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Published / 2026-03-17 23:03:58
झारखंड में इको टूरिज्म को मिलेगी रफ्तार

झारखंड में इको टूरिज्म को मिलेगी रफ्तार

सीएम हेमंत सोरेन ने तय की विकास की नयी रूपरेखा

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में इको टूरिज्म के विकास को लेकर सरकार अब तेजी से आगे बढ़ने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में झारखंड इको टूरिज्म अथॉरिटी यानी जेटा की चौथी बैठक विधानसभा स्थित सीएम के कक्ष में हुई। बैठक के दौरान राज्य के प्राकृतिक स्थलों को पर्यटन के नक्शे पर लाने की दिशा में अहम फैसले लिये गये।

बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया कि जिन क्षेत्रों में इको टूरिज्म की बेहतर संभावनाएं हैं, वहां प्राथमिकता के आधार पर स्थलों की पहचान की जाये। इसके साथ ही वन, पर्यटन और जल संसाधन विभाग को आपसी समन्वय के साथ ठोस कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया।

समय सीमा के भीतर योजनाओं को धरातल पर उतारें: सीएम

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर राज्य है और यहां इको टूरिज्म के जरिए न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि चयनित स्थलों पर बेहतर आधारभूत संरचना विकसित की जाये और तय समयसीमा के भीतर योजनाओं को जमीन पर उतारा जाये।

इन जगहों पर इको टूरिज्म के विस्तार को लेकर चर्चा

बैठक में मैथन, नेतरहाट, पतरातू, चाईबासा, दुमका और रांची जैसे प्रमुख स्थानों पर इको टूरिज्म विकसित करने पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके साथ ही मसानजोर की तर्ज पर पतरातू को भी पर्यटन हब के रूप में विकसित करने की योजना पर विचार किया गया। 

सरकार का फोकस इस बात पर है कि धार्मिक स्थलों, वन क्षेत्रों, नदियों, जलाशयों और पहाड़ी इलाकों को चिन्हित कर वहां पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हुए पर्यटन सुविधाएं विकसित की जायें।

बैठक में कई वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी मौजूद रहे। सरकार का मानना है कि सुनियोजित तरीके से इको टूरिज्म को बढ़ावा देकर झारखंड को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलायी जा सकती।

Published / 2026-03-17 21:25:59
रांची : संघ ने बनायी भविष्य की व्यापक कार्ययोजना

संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा संपन्न, कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा 

टीम एबीएन, रांची। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा 13 से 15 मार्च तक हरियाणा के समालखा में हुई। इस महत्वपूर्ण बैठक में देशभर के 46 प्रांतों से 1438 जिसमें झारखंड से 31 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभा में संगठन विस्तार, सामाजिक समरसता, राष्ट्रहित में सज्जन शक्ति की सक्रियता तथा संघ के शताब्दी वर्ष को ध्यान में रखते हुए भविष्य की व्यापक कार्ययोजना (रोडमैप) पर गहन विचार-विमर्श किया गया। 

प्रांत कार्यवाह संजय कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि इस अवसर पर संत शिरोमणी रविदास जी के 650वें प्राकट्य वर्ष के उपलक्ष्य में मा. सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले का वक्तव्य पढ़ा गया। संदेश में वर्तमान समय में सक्रिय विभाजनकारी प्रवृत्तियों के बीच संत रविदास जी के एकात्मता, समरसता और सामाजिक सौहार्द के विचारों को आत्मसात करने का आह्वान किया गया। 

उन्होंने बताया कि संघ का कार्य निरंतर विस्तार की दिशा में अग्रसर है। वर्तमान में देशभर में 55,683 स्थान में शाखा,मिलन व मंडली की संख्या बढ़कर 1,34,766 हो गयी है तथा संघ का कार्य अब अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख जैसे दूरस्थ एवं सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। यह विस्तार न केवल भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि राष्ट्र की एकात्मता और सांस्कृतिक एकरूपता को भी सुदृढ़ करता है। 

झारखंड के संदर्भ में उन्होंने बताया कि राज्य में 1050 से अधिक स्थानों पर नियमित गतिविधियां संचालित हो रही हैं, जिनमें शाखा, मिलन व मंडली 1513 है। राज्य के 4 महानगर 89 नगरों व 519 बस्ती में शाखा कार्य सक्रिय है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 8 विभाग, 24 जिलों, 258 खंडों एवं 1,264 मंडलों के 786 मंडल में संगठन का कार्य विस्तार प्राप्त कर चुका है। 

प्रांत कार्यवाह ने कहा कि संघ केवल संख्यात्मक विस्तार पर ही नहीं, बल्कि कार्य की गुणवत्ता और प्रभाव पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। पंच परिवर्तन के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसमें सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी जीवनशैली तथा नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता जैसे विषय शामिल हैं। 

उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदुत्व एक जीवनशैली है, जो समाज में श्रेष्ठ मूल्यों का संवर्धन करती है, और सज्जन शक्ति को राष्ट्रहित में संगठित करना समय की प्रमुख आवश्यकता है। सभा में वैचारिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई, जिसमें भारतीय दृष्टिकोण को सुदृढ़ करने, औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति पाने तथा समाज जीवन में सांस्कृतिक मूल्यों को पुनर्स्थापित करने पर बल दिया गया। 

साथ ही, समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच बढ़ाने के लिए व्यापक जनसंपर्क और जन-जागरण अभियानों की रूपरेखा तैयार की गयी। महापुरुषों के प्रेरक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि गुरु तेग बहादुर जी के 350वें बलिदान वर्ष के अवसर पर देशभर में 2,000 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किये गये, जिनमें लगभग 7 लाख लोगों की सहभागिता रही। वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ भी बड़े उत्साह के साथ मनायी गयी।

आगामी समय में संत रविदास जी के 650वें प्राकट्य वर्ष पर भी व्यापक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। संघ शिक्षा वर्गों की जानकारी देते हुए बताया गया कि प्राथमिक वर्ग 28 स्थानों पर आयोजित हुए, जिनमें 870 शिक्षार्थियों ने भाग लिया। एक सामान्य वर्ग में 247 शिक्षार्थियों को प्रशिक्षण दिया गया। आगामी समय में 96 प्रशिक्षण वर्ग (11 क्षेत्रीय एवं नागपुर सहित) आयोजित किए जाएंगे। 

झारखंड में 26 मई 2026 से जमशेदपुर में संघ शिक्षा वर्ग (सामान्य )वर्ग संपन्न होंगे इसी विभाग में उत्तर पूर्व क्षेत्र के संघ शिक्षा वर्ग (विशेष वर्ग) भी संपन्न होंगे। संघ शताब्दी वर्ष के अंतर्गत भी उल्लेखनीय कार्य हुए हैं। श्री विजयादशमी उत्सव देश भर में 62555 उत्सव जिसमें 3245141 स्वयंसेवक सहभागी हुए संचलन 22656 स्थान पर गणवेश में 2545818 स्वंयसेवक सहभागी हुए। 

झारखंड प्रांत में भी 1879 स्थान पर कुल 31638 स्वयंसेवकों की सहभागिता रही वहीं 390 संचलन पूर्ण गणवेश में निकले जिसमें 30976 स्वयंसेवक उपस्थित थे। गृह संपर्क अभियान के माध्यम से 17194 ग्राम में पंच परिवर्तन के विषय को लेकर गृह संपर्क किया गया, जिसमें 2797357 परिवारों से संपर्क हुआ, इस कार्य हेतु 35813 कार्यकर्ता लगे। 

शत-प्रतिशत गांवों तक पहुंच बनायी गयी, जो संगठन की जमीनी पकड़ को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि जनवरी माह में पु.सरसंघचालक एवं सरकार्यवाह का झारखंड प्रवास भी हुआ। 12 जनवरी को सरकार्यवाह की उपस्थिति में चार सत्रों में सामाजिक सद्भाव बैठक आयोजित की गई, जिसमें समाज के विभिन्न जाति- बिरादरी एवं समुदायों के 600 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। 

इस दौरान समाज में व्याप्त विसंगतियों एवं समस्याओं पर गंभीर और सार्थक चर्चा हुई। साथ ही संत-महात्माओं एवं सामाजिक-आध्यात्मिक संगठनों के साथ विचार-विमर्श करते हुए सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, अध्यात्म के माध्यम से सामाजिक चेतना के विस्तार तथा समाज के सभी वर्गों तक पहुंच बढ़ाने जैसे विषयों पर गहन चिंतन किया गया। 

इसके अलावा झारखंड प्रांत के 281 खंड व नगरों मे यह बैठक आयोजन हुआ इस बैठक में 29680 विभिन्न जाति - बिरादरी, संत-महात्मा सहभागी हुए। 
इसके अतिरिक्त, 24 जनवरी को प.पु.सरसंघचालक के उपस्थिति में जनजाति संवाद कार्यक्रम आयोजित हुआ, जो दो सत्रों में संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में 800 से अधिक जनजाति समुदाय के प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें धर्मांतरण, सरना धर्म, जनजातीय संस्कृति की रक्षा एवं संवर्धन जैसे विषयों पर गंभीर और सकारात्मक चर्चा की गयी। इस प्रकार, अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा 2026 न केवल संगठनात्मक समीक्षा का मंच बनी, बल्कि आने वाले समय में राष्ट्र और समाज के समग्र विकास हेतु दिशा निर्धारित करने वाला एक महत्वपूर्ण पड़ाव भी सिद्ध हुई। 

प्रांत कार्यवाह संजय कुमार ने आगामी भारतीय नव वर्ष व प्रकृति पर्व सरहुल, रामनवमी की अनंत शुभकामनाएं दी। आज के पत्रकार वार्ता में उत्तर पूर्व के क्षेत्र संघचालक मा.देवव्रत पाहन, झारखंड प्रांत के सह प्रांत संघचालक मा.अशोक कुमार श्रीवास्तव जी रांची विभाग के प्रचार प्रमुख श्री विवेक जी, रांची महानगर के प्रचार प्रमुख स्निग्ध एवं सह प्रचार प्रमुख शिवेंदु सागर उपस्थित थे।

बिहार

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Published / 2026-03-16 21:56:13
बिहार राज्यसभा चुनाव में विपक्ष चारों खाने चित्त

बिहार में तेजस्वी यादव की फिर हार, कांग्रेस का साथ बेकार; राज्यसभा चुनाव परिणाम से क्या संकेत? 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। 14 नवंबर 2025 मंगलवार था। 16 मार्च 2026 सोमवार है। दिन अलग है। परिणाम एक। अंतराल 120 दिन करीब। कुछ बदला नहीं तेजस्वी यादव के लिए। विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हारे। राज्यसभा चुनाव भी। संकेत सोचने को मजबूर कर रहा। बिहार में विपक्ष को अब सोचना ही पड़ेगा। खासकर, तेजस्वी यादव और कांग्रेस को। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणाम में साफ दिख गया कि राजद-कांग्रेस के साथ होने का कोई फायदा नहीं है। 

अब राज्यसभा चुनाव 2026 के परिणाम से यह साफ हो रहा है कि कांग्रेस को साथ रखने पर राजद को विचारना ही पड़ेगा। तेजस्वी यादव ने पांच में से राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए वह भी कर दिया, जो विधानसभा में नहीं किया था- अकटकट को साथ लाना। फिर भी, हार का सिलसिला नहीं थमा। एक सीट तेजस्वी जीत जाते तो उनके लिए बड़ी जीत होती, लेकिन अपने एक और कांग्रेस के तीन विधायकों ने उनके वजूद पर सवाल खड़ा कर दिया है। 

अपने एक विधायक पर काबू नहीं रख पाये तेजस्वी 

चुनाव में धन-बल का प्रयोग होगा, यह पहले ही कहा जा रहा था। पांचवीं सीट पर जीत के लिए किसी भी पक्ष को मैनेज करना ही था। तेजस्वी यादव ने असद्दुदीन ओवैसी की पार्टी के पांच और मायावती की बहुजन समाज पार्टी के इकलौते विधायक को साथ कर लिया। इसके बाद उन्हें सिर्फ पहले से महागठबंधन में रहे अपने विधायकों को साथ रखना था। वह अपने एक विधायक पर काबू नहीं कर सके। इसके साथ ही कांग्रेस के तीन विधायक गायब रहे। मतलब, होटल में नजर के सामने रखने की पूरी योजना बेकार गयी। नतीजा हार।  

जानिये, तेजस्वी यादव और एडी सिंह ने क्या कहा? 

हार के बाद तेजस्वी यादव ने कहा था कि हमारे चार विधायक वोट देने नहीं आये, यह बात पूरे बिहार को पता है कि वो लोग क्यों नहीं आए। संख्या कम होने के बावजूद हमलोगों ने अंतिम सांस तक लड़ाई लड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा धनतंत्र और मशीन तंत्र का उपयोग करती है। विधानसभा चुनाव में क्या हुआ था? 

इसे सबने देखा। आज तो भाजपा का धनतंत्र जीत गया लेकिन एक वक्त आएगा जब भाजपा का यह सब हथकंडा नहीं चल पायेगा। हमलोग हमेशा भाजपा के खिलाफ लड़ते रहेंगे। जब तब जीतेंगे नहीं तब तक छोड़ेंगे नहीं। वहीं राजद के उम्मीवार अमरेंद्र धारी सिंह ने कहा कि पूरी तरह से खरीद-फरोख्त की गई है। भाजपा ने सत्ता का दुरुपयोग किया। धनबल का गलत प्रयोग किया गया है।  

हार के बाद राजद विधायक ने क्या कहा? 

महागठबंधन की ओर से राजद विधायक कुमार सर्वजीत ने कहा कि अब तो पूरा देश जान गया कि कौन धनबल का प्रयोग करता है? भाजपा ने धनबल का प्रयोग किया है। यह छल किया गया है। यह जनता का अपमान है। महागठबंधन के चार विधायकों के नहीं पहुंचने पर कुमार सर्वजीत ने कहा कि मतदान प्रक्रिया में भाग नहीं लेने वालों विधायकों ने जनता के साथ धोखा दिया है। उनके ऊपर जिंदगी भर एक्स एमएलए का टैग लग जायेगा।

Published / 2026-03-05 18:16:44
बाबूलाल ने नीतीश कुमार के योगदान को सुशासन के लिए बताया सर्वोच्च

  • नीतिश कुमार के ट्वीट पर बाबूलाल मरांडी का जवाब
  • कहा- सुशासन की स्थापना में आपका योगदान सर्वोच्च

टीम एबीएन, रांची। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के ट्वीट पर जवाब दिया है। मरांडी ने लिखा, नीतिश कुमार, पिछले तीन-चार दशकों से आप बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे हैं।

मरांडी ने आगे लिखा, बिहार को जंगलराज से बाहर निकालकर सुशासन की स्थापना में आपका योगदान सर्वोच्च रहा है। आपके नेतृत्व में राज्य ने प्रशासनिक स्थिरता, विकास और व्यवस्था की एक नई दिशा प्राप्त की। मरांडी ने लिखा, सार्वजनिक जीवन में आपने हमेशा सुचिता, सम्मान और नैतिकता के मूल्यों को स्थापित किया है। बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में आपका कार्यकाल राज्य के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में याद किया जाएगा।

मरांडी ने कहा कि अब राज्यसभा सदस्य के रूप में भी सदन आपके अनुभव, द्दष्टि और नेतृत्व से निश्चित रूप से गौरवान्वित होगा। आपके उज्ज्वल भविष्य और इस नई पारी के लिए हार्दिक शुभकामनाएं। विकसित भारत के निर्माण में आपका अनुभव और योगदान देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगा।

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