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Published / 2026-06-20 21:07:12
तीन मासूमों की मौत हादसा नहीं, प्रबंधन की घोर लापरवाही का परिणाम : देवेन्द्र नाथ महतो

सीसीएल के लापरवाही से मासूम बच्चों की मौत हुई है : देवेन्द्र नाथ महतो 

मासूम बच्चों की मौत के विरोध में सीसीएल मगध माइंस बंद, पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग 

टीम एबीएन, रांची। हर बार की भांति इस बार भी देवेन्द्र नाथ महतो गरीबों का मसीहा बने, लातेहार जिला के बालूमाथ प्रखंड अंतर्गत आरा-चमातु निवासी द्वारिका गोंझू के तीनों मासूम बच्चों—माही 9 वर्ष, दीपिका 6 वर्ष एवं आर्यन 3 वर्ष की दर्दनाक मौत से पूरे क्षेत्र में शोक एवं आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि सीसीएल मगध परियोजना प्रबंधन की लापरवाही के कारण यह दुखद घटना घटी है। 

घटना के विरोध में झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा  के केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष एवं आंदोलनकारी नेता देवेन्द्र नाथ महतो के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीण सबसे पहले मगध परियोजना के पीओ कार्यालय पहुंचे। वहां एरिया जीएम एवं प्रोजेक्ट आॅफिसर से मुलाकात कर घटना पर वार्ता करने तथा पीड़ित परिवार को न्याय, उचित मुआवजा एवं अन्य मांगों को रखने का प्रयास किया गया। लेकिन परियोजना प्रबंधन की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं की गयी और न ही ग्रामीणों के साथ कोई सार्थक वार्ता की गयी। 

प्रबंधन के असंवेदनशील रवैये से ग्रामीणों में भारी आक्रोश उत्पन्न हो गया। इसके बाद देवेन्द्र नाथ महतो के नेतृत्व में ग्रामीणों ने सीसीएल मगध माइंस का संचालन बंद करा दिया तथा न्याय की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। देर रात तक माइंस का संचालन पूरी तरह बंद रहा और आंदोलन जारी रहा। इस दौरान देवेन्द्र नाथ महतो ने कहा तीन मासूम बच्चों की मौत केवल एक हादसा नहीं, बल्कि प्रबंधन की घोर लापरवाही का परिणाम है। 

जब ग्रामीण अपनी पीड़ा और न्याय की मांग लेकर प्रबंधन के पास पहुंचे, तब उनकी बात सुनने तक का प्रयास नहीं किया गया। यह जनता के प्रति गैर-जिम्मेदाराना और असंवेदनशील रवैया है। उन्होंने आगे कहा पीड़ित परिवार को तत्काल सम्मानजनक मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को स्थायी रोजगार, घटना की उच्चस्तरीय जांच एवं दोषी अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाये। 

साथ ही परियोजना क्षेत्र में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाये, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाएं दोबारा न हों। देवेन्द्र नाथ महतो ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा जब तक पीड़ित परिवार की मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता और न्याय सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक सीसीएल मगध माइंस का संचालन बंद रहेगा। 

यदि प्रबंधन और सरकार इस मामले को गंभीरता से नहीं लेती है तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जायेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन एवं प्रशासन की होगी। आंदोलन स्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता तथा जेएलकेएम के पदाधिकारी और कार्यकर्ता देर रात तक डटे रहे और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के संकल्प को दोहराया।

Published / 2026-06-20 21:04:15
धनबाद : तिलातांड़ में अवैध कोयला डिपो का खेल जारी

  • धनबाद : तिलातांड़ में अवैध कोयला डिपो का खेल जारी
  • बड़े पैमाने पर चलाया जा रहा अवैध कोयला कारोबार

एबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ जिला अध्यक्ष रत्नेश कुमार ने झारखंड डीजीपी को पत्र लिखकर कहा कि धनबाद जिले के कतरास क्षेत्र अंतर्गत तिलातांड़ बारूद घर के समीप कथित रूप से बड़े पैमाने पर अवैध कोयला कारोबार चलाया जा रहा है। अवैध कोयला डिपो चलाकर कोयले का भंडारण किया जा रहा है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण बढ़ रहा है और लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी हुई है।

मोटरसाइकिल एवं स्कूटर के माध्यम से विभिन्न स्थानों से कोयला एकत्र कर डिपो में जमा किया जाता है। इसके बाद मजदूरों की सहायता से प्रतिदिन हाइवा एवं ट्रकों में कोयला लोड कर बाहरी मंडियों की ओर भेजा जाता है। अवैध कारोबार पर कार्रवाई नहीं होने से अवैध कारोबारियों का मनोबल बढ़ता जा रहा है। 

चल रहे अवैध कोयला डिपो के कारण क्षेत्र में हर समय आसपास रहने वाले लोगों में भय का माहौल बना रहता है कि इस प्रकार की गतिविधियों से प्रशासन और पुलिस की छवि भी प्रभावित होती है। आप अपने स्तर से निष्पक्ष जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई करने की कृपा करेंगे। साथ ही अवैध कोयला कारोबार पर रोक लगाने की कृपा करेंगे।

बिहार

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Published / 2026-05-12 20:21:01
गोपालगंज : आर्केस्ट्रा से 40 नाबालिग मुक्त, 22 गिरफ्तार

गोपालगंज में आर्केस्ट्रा समूहों से मुक्त करायी गयी 40 से ज्यादा नाबालिग लड़कियां, 22 गिरफ्तार 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। बिहार के गोपालगंज जिले में आर्केस्ट्रा समूहों में नाबालिग लड़कियों के शोषण व उत्पीड़न के खिलाफ हालिया समय की सबसे बड़ी छापे की कार्रवाई में 40 से ज्यादा नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया गया। जिले के कुचायकोट थानाक्षेत्र में रात एक बजे से सुबह सात बजे तक तकरीबन 15 आर्केस्ट्रा समूहों पर हुई इस कार्रवाई में ट्रैफिकिंग व बच्चों के शोषण के आरोप में 22 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। 

यह पूरा अभियान अपर पुलिस महानिदेशक (कमजोर वर्ग) अमित जैन व गोपालगंज के पुलिस अधीक्षक विनय तिवारी की देखरेख में कुचायकोट पुलिस, एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन, नारायणी सेवा संस्थान व पटना स्थित बिहार पुलिस मुख्यालय ने संयुक्त रूप से चलाया। छापे की इस कार्रवाई में शामिल एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन और नारायणी सेवा संस्थान बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठन हैं। 

मुक्त करायी गयी लड़कियों की काउंसलिंग के बाद उनको सुरक्षित जगह भेज दिया गया और उनकी उम्र के सत्यापन की प्रक्रिया व अन्य कानूनी कार्रवाई जारी है। मुक्त करायी गयी लड़कियों की उम्र 10 से 17 साल है। फिलहाल मिली जानकारी के अनुसार इन बच्चियों को झांसा देकर ट्रैफिकिंग के जरिए पश्चिम बंगाल, असम, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से लाया गया था।  

बिहार में ट्रैफिकिंग गिरोहों व आर्केस्ट्रा समूहों के बीच गहरी सांठ-गांठ की ओर संकेत करते हुए एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन के वरिष्ठ निदेशक मनीष शर्मा ने कहा, इस अभियान ने एक बार इस तथ्य को उजागर किया है कि कितने बड़े पैमाने पर लड़कियों की ट्रैफिकिंग कर उन्हें राज्य के विभिन्न हिस्सों में चल रहे आर्केस्ट्रा समूहों में धकेला जा रहा है। इन लड़कियों को बहला-फुसलाकर यौन शोषण व उत्पीड़न के अंतहीन दलदल में धकेल दिया जाता है। हमें ट्रैफिकिंग के संगठित अपराध और आर्केस्ट्रा समूहों की मिलीभगत के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने की जरूरत है। 

इन्हें सख्त सजा देने के साथ ही पीड़ित बच्चियों के पुनर्वास व पर्याप्त मुआवजे की तत्काल आवश्यकता है। न्याय में किसी भी तरह की देरी इन बच्चों को दोबारा निराश कर सकती है। एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन और नारायणी सेवा संस्थान पिछले एक महीने से इन आर्केस्ट्रा समूहों की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे।

उन्होंने पाया कि आर्केस्ट्रा समूह शादी-ब्याह के समय ट्रैफिकिंग के जरिए पड़ोसी राज्यों से नाबालिग बच्चियों को लाते हैं और इन्हें विवाह समारोहों में भोजपुरी गानों पर अश्लील नृत्य के लिए मजबूर किया जाता है। हालांकि इनके यौन उत्पीड़न का सिलसिला समारोह खत्म होने के बाद भी जारी रहता है। चूंकि शादी-ब्याह का मौसम कुछ ही दिनों में खत्म होने वाला है, इसलिए छापे के लिए जानबूझ कर ऐसा दिन चुना गया जब कोई लग्न नहीं हो और ये सभी लड़कियां अपने ठिकानों पर मौजूद रहें।     

मुक्त कराये जाने के बाद काउंसलिंग के दौरान भयभीत दिख रही कई लड़कियों ने बताया कि उन्हें उनके कथित प्रेमी ने बेच दिया या फिर पैसे, नाम व बेहतर जिंदगी का लालच देकर शोषण के दलदल में धकेल दिया। कुछ लड़कियों ने बताया कि उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि अगर वे आर्केस्ट्रा से जुड़ी रहेंगी तो उन्हें भोजपुरी फिल्मों में काम करने का अवसर भी मिलेगा।   

ऐसे मामलों में जवाबदेही व तत्काल कार्रवाइयों की जरूरत पर जोर देते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के राष्ट्रीय संयोजक रवि कांत ने कहा, यह देखना दुखद है कि संगठित ट्रैफिकिंग गिरोह आर्केस्ट्रा समूहों के जरिए शोषण के इरादे से विभिन्न राज्यों में बच्चों को निशाना बना रहे हैं। यह कोई इकलौती घटना नहीं है बल्कि एक संगठित आपराधिक तंत्र की ओर इशारा करती है जो बच्चों की लाचारी, आर्केस्ट्रा जैसे धंधों में उनकी मांग और कानूनी सख्ती में कमी की वजह से फल-फूल रहा है। 

भारत में बच्चों की सुरक्षा के लिए काफी कड़े कानून हैं और हालिया समय में बिहार पुलिस की सख्ती बताती है कि वे ट्रैफिकिंग और बच्चों के शोषण के खात्मे के लिए गंभीर हैं। फिर भी राज्यों में आपसी समन्वय, शादी-ब्याह के मौसमों के दौरान इन पर सख्त निगरानी व जवाबदेही तंत्र को और मजबूत बनाने की जरूरत है ताकि इसका हमेशा के लिए खात्मा किया जा सके। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क कर सकते हैं।

Published / 2026-04-07 19:28:02
किशनगंज : नाबालिग की पिटाई कर जबरन बाल विवाह कराया, सात पर एफआईआर

एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। बिहार के किशनगंज जिले में एक 17 वर्षीय नाबालिग को मारपीट कर उसका 20 साल की युवती से जबरन विवाह करा दिया गया। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने सात आरोपियों के खिलाफ बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम सहित कई धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है। 

पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार घटना की रात रिजवान (बदला हुआ नाम) अपनी मां के साथ घर में था और पिता मजदूरी के लिए बाहर गये हुए थे। रात करीब नौ बजे आधा दर्जन लोगों ने दरवाजा खटखटाया और रिजवान की मां को धमकाते हुए उसका विवाह 20 साल की एक युवती से करने को कहा। 

मां के इनकार से नाराज आरोपी रिजवान को जबरन उठाकर एक होटल में ले गए। वहां उसे बंद कर मारा-पीटा गया इससे डरकर वह बेहोश हो गया। इसी दौरान बेहोशी की हालत में शादी की रस्में पूरी की गयीं। होश आने पर लड़के ने आरोपियों से उसका विवाह नहीं कराने की विनती की लेकिन इसी बीच उन्होंने मौलवी को बुलाकर जबरन निकाह पढ़ा दिया और निकाहनामे पर दस्तखत भी करा लिये। 

दबाव बनाने की गर्ज से आरोपियों ने पीड़ित परिवार से छह लाख रुपए की रंगदारी भी मांगी और पैसे नहीं देने पर झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी। रिजवान की मां अपने बेटे के जबरन बाल विवाह की शिकायत लेकर बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन जन निर्माण केंद्र तक पहुंची। संगठन ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत जिले के एसडीएम अनिकेत कुमार को सूचित किया। 

प्रशासन ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों के खिलाफ बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006, किशोर न्याय अधिनियम 2015 और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की। फिलहाल लड़का अपनी मां के पास सुरक्षित है और पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है। 

बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठन जन निर्माण केंद्र के राकेश कुमार ने कहा बाल विवाह की बहस हमेशा लड़कियों के इर्द-गिर्द घूमती है और यह गलत भी नहीं, क्योंकि वे सबसे बड़ी पीड़ित होती हैं। लेकिन लड़कों के साथ होने वाले ऐसे मामले अक्सर सुर्खियों से बाहर रह जाते हैं। 

समाज सोचता है लड़का है, झेल लेगा। जबकि बच्चा तो बच्चा होता है, चाहे बेटा हो या बेटी। बिहार में एक दौर जबरन विवाहों जिसे पकड़ुआ विवाह कहते हैं, का भी रहा है। ऐसे में जरूरी है कि प्रशासन चौकस रहे क्योंकि आम तौर पर इसके पीड़ित नाबालिग किशोर ही होते हैं। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क कर सकते हैं।

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