादी की रस्में पूरी की गयीं। होश आने पर लड़के ने आरोपियों से उसका विवाह नहीं कराने की विनती की लेकिन इसी बीच उन्होंने मौलवी को बुलाकर जबरन निकाह पढ़ा दिया और निकाहनामे पर दस्तखत भी करा लिये। 

दबाव बनाने की गर्ज से आरोपियों ने पीड़ित परिवार से छह लाख रुपए की रंगदारी भी मांगी और पैसे नहीं देने पर झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी। रिजवान की मां अपने बेटे के जबरन बाल विवाह की शिकायत लेकर बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन जन निर्माण केंद्र तक पहुंची। संगठन ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत जिले के एसडीएम अनिकेत कुमार को सूचित किया। 

प्रशासन ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों के खिलाफ बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006, किशोर न्याय अधिनियम 2015 और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की। फिलहाल लड़का अपनी मां के पास सुरक्षित है और पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है। 

बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठन जन निर्माण केंद्र के राकेश कुमार ने कहा बाल विवाह की बहस हमेशा लड़कियों के इर्द-गिर्द घूमती है और यह गलत भी नहीं, क्योंकि वे सबसे बड़ी पीड़ित होती हैं। लेकिन लड़कों के साथ होने वाले ऐसे मामले अक्सर सुर्खियों से बाहर रह जाते हैं। 

समाज सोचता है लड़का है, झेल लेगा। जबकि बच्चा तो बच्चा होता है, चाहे बेटा हो या बेटी। बिहार में एक दौर जबरन विवाहों जिसे पकड़ुआ विवाह कहते हैं, का भी रहा है। ऐसे में जरूरी है कि प्रशासन चौकस रहे क्योंकि आम तौर पर इसके पीड़ित नाबालिग किशोर ही होते हैं। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क कर सकते हैं।

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