Featured

View All

विज्ञापन

देश

झारखंड

खेल समाचार

करियर

समाज

मनोरंजन

वर्ल्ड

हेल्थ

बिजनेस

कानून व्यवस्था

ज्ञान विज्ञान

वन और पर्यावरण

राज काज

विचार

झारखंड

View All
Published / 2026-05-31 20:41:10
रांची : हरमू स्थित सरदार पटेल पार्क बदहाली की ओर

  • हरमू स्थित सरदार पटेल पार्क बदहाली की ओर
  • करोड़ों की लागत से बना पार्क रखरखाव के अभाव में जर्जर

टीम एबीएन, रांची। राजधानी रांची के मध्य स्थित हरमू हाउसिंग कॉलोनी का सरदार पटेल पार्क इन दिनों उपेक्षा का शिकार होता नजर आ रहा है। कभी शहरवासियों और आसपास के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा यह पार्क आज रखरखाव के अभाव में अपनी पहचान खोता जा रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से विकसित किए गए इस पार्क की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

हरमू हाउसिंग कॉलोनी को राजधानी के प्रतिष्ठित इलाकों में गिना जाता है। यह क्षेत्र हटिया विधानसभा के अंतर्गत आता है और यहां कई वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद, अधिवक्ता एवं समाज के प्रतिष्ठित लोग निवास करते हैं। इसके बावजूद पार्क की दुर्दशा पर किसी का ध्यान नहीं जाना स्थानीय नागरिकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

स्थानीय लोगों के अनुसार पार्क के रखरखाव की जिम्मेदारी संभाल रही एजेंसी का कार्यकाल लगभग आठ से दस महीने पूर्व समाप्त हो चुका है। इसके बाद से पार्क की नियमित देखरेख लगभग बंद हो गई है। वर्तमान में रांची नगर निगम द्वारा केवल टिकट व्यवस्था और रात्रि सुरक्षा के लिए कुछ होमगार्ड तैनात किए गए हैं, लेकिन पार्क की साफ-सफाई, हरियाली, मरम्मत और अन्य सुविधाओं पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

पार्क में लगे बच्चों के झूले टूट-फूट का शिकार हो रहे हैं। कई स्थानों पर पेड़-पौधे सूख रहे हैं। शौचालयों की स्थिति दयनीय बनी हुई है, जहां पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है। नलों की टोटियां क्षतिग्रस्त हैं और कई अन्य बुनियादी सुविधाएं भी खराब हो चुकी हैं। पार्क के मध्य स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा के आसपास भी नियमित सफाई और रखरखाव का अभाव दिखाई देता है।

स्थानीय नागरिकों ने बताया कि पार्क में स्थापित फव्वारे लंबे समय से बंद पड़े हैं। शाम के समय टहलने और व्यायाम करने आने वाले लोगों को पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं मिलने से भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। गर्मी की छुट्टियों के दौरान पार्क में बच्चों और परिवारों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन सुविधाओं की कमी लोगों की निराशा का कारण बन रही है।

नागरिकों का कहना है कि पार्क में प्रवेश शुल्क नियमित रूप से लिया जा रहा है, लेकिन इसके बदले मिलने वाली सुविधाएं लगातार घटती जा रही हैं। ऐसे में यह भी आवश्यक है कि नगर निगम पार्क से प्राप्त होने वाले राजस्व और उसके उपयोग की समीक्षा करे तथा पारदर्शिता सुनिश्चित करे।

स्थानीय लोगों ने रांची नगर निगम, नगर आयुक्त, जनप्रतिनिधियों तथा संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि पार्क की वर्तमान स्थिति का तत्काल निरीक्षण कराया जाए और किसी सक्षम एजेंसी को पुनः रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपी जाए। उनका कहना है कि शहर के बीचों-बीच स्थित यह पार्क न केवल बच्चों और परिवारों के मनोरंजन का केंद्र है, बल्कि लोगों को व्यस्त जीवनशैली के बीच कुछ समय प्रकृति के करीब बिताने का अवसर भी प्रदान करता है।

क्षेत्रवासियों का मानना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो करोड़ों रुपये की लागत से विकसित यह सार्वजनिक संपत्ति धीरे-धीरे अपनी उपयोगिता और सुंदरता खो देगी। इसलिए जनहित को ध्यान में रखते हुए पार्क की व्यवस्था को शीघ्र दुरुस्त करना आवश्यक है, ताकि यहां घूमने आने वाले लोगों को सुरक्षित, स्वच्छ और सुविधायुक्त वातावरण उपलब्ध हो सके।

Published / 2026-05-31 20:25:38
विश्व दुग्ध दिवस स्वास्थ्य, पोषण और समृद्धि का देता है संदेश : संजय सर्राफ

  • विश्व दुग्ध दिवस स्वास्थ्य, पोषण और समृद्धि का देता है संदेश: संजय सर्राफ

टीम एबीएन, रांची। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है विश्व दुग्ध दिवस प्रत्येक वर्ष 1 जून को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 2001 में खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) द्वारा की गई थी। 

इस दिवस का उद्देश्य दूध एवं दुग्ध उत्पादों के पोषणात्मक महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करना तथा डेयरी क्षेत्र के आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी योगदान को रेखांकित करना है। 

दूध को संपूर्ण आहार माना जाता है क्योंकि इसमें कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन-डी, विटामिन-बी12, पोटैशियम तथा अनेकआवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं। यह बच्चों की शारीरिक एवं मानसिक वृद्धि, युवाओं की कार्यक्षमता तथा बुजुर्गों की हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 

संतुलित आहार में दूध और दुग्ध उत्पादों का विशेष स्थान है।विश्व दुग्ध दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को दूध के स्वास्थ्य लाभों से अवगत कराना, डेयरी किसानों के योगदान का सम्मान करना तथा दुग्ध उत्पादन और वितरण से जुड़े उद्योगों के महत्व को उजागर करना है। 

यह दिवस किसानों, डेयरी उद्यमियों, वैज्ञानिकों और उपभोक्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का भी अवसर प्रदान करता है।भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है। देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में डेयरी क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान है। लाखों किसान एवं पशुपालक दुग्ध उत्पादन के माध्यम से अपनी आजीविका अर्जित करते हैं। 

विशेष रूप से महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में डेयरी व्यवसाय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। दुग्ध सहकारी समितियों और आधुनिक डेयरी तकनीकों ने ग्रामीण विकास को नई दिशा प्रदान की है। इस दिवस की विशेषता यह है कि इसके माध्यम से पौष्टिक आहार, खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण विकास और सतत कृषि के महत्व को भी बढ़ावा दिया जाता है। 

विभिन्न संस्थाओं द्वारा जागरूकता अभियान, स्वास्थ्य शिविर, संगोष्ठियां, दुग्ध वितरण कार्यक्रम तथा किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। आज के समय में जब कुपोषण और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां बढ़ रही हैं, तब दूध जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। 

विश्व दुग्ध दिवस हमें यह संदेश देता है कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए संतुलित पोषण, गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पादन और किसानों के कल्याण पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।विश्व दुग्ध दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि पोषण, स्वास्थ्य, किसान समृद्धि और सतत विकास के प्रति सामूहिक संकल्प का प्रतीक है।

बिहार

View All
Published / 2026-05-12 20:21:01
गोपालगंज : आर्केस्ट्रा से 40 नाबालिग मुक्त, 22 गिरफ्तार

गोपालगंज में आर्केस्ट्रा समूहों से मुक्त करायी गयी 40 से ज्यादा नाबालिग लड़कियां, 22 गिरफ्तार 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। बिहार के गोपालगंज जिले में आर्केस्ट्रा समूहों में नाबालिग लड़कियों के शोषण व उत्पीड़न के खिलाफ हालिया समय की सबसे बड़ी छापे की कार्रवाई में 40 से ज्यादा नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया गया। जिले के कुचायकोट थानाक्षेत्र में रात एक बजे से सुबह सात बजे तक तकरीबन 15 आर्केस्ट्रा समूहों पर हुई इस कार्रवाई में ट्रैफिकिंग व बच्चों के शोषण के आरोप में 22 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। 

यह पूरा अभियान अपर पुलिस महानिदेशक (कमजोर वर्ग) अमित जैन व गोपालगंज के पुलिस अधीक्षक विनय तिवारी की देखरेख में कुचायकोट पुलिस, एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन, नारायणी सेवा संस्थान व पटना स्थित बिहार पुलिस मुख्यालय ने संयुक्त रूप से चलाया। छापे की इस कार्रवाई में शामिल एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन और नारायणी सेवा संस्थान बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठन हैं। 

मुक्त करायी गयी लड़कियों की काउंसलिंग के बाद उनको सुरक्षित जगह भेज दिया गया और उनकी उम्र के सत्यापन की प्रक्रिया व अन्य कानूनी कार्रवाई जारी है। मुक्त करायी गयी लड़कियों की उम्र 10 से 17 साल है। फिलहाल मिली जानकारी के अनुसार इन बच्चियों को झांसा देकर ट्रैफिकिंग के जरिए पश्चिम बंगाल, असम, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से लाया गया था।  

बिहार में ट्रैफिकिंग गिरोहों व आर्केस्ट्रा समूहों के बीच गहरी सांठ-गांठ की ओर संकेत करते हुए एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन के वरिष्ठ निदेशक मनीष शर्मा ने कहा, इस अभियान ने एक बार इस तथ्य को उजागर किया है कि कितने बड़े पैमाने पर लड़कियों की ट्रैफिकिंग कर उन्हें राज्य के विभिन्न हिस्सों में चल रहे आर्केस्ट्रा समूहों में धकेला जा रहा है। इन लड़कियों को बहला-फुसलाकर यौन शोषण व उत्पीड़न के अंतहीन दलदल में धकेल दिया जाता है। हमें ट्रैफिकिंग के संगठित अपराध और आर्केस्ट्रा समूहों की मिलीभगत के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने की जरूरत है। 

इन्हें सख्त सजा देने के साथ ही पीड़ित बच्चियों के पुनर्वास व पर्याप्त मुआवजे की तत्काल आवश्यकता है। न्याय में किसी भी तरह की देरी इन बच्चों को दोबारा निराश कर सकती है। एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन और नारायणी सेवा संस्थान पिछले एक महीने से इन आर्केस्ट्रा समूहों की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे।

उन्होंने पाया कि आर्केस्ट्रा समूह शादी-ब्याह के समय ट्रैफिकिंग के जरिए पड़ोसी राज्यों से नाबालिग बच्चियों को लाते हैं और इन्हें विवाह समारोहों में भोजपुरी गानों पर अश्लील नृत्य के लिए मजबूर किया जाता है। हालांकि इनके यौन उत्पीड़न का सिलसिला समारोह खत्म होने के बाद भी जारी रहता है। चूंकि शादी-ब्याह का मौसम कुछ ही दिनों में खत्म होने वाला है, इसलिए छापे के लिए जानबूझ कर ऐसा दिन चुना गया जब कोई लग्न नहीं हो और ये सभी लड़कियां अपने ठिकानों पर मौजूद रहें।     

मुक्त कराये जाने के बाद काउंसलिंग के दौरान भयभीत दिख रही कई लड़कियों ने बताया कि उन्हें उनके कथित प्रेमी ने बेच दिया या फिर पैसे, नाम व बेहतर जिंदगी का लालच देकर शोषण के दलदल में धकेल दिया। कुछ लड़कियों ने बताया कि उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि अगर वे आर्केस्ट्रा से जुड़ी रहेंगी तो उन्हें भोजपुरी फिल्मों में काम करने का अवसर भी मिलेगा।   

ऐसे मामलों में जवाबदेही व तत्काल कार्रवाइयों की जरूरत पर जोर देते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के राष्ट्रीय संयोजक रवि कांत ने कहा, यह देखना दुखद है कि संगठित ट्रैफिकिंग गिरोह आर्केस्ट्रा समूहों के जरिए शोषण के इरादे से विभिन्न राज्यों में बच्चों को निशाना बना रहे हैं। यह कोई इकलौती घटना नहीं है बल्कि एक संगठित आपराधिक तंत्र की ओर इशारा करती है जो बच्चों की लाचारी, आर्केस्ट्रा जैसे धंधों में उनकी मांग और कानूनी सख्ती में कमी की वजह से फल-फूल रहा है। 

भारत में बच्चों की सुरक्षा के लिए काफी कड़े कानून हैं और हालिया समय में बिहार पुलिस की सख्ती बताती है कि वे ट्रैफिकिंग और बच्चों के शोषण के खात्मे के लिए गंभीर हैं। फिर भी राज्यों में आपसी समन्वय, शादी-ब्याह के मौसमों के दौरान इन पर सख्त निगरानी व जवाबदेही तंत्र को और मजबूत बनाने की जरूरत है ताकि इसका हमेशा के लिए खात्मा किया जा सके। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क कर सकते हैं।

Published / 2026-04-07 19:28:02
किशनगंज : नाबालिग की पिटाई कर जबरन बाल विवाह कराया, सात पर एफआईआर

एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। बिहार के किशनगंज जिले में एक 17 वर्षीय नाबालिग को मारपीट कर उसका 20 साल की युवती से जबरन विवाह करा दिया गया। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने सात आरोपियों के खिलाफ बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम सहित कई धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है। 

पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार घटना की रात रिजवान (बदला हुआ नाम) अपनी मां के साथ घर में था और पिता मजदूरी के लिए बाहर गये हुए थे। रात करीब नौ बजे आधा दर्जन लोगों ने दरवाजा खटखटाया और रिजवान की मां को धमकाते हुए उसका विवाह 20 साल की एक युवती से करने को कहा। 

मां के इनकार से नाराज आरोपी रिजवान को जबरन उठाकर एक होटल में ले गए। वहां उसे बंद कर मारा-पीटा गया इससे डरकर वह बेहोश हो गया। इसी दौरान बेहोशी की हालत में शादी की रस्में पूरी की गयीं। होश आने पर लड़के ने आरोपियों से उसका विवाह नहीं कराने की विनती की लेकिन इसी बीच उन्होंने मौलवी को बुलाकर जबरन निकाह पढ़ा दिया और निकाहनामे पर दस्तखत भी करा लिये। 

दबाव बनाने की गर्ज से आरोपियों ने पीड़ित परिवार से छह लाख रुपए की रंगदारी भी मांगी और पैसे नहीं देने पर झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी। रिजवान की मां अपने बेटे के जबरन बाल विवाह की शिकायत लेकर बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन जन निर्माण केंद्र तक पहुंची। संगठन ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत जिले के एसडीएम अनिकेत कुमार को सूचित किया। 

प्रशासन ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों के खिलाफ बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006, किशोर न्याय अधिनियम 2015 और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की। फिलहाल लड़का अपनी मां के पास सुरक्षित है और पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है। 

बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठन जन निर्माण केंद्र के राकेश कुमार ने कहा बाल विवाह की बहस हमेशा लड़कियों के इर्द-गिर्द घूमती है और यह गलत भी नहीं, क्योंकि वे सबसे बड़ी पीड़ित होती हैं। लेकिन लड़कों के साथ होने वाले ऐसे मामले अक्सर सुर्खियों से बाहर रह जाते हैं। 

समाज सोचता है लड़का है, झेल लेगा। जबकि बच्चा तो बच्चा होता है, चाहे बेटा हो या बेटी। बिहार में एक दौर जबरन विवाहों जिसे पकड़ुआ विवाह कहते हैं, का भी रहा है। ऐसे में जरूरी है कि प्रशासन चौकस रहे क्योंकि आम तौर पर इसके पीड़ित नाबालिग किशोर ही होते हैं। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क कर सकते हैं।

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।

© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse