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Published / 2026-05-09 21:43:28
खदानों में श्रमिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं : सुखदेव भगत

आधुनिक तकनीक और मजबूत सुरक्षा मानक जरूरी 

सिलीगुड़ी, गंगटोक और हैदराबाद में कोयला, खान एवं इस्पात संबंधी स्थायी समिति की अहम बैठक में संपन्न 

एबीएन सेंट्रल डेस्क, हैदराबाद/लोहरदगा। कोयला, खान एवं इस्पात संबंधी संसदीय स्थायी समिति की अध्ययन यात्रा के तहत सिलीगुड़ी, गंगटोक और हैदराबाद में आयोजित उच्चस्तरीय बैठकों में खनन क्षेत्र की सुरक्षा, संरक्षण, अवसंरचना विकास और आत्मनिर्भर भारत अभियान को लेकर व्यापक मंथन किया गया। समिति की अध्यक्षता सांसद अनुराग ठाकुर ने की। 

बैठकों में कोयला मंत्रालय, खान मंत्रालय तथा विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों और संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इनमें भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल), नॉर्थ ईस्टर्न कोल फील्ड्स, सेंट्रल कोल फील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल), भारतीय खान ब्यूरो, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, नेशनल एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (नालको), मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड तथा हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के प्रतिनिधि शामिल रहे। 

सिलीगुड़ी में आयोजित बैठक में राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन पर विशेष चर्चा हुई। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत देश को महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में रणनीतियों और संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। गंगटोक में समिति ने कोयला खदानों में संरक्षण, श्रमिक सुरक्षा और अवसंरचना विकास के मुद्दों पर गंभीर चर्चा की। 

इस दौरान लोहरदगा सांसद सुखदेव भगत ने खदानों में कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खदानों में सुरक्षा मानकों को और अधिक मजबूत किया जाए तथा आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग सुनिश्चित हो, ताकि दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके। 

सुखदेव भगत ने कहा कि खनन क्षेत्र में सतत विकास के साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। इसके लिए स्थायी संरक्षण उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कोयला खदानों एवं आसपास के क्षेत्रों में आधारभूत संरचनाओं के उन्नयन की आवश्यकता बताते हुए कहा कि बेहतर सड़क, बिजली, जलापूर्ति और अन्य सुविधाओं से उत्पादन क्षमता में तेजी आयेगी और स्थानीय विकास को भी बल मिलेगा। 

वहीं हैदराबाद में आयोजित बैठक में कुकिंग कोल की कमी और इस्पात उत्पादन में स्थानीय कोयले के अधिक उपयोग पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि घरेलू संसाधनों के बेहतर उपयोग से इस्पात उद्योग को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी। बैठक का मुख्य उद्देश्य देश के कोयला और खनिज क्षेत्र की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करना, उत्पादन क्षमता बढ़ाना तथा सुरक्षा और पर्यावरणीय मानकों को और अधिक प्रभावी बनाना था।

Published / 2026-05-09 21:37:28
आजसू छात्र संघ ने गवर्नर और सीएम को सौंपा विरोध पत्र

आजसू ने राज्य के सभी विश्विद्यालयों  एवं अंगीभूत महाविद्यालयों एवं प्रस्तावित रिस्ट्रक्टिंग एंड क्लसटरिंग सिस्टम संबंधी संकल्प को तत्काल निरस्त करने हेतु राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री को विरोध-पत्र सौंपा 

टीम एबीएन, रांची। आजसू ने ज्ञापन के माध्यम से राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री को कहा कि झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा जारी संकल्प पत्रांक- 05/प0-13/2023 - 902, संकल्प पत्रांक-05/प0-06/2023 - 893 एवं अन्य संकल्प पत्रों के माध्यम से रांची विश्वविद्यालय, इसके अंतर्गत संचालित अंगीभूत महाविद्यालयों एवं झारखंड के अन्य विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक पदों के रिस्ट्रक्टिंग एंड क्लसटरिंग सिस्टम को लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है। 

यह प्रस्ताव राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था, विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों तथा झारखंड की भाषाई एवं सांस्कृतिक अस्मिता के लिए अत्यंत चिंताजनक, अव्यावहारिक एवं जनविरोधी प्रतीत होता है। अत: आजसू  इस संपूर्ण व्यवस्था का पुरजोर विरोध करते हुए माननीय राज्यपाल एवं  मुख्यमंत्री महोदय से इसे तत्काल निरस्त करने की मांग करती हैं। 

झारखंड सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक दृष्टि से अभी भी विकासशील राज्यों की श्रेणी में आता है। राज्य के अधिकांश विद्यार्थी ग्रामीण, आदिवासी, दलित, पिछड़े एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। ऐसे विद्यार्थी सीमित संसाधनों के बीच अपने निकटवर्ती महाविद्यालयों में अध्ययन कर पाते हैं। वर्तमान व्यवस्था में एक ही महाविद्यालय में कला, विज्ञान एवं वाणिज्य संकाय उपलब्ध रहने से विद्यार्थियों को विषय चयन की स्वतंत्रता, सहज पहुंच तथा संतुलित शैक्षणिक वातावरण प्राप्त होता है। 

किंतु प्रस्तावित क्लसटरिंग सिस्टम अंतर्गत किसी महाविद्यालय को केवल विज्ञान, किसी को केवल कला तथा किसी को केवल वाणिज्य अथवा अन्य विशिष्ट विषयों तक सीमित करने का प्रयास किया जा रहा है। यह व्यवस्था पूर्णत: अव्यावहारिक, छात्र-विरोधी एवं शिक्षा-विरोधी है। यदि विद्यार्थियों को अलग-अलग संकायों के लिए विभिन्न महाविद्यालयों में जाना पड़ेगा, तो राज्य की संपूर्ण उच्च शिक्षा व्यवस्था गंभीर रूप से प्रभावित होगी। 

  1. गरीब एवं ग्रामीण विद्यार्थियों पर प्रतिकूल प्रभाव : इस व्यवस्था के कारण गरीब एवं ग्रामीण विद्यार्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्हें परिवहन, आवास एवं अन्य खर्च वहन करने पड़ेंगे, जो अधिकांश परिवारों के लिए संभव नहीं है। परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में विद्यार्थी उच्च शिक्षा छोड़ने को विवश होंगे। झारखंड पहले से ही उच्च शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय औसत से पीछे है। ऐसी स्थिति में यह व्यवस्था विद्यार्थियों को शिक्षा से और दूर कर देगी। 
  2. छात्राओं की शिक्षा पर गंभीर असर : ग्रामीण एवं पारंपरिक परिवारों की अनेक छात्राएं केवल निकटवर्ती महाविद्यालयों में ही अध्ययन कर पाती हैं। यदि विषयों के अनुसार उन्हें दूरस्थ महाविद्यालयों में जाना पड़े, तो उनकी शिक्षा बाधित होगी तथा महिला शिक्षा को गंभीर क्षति पहुंचेगी। 
  3. राष्ट्रीय शिक्षा नीति की मूल भावना के विपरीत : राष्ट्रीय शिक्षा नीति बहुविषयी शिक्षा की अवधारणा को बढ़ावा देती है, जहां विद्यार्थी विभिन्न विषयों का अध्ययन कर सकें। परंतु प्रस्तावित क्लसटरिंग सिस्टम महाविद्यालयों को संकीर्ण विषय-केंद्रित संस्थानों में बदलने का प्रयास कर रहा है। वास्तविक बहुविषयी शिक्षा तभी संभव है जब एक ही महाविद्यालय में कला, विज्ञान एवं वाणिज्य सभी संकाय उपलब्ध हों। 
  4. महाविद्यालयों की ऐतिहासिक पहचान समाप्त होने का खतरा : वर्षों से स्थापित महाविद्यालय अपनी समग्र शैक्षणिक संरचना एवं बहुविषयी स्वरूप के कारण प्रसिद्ध हैं। यदि उनमें से विभिन्न संकाय समाप्त या स्थानांतरित कर दिये गये, तो उनकी ऐतिहासिक पहचान, शैक्षणिक गरिमा एवं सामाजिक महत्व प्रभावित होगा। 
  5. शिक्षकों एवं कर्मचारियों के पदों पर संकट : इस संकल्प में अनेक शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक पदों को सरेंडर करने तथा पुनर्गठन के नाम पर समाप्त करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। जबकि वास्तविक स्थिति यह है कि विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में पहले से ही शिक्षकों एवं कर्मचारियों की भारी कमी है। पदों की कटौती से शिक्षा की गुणवत्ता, शोध कार्य, परीक्षा व्यवस्था, पुस्तकालय, प्रयोगशालाएं एवं प्रशासनिक कार्य गंभीर रूप से प्रभावित होंगे। 
  6. जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं पर सीधा खतरा : झारखंड अपनी समृद्ध जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं, संस्कृति, परंपराओं एवं लोकजीवन के कारण पूरे देश में विशिष्ट पहचान रखता है। यहां की भाषाएं केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि आदिवासी एवं मूलवासी समाज की ऐतिहासिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत एवं सामाजिक अस्मिता की आधारशिला हैं। वर्तमान में विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में संताली, हो, खड़िया, कुड़ुख, मुंडारी, नागपुरी, पंचपरगनिया, खोरठा एवं कुड़माली जैसी भाषाओं का अध्ययन-अध्यापन होने के कारण नयी पीढ़ी अपनी भाषा, संस्कृति एवं परंपराओं से जुड़ी हुई है। किंतु प्रस्तावित क्लसटरिंग सिस्टम के अंतर्गत इन विभागों को सीमित अथवा स्थानांतरित किए जाने से जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के विभाग स्वत: कमजोर हो जायेंगे। अधिकांश विद्यार्थी दूरस्थ महाविद्यालयों में जाकर इन भाषाओं का अध्ययन नहीं कर पायेंगे, जिससे नामांकन घटेगा, विभाग निष्क्रिय होंगे तथा धीरे-धीरे ये भाषाएं उच्च शिक्षा व्यवस्था से समाप्त होने लगेंगी। यह केवल शैक्षणिक क्षति नहीं होगी, बल्कि झारखंड की सांस्कृतिक पहचान एवं भाषाई विरासत पर भी गंभीर आघात होगा। 
  7. झारखंड को शिक्षा के क्षेत्र में और पीछे धकेलने वाला निर्णय : झारखंड जैसे राज्य में आवश्यकता उच्च शिक्षा संस्थानों को मजबूत करने की है, न कि उन्हें विभाजित एवं कमजोर करने की। महाविद्यालयों को तोड़ने के बजाय उनमें शिक्षकों की नियुक्ति, आधारभूत संरचना, पुस्तकालय, प्रयोगशालाएं, डिजिटल सुविधाएं एवं शोध व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाना चाहिए। 

यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो झारखंड उच्च शिक्षा, भाषा एवं संस्कृति तीनों क्षेत्रों में और अधिक पिछड़ जायेगा। राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री से विनम्र प्रार्थना है कि 

  1. रिस्ट्रक्टिंग एंड क्लसटरिंग सिस्टम संबंधी उक्त संकल्प को तत्काल निरस्त किया जाये। 
  2. प्रत्येक महाविद्यालय में पूर्ववत कला, विज्ञान एवं वाणिज्य संकायों को यथावत रखा जाये। 
  3. जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के विभागों एवं अध्ययन-अध्यापन की वर्तमान व्यवस्था को सुरक्षित रखा जाये। 
  4. शिक्षकों एवं कर्मचारियों के पदों में कटौती बंद कर नियमित नियुक्तियां की जायें। 
  5. किसी भी नयी व्यवस्था को लागू करने से पूर्व विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों एवं शिक्षाविदों से व्यापक विमर्श किया जाये। 

हमें पूर्ण विश्वास है कि राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं राज्य के शैक्षणिक तथा सांस्कृतिक भविष्य के हित में संवेदनशील निर्णय लेते हुए इस जनविरोधी संकल्प को तत्काल निरस्त करने की कृपा करेंगे। ज्ञापन सौंपने में प्रदेश सचिव सक्षम झा, प्रदेश सचिव राजेश सिंह, महानगर अध्यक्ष अमन साहू, निशांत लिंडा, मोहन कुमार, संदीप सिंह इत्यादि उपस्थित थे। उक्त जानकारी अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) के प्रदेश सचिव सक्षम झा और राजेश सिंह ने दी।

बिहार

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Published / 2026-04-15 20:49:10
वाह काका नीतीश कुमार...

त्रिवेणी दास 

वाह काका नीतीश कुमार  

नैतिकता से भरपूर, 

पिता पुत्र दोनों बिहारी 

परिवारवाद से दूर 

जो रहा नहीं कभी दस्तूर..  

एबीएन एडिटोरियल डेस्क। ...और देखते ही देखते बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी वादा पूरी करते हुए कि सम्राट चौधरी को बड़ा आदमी बनायेंगे, दिल्ली कूच कर गये... ...सम्राट चौधरी के पिताजी स्वर्गीय शकुनी चौधरी समता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। 

राजद, कांग्रेस, जदयू और हिंदुस्तानी आवाम पार्टी (हम) में सक्रिय रहते हुए बिहार के तारापुर से विधायक और खगड़िया से सांसद रहे। सम्राट चौधरी ने भी राजद, जदयू और अब भारतीय जनता पार्टी में कार्य करते हुए परिवारवाद को आगे बढ़ाया; अब तो शानदार मुख्यमंत्री...। 

भारतीय राजनीति में जब परिवारवाद के तथाकथित नैतिक प्रचलन जो शुद्ध रूप से राजतंत्र का ही प्रयाय है, स्वीकृति प्राप्त हो ऐसे मे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इकलौता बेटा निशांत कुमार ने एक अलग ही नजीर पेश किया है और उन्होंने अनुकूल परिवेश होते हुए भी उपमुख्यमंत्री बनना स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि वह अभी किसी  सदन के सदस्य नहीं हैं और इसलिए उपमुख्यमंत्री नहीं बनेंगे। 

एनडीए के घटक दल के नेता उपेंद्र कुशवाहा का बेटा मंत्री बन गये जबकि वे किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। हिंदुस्तान आवाम पार्टी के नेता जीतन राम मांझी तो परिवारवाद के माल वाहक ट्रक ही चला रहे हैं। परिवारवाद के इंजन लालू प्रसाद यादव की गाड़ी राजनीति के पटरी में सबसे लंबी है। राजनीति में परिवारवाद के  इतिहास का किताब नेहरू गांधी परिवार का सबसे मोटा है जो वर्तमान तक यथावत चला आ रहा है। 

दक्षिण भारतीय राजनीति का तो आधार ही परिवारवाद रहा है। बड़े मियां तो बड़े मियां छोटे मियां सुभान अल्लाह.. अब तो प्रखंड से लेकर जिला स्तर तक के राजनीति में परिवारवाद का करिश्मा देखने का सौभाग्य एवं शुभ अवसर प्राप्त हो रहा है। सब प्रकार से अनुकूल परिस्थिति और कूवत होते हुए भी श्रीमान नीतीश कुमार तथा उनके पुत्र श्रीमान निशांत कुमार ने जो आदर्श प्रस्तुत किया है उसकी सराहना पूरे देश में हो रही है।

Published / 2026-04-05 19:44:26
राजद को फिर राष्ट्रीय पार्टी बनायेंगे कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव

  • कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार रांची पहुंचे तेजस्वी यादव
  • भव्य अभिनंदन समारोह में बोले- राजद को फिर राष्ट्रीय पार्टी बनाएंगे
  • राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने के तेजस्वी यादव पहली बार रांची पहुंचे, यहां उनका भव्य स्वागत किया गया

टीम एबीएन, रांची। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव का रांची के कार्निवल बैंक्वेट हॉल में रविवार को भव्य अभिनंदन किया गया। पटना से उनके साथ राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव, विधायक ओसामा शाहाब, पूर्व केंद्रीय मंत्री व झारखंड प्रभारी जयप्रकाश यादव, भोला यादव, झारखंड के श्रम मंत्री संजय प्रसाद यादव, प्रदेश अध्यक्ष संजय सिंह यादव, महिला राजद की प्रदेश अध्यक्ष रश्मि प्रकाश, पूर्व मंत्री सत्यानंद भोक्ता, उपाध्यक्ष अनिता यादव सहित सभी जिलों से आए जिलाध्यक्ष, जिला सचिव और अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाने का संकल्प

अभिनंदन समारोह में गद्गद हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि वे पार्टी को फिर से राष्ट्रीय पार्टी बनाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि राजद केरल में तीन सीटों पर चुनाव लड़ रहा है और वहां लेफ्ट अलायंस के साथ गठबंधन में है। तेजस्वी ने कहा, देश में जहां-जहां हमारी ताकत है, वहां-वहां हम चुनाव लड़ेंगे। पार्टी को बढ़ाना, विस्तार करना और मजबूत करना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

झारखंड के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं से उन्होंने आह्वान किया कि हर जिले और हर विधानसभा की एक-एक बूथ पर मजबूत तैयारी करें। तेजस्वी यादव बोले, आप सभी 81 विधानसभा सीटों पर तैयारी रखें। जब गठबंधन की बात होगी, तब देखा जाएगा. पिछली बार हमें सात सीटें मिलीं, जिनमें से दो पर फ्रेंडली फाइट हुई। पांच में से चार पर हम जीते। अगर ज्यादा सीटें मिलती तो और बेहतर प्रदर्शन होता।

फिर्कापरस्त ताकतों का विरोध और संगठन मजबूत करने पर जोर

तेजस्वी यादव ने कहा कि देश और राज्य में फिर्कापरस्त ताकतों को रोकना राजद की पहली प्राथमिकता है। बिरसा मुंडा की जमीन पर भाजपा को रोकने में झामुमो, कांग्रेस और माले के साथ राजद की बड़ी भूमिका रहेगी। उन्होंने स्वीकार किया कि कार्यकर्ता ज्यादा सीटों पर लड़ना चाहते हैं, लेकिन गठबंधन में समझौता भी करना पड़ता है। उन्होंने जोर दिया कि झारखंड में संगठन को मजबूत करेंगे तो सहयोगी दलों से ज्यादा सीटों की मांग भी कर पाएंगे।

बिहार विधानसभा चुनाव में हार का जिक्र करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा, हम जनता के वोट से नहीं हारे, बल्कि मशीन तंत्र और धनतंत्र की वजह से हारे। उन्होंने बताया कि राजद को 2025 के चुनाव में 1 करोड़ 90 लाख वोट मिले, जो 2020 से 20 लाख ज्यादा हैं। महिलाओं को 10 हजार रुपये देने के बावजूद वोट बढ़ा। तेजस्वी ने कहा, जितना भी छल-बेमानी कर लें, सच सामने आएगा। बिहार की जनता ने हमें पूरा प्यार दिया। हमारा समय कमजोर था, हम नहीं।

धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय की रक्षा

तेजस्वी यादव ने जोर देकर कहा कि राजद लालू प्रसाद यादव की विचारधारा पर चलने वाली पार्टी है। किसी में इतना दम नहीं कि राजद को तोड़ दे। अन्नपूर्णा देवी के पार्टी छोड़ने का कोई फर्क नहीं पड़ा। ईडी-सीबीआई जैसे मामलों के बावजूद राजद कमबैक करेगी और बिहार व केंद्र में सत्ता में आएगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि हर दिन कम से कम एक घंटा पार्टी को सशक्त बनाने में लगाएं। पार्टी में सबको बराबरी का मौका मिले और सभी विंग मजबूत हों।

तेजस्वी यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन असम में लड़ रहे हैं, जबकि हम केरल में लड़ रहे हैं। उन्होंने दिशोम गुरु शिबू सोरेन का आदर-सम्मान व्यक्त किया। परिसीमन के बाद बढ़ने वाली सीटों के लिए अभी से जिला स्तर पर तैयारी शुरू करने का आह्वान किया।

अन्य नेताओं ने क्या कहा

राजद के राष्ट्रीय महासचिव भोला यादव ने कहा कि देश में दो धाराएं हैं एक आरक्षण और संविधान खत्म करने की, दूसरी बाबा साहेब अंबेडकर के अरमानों को बचाने की। तेजस्वी यादव केरल से परचम लहराकर आए हैं। अगले चुनाव नई परिसीमन पर होंगे। 

झारखंड में विधानसभा सीटें बढ़कर 120 और लोकसभा 20 हो जाएंगी। एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, इसलिए महिलाओं को सक्रिय करें। बूथ, पंचायत, प्रखंड और जिला स्तर पर संगठन मजबूत करें अकेला लड़ने जैसी तैयारी रखें।

वहीं, प्रदेश उपाध्यक्ष अनिता यादव ने कहा यूजीसी संशोधन जरूरी है। शिक्षण संस्थानों में ओबीसी, एससी, एसटी छात्रों का शोषण रोकें। SIR के दौरान सजग रहें ताकि किसी का नाम न कटे।

राजद के राष्ट्रीय महासचि अभय सिंह ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि लालू प्रसाद के उत्तराधिकारी तेजस्वी यादव हैं। बूथ जीतो कार्यक्रम में संगठन की कमजोरी हार की वजह बनी। वहीं, प्रदेश अध्यक्ष संजय सिंह यादव ने कहा कि झारखंड राजद बिहार के साथ कदम मिलाकर चलेगा और पार्टी को राष्ट्रीय दर्जा दिलाने में अहम भूमिका निभाएगा।

कार्यक्रम में तेजस्वी यादव और अन्य नेताओं ने संगठन विस्तार, बूथ स्तर की तैयारी और आगामी चुनावों (परिसीमन के बाद) पर जोर दिया। यह कार्यक्रम राजद को झारखंड में मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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