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Published / 2026-03-07 22:45:15
रांची : होटल टीटॉस में बाइक सवार अपराधियों की फायरिंग, वेटर की मौत

  • रांची के होटल टीटॉस में बाइक सवार अपराधियों ने की ताबड़तोड़ फायरिंग, वेटर की मौत

टीम एबीएन, रांची। रांची के एयरपोर्ट थाना क्षेत्र के कुतियातु चौक स्थित होटल टीटॉस में शनिवार रात हथियारबंद अपराधियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग की। अपराधियों ने होटल परिसर में घुसकर करीब तीन से चार राउंड फायर किए। इस घटना में होटल का वेटर मनीष गंभीर रूप से घायल हो गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावर बाइक पर सवार थे और उन्होंने अचानक होटल को निशाना बनाया। गोलीबारी के दौरान होटल में अफरा-तफरी मच गई। घटना की सूचना मिलते ही एयरपोर्ट थाना की पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घायल मनीष को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया। अस्पताल सूत्रों के अनुसार इलाज के दौरान मनीष की मौत हो गई।

पुलिस ने घटनास्थल से खोखे बरामद किए हैं और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू कर दिया है। इसके अलावा अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए क्षेत्र में नाकेबंदी की गई है। शुरुआती जांच में पुलिस ने एक मुख्य संदिग्ध की पहचान कर ली है और उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापामारी जारी है।

Published / 2026-03-07 22:42:35
जल-जंगल-जमीन के अधिकार पर जोर, सांसद सुखदेव भगत ने डीसी से की सीधी बातचीत

  • जल-जंगल-जमीन के अधिकार पर जोर, सांसद सुखदेव भगत ने डीसी से की सीधी बातचीत
  • पेसा कानून लागू करने को ले सांसद सुखदेव भगत को उपायुक्त ने 10 दिनों के अन्दर काम प्रारंभ करने का दिया आश्वासन

एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समाज को जल, जंगल और जमीन पर अधिकार दिलाने वाले पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर लोहरदगा में आवाज तेज हो गई है। जिले के सांसद सुखदेव भगत ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि पेसा कानून को लागू करने की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाए, ताकि ग्रामसभाओं को उनका वास्तविक अधिकार मिल सके और आदिवासी समाज की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को मजबूती मिल सके। 

इसी मुद्दे को लेकर सांसद सुखदेव भगत ने सामाजिक प्रतिनिधियों दीवान और बेल के साथ लोहरदगा उपायुक्त डॉ. ताराचंद से मुलाकात कर जिले में पेसा कानून के क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान सांसद ने प्रशासन से आग्रह किया कि जल्द से जल्द पेसा कानून को लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि अनुसूचित क्षेत्रों के गांवों में ग्रामसभा को विकास योजनाओं और स्थानीय संसाधनों पर निर्णय लेने का अधिकार मिल सके। 

सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि पेसा कानून आदिवासी समाज के जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों का संरक्षण करने वाला एक महत्वपूर्ण कानून है। इसके लागू होने से ग्रामसभाओं को स्थानीय संसाधनों के उपयोग और प्रबंधन, विकास योजनाओं की स्वीकृति तथा सामाजिक मामलों में निर्णय लेने की शक्ति मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह कानून आदिवासी परंपरा और स्वशासन की व्यवस्था को मजबूत करेगा और ग्रामीण स्तर पर लोकतांत्रिक भागीदारी को बढ़ावा देगा।

उन्होंने यह भी कहा कि पेसा कानून लागू होने के बाद ग्रामसभाओं को गांव के विकास, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सामाजिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण अधिकार मिलते हैं। इसके तहत छोटे वन उत्पादों के उपयोग और प्रबंधन, जल संसाधनों के संरक्षण, स्थानीय विकास योजनाओं की स्वीकृति तथा भूमि अधिग्रहण से पहले ग्रामसभा की सहमति को अनिवार्य माना जाता है। इससे आदिवासी समाज को अपने गांव और संसाधनों के प्रबंधन में सीधी भागीदारी का अवसर मिलता है। 

गौरतलब है कि पेसा कानून यानी पंचायती राज (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम, 1996 अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत व्यवस्था को लागू करने और आदिवासी समुदाय को स्थानीय शासन में अधिकार देने के उद्देश्य से बनाया गया था। झारखंड में लंबे समय से इस कानून को पूरी तरह लागू करने की मांग उठती रही है और हाल के वर्षों में राज्य सरकार ने इसके नियमों को मंजूरी देकर ग्रामसभाओं को सशक्त बनाने की दिशा में कदम उठाया है। 

मौके पर पारंपरिक स्वशासन पड़हा व्यवस्था लोहरदगा के वेल विजय उरांव, उप वेल शिवशंकर टाना भगत, देवान संजीव भगत, उप देवान जतरू उरांव और कोटवार रामकिशुन उरांव समेत बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के प्रतिनिधि मौजूद थे। इसके अलावा इंटक के जिलाध्यक्ष आलोक साहू, साजिद अहमद, नेसार अहमद, सोनू कुरैशी सहित अन्य लोग भी उपस्थित थे।

बिहार

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Published / 2026-03-05 18:16:44
बाबूलाल ने नीतीश कुमार के योगदान को सुशासन के लिए बताया सर्वोच्च

  • नीतिश कुमार के ट्वीट पर बाबूलाल मरांडी का जवाब
  • कहा- सुशासन की स्थापना में आपका योगदान सर्वोच्च

टीम एबीएन, रांची। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के ट्वीट पर जवाब दिया है। मरांडी ने लिखा, नीतिश कुमार, पिछले तीन-चार दशकों से आप बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे हैं।

मरांडी ने आगे लिखा, बिहार को जंगलराज से बाहर निकालकर सुशासन की स्थापना में आपका योगदान सर्वोच्च रहा है। आपके नेतृत्व में राज्य ने प्रशासनिक स्थिरता, विकास और व्यवस्था की एक नई दिशा प्राप्त की। मरांडी ने लिखा, सार्वजनिक जीवन में आपने हमेशा सुचिता, सम्मान और नैतिकता के मूल्यों को स्थापित किया है। बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में आपका कार्यकाल राज्य के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में याद किया जाएगा।

मरांडी ने कहा कि अब राज्यसभा सदस्य के रूप में भी सदन आपके अनुभव, द्दष्टि और नेतृत्व से निश्चित रूप से गौरवान्वित होगा। आपके उज्ज्वल भविष्य और इस नई पारी के लिए हार्दिक शुभकामनाएं। विकसित भारत के निर्माण में आपका अनुभव और योगदान देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगा।

Published / 2026-02-04 21:19:06
दरभंगा : गांव के सभी ब्राह्मणों पर एक साथ केस

  • दिल्ली में काम करने वाले भी बने आरोपी, बिहार में अनोखा मामला 
  • दरभंगा के एक गांव में लगभग हर ब्राह्मण परिवार को आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने 70 नामजद लोगों और 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि पूरे ब्राह्मण समुदाय ने मिलकर एक परिवार का शोषण किया। 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। बिहार के दरभंगा में कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र के हरिनगर गांव में दर्ज एक प्राथमिकी आजकल चर्चा का विषय बनी हुई है। इसका कारण यह है कि इस एक ही प्राथमिकी में पूरे गांव के ब्राह्मण समुदाय के सभी सदस्यों को आरोपी बनाया गया है। हैरानी की बात यह है कि इनमें से कई लोग सालों से अपने परिवार का पेट पालने के लिए दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में काम कर रहे हैं, फिर भी उनके नाम भी आरोपियों की लिस्ट में शामिल हैं। 

एक प्राथमिकी, पूरा गांव कटघरे में 

दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान थाने में दर्ज इस प्राथमिकी में हरिनगर गांव के करीब 70 ब्राह्मणों के नाम हैं, जबकि 100 से 150 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। शिकायतकर्ता, असरफी पासवान का आरोप है कि पूरे गांव ने मिलकर उनके परिवार पर हमला किया और उन्हें परेशान किया। इसी आधार पर पुलिस ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम सहित कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। 
जैसे ही यह मामला सामने आया, गांव में हंगामा मच गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली बार है कि किसी विवाद में पूरे समुदाय को आरोपी बनाया गया है। 

दिल्ली और मुंबई में काम करने वाले भी आरोपी 

इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि आवेदन में जिन लोगों के नाम हैं, उनमें से कई सालों से गांव में नहीं रह रहे हैं। कुछ दिल्ली और मुंबई में मजदूरी करते हैं, जबकि कुछ प्राइवेट कंपनियों में नौकरी करते हैं। परिवार वालों का कहना है कि घटना के समय ये लोग गांव में मौजूद नहीं थे, फिर भी उन्हें आरोपी बनाया गया है।

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