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Published / 2026-06-19 21:28:12
झारखंड : राज्यसभा चुनाव में प्रणव झा की हार पर महागठबंधन में झकझूमर

  • राज्यसभा चुनाव के बाद गठबंधन में रार, कांग्रेस के आरोपों पर आरजेडी का पलटवार; कहा- अपने अंदर झांके

टीम एबीएन, रांची। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा की हार के बाद झारखंड की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस प्रभारी के. राजू द्वारा राजद पर गठबंधन प्रत्याशी को वोट नहीं देने का आरोप लगाए जाने के बाद राजद ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

 राजद के पोलिंग एजेंट भोला प्रसाद यादव, विधायक दल के नेता सुरेश पासवान, प्रदेश अध्यक्ष संजय सिंह यादव और मंत्री संजय प्रसाद यादव ने संयुक्त रूप से कांग्रेस के आरोपों को निराधार और दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। राजद विधायक दल के नेता सुरेश पासवान ने कहा कि कांग्रेस को दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपने भीतर झांकना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि राजद के सभी चार विधायकों ने गठबंधन प्रत्याशी प्रणव झा को ही वोट दिया था।

श्री पासवान ने आरोप लगाया कि कांग्रेस प्रभारी के. राजू स्वयं इस चुनाव में खेला करने के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि राजद पर आरोप लगाकर कांग्रेस अपनी विफलता छिपाने की कोशिश कर रही है। साथ ही राहुल गांधी से के. राजू को झारखंड प्रभारी पद से हटाने की मांग भी की।

प्रदेश अध्यक्ष संजय सिंह यादव ने कहा कि कांग्रेस की वर्तमान स्थिति उसके नेताओं की कार्यशैली और बयानों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि जनता लगातार कांग्रेस से दूरी बना रही है और पार्टी को आत्ममंथन करने की जरूरत है।

राजद विधायकों ने कांग्रेस प्रत्याशी को वोट दिया

राजद के पोलिंग एजेंट भोला प्रसाद यादव ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का स्पष्ट निर्देश था कि गठबंधन प्रत्याशी प्रणव झा को जिताना है। उन्होंने दावा किया कि मतदान के दौरान सभी राजद विधायकों ने उन्हें अपना वोट दिखाया था, जिससे वह पूरी तरह संतुष्ट थे।

मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा कि राजद ने कभी किसी सहयोगी दल के साथ विश्वासघात नहीं किया है। कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों पर सार्वजनिक बयानबाजी के बजाय गठबंधन के मंच पर चर्चा होनी चाहिए।

Published / 2026-06-19 21:10:05
आठ वर्षों से लंबित नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों ने विभागीय सचिव से की मुलाकात

  • आठ वर्षों से लंबित नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों ने विभागीय सचिव से की मुलाकात
  • JUIDCO Ltd. के 141 कनीय अभियंता पदों पर नियुक्ति शीघ्र पूर्ण करने की मांग

टीम एबीएन, रांची। नगर विकास एवं आवास विभाग के अंतर्गत कनीय अभियंताओं की नियुक्ति प्रक्रिया में हो रहे लंबे विलंब को लेकर अभ्यर्थियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज विभागीय प्रधान आप्त सचिव से मुलाकात की। इस दौरान अभ्यर्थियों ने झारखंड अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड में नियुक्ति प्रक्रिया को हो रही अत्यधिक देरी पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए शीघ्र नियुक्ति की मांग की।

अभ्यर्थियों ने आवेदन सौंपते हुए बताया कि झारखंड सरकार के संकल्प संख्या-2304 दिनांक 27.04.2018 तथा पत्रांक 4967 के आलोक में विभिन्न शहरी स्थानीय निकायों में संविदा आधारित कनीय अभियंताओं के कुल 141 पदों (सिविल-93, विद्युत-23 एवं यांत्रिक-25) पर नियुक्ति हेतु विज्ञापन जारी किया गया था। किंतु विज्ञापन प्रकाशित होने के लगभग आठ वर्ष बाद भी नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो सकी है।

उन्होंने कहा कि आवेदन शुल्क के रूप में प्रत्येक अभ्यर्थी से ₹2000 की राशि ली गई थी, बावजूद इसके नियुक्ति प्रक्रिया अब तक अधूरी है। इससे हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने विभाग से अविलंब नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण कर योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रदान करने का आग्रह किया।

प्रधान आप्त सचिव संजय कुमार सिंह ने अभ्यर्थियों की बातों को गंभीरतापूर्वक सुना तथा JUIDCO Ltd. में शीघ्र सकारात्मक पहल करने का आश्वासन दिया। मुलाकात करने वाले शिष्टमंडल में संजय कुमार, तपेश्वर यादव एवं शेखर मंडल शामिल थे।

बिहार

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Published / 2026-05-12 20:21:01
गोपालगंज : आर्केस्ट्रा से 40 नाबालिग मुक्त, 22 गिरफ्तार

गोपालगंज में आर्केस्ट्रा समूहों से मुक्त करायी गयी 40 से ज्यादा नाबालिग लड़कियां, 22 गिरफ्तार 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। बिहार के गोपालगंज जिले में आर्केस्ट्रा समूहों में नाबालिग लड़कियों के शोषण व उत्पीड़न के खिलाफ हालिया समय की सबसे बड़ी छापे की कार्रवाई में 40 से ज्यादा नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया गया। जिले के कुचायकोट थानाक्षेत्र में रात एक बजे से सुबह सात बजे तक तकरीबन 15 आर्केस्ट्रा समूहों पर हुई इस कार्रवाई में ट्रैफिकिंग व बच्चों के शोषण के आरोप में 22 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। 

यह पूरा अभियान अपर पुलिस महानिदेशक (कमजोर वर्ग) अमित जैन व गोपालगंज के पुलिस अधीक्षक विनय तिवारी की देखरेख में कुचायकोट पुलिस, एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन, नारायणी सेवा संस्थान व पटना स्थित बिहार पुलिस मुख्यालय ने संयुक्त रूप से चलाया। छापे की इस कार्रवाई में शामिल एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन और नारायणी सेवा संस्थान बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठन हैं। 

मुक्त करायी गयी लड़कियों की काउंसलिंग के बाद उनको सुरक्षित जगह भेज दिया गया और उनकी उम्र के सत्यापन की प्रक्रिया व अन्य कानूनी कार्रवाई जारी है। मुक्त करायी गयी लड़कियों की उम्र 10 से 17 साल है। फिलहाल मिली जानकारी के अनुसार इन बच्चियों को झांसा देकर ट्रैफिकिंग के जरिए पश्चिम बंगाल, असम, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से लाया गया था।  

बिहार में ट्रैफिकिंग गिरोहों व आर्केस्ट्रा समूहों के बीच गहरी सांठ-गांठ की ओर संकेत करते हुए एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन के वरिष्ठ निदेशक मनीष शर्मा ने कहा, इस अभियान ने एक बार इस तथ्य को उजागर किया है कि कितने बड़े पैमाने पर लड़कियों की ट्रैफिकिंग कर उन्हें राज्य के विभिन्न हिस्सों में चल रहे आर्केस्ट्रा समूहों में धकेला जा रहा है। इन लड़कियों को बहला-फुसलाकर यौन शोषण व उत्पीड़न के अंतहीन दलदल में धकेल दिया जाता है। हमें ट्रैफिकिंग के संगठित अपराध और आर्केस्ट्रा समूहों की मिलीभगत के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने की जरूरत है। 

इन्हें सख्त सजा देने के साथ ही पीड़ित बच्चियों के पुनर्वास व पर्याप्त मुआवजे की तत्काल आवश्यकता है। न्याय में किसी भी तरह की देरी इन बच्चों को दोबारा निराश कर सकती है। एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन और नारायणी सेवा संस्थान पिछले एक महीने से इन आर्केस्ट्रा समूहों की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे।

उन्होंने पाया कि आर्केस्ट्रा समूह शादी-ब्याह के समय ट्रैफिकिंग के जरिए पड़ोसी राज्यों से नाबालिग बच्चियों को लाते हैं और इन्हें विवाह समारोहों में भोजपुरी गानों पर अश्लील नृत्य के लिए मजबूर किया जाता है। हालांकि इनके यौन उत्पीड़न का सिलसिला समारोह खत्म होने के बाद भी जारी रहता है। चूंकि शादी-ब्याह का मौसम कुछ ही दिनों में खत्म होने वाला है, इसलिए छापे के लिए जानबूझ कर ऐसा दिन चुना गया जब कोई लग्न नहीं हो और ये सभी लड़कियां अपने ठिकानों पर मौजूद रहें।     

मुक्त कराये जाने के बाद काउंसलिंग के दौरान भयभीत दिख रही कई लड़कियों ने बताया कि उन्हें उनके कथित प्रेमी ने बेच दिया या फिर पैसे, नाम व बेहतर जिंदगी का लालच देकर शोषण के दलदल में धकेल दिया। कुछ लड़कियों ने बताया कि उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि अगर वे आर्केस्ट्रा से जुड़ी रहेंगी तो उन्हें भोजपुरी फिल्मों में काम करने का अवसर भी मिलेगा।   

ऐसे मामलों में जवाबदेही व तत्काल कार्रवाइयों की जरूरत पर जोर देते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के राष्ट्रीय संयोजक रवि कांत ने कहा, यह देखना दुखद है कि संगठित ट्रैफिकिंग गिरोह आर्केस्ट्रा समूहों के जरिए शोषण के इरादे से विभिन्न राज्यों में बच्चों को निशाना बना रहे हैं। यह कोई इकलौती घटना नहीं है बल्कि एक संगठित आपराधिक तंत्र की ओर इशारा करती है जो बच्चों की लाचारी, आर्केस्ट्रा जैसे धंधों में उनकी मांग और कानूनी सख्ती में कमी की वजह से फल-फूल रहा है। 

भारत में बच्चों की सुरक्षा के लिए काफी कड़े कानून हैं और हालिया समय में बिहार पुलिस की सख्ती बताती है कि वे ट्रैफिकिंग और बच्चों के शोषण के खात्मे के लिए गंभीर हैं। फिर भी राज्यों में आपसी समन्वय, शादी-ब्याह के मौसमों के दौरान इन पर सख्त निगरानी व जवाबदेही तंत्र को और मजबूत बनाने की जरूरत है ताकि इसका हमेशा के लिए खात्मा किया जा सके। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क कर सकते हैं।

Published / 2026-04-07 19:28:02
किशनगंज : नाबालिग की पिटाई कर जबरन बाल विवाह कराया, सात पर एफआईआर

एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। बिहार के किशनगंज जिले में एक 17 वर्षीय नाबालिग को मारपीट कर उसका 20 साल की युवती से जबरन विवाह करा दिया गया। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने सात आरोपियों के खिलाफ बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम सहित कई धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है। 

पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार घटना की रात रिजवान (बदला हुआ नाम) अपनी मां के साथ घर में था और पिता मजदूरी के लिए बाहर गये हुए थे। रात करीब नौ बजे आधा दर्जन लोगों ने दरवाजा खटखटाया और रिजवान की मां को धमकाते हुए उसका विवाह 20 साल की एक युवती से करने को कहा। 

मां के इनकार से नाराज आरोपी रिजवान को जबरन उठाकर एक होटल में ले गए। वहां उसे बंद कर मारा-पीटा गया इससे डरकर वह बेहोश हो गया। इसी दौरान बेहोशी की हालत में शादी की रस्में पूरी की गयीं। होश आने पर लड़के ने आरोपियों से उसका विवाह नहीं कराने की विनती की लेकिन इसी बीच उन्होंने मौलवी को बुलाकर जबरन निकाह पढ़ा दिया और निकाहनामे पर दस्तखत भी करा लिये। 

दबाव बनाने की गर्ज से आरोपियों ने पीड़ित परिवार से छह लाख रुपए की रंगदारी भी मांगी और पैसे नहीं देने पर झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी। रिजवान की मां अपने बेटे के जबरन बाल विवाह की शिकायत लेकर बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन जन निर्माण केंद्र तक पहुंची। संगठन ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत जिले के एसडीएम अनिकेत कुमार को सूचित किया। 

प्रशासन ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों के खिलाफ बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006, किशोर न्याय अधिनियम 2015 और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की। फिलहाल लड़का अपनी मां के पास सुरक्षित है और पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है। 

बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठन जन निर्माण केंद्र के राकेश कुमार ने कहा बाल विवाह की बहस हमेशा लड़कियों के इर्द-गिर्द घूमती है और यह गलत भी नहीं, क्योंकि वे सबसे बड़ी पीड़ित होती हैं। लेकिन लड़कों के साथ होने वाले ऐसे मामले अक्सर सुर्खियों से बाहर रह जाते हैं। 

समाज सोचता है लड़का है, झेल लेगा। जबकि बच्चा तो बच्चा होता है, चाहे बेटा हो या बेटी। बिहार में एक दौर जबरन विवाहों जिसे पकड़ुआ विवाह कहते हैं, का भी रहा है। ऐसे में जरूरी है कि प्रशासन चौकस रहे क्योंकि आम तौर पर इसके पीड़ित नाबालिग किशोर ही होते हैं। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क कर सकते हैं।

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