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Published / 2026-06-04 20:53:06
लोहरदगा : सड़क हादसे में घायल तीन युवकों को सांसद ने पहुंचाया अस्पताल

सड़क हादसे में तीन युवक घायल, सांसद सुखदेव भगत ने दिखायी मानवता, सीएचसी भंडरा पहुंचाया 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। भंडरा-बेड़ो मुख्य पथ पर तुको गांव के समीप बुधवार को एक सड़क दुर्घटना में तीन युवक गंभीर रूप से घायल हो गये। दुर्घटना की सूचना मिलते ही आसपास के लोगों की भीड़ जुट गयी। इसी दौरान लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुखदेव भगत बेड़ो जतरा कार्यक्रम में भाग वहां से गुजर रहे थे। 

घटना को देखकर सांसद ने तत्काल अपनी गाड़ी रुकवाई और मानवता का परिचय देते हुए घायलों की सहायता में जुट गये। उन्होंने स्थानीय लोगों एवं अपने अंगरक्षकके सहयोग से घायल युवकों को वाहन  व्यवस्था कर सीएचसी भंडरा पहुंचाने की व्यवस्था करायी, ताकि उन्हें शीघ्र चिकित्सा सुविधा मिल सके। 

घायल तीनों रवि नगेसिया, जोसन नगेसिया और उमेश नगेसिया तीनों पाखर डूमर टोला के रहने वाले हैं। तीनों घायलों में से एक युवक की गंभीर स्थिति को देखते हुए, प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए रिम्स रेफर कर दिया। सांसद भंडरा स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर घायलों से मुलाकात कर उनका कुशल क्षेम जाना। 

डॉक्टर से अद्यतन स्थिति का जायजा लिया और समुचित इलाज करने का निर्देश दिया तथा घायलों को आर्थिक सहयोग भी किये । दुर्घटना के बाद सड़क पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया था, लेकिन समय रहते घायलों को अस्पताल पहुंचा दिये जाने से स्थिति नियंत्रण में रही। 

स्थानीय लोगों ने सांसद के इस मानवीय कार्य की सराहना करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों का ऐसा संवेदनशील व्यवहार समाज के लिए प्रेरणादायक है। वहीं अस्पताल में दो घायलों का उपचार जारी है और उनकी स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है। मौके पर सांसद के साथ आलोक कुमार साहू, शाहिद अहमद वेलू, वीरेंद्र यादव, अमित मिंज भी थे।

Published / 2026-06-04 20:49:40
मां शारदे मंच ने वार्षिकोत्सव पर पौधरोपण और नेत्र जांच शिविर लगाया

मानव सेवा ईश्वर सेवा के समान है : नीतू सिन्हा  

मां शारदे मंच का वार्षिकोत्सव सफलतापूर्वक संपन्न  

टीम एबीएन, रांची। मां शारदे मंच का वार्षिकोत्सव नामकुम के रामपुर गांव के धूमकुड़िया पंचायत में उत्साहपूर्वक मनाया गया। मां शारदे मंच एवं गरुड़ आई हॉस्पिटल के संयुक्त तत्वाधान में नि:शुल्क नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया गया। मां शारदे मंच की सहभागिता से अनेक लोगों ने नेत्र जांच शिविर का लाभ उठाया। 

100 से अधिक लोगों ने शिविर में पहुंचकर अपने आंखों का इलाज करवाया। जांच के दौरान लोगों में मोतियाबिंद, अंधेपन, पास की वस्तुओं को देखने में कठिनाई, चश्मा या कांटेक्ट लेंस जैसी समस्याओं की जांच की गयी। 

कार्यक्रम के दौरान मां शारदे मंच के सदस्यों ने पौधारोपण कर प्रकृति को हरा भरा बनाने का संकल्प लिया। मां शारदे मंच की अध्यक्ष नीतू सिन्हा ने कहा कि प्रकृति को स्वच्छ और सुंदर बनाकर ही हम स्वस्थ रह सकते हैं। सेवा ही धर्म है और सेवा ही संकल्प है।  

मानव सेवा ईश्वर सेवा के समान 

सभी को इस पुनीत कार्य में आगे आकर सहयोग करना चाहिए। प्रकृति को स्वच्छ बनाकर ही हम अपने परिवेश और पर्यावरण की सुरक्षा कर सकते हैं। नीतू सिन्हा ने बताया कि ऐसे कार्य मंच के माध्यम से हमेशा आयोजित किये जाते हैं।

मां शारदे मंच का हमेशा यह प्रयास रहता है कि वह समाज को एक नया आयाम प्रदान करें। मौके पर रामपुर की मुखिया सरस्वती देवी एवं मंच की सदस्य शिखा प्रिया, सीमा श्रीवास्तव, रजनी बक्शी, रेनू वर्मा, पुष्पा सिंह, समीर सिन्हा, मनोज सिन्हा, शशांक श्रीवास्तव एवं मार्ग्रेट आदि उपस्थित थे।

बिहार

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Published / 2026-05-12 20:21:01
गोपालगंज : आर्केस्ट्रा से 40 नाबालिग मुक्त, 22 गिरफ्तार

गोपालगंज में आर्केस्ट्रा समूहों से मुक्त करायी गयी 40 से ज्यादा नाबालिग लड़कियां, 22 गिरफ्तार 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। बिहार के गोपालगंज जिले में आर्केस्ट्रा समूहों में नाबालिग लड़कियों के शोषण व उत्पीड़न के खिलाफ हालिया समय की सबसे बड़ी छापे की कार्रवाई में 40 से ज्यादा नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया गया। जिले के कुचायकोट थानाक्षेत्र में रात एक बजे से सुबह सात बजे तक तकरीबन 15 आर्केस्ट्रा समूहों पर हुई इस कार्रवाई में ट्रैफिकिंग व बच्चों के शोषण के आरोप में 22 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। 

यह पूरा अभियान अपर पुलिस महानिदेशक (कमजोर वर्ग) अमित जैन व गोपालगंज के पुलिस अधीक्षक विनय तिवारी की देखरेख में कुचायकोट पुलिस, एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन, नारायणी सेवा संस्थान व पटना स्थित बिहार पुलिस मुख्यालय ने संयुक्त रूप से चलाया। छापे की इस कार्रवाई में शामिल एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन और नारायणी सेवा संस्थान बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठन हैं। 

मुक्त करायी गयी लड़कियों की काउंसलिंग के बाद उनको सुरक्षित जगह भेज दिया गया और उनकी उम्र के सत्यापन की प्रक्रिया व अन्य कानूनी कार्रवाई जारी है। मुक्त करायी गयी लड़कियों की उम्र 10 से 17 साल है। फिलहाल मिली जानकारी के अनुसार इन बच्चियों को झांसा देकर ट्रैफिकिंग के जरिए पश्चिम बंगाल, असम, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से लाया गया था।  

बिहार में ट्रैफिकिंग गिरोहों व आर्केस्ट्रा समूहों के बीच गहरी सांठ-गांठ की ओर संकेत करते हुए एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन के वरिष्ठ निदेशक मनीष शर्मा ने कहा, इस अभियान ने एक बार इस तथ्य को उजागर किया है कि कितने बड़े पैमाने पर लड़कियों की ट्रैफिकिंग कर उन्हें राज्य के विभिन्न हिस्सों में चल रहे आर्केस्ट्रा समूहों में धकेला जा रहा है। इन लड़कियों को बहला-फुसलाकर यौन शोषण व उत्पीड़न के अंतहीन दलदल में धकेल दिया जाता है। हमें ट्रैफिकिंग के संगठित अपराध और आर्केस्ट्रा समूहों की मिलीभगत के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने की जरूरत है। 

इन्हें सख्त सजा देने के साथ ही पीड़ित बच्चियों के पुनर्वास व पर्याप्त मुआवजे की तत्काल आवश्यकता है। न्याय में किसी भी तरह की देरी इन बच्चों को दोबारा निराश कर सकती है। एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन और नारायणी सेवा संस्थान पिछले एक महीने से इन आर्केस्ट्रा समूहों की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे।

उन्होंने पाया कि आर्केस्ट्रा समूह शादी-ब्याह के समय ट्रैफिकिंग के जरिए पड़ोसी राज्यों से नाबालिग बच्चियों को लाते हैं और इन्हें विवाह समारोहों में भोजपुरी गानों पर अश्लील नृत्य के लिए मजबूर किया जाता है। हालांकि इनके यौन उत्पीड़न का सिलसिला समारोह खत्म होने के बाद भी जारी रहता है। चूंकि शादी-ब्याह का मौसम कुछ ही दिनों में खत्म होने वाला है, इसलिए छापे के लिए जानबूझ कर ऐसा दिन चुना गया जब कोई लग्न नहीं हो और ये सभी लड़कियां अपने ठिकानों पर मौजूद रहें।     

मुक्त कराये जाने के बाद काउंसलिंग के दौरान भयभीत दिख रही कई लड़कियों ने बताया कि उन्हें उनके कथित प्रेमी ने बेच दिया या फिर पैसे, नाम व बेहतर जिंदगी का लालच देकर शोषण के दलदल में धकेल दिया। कुछ लड़कियों ने बताया कि उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि अगर वे आर्केस्ट्रा से जुड़ी रहेंगी तो उन्हें भोजपुरी फिल्मों में काम करने का अवसर भी मिलेगा।   

ऐसे मामलों में जवाबदेही व तत्काल कार्रवाइयों की जरूरत पर जोर देते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के राष्ट्रीय संयोजक रवि कांत ने कहा, यह देखना दुखद है कि संगठित ट्रैफिकिंग गिरोह आर्केस्ट्रा समूहों के जरिए शोषण के इरादे से विभिन्न राज्यों में बच्चों को निशाना बना रहे हैं। यह कोई इकलौती घटना नहीं है बल्कि एक संगठित आपराधिक तंत्र की ओर इशारा करती है जो बच्चों की लाचारी, आर्केस्ट्रा जैसे धंधों में उनकी मांग और कानूनी सख्ती में कमी की वजह से फल-फूल रहा है। 

भारत में बच्चों की सुरक्षा के लिए काफी कड़े कानून हैं और हालिया समय में बिहार पुलिस की सख्ती बताती है कि वे ट्रैफिकिंग और बच्चों के शोषण के खात्मे के लिए गंभीर हैं। फिर भी राज्यों में आपसी समन्वय, शादी-ब्याह के मौसमों के दौरान इन पर सख्त निगरानी व जवाबदेही तंत्र को और मजबूत बनाने की जरूरत है ताकि इसका हमेशा के लिए खात्मा किया जा सके। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क कर सकते हैं।

Published / 2026-04-07 19:28:02
किशनगंज : नाबालिग की पिटाई कर जबरन बाल विवाह कराया, सात पर एफआईआर

एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। बिहार के किशनगंज जिले में एक 17 वर्षीय नाबालिग को मारपीट कर उसका 20 साल की युवती से जबरन विवाह करा दिया गया। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने सात आरोपियों के खिलाफ बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम सहित कई धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है। 

पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार घटना की रात रिजवान (बदला हुआ नाम) अपनी मां के साथ घर में था और पिता मजदूरी के लिए बाहर गये हुए थे। रात करीब नौ बजे आधा दर्जन लोगों ने दरवाजा खटखटाया और रिजवान की मां को धमकाते हुए उसका विवाह 20 साल की एक युवती से करने को कहा। 

मां के इनकार से नाराज आरोपी रिजवान को जबरन उठाकर एक होटल में ले गए। वहां उसे बंद कर मारा-पीटा गया इससे डरकर वह बेहोश हो गया। इसी दौरान बेहोशी की हालत में शादी की रस्में पूरी की गयीं। होश आने पर लड़के ने आरोपियों से उसका विवाह नहीं कराने की विनती की लेकिन इसी बीच उन्होंने मौलवी को बुलाकर जबरन निकाह पढ़ा दिया और निकाहनामे पर दस्तखत भी करा लिये। 

दबाव बनाने की गर्ज से आरोपियों ने पीड़ित परिवार से छह लाख रुपए की रंगदारी भी मांगी और पैसे नहीं देने पर झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी। रिजवान की मां अपने बेटे के जबरन बाल विवाह की शिकायत लेकर बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन जन निर्माण केंद्र तक पहुंची। संगठन ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत जिले के एसडीएम अनिकेत कुमार को सूचित किया। 

प्रशासन ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों के खिलाफ बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006, किशोर न्याय अधिनियम 2015 और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की। फिलहाल लड़का अपनी मां के पास सुरक्षित है और पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है। 

बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठन जन निर्माण केंद्र के राकेश कुमार ने कहा बाल विवाह की बहस हमेशा लड़कियों के इर्द-गिर्द घूमती है और यह गलत भी नहीं, क्योंकि वे सबसे बड़ी पीड़ित होती हैं। लेकिन लड़कों के साथ होने वाले ऐसे मामले अक्सर सुर्खियों से बाहर रह जाते हैं। 

समाज सोचता है लड़का है, झेल लेगा। जबकि बच्चा तो बच्चा होता है, चाहे बेटा हो या बेटी। बिहार में एक दौर जबरन विवाहों जिसे पकड़ुआ विवाह कहते हैं, का भी रहा है। ऐसे में जरूरी है कि प्रशासन चौकस रहे क्योंकि आम तौर पर इसके पीड़ित नाबालिग किशोर ही होते हैं। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क कर सकते हैं।

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