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Published / 2026-05-12 22:02:05
चार दिन से लापता 18 महीने की मासूम बच्ची अदिति पांडेय का शव नाले में मिला

टीम एबीएन, रांची। रांची के लोवाडीह नाले से शव जैसा संदिग्ध अवशेष मिलने के बाद मंगलवार को सनसनी फैल गयी। लोग के बीच तरह के चर्चा होने लगी, कोई 18 महीने की मासूम अदिति पांडेय का शव बता रहा तो कोई कुछ और बोल रहा था। 

हर कोई यही जानने की कोशिश में था कि आखिर नाले में मिला यह अवशेष किसका है। इस बीच, इलाके में यह चर्चा भी तेज हो गई कि कहीं यह अवशेष कोकर से लापता हुई 18 माह की मासूम अदिति का तो नहीं। हालांकि पुलिस ने अभी इस आशंका की कोई पुष्टि नहीं की है। फिलहाल जांच जारी है। 

स्थानीय लोगों के मुताबिक, लोआडीह इलाके के बहते नाले में कुछ ऐसा दिखा, जिसे देखकर लोगों को शक हुआ। पहले आसपास के लोगों ने खुद देखने की कोशिश की, लेकिन मामला गंभीर लगने पर तुरंत पुलिस को सूचना दी गयी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और संदिग्ध अवशेष को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। 

पुलिस आसपास के लोगों से भी जानकारी जुटा रही है। फिलहाल पुलिस की सबसे बड़ी कोशिश यही है कि यह साफ किया जाए कि मिला अवशेष किसी इंसान का है या किसी जानवर का। इसके लिए अवशेष को जांच के लिए भेजा जाएगा, ताकि वैज्ञानिक तरीके से इसकी पहचान हो सके।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती नजर में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। 
घटना के बाद मौके पर जितनी जुबां, उतनी तरह की बातें होने लगीं। कोई इसे लापता बच्ची से जोड़ रहा था, तो कोई दूसरी कहानी बता रहा था। मौके पर मौजूद लोगों के बीच बेचैनी साफ दिख रही थी। 

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करें और अफवाहें फैलाने से बचें। पुलिस पूरे मामले को गंभीरता से देख रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि अवशेष वहां कैसे पहुंचा और इसकी असली पहचान क्या है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो पायेगी। 

गौरतलब है कि कोकर के खोरा टोली में बीते 9 मई को 18 महीने की मासूम बच्ची लापता है। पुलिस खोजबीन में जुटी हुई है। इस बीच अदिति के परिजनों को कई बार फ्रॉड कॉल के माध्यम से रुपये का डिमांड भी किया गया है।

Published / 2026-05-12 21:59:16
एक्रोबैटिक रॉक एंड रोल में झारखंड का ऐतिहासिक प्रदर्शन

खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किया गौरवान्वित 

एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। झारखंड जिम्नास्टिक के खिलाड़ियों ने वर्ष 2026 में आयोजित एक्रोबैटिक रॉक एंड रोल नेशनल चैंपियनशिप एवं एशियन चैंपियनशिप में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए राज्य का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। 

खिलाड़ियों की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से पूरे झारखंड में हर्ष एवं गर्व का वातावरण है। नेशनल चैंपियनशिप 2026 में झारखंड के खिलाड़ी विकाश कुमार गोप एवं कुमारी ऋष्टि राज ने एक्रोबैटिक रॉक एंड रोल कपल्स स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीतकर प्रथम स्थान प्राप्त किया।

दोनों खिलाड़ियों ने बेहतरीन तालमेल, तकनीक एवं प्रस्तुति का परिचय देते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की। इसी प्रतियोगिता में मोनिका धनवार एवं अलेक्जेंडर ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए तृतीय स्थान प्राप्त कर कांस्य पदक हासिल किया। वहीं झारखंड गर्ल्स ग्रुप टीम ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय चैंपियनशिप में तृतीय स्थान प्राप्त कर कांस्य पदक अपने नाम किया।

टीम में शामिल खिलाड़ियों के नाम इस प्रकार हैं : चंदा कुमारी, कुमारी ऋष्टि राज, सपना कुमारी, दशमी कुमारी, करिश्मा कुमारी, मोनिका धनवार, लतिका चंद्रा नायक, मुस्कान गुप्ता, मुस्कान रजक, रिया कुमारी। इन सभी खिलाड़ियों का चयन एशियन चैंपियनशिप के लिए किया गया, जो झारखंड के लिए अत्यंत गौरव की बात है। 

दिल्ली स्थित तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित एशियन चैंपियनशिप में 11 देशों के खिलाड़ियों ने भाग लिया। इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में झारखंड के खिलाड़ी विकाश कुमार गोप एवं कुमारी ऋष्टि राज ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चौथा स्थान प्राप्त किया। अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनका यह प्रदर्शन भारत एवं झारखंड के लिए गौरव का विषय है। 

इसके साथ ही, विकाश कुमार गोप एवं कुमारी ऋष्टि राज का चयन आगामी वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए भी किया गया है। यह उपलब्धि झारखंड में एक्रोबैटिक रॉक एंड रोल खेल के निरंतर विकास एवं खिलाड़ियों की कठिन मेहनत का प्रमाण है। 

झारखंड के लिए यह अत्यंत गर्व एवं प्रेरणा का क्षण है कि पहली बार राज्य के खिलाड़ियों ने एक्रोबैटिक रॉक एंड रोल में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल की है। खिलाड़ियों की इस सफलता से आने वाली पीढ़ियों को भी खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। 

इस अवसर पर झारखंड ओलंपिक संघ के अध्यक्ष आरके आनंद, कार्यकारी अध्यक्ष शेखर बोस, महासचिव मधुकांत पाठक, शिवेन्द्र दूबे तथा झारखंड जिम्नास्टिक्स संघ के संरक्षक डॉ अजीत कुमार सिन्हा, अध्यक्ष रंजन कुमार, कार्यकारी अध्यक्ष निशिकांत पाठक, महासचिव तुलिका श्रीवास्तव, कोषाध्यक्ष डॉ दीपक कुमार साहु,पुष्पा हेस्सा, जितेंद्र कुमार, हनी सिन्हा, सुहिरता रॉय, गोविंद झा, रविन्द्र कुमार, पारुल सिंह, दीप कुमारी मांझी एवं हेमा कुमारी ने टीम की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सभी खिलाड़ियों, कोच एवं प्रबंधन टीम को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

बिहार

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Published / 2026-05-12 20:21:01
गोपालगंज : आर्केस्ट्रा से 40 नाबालिग मुक्त, 22 गिरफ्तार

गोपालगंज में आर्केस्ट्रा समूहों से मुक्त करायी गयी 40 से ज्यादा नाबालिग लड़कियां, 22 गिरफ्तार 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। बिहार के गोपालगंज जिले में आर्केस्ट्रा समूहों में नाबालिग लड़कियों के शोषण व उत्पीड़न के खिलाफ हालिया समय की सबसे बड़ी छापे की कार्रवाई में 40 से ज्यादा नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया गया। जिले के कुचायकोट थानाक्षेत्र में रात एक बजे से सुबह सात बजे तक तकरीबन 15 आर्केस्ट्रा समूहों पर हुई इस कार्रवाई में ट्रैफिकिंग व बच्चों के शोषण के आरोप में 22 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। 

यह पूरा अभियान अपर पुलिस महानिदेशक (कमजोर वर्ग) अमित जैन व गोपालगंज के पुलिस अधीक्षक विनय तिवारी की देखरेख में कुचायकोट पुलिस, एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन, नारायणी सेवा संस्थान व पटना स्थित बिहार पुलिस मुख्यालय ने संयुक्त रूप से चलाया। छापे की इस कार्रवाई में शामिल एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन और नारायणी सेवा संस्थान बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठन हैं। 

मुक्त करायी गयी लड़कियों की काउंसलिंग के बाद उनको सुरक्षित जगह भेज दिया गया और उनकी उम्र के सत्यापन की प्रक्रिया व अन्य कानूनी कार्रवाई जारी है। मुक्त करायी गयी लड़कियों की उम्र 10 से 17 साल है। फिलहाल मिली जानकारी के अनुसार इन बच्चियों को झांसा देकर ट्रैफिकिंग के जरिए पश्चिम बंगाल, असम, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से लाया गया था।  

बिहार में ट्रैफिकिंग गिरोहों व आर्केस्ट्रा समूहों के बीच गहरी सांठ-गांठ की ओर संकेत करते हुए एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन के वरिष्ठ निदेशक मनीष शर्मा ने कहा, इस अभियान ने एक बार इस तथ्य को उजागर किया है कि कितने बड़े पैमाने पर लड़कियों की ट्रैफिकिंग कर उन्हें राज्य के विभिन्न हिस्सों में चल रहे आर्केस्ट्रा समूहों में धकेला जा रहा है। इन लड़कियों को बहला-फुसलाकर यौन शोषण व उत्पीड़न के अंतहीन दलदल में धकेल दिया जाता है। हमें ट्रैफिकिंग के संगठित अपराध और आर्केस्ट्रा समूहों की मिलीभगत के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने की जरूरत है। 

इन्हें सख्त सजा देने के साथ ही पीड़ित बच्चियों के पुनर्वास व पर्याप्त मुआवजे की तत्काल आवश्यकता है। न्याय में किसी भी तरह की देरी इन बच्चों को दोबारा निराश कर सकती है। एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन और नारायणी सेवा संस्थान पिछले एक महीने से इन आर्केस्ट्रा समूहों की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे।

उन्होंने पाया कि आर्केस्ट्रा समूह शादी-ब्याह के समय ट्रैफिकिंग के जरिए पड़ोसी राज्यों से नाबालिग बच्चियों को लाते हैं और इन्हें विवाह समारोहों में भोजपुरी गानों पर अश्लील नृत्य के लिए मजबूर किया जाता है। हालांकि इनके यौन उत्पीड़न का सिलसिला समारोह खत्म होने के बाद भी जारी रहता है। चूंकि शादी-ब्याह का मौसम कुछ ही दिनों में खत्म होने वाला है, इसलिए छापे के लिए जानबूझ कर ऐसा दिन चुना गया जब कोई लग्न नहीं हो और ये सभी लड़कियां अपने ठिकानों पर मौजूद रहें।     

मुक्त कराये जाने के बाद काउंसलिंग के दौरान भयभीत दिख रही कई लड़कियों ने बताया कि उन्हें उनके कथित प्रेमी ने बेच दिया या फिर पैसे, नाम व बेहतर जिंदगी का लालच देकर शोषण के दलदल में धकेल दिया। कुछ लड़कियों ने बताया कि उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि अगर वे आर्केस्ट्रा से जुड़ी रहेंगी तो उन्हें भोजपुरी फिल्मों में काम करने का अवसर भी मिलेगा।   

ऐसे मामलों में जवाबदेही व तत्काल कार्रवाइयों की जरूरत पर जोर देते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के राष्ट्रीय संयोजक रवि कांत ने कहा, यह देखना दुखद है कि संगठित ट्रैफिकिंग गिरोह आर्केस्ट्रा समूहों के जरिए शोषण के इरादे से विभिन्न राज्यों में बच्चों को निशाना बना रहे हैं। यह कोई इकलौती घटना नहीं है बल्कि एक संगठित आपराधिक तंत्र की ओर इशारा करती है जो बच्चों की लाचारी, आर्केस्ट्रा जैसे धंधों में उनकी मांग और कानूनी सख्ती में कमी की वजह से फल-फूल रहा है। 

भारत में बच्चों की सुरक्षा के लिए काफी कड़े कानून हैं और हालिया समय में बिहार पुलिस की सख्ती बताती है कि वे ट्रैफिकिंग और बच्चों के शोषण के खात्मे के लिए गंभीर हैं। फिर भी राज्यों में आपसी समन्वय, शादी-ब्याह के मौसमों के दौरान इन पर सख्त निगरानी व जवाबदेही तंत्र को और मजबूत बनाने की जरूरत है ताकि इसका हमेशा के लिए खात्मा किया जा सके। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क कर सकते हैं।

Published / 2026-04-07 19:28:02
किशनगंज : नाबालिग की पिटाई कर जबरन बाल विवाह कराया, सात पर एफआईआर

एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। बिहार के किशनगंज जिले में एक 17 वर्षीय नाबालिग को मारपीट कर उसका 20 साल की युवती से जबरन विवाह करा दिया गया। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने सात आरोपियों के खिलाफ बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम सहित कई धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है। 

पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार घटना की रात रिजवान (बदला हुआ नाम) अपनी मां के साथ घर में था और पिता मजदूरी के लिए बाहर गये हुए थे। रात करीब नौ बजे आधा दर्जन लोगों ने दरवाजा खटखटाया और रिजवान की मां को धमकाते हुए उसका विवाह 20 साल की एक युवती से करने को कहा। 

मां के इनकार से नाराज आरोपी रिजवान को जबरन उठाकर एक होटल में ले गए। वहां उसे बंद कर मारा-पीटा गया इससे डरकर वह बेहोश हो गया। इसी दौरान बेहोशी की हालत में शादी की रस्में पूरी की गयीं। होश आने पर लड़के ने आरोपियों से उसका विवाह नहीं कराने की विनती की लेकिन इसी बीच उन्होंने मौलवी को बुलाकर जबरन निकाह पढ़ा दिया और निकाहनामे पर दस्तखत भी करा लिये। 

दबाव बनाने की गर्ज से आरोपियों ने पीड़ित परिवार से छह लाख रुपए की रंगदारी भी मांगी और पैसे नहीं देने पर झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी। रिजवान की मां अपने बेटे के जबरन बाल विवाह की शिकायत लेकर बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन जन निर्माण केंद्र तक पहुंची। संगठन ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत जिले के एसडीएम अनिकेत कुमार को सूचित किया। 

प्रशासन ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों के खिलाफ बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006, किशोर न्याय अधिनियम 2015 और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की। फिलहाल लड़का अपनी मां के पास सुरक्षित है और पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है। 

बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठन जन निर्माण केंद्र के राकेश कुमार ने कहा बाल विवाह की बहस हमेशा लड़कियों के इर्द-गिर्द घूमती है और यह गलत भी नहीं, क्योंकि वे सबसे बड़ी पीड़ित होती हैं। लेकिन लड़कों के साथ होने वाले ऐसे मामले अक्सर सुर्खियों से बाहर रह जाते हैं। 

समाज सोचता है लड़का है, झेल लेगा। जबकि बच्चा तो बच्चा होता है, चाहे बेटा हो या बेटी। बिहार में एक दौर जबरन विवाहों जिसे पकड़ुआ विवाह कहते हैं, का भी रहा है। ऐसे में जरूरी है कि प्रशासन चौकस रहे क्योंकि आम तौर पर इसके पीड़ित नाबालिग किशोर ही होते हैं। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क कर सकते हैं।

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