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Published / 2026-07-02 21:56:53
झारखंड में नेत्रदान अभियान बना मिसाल

35 वर्षों में 1083 से अधिक लोगों की आंखों में लौटी रोशनी 

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में नेत्रदान और कॉर्निया प्रत्यारोपण के क्षेत्र में पिछले तीन दशकों से अधिक समय में उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिली है। लगातार जागरूकता अभियानों, चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार और समाज की भागीदारी के चलते अब तक 1083 से अधिक कॉर्नियल अंधता से पीड़ित मरीजों को सफल प्रत्यारोपण के माध्यम से नयी दृष्टि मिल चुकी है। यह उपलब्धि राज्य में नेत्रदान के प्रति बढ़ती जागरूकता का महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है। 

जागरूकता से बदली लोगों की सोच 

करीब 35 वर्ष पहले नेत्रदान को लेकर समाज में कई तरह की भ्रांतियां और संकोच देखने को मिलते थे। धीरे-धीरे विभिन्न सामाजिक और चिकित्सा संगठनों ने जागरूकता अभियान चलाये, जिसके बाद लोगों में नेत्रदान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित हुई। लगातार जनसंपर्क और जागरूकता कार्यक्रमों का असर यह हुआ कि अधिक से अधिक लोग नेत्रदान के लिए आगे आने लगे। 

आई बैंक और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का मिला लाभ 

राज्य में आई बैंक की स्थापना और कॉर्निया प्रत्यारोपण से जुड़ी आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विकसित होने के बाद मरीजों को स्थानीय स्तर पर बेहतर इलाज मिलने लगा। विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम और नयी तकनीकों की मदद से कॉर्निया प्रत्यारोपण सेवाओं का लगातार विस्तार हुआ, जिससे बड़ी संख्या में जरूरतमंद मरीजों को लाभ मिला। 

महामारी के दौरान भी जारी रही सेवा 

कोविड-19 महामारी के कठिन दौर में भी नेत्र प्रत्यारोपण से जुड़ी सेवाओं को पूरी तरह बंद नहीं किया गया। आवश्यक सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए कई जरूरतमंद मरीजों का सफल कॉर्निया प्रत्यारोपण किया गया। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी सेवाओं का जारी रहना चिकित्सा व्यवस्था की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। 

जन-जागरूकता कार्यक्रमों से बढ़ी भागीदारी 

नेत्रदान के प्रति लोगों को प्रेरित करने के लिए समय-समय पर जागरूकता रैली, रन, मैराथन, संगोष्ठी और अन्य सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किये जाते रहे हैं। इन अभियानों का उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि मृत्यु के बाद नेत्रदान किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में रोशनी ला सकता है। 

समाज की सहभागिता बनी सबसे बड़ी ताकत 

विशेषज्ञों का मानना है कि नेत्रदान अभियान की सफलता केवल चिकित्सा क्षेत्र की उपलब्धि नहीं है, बल्कि इसमें समाज की सक्रिय भागीदारी भी अहम रही है। लोगों की बढ़ती जागरूकता और स्वैच्छिक नेत्रदान की भावना के कारण राज्य में कॉर्निया प्रत्यारोपण के मामलों में लगातार वृद्धि हुई है। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अधिक से अधिक लोग नेत्रदान का संकल्प लें, तो भविष्य में कॉर्नियल अंधता से पीड़ित कई और मरीजों की जिंदगी में रोशनी लौटायी जा सकती है।

Published / 2026-07-02 20:44:46
धनबाद : बस स्टैंड के पास शव मिलने से सनसनी

धनबाद बस स्टैंड के पास कचरा चुनने वाले का शव मिला, इलाके में सनसनी, पुलिस जांच में जुटी   

एबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। गुरुवार सुबह धनबाद बस स्टैंड के पास एक व्यक्ति का शव मिलने से हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों ने तुरंत धनबाद थाना पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। 

कचरा चुनकर शराब पीता था मृतक   

स्थानीय शंभू सिंह ने मीडिया को बताया कि मृतक पिछले कई दिनों से बस स्टैंड के आसपास कचरा चुनने का काम करता था। कचरा बेचकर जो पैसे मिलते, उससे अक्सर शराब पीता था।  

शौच के लिए गये तो देखा शव   

शंभू सिंह ने कहा- गुरुवार सुबह जब मैं शौच के लिए गया तो एक व्यक्ति को जमीन पर पड़ा देखा। पास जाकर पहचाना तो वही था जो लंबे समय से यहां कचरा चुनता था। 

पुलिस कर रही जांच   

फिलहाल मृतक की पहचान नहीं हो पायी है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मौत का कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही साफ होगा। शराब के नशे में गिरने से मौत हुई या कोई और वजह है, पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है। बस स्टैंड के पास लाश मिलना अब आम बात हो गयी है। कचरा चुनने वाला था, शराब पीता था, इसलिए उसकी जान की कीमत नहीं? 

धनबाद स्टेशन रोड से लेकर बस स्टैंड तक लावारिस लाशें मिलती रहती हैं। प्रशासन सोया है। नगर निगम को रैन बसेरा नहीं दिखता? ये भी इसी शहर का था। नशा मुक्ति केंद्र किस काम के? गरीब मर रहा है और सिस्टम मूकदर्शक बना है। पोस्टमार्टम होगा, कागज बनेगा, फाइल बंद। पर सवाल वही रहेगा- अगली लाश कब और कहां मिलेगी?

बिहार

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Published / 2026-07-02 20:45:59
सरकारी बंगला से निजी आवास में शिफ्ट हुईं राबड़ी देवी

पूर्व सीएम राबड़ी देवी ने खाली किया सरकारी बंगला, निजी आवास में हुईं शिफ्ट 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने बृहस्पतिवार को उस सरकारी बंगले को खाली कर दिया, जिसका इस्तेमाल वह दो दशक से अधिक समय से अपने आवास और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के कैंप कार्यालय के रूप में कर रही थीं।  

राजद के बिहार में 2005 में हुए विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के कुछ समय बाद नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार ने राबड़ी को मुख्यमंत्री आवास के ठीक सामने तथा राजभवन के पास 10, सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगला आवंटित किया था। 

अब राबड़ी लगभग दो किलोमीटर दूर कौटिल्य नगर स्थित अपने निजी आवास में रहने चली गयी हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने 10, सर्कुलर रोड स्थित बंगला पार्टी नेता एवं मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित कर दिया है।  

बिहार सरकार ने पिछले साल नवंबर में एक आदेश जारी कर 10, सर्कुलर रोड स्थित बंगले को उपमुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास घोषित कर दिया था। इसके साथ ही राज्य विधान परिषद में विपक्ष की नेता होने के नाते राबड़ी को दूसरा सरकारी बंगला आवंटित किया गया था। हालांकि, राबड़ी ने उन्हें आवंटित 39, हार्डिंग रोड स्थित बंगले में जाने से इनकार कर दिया था। 

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा था कि यह बंगला 10, सर्कुलर रोड स्थित बंगले की तुलना में छोटा है और इसे राजनीतिक दृष्टि से अशुभ माना जाता है, क्योंकि यहां अतीत में रहने वाले सभी प्रमुख नेताओं का सियासी दबदबा बाद में घट गया।  

पिछले महीने भवन निर्माण विभाग ने नया आदेश जारी कर राबड़ी देवी को 39, हार्डिंग रोड स्थित आवास में स्थानांतरित होने और 29 जून तक 10, सर्कुलर रोड स्थित बंगला खाली करने का निर्देश दिया था। 

राबड़ी ने इस घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को चुनौती दी थी कि अगर उनमें हिम्मत है, तो वह उन्हें बेदखल करके दिखाएं। सम्राट बिहार में राबड़ी के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री थे। राबड़ी की प्रतिक्रिया के कारण राजद को तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था।

Published / 2026-05-12 20:21:01
गोपालगंज : आर्केस्ट्रा से 40 नाबालिग मुक्त, 22 गिरफ्तार

गोपालगंज में आर्केस्ट्रा समूहों से मुक्त करायी गयी 40 से ज्यादा नाबालिग लड़कियां, 22 गिरफ्तार 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। बिहार के गोपालगंज जिले में आर्केस्ट्रा समूहों में नाबालिग लड़कियों के शोषण व उत्पीड़न के खिलाफ हालिया समय की सबसे बड़ी छापे की कार्रवाई में 40 से ज्यादा नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया गया। जिले के कुचायकोट थानाक्षेत्र में रात एक बजे से सुबह सात बजे तक तकरीबन 15 आर्केस्ट्रा समूहों पर हुई इस कार्रवाई में ट्रैफिकिंग व बच्चों के शोषण के आरोप में 22 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। 

यह पूरा अभियान अपर पुलिस महानिदेशक (कमजोर वर्ग) अमित जैन व गोपालगंज के पुलिस अधीक्षक विनय तिवारी की देखरेख में कुचायकोट पुलिस, एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन, नारायणी सेवा संस्थान व पटना स्थित बिहार पुलिस मुख्यालय ने संयुक्त रूप से चलाया। छापे की इस कार्रवाई में शामिल एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन और नारायणी सेवा संस्थान बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठन हैं। 

मुक्त करायी गयी लड़कियों की काउंसलिंग के बाद उनको सुरक्षित जगह भेज दिया गया और उनकी उम्र के सत्यापन की प्रक्रिया व अन्य कानूनी कार्रवाई जारी है। मुक्त करायी गयी लड़कियों की उम्र 10 से 17 साल है। फिलहाल मिली जानकारी के अनुसार इन बच्चियों को झांसा देकर ट्रैफिकिंग के जरिए पश्चिम बंगाल, असम, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से लाया गया था।  

बिहार में ट्रैफिकिंग गिरोहों व आर्केस्ट्रा समूहों के बीच गहरी सांठ-गांठ की ओर संकेत करते हुए एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन के वरिष्ठ निदेशक मनीष शर्मा ने कहा, इस अभियान ने एक बार इस तथ्य को उजागर किया है कि कितने बड़े पैमाने पर लड़कियों की ट्रैफिकिंग कर उन्हें राज्य के विभिन्न हिस्सों में चल रहे आर्केस्ट्रा समूहों में धकेला जा रहा है। इन लड़कियों को बहला-फुसलाकर यौन शोषण व उत्पीड़न के अंतहीन दलदल में धकेल दिया जाता है। हमें ट्रैफिकिंग के संगठित अपराध और आर्केस्ट्रा समूहों की मिलीभगत के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने की जरूरत है। 

इन्हें सख्त सजा देने के साथ ही पीड़ित बच्चियों के पुनर्वास व पर्याप्त मुआवजे की तत्काल आवश्यकता है। न्याय में किसी भी तरह की देरी इन बच्चों को दोबारा निराश कर सकती है। एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन और नारायणी सेवा संस्थान पिछले एक महीने से इन आर्केस्ट्रा समूहों की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे।

उन्होंने पाया कि आर्केस्ट्रा समूह शादी-ब्याह के समय ट्रैफिकिंग के जरिए पड़ोसी राज्यों से नाबालिग बच्चियों को लाते हैं और इन्हें विवाह समारोहों में भोजपुरी गानों पर अश्लील नृत्य के लिए मजबूर किया जाता है। हालांकि इनके यौन उत्पीड़न का सिलसिला समारोह खत्म होने के बाद भी जारी रहता है। चूंकि शादी-ब्याह का मौसम कुछ ही दिनों में खत्म होने वाला है, इसलिए छापे के लिए जानबूझ कर ऐसा दिन चुना गया जब कोई लग्न नहीं हो और ये सभी लड़कियां अपने ठिकानों पर मौजूद रहें।     

मुक्त कराये जाने के बाद काउंसलिंग के दौरान भयभीत दिख रही कई लड़कियों ने बताया कि उन्हें उनके कथित प्रेमी ने बेच दिया या फिर पैसे, नाम व बेहतर जिंदगी का लालच देकर शोषण के दलदल में धकेल दिया। कुछ लड़कियों ने बताया कि उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि अगर वे आर्केस्ट्रा से जुड़ी रहेंगी तो उन्हें भोजपुरी फिल्मों में काम करने का अवसर भी मिलेगा।   

ऐसे मामलों में जवाबदेही व तत्काल कार्रवाइयों की जरूरत पर जोर देते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के राष्ट्रीय संयोजक रवि कांत ने कहा, यह देखना दुखद है कि संगठित ट्रैफिकिंग गिरोह आर्केस्ट्रा समूहों के जरिए शोषण के इरादे से विभिन्न राज्यों में बच्चों को निशाना बना रहे हैं। यह कोई इकलौती घटना नहीं है बल्कि एक संगठित आपराधिक तंत्र की ओर इशारा करती है जो बच्चों की लाचारी, आर्केस्ट्रा जैसे धंधों में उनकी मांग और कानूनी सख्ती में कमी की वजह से फल-फूल रहा है। 

भारत में बच्चों की सुरक्षा के लिए काफी कड़े कानून हैं और हालिया समय में बिहार पुलिस की सख्ती बताती है कि वे ट्रैफिकिंग और बच्चों के शोषण के खात्मे के लिए गंभीर हैं। फिर भी राज्यों में आपसी समन्वय, शादी-ब्याह के मौसमों के दौरान इन पर सख्त निगरानी व जवाबदेही तंत्र को और मजबूत बनाने की जरूरत है ताकि इसका हमेशा के लिए खात्मा किया जा सके। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क कर सकते हैं।

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