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Published / 2026-05-25 21:51:57
डालसा और मानवाधिकार ने बुंडू में लगाया विधिक जागरूकता शिविर

टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 25 5 2025 को जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), रांची एवं अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के संयुक्त तत्वाधान में बुंडू प्रखंड कार्यालय में एक दिवसीय विधिक जागरूकता सह रक्तदान शिविर का आयोजन अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के राज्य प्रभारी राजेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में लगाया गया।

इस शिविर के मुख्य अतिथि  राकेश रौशन, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, हंश हेंब्रम, अंचल अधिकारी, बुंडू प्रखंड एवं रितेश कुमार, राष्ट्रीय अध्यक्ष, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन मुख्य रूप से उपस्थित थे। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य कार्यक्रम में आए हुए लोगों के बीच विधिक जागरूकता एवं सरकार के कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देना एवं एवं उनकी समस्याओं को सही पटल पर रखकर त्वरित निष्पादन करवाना है। 

इस शिविर में उपस्थित प्रखंड की ग्रामीण जनता को विधिक एवं सरकार के द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकार, रांची के पैनल अधिवक्ता राजेश कुमार सिन्हा के द्वारा दी गई एवं काफी संख्या में ग्रामीणों के द्वारा मुकदमों से संबंधित आवेदन, अबुआ आवास, राशन कार्ड, वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन, भूमि विवाद से  संबंधित आवेदन इस शिविर में आगे की कार्यवाही के लिए जमा किये। 

इसके साथ ही सदर अस्पताल से रक्त संग्रहण दल रविन्द्र कुमार के नेतृत्व में इस शिविर में उपस्थित थे, जिन्होंने इस रक्तदान शिविर में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के सदस्यों के द्वारा दिये गये रक्त का संग्रहण किया। 

सचिव एवं अंचलाधिकारी ने रक्तदाताओं के बीच बिस्कुट, पानी एवं जूस का वितरण किया। सचिव ने शिविर में आये आवेदनों पर त्वरित कार्यवाही करने एवं सबको सस्ता एवं सुलभ न्याय प्राप्त करने की बात कही। सचिव को रितेश कुमार, राष्ट्रीय अध्यक्ष ने रुद्राक्ष का पौधा देकर इस शिविर में आने के लिए अपने संगठन की ओर से आभार व्यक्त किया। राज्य प्रभारी राजेश सिंह ने पैनल अधिवक्ता राजेश सिन्हा एवं सीओ, हंस हेंब्रम को भी पौधा देकर सम्मानित किया। 

इस शिविर में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के बुंडू प्रखंड प्रभारी चौधरी महतो, राम सिंह, जागेश्वर, मुन्ना लाल, जगरनाथ मुंडा, बगराए मुंडा, बिकेस्वर महतो, सदर अस्पताल से रविन्द्र कुमार एवं काफी संख्या में ग्रामीणों का इस एक दिवसीय विधिक जागरूकता एवं रक्तदान शिविर को सफल बनाने में सराहनीय सहयोग रहा।

Published / 2026-05-25 21:51:00
छात्रों के आंदोलन के आगे झुका विश्वविद्यालय प्रशासन, सेमेस्टर- 5 परीक्षा में बैठने की मिली अनुमति

टीम एबीएन, रांची। आजसू छात्र संघ के नेतृत्व में सोमवार को श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में छात्रों की विभिन्न समस्याओं को लेकर ताला बंद कर जोरदार प्रदर्शन किया गया। आंदोलन के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में काफी देर तक छात्र-प्रशासन के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।

बाद में कुलपति, प्रॉक्टर एवं परीक्षा नियंत्रक मौके पर पहुंचे और छात्र प्रतिनिधियों के साथ वार्ता कर प्रशासनिक भवन का ताला खुलवाया। 
छात्रों की मुख्य मांग नई शिक्षा नीति (ठएढ-2020) के तहत सेशन 2023-27 के छात्रों को हो रही परेशानियों को लेकर थी। 

छात्रों का आरोप है कि वर्ष 2023 में नामांकन के समय विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा यह स्पष्ट जानकारी नहीं दी गयी कि वे चार वर्षीय पाठ्यक्रम एवं ठएढ के नए नियमों के अंतर्गत अध्ययन करेंगे। साथ ही यह भी नहीं बताया गया कि प्रत्येक वर्ष दो सेमेस्टर की परीक्षाओं को मिलाकर 75 प्रतिशत पेपर पास करना अनिवार्य होगा, अन्यथा छात्रों को ईयर बैक का सामना करना पड़ेगा। 

छात्र नेताओं ने कहा कि कई छात्र वर्तमान में सेमेस्टर-5 तक पहुंच चुके हैं, लेकिन अभी तक सेमेस्टर-1 से सेमेस्टर- 4 तक की अंकपत्र उन्हें उपलब्ध नहीं करायी गयी है। ऐसे में छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है, जबकि उनका शैक्षणिक सत्र वर्ष 2027 में समाप्त होने वाला है। 

आंदोलन के दौरान छात्रों ने परीक्षा नियंत्रक पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने छात्रों को एनईपी का एक्सपेरिमेंट छात्र बताते हुए समस्याओं को सहने की बात कही। छात्र नेताओं ने इसे गैर-जिम्मेदाराना एवं छात्र विरोधी बयान बताया। काफी देर तक चली वार्ता और छात्रों के दबाव के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सेशन 2023-27 के सेमेस्टर-5 के छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति देने पर सहमति जतायी। इसके बाद आंदोलन समाप्त किया गया। 

छात्र नेताओं ने इसे छात्र एकता और संघर्ष की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि छात्र हितों से जुड़े मुद्दों पर आगे भी आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलन का नेतृत्व प्रदेश सचिव  राजेश सिंह, अनुष्का सिंह, शिवम सिंह, राज दुबे, योगेश महतो, बिट्टू वर्मा, रोशन नायक एवं रवि ने किया।

बिहार

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Published / 2026-05-12 20:21:01
गोपालगंज : आर्केस्ट्रा से 40 नाबालिग मुक्त, 22 गिरफ्तार

गोपालगंज में आर्केस्ट्रा समूहों से मुक्त करायी गयी 40 से ज्यादा नाबालिग लड़कियां, 22 गिरफ्तार 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। बिहार के गोपालगंज जिले में आर्केस्ट्रा समूहों में नाबालिग लड़कियों के शोषण व उत्पीड़न के खिलाफ हालिया समय की सबसे बड़ी छापे की कार्रवाई में 40 से ज्यादा नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया गया। जिले के कुचायकोट थानाक्षेत्र में रात एक बजे से सुबह सात बजे तक तकरीबन 15 आर्केस्ट्रा समूहों पर हुई इस कार्रवाई में ट्रैफिकिंग व बच्चों के शोषण के आरोप में 22 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। 

यह पूरा अभियान अपर पुलिस महानिदेशक (कमजोर वर्ग) अमित जैन व गोपालगंज के पुलिस अधीक्षक विनय तिवारी की देखरेख में कुचायकोट पुलिस, एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन, नारायणी सेवा संस्थान व पटना स्थित बिहार पुलिस मुख्यालय ने संयुक्त रूप से चलाया। छापे की इस कार्रवाई में शामिल एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन और नारायणी सेवा संस्थान बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठन हैं। 

मुक्त करायी गयी लड़कियों की काउंसलिंग के बाद उनको सुरक्षित जगह भेज दिया गया और उनकी उम्र के सत्यापन की प्रक्रिया व अन्य कानूनी कार्रवाई जारी है। मुक्त करायी गयी लड़कियों की उम्र 10 से 17 साल है। फिलहाल मिली जानकारी के अनुसार इन बच्चियों को झांसा देकर ट्रैफिकिंग के जरिए पश्चिम बंगाल, असम, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से लाया गया था।  

बिहार में ट्रैफिकिंग गिरोहों व आर्केस्ट्रा समूहों के बीच गहरी सांठ-गांठ की ओर संकेत करते हुए एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन के वरिष्ठ निदेशक मनीष शर्मा ने कहा, इस अभियान ने एक बार इस तथ्य को उजागर किया है कि कितने बड़े पैमाने पर लड़कियों की ट्रैफिकिंग कर उन्हें राज्य के विभिन्न हिस्सों में चल रहे आर्केस्ट्रा समूहों में धकेला जा रहा है। इन लड़कियों को बहला-फुसलाकर यौन शोषण व उत्पीड़न के अंतहीन दलदल में धकेल दिया जाता है। हमें ट्रैफिकिंग के संगठित अपराध और आर्केस्ट्रा समूहों की मिलीभगत के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने की जरूरत है। 

इन्हें सख्त सजा देने के साथ ही पीड़ित बच्चियों के पुनर्वास व पर्याप्त मुआवजे की तत्काल आवश्यकता है। न्याय में किसी भी तरह की देरी इन बच्चों को दोबारा निराश कर सकती है। एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन और नारायणी सेवा संस्थान पिछले एक महीने से इन आर्केस्ट्रा समूहों की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे।

उन्होंने पाया कि आर्केस्ट्रा समूह शादी-ब्याह के समय ट्रैफिकिंग के जरिए पड़ोसी राज्यों से नाबालिग बच्चियों को लाते हैं और इन्हें विवाह समारोहों में भोजपुरी गानों पर अश्लील नृत्य के लिए मजबूर किया जाता है। हालांकि इनके यौन उत्पीड़न का सिलसिला समारोह खत्म होने के बाद भी जारी रहता है। चूंकि शादी-ब्याह का मौसम कुछ ही दिनों में खत्म होने वाला है, इसलिए छापे के लिए जानबूझ कर ऐसा दिन चुना गया जब कोई लग्न नहीं हो और ये सभी लड़कियां अपने ठिकानों पर मौजूद रहें।     

मुक्त कराये जाने के बाद काउंसलिंग के दौरान भयभीत दिख रही कई लड़कियों ने बताया कि उन्हें उनके कथित प्रेमी ने बेच दिया या फिर पैसे, नाम व बेहतर जिंदगी का लालच देकर शोषण के दलदल में धकेल दिया। कुछ लड़कियों ने बताया कि उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि अगर वे आर्केस्ट्रा से जुड़ी रहेंगी तो उन्हें भोजपुरी फिल्मों में काम करने का अवसर भी मिलेगा।   

ऐसे मामलों में जवाबदेही व तत्काल कार्रवाइयों की जरूरत पर जोर देते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के राष्ट्रीय संयोजक रवि कांत ने कहा, यह देखना दुखद है कि संगठित ट्रैफिकिंग गिरोह आर्केस्ट्रा समूहों के जरिए शोषण के इरादे से विभिन्न राज्यों में बच्चों को निशाना बना रहे हैं। यह कोई इकलौती घटना नहीं है बल्कि एक संगठित आपराधिक तंत्र की ओर इशारा करती है जो बच्चों की लाचारी, आर्केस्ट्रा जैसे धंधों में उनकी मांग और कानूनी सख्ती में कमी की वजह से फल-फूल रहा है। 

भारत में बच्चों की सुरक्षा के लिए काफी कड़े कानून हैं और हालिया समय में बिहार पुलिस की सख्ती बताती है कि वे ट्रैफिकिंग और बच्चों के शोषण के खात्मे के लिए गंभीर हैं। फिर भी राज्यों में आपसी समन्वय, शादी-ब्याह के मौसमों के दौरान इन पर सख्त निगरानी व जवाबदेही तंत्र को और मजबूत बनाने की जरूरत है ताकि इसका हमेशा के लिए खात्मा किया जा सके। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क कर सकते हैं।

Published / 2026-04-07 19:28:02
किशनगंज : नाबालिग की पिटाई कर जबरन बाल विवाह कराया, सात पर एफआईआर

एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। बिहार के किशनगंज जिले में एक 17 वर्षीय नाबालिग को मारपीट कर उसका 20 साल की युवती से जबरन विवाह करा दिया गया। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने सात आरोपियों के खिलाफ बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम सहित कई धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है। 

पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार घटना की रात रिजवान (बदला हुआ नाम) अपनी मां के साथ घर में था और पिता मजदूरी के लिए बाहर गये हुए थे। रात करीब नौ बजे आधा दर्जन लोगों ने दरवाजा खटखटाया और रिजवान की मां को धमकाते हुए उसका विवाह 20 साल की एक युवती से करने को कहा। 

मां के इनकार से नाराज आरोपी रिजवान को जबरन उठाकर एक होटल में ले गए। वहां उसे बंद कर मारा-पीटा गया इससे डरकर वह बेहोश हो गया। इसी दौरान बेहोशी की हालत में शादी की रस्में पूरी की गयीं। होश आने पर लड़के ने आरोपियों से उसका विवाह नहीं कराने की विनती की लेकिन इसी बीच उन्होंने मौलवी को बुलाकर जबरन निकाह पढ़ा दिया और निकाहनामे पर दस्तखत भी करा लिये। 

दबाव बनाने की गर्ज से आरोपियों ने पीड़ित परिवार से छह लाख रुपए की रंगदारी भी मांगी और पैसे नहीं देने पर झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी। रिजवान की मां अपने बेटे के जबरन बाल विवाह की शिकायत लेकर बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन जन निर्माण केंद्र तक पहुंची। संगठन ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत जिले के एसडीएम अनिकेत कुमार को सूचित किया। 

प्रशासन ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों के खिलाफ बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006, किशोर न्याय अधिनियम 2015 और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की। फिलहाल लड़का अपनी मां के पास सुरक्षित है और पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है। 

बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठन जन निर्माण केंद्र के राकेश कुमार ने कहा बाल विवाह की बहस हमेशा लड़कियों के इर्द-गिर्द घूमती है और यह गलत भी नहीं, क्योंकि वे सबसे बड़ी पीड़ित होती हैं। लेकिन लड़कों के साथ होने वाले ऐसे मामले अक्सर सुर्खियों से बाहर रह जाते हैं। 

समाज सोचता है लड़का है, झेल लेगा। जबकि बच्चा तो बच्चा होता है, चाहे बेटा हो या बेटी। बिहार में एक दौर जबरन विवाहों जिसे पकड़ुआ विवाह कहते हैं, का भी रहा है। ऐसे में जरूरी है कि प्रशासन चौकस रहे क्योंकि आम तौर पर इसके पीड़ित नाबालिग किशोर ही होते हैं। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क कर सकते हैं।

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