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Published / 2026-03-31 21:52:08
रांची : नगर निगम की राजस्व वसूली 101 करोड़ पार

रांची नगर निगम का पांच वर्षों में दोगुणी हुई राजस्व वसूली, 101 करोड़ का आंकड़ा पार हुआ

टीम एबीएन, रांची। नगर निगम ने संपत्ति कर संग्रण में रिकार्ड आंकड़ा दर्ज किया है। पिछले पांच वर्षों में यह राशि दोगुणी होकर 101 करोड़ आंकड़ा पार कर गया है। 2020-21 में जहां राजस्व संग्रहण 51.35 करोड़ दर्ज किया गया था, 31 मार्च को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा 101.99 करोड़ जा पहुंचा है। निगम के अधिकारी इसे शहरी वित्तीय प्रबंधन एवं राजस्व सुदृढ़ीकरण को मुख्य कारक बताया है। 

एक नयी उपलब्धि के रूप में 31 मार्च को नगर निगम का राजस्व संग्रहण 1.59 करोड़ हुआ है, जो विशेष अभियान का हिस्सा रहा। यह भी रांची नगर निगम की बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इसके अलावा 23 करोड़ का राजस्व आनलाइन माध्यम से निगम को प्राप्त हुआ। हालांकि राजस्व वृद्धि के अनुरूप अब आम नागरिकों की नगरीय सुविधा में दोगुणी वृद्धि निगम के दायित्व बोध के रूप में चुनौती के रूप में भी खड़ा है। 

यहां मालूम हो कि रांची नगर निगम के प्रशासक सुशांत गौरव के नेतृत्व में पिछले 6 माह के दौरान राजस्व वृद्धि को मिशन मोड में लेते हुए कई सशक्त कदम उठाये गये। व्यापक डोर-टू-डोर सर्वे एवं सत्यापन, शहर के सभी वार्डों में विशेष अभियान चलाकर अज्ञात एवं छूटे हुए होल्डिंग्स की पहचान की गयी। संपत्तियों के भौतिक सत्यापन के माध्यम से टैक्स बेस को मजबूत किया गया। 

वार्ड-स्तरीय लक्ष्य एवं दैनिक मॉनिटरिंग, प्रत्येक वार्ड के लिए स्पष्ट राजस्व लक्ष्य निर्धारित किये गये। दैनिक एवं साप्ताहिक समीक्षा के माध्यम से प्रगति की निरंतर निगरानी की गयी। कम प्रदर्शन वाले क्षेत्रों में विशेष फोकस ड्राइव चलाये गये। डिजिटल प्रणाली को प्रभावी बनाया गया। बड़े बकायेदारों पर कार्रवाई की गयी। इसके अलावा नागरिक सहभागिता और जागरुकता के साथ साथ फील्ड टीमों की सक्रियता एवं समन्वय को प्रभावी बनाया गया।

Published / 2026-03-31 19:59:01
चाईबासा : जंगली हाथियों ने महिला को कुचल डाला

चाईबासा में जंगली हाथी का कहर; सो रहे लोगों पर किया हमला, महिला की मौत, एक की हालत गंभीर 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, पश्चिमी सिंहभूम। जिले के चाईबासा में जंगली हाथियों का आतंक लगातार जारी है। ताजा मामला सदर प्रखंड के मुफस्सिल थाना क्षेत्र अंतर्गत बरकुंडीय गांव के तुरामडीह टोला का है, जहां सोमवार देर रात करीब 11 बजे एक जंगली हाथी ने अचानक हमला कर दिया।

इस दर्दनाक घटना में 57 वर्षीय चांदो देवी की मौके पर ही मौत हो गयी, जबकि 60 वर्षीय लखन कुदादा गंभीर रूप से घायल हो गये। मिली जानकारी के अनुसार, गांव में निर्माणाधीन मंदिर के पास कुछ लोग रात में सो रहे थे। इसी दौरान अचानक एक जंगली हाथी वहां पहुंच गया और सो रहे लोगों पर हमला कर दिया। नींद में होने के कारण लोग संभल नहीं सके। 

हाथी ने चांदो देवी को पटक दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गयी, वहीं लखन कुदादा गंभीर रूप से घायल हो गये। मृतका के पुत्र गोपाल गोप ने बताया कि उनकी मां मंदिर निर्माण कार्य में लगी थीं और वहीं सोती थीं। वहीं घायल लखन कुदादा के पुत्र ज्वार कुदादा के अनुसार, उनके पिता भी उसी स्थान पर सो रहे थे, तभी हाथी ने हमला कर दिया। 

घटना के बाद ग्रामीण मुंडा ने तत्काल पुलिस और वन विभाग को सूचना दी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल चाईबासा भेज दिया है और बाद में शव परिजनों को सौंप दिया गया। मुफस्सिल थाना प्रभारी विनोद कुमार ने बताया कि मामले की जांच जारी है। ग्रामीणों में इस घटना के बाद भारी दहशत का माहौल है और वन विभाग से हाथियों के आतंक से निजात दिलाने की मांग की जा रही है।

बिहार

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Published / 2026-03-18 20:32:53
सीएम हेमंत से मिले बिहार विधान परिषद के सदस्य

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बिहार विधान परिषद समिति के सदस्यों ने की मुलाकात 

टीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से झारखंड विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कक्ष में बिहार विधान परिषद की बाल संरक्षण एवं महिला सशक्तिकरण समिति के सदस्यों ने मुलाकात की। 

इस अवसर पर समिति के सदस्यों ने मुख्यमंत्री को बाल संरक्षण एवं महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में किये जा रहे अपने कार्यों से अवगत कराया। साथ ही उन्होंने बताया कि झारखंड विधानसभा के परिभ्रमण के दौरान यहां की महिला एवं बाल विकास समिति द्वारा किये जा रहे कार्यों की जानकारी प्राप्त हुई और दोनों राज्यों के अनुभवों का आदान-प्रदान भी किया गया। 

मौके पर कल्पना सोरेन, जो झारखंड विधानसभा की महिला एवं बाल विकास समिति की सभापति हैं, भी उपस्थित रहीं। मुख्यमंत्री से मुलाकात करने वालों में बिहार विधान परिषद की बाल संरक्षण और महिला सशक्तिकरण समिति की अध्यक्ष डॉ कुमुद वर्मा, सदस्य रीना यादव, मुन्नी देवी और निवेदिता सिंह सहित अन्य शामिल थे।

Published / 2026-03-08 15:44:14
बिहार में तो सिर्फ और सिर्फ नीतीशे कुमार...

बिहार में तो सिर्फ और सिर्फ नीतीशे कुमार...

त्रिवेणी दास 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। पिछला बिहार विधानसभा का चुनाव नवंबर 2025 को हुआ था। 243 विधानसभा क्षेत्र में 89 भाजपा, 85 जदयू और 19 एलजेपी (रामविलास) तथा अन्य एनडीए गठबंधन कुल 202 सीट जीत कर बहुमत का आंकड़ा प्राप्त किया और नीतीश कुमार 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बने। मात्र (3) सवा तीन (3:15) महीना के भीतर नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री का कुर्सी छोड़कर राज्यसभा के सांसद के रूप में दिल्ली जाने का निर्णय लिया जो अचंभित भी करता है और राजनीति के लिए आश्चर्यजनक है।

बताया यह जा रहा है कि नीतीश कुमार चारों सदन की सदस्यता का रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं इसीलिए उन्होंने स्वेच्छा से मुख्यमंत्री पद छोड़ना स्वीकार किया; परंतु सियासत एवं वक्त में एकदम से सीधा अनोनाश्रय रिश्ता होता है जो कभी भारी पड़ता है, कभी ढीला पड़ जाता है और कभी राजनीतिज्ञ को कमजोर बना देता है। 

वक्त को भारी पड़ते हुए देख राजनीति के ट्रैक में लाइन बदलने का निर्णय नीतीश कुमार के राजनीतिक परिपक्वता का परिचायक है। आजादी के बाद से भारतीय राजनीति में परिवारवाद का प्रचलन कोई अपवाद नहीं है, विशेष कर कांग्रेस एवं क्षेत्रीय दलों में तो यही परिपाटी रही है। इस परिपाटी का अनुपालन जदयू में भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है। 

नीतीश कुमार के सुपुत्र निशांत का जदयू के राजनीति में एंट्री हो चुका है। वह बकायदे सक्रिय हो चुके हैं और अपने बाबूजी की तरह अपनी राजनीतिक यात्रा बिहार के चंपारण से शुरू करने वाले हैं। पार्टी के जिला अध्यक्षों से उन्होंने लंबी मंत्रणा की है और पार्टी के युवा विधायकों के साथ जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के आवास पर लंबी चर्चा की है। 

इधर बिहार विधानसभा के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी लगातार अधिक सीट जीतने के बाद भी अधिकतम ऊंचाई उपमुख्यमंत्री तक ही सीमित रही है। सुशील कुमार मोदी की लंबी पारी के कारण भाजपा में कोई अन्य नेता उभर कर सामने नहीं आ पाया है। बिहार से नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर पहले ही दिल्ली बुला लिया गया और अब उन्हें राज्यसभा भेज कर उनका स्थाई निवास दिल्ली बना दिया जा रहा है। 

बीजेपी के पास बिहार के राजनीति की उच्चतम पद पर काबिज होने का यह सुनहरा मौका है और वह मुख्यमंत्री बनाने के अत्यंत करीब पहुंच भी चुकी है। भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री कौन होगा यह एक बड़ा सवाल है। हमेशा की तरह मोदीजी इस निर्णय पर भी चौंकाने का कार्य करेंगे? राजनीति के पंडितों के दिमाग में इसके उत्तर नहीं मिल पा रहे हैं। 

नीतीश कुमार का कद, काठी, प्रभाव और केंद्र की सरकार के टिकाऊ के लिए अत्यंत आवश्यक समर्थन को देखते हुए इतना तो तय है कि बिहार की राजनीति और सरकार में उनके सुपुत्र निशांत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाली है।

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