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Published / 2026-09-03 21:07:57
श्री कृष्ण प्रणामी मंदिर में भव्य जन्माष्टमी महोत्सव की तैयारियां पूरी

वृंदावन से आये विशेष आभूषण-वस्त्र, कोलकाता की टीम प्रस्तुत करेगी मनोहारी नृत्य-नाटिका 

टीम एबीएन, रांची। परमहंस डॉ. सदानंद जी महाराज के पावन सानिध्य एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के तत्वावधान में रांची के पुंदाग स्थित श्री कृष्ण प्रणामी सेवाधाम के श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं। जन्माष्टमी को लेकर मंदिर परिसर को आकर्षक विद्युत सज्जा, रंग-बिरंगी रोशनी एवं मनोहारी सजावट से भव्य रूप प्रदान किया गया है। महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। 

ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल एवं प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने संयुक्त रूप से बताया कि जन्माष्टमी महोत्सव को लेकर मंदिर में विशेष तैयारियां की गयी हैं। भगवान श्री राधा-कृष्ण के लिए वृंदावन से विशेष रूप से जड़ित आभूषणों से सुसज्जित आकर्षक वस्त्र मंगाये गये हैं। मंदिर में भगवान का भव्य श्रृंगार श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा। जन्माष्टमी महोत्सव का एक प्रमुख आकर्षण कोलकाता से आने वाली कलाकारों की विशेष नृत्य-नाटिका टीम होगी।

कलाकार भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, उनकी बाल लीलाओं, राधा-कृष्ण की प्रेम एवं भक्ति, कंस वध तथा भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य चरित्र पर आधारित मनोहारी नृत्य-नाटिका प्रस्तुत करेंगे। भक्ति, संगीत और नृत्य के माध्यम से श्रीकृष्ण की लीलाओं का जीवंत चित्रण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति करायेगा। मंदिर परिसर में भव्य झूलन भी सजाया गया है, जिसमें लड्डू गोपाल विराजमान होंगे। विभिन्न रंगों के आकर्षक एवं मनोहारी वस्त्रों में सुसज्जित अनेक लड्डू गोपाल झूलन की शोभा बढ़ायेंगे। 

श्रद्धालु भगवान के बाल स्वरूप के दर्शन कर झूलन उत्सव का आनंद ले सकेंगे। महोत्सव के क्रम में प्रात: 5:30 बजे मंगला आरती, 9 बजे श्रृंगार आरती तथा 11 बजे भगवान को थाल भोग अर्पित किया जायेगा। संध्या 4 बजे से श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन होंगे तथा 6 बजे संध्या आरती संपन्न होगी। इसके बाद रात्रि 7 बजे से भजन गायक मनीष सोनी एवं कोलकाता से आये जागरण मंडली के कलाकारों द्वारा भक्तिमय भजन, संकीर्तन एवं धार्मिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये जायेंगे, जो मध्यरात्रि तक चलेगा। 

मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के पावन अवसर पर विशेष आरती, जयघोष एवं जन्मोत्सव मनाया जायेगा। इसके पश्चात श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया जायेगा। पूरा मंदिर परिसर नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की जैसे भक्तिमय जयघोष से गूंज उठेगा। प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने सभी श्रद्धालुओं, भक्तजनों एवं धर्मप्रेमी नागरिकों से सपरिवार जन्माष्टमी महोत्सव में शामिल होकर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पुण्य एवं आध्यात्मिक आनंद प्राप्त करने का आग्रह किया।

Published / 2026-09-03 20:55:54
लोहरदगा : करमा पर्व को भव्य बनाने में जुटी सरना समिति

युवा पीढ़ी को संस्कृति, रीति-रिवाज और परंपराओं से जोड़ना जरूर : सुखदेव भगत 

मैना बगीचा स्थित पूजा स्थल की साफ-सफाई से लेकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक की बनी रणनीति 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। आगामी करमा पर्व को लेकर नवयुवक सरना समिति, मैना बगीचा, लोहरदगा की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गयी। बैठक में लोहरदगा लोकसभा के सांसद सुखदेव भगत उपस्थित रहे।  

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि प्रत्येक वर्ष की परंपरा को कायम रखते हुए इस वर्ष भी मैना बगीचा में करमा पर्व को भव्य और ऐतिहासिक रूप से मनाया जायेगा।  बैठक में करमा पूजा स्थल की साफ-सफाई, पूजा की तैयारियों, श्रद्धालुओं की सुविधा तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन को लेकर विस्तार से चर्चा की गयी। आयोजन को व्यवस्थित और सफल बनाने के लिए विभिन्न समितियों का गठन कर सदस्यों को जिम्मेदारियां भी सौंपी गयी।  

बैठक को संबोधित करते हुए सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि करमा पर्व आदिवासी समाज का महान पर्व है। यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, पहचान, भाईचारे और प्रकृति के साथ हमारे अटूट रिश्ते का प्रतीक है।  करम राजा बहन-भाई के पवित्र प्रेम, सुख-समृद्धि और प्रकृति संरक्षण का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अपनी संस्कृति, रीति-रिवाज और परंपराओं को और मजबूत करने की आवश्यकता है।  

युवा पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और करमा पर्व के महत्व से जोड़ना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि मैना बगीचा में इस बार भी करमा पर्व को ऐतिहासिक और भव्य स्वरूप दिया जायेगा और वे हर कदम पर सरना समिति के साथ खड़े हैं।  

सांसद ने कहा कि करमा पर्व के अवसर पर मैना बगीचा में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। इसे देखते हुए प्रशासन से समन्वय कर सुरक्षा, यातायात, साफ-सफाई और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराने की दिशा में पहल की जायेगी, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। 

बैठक में सीताराम भगत, अभिनव सिद्धार्थ, मनोज भगत, मनोज सोन तिर्की, संतोष केरकेट्टा, अनमोल भगत, वीरेंद्र भगत, प्रदीप उरांव, आशीष उरांव, रोहित उरांव, शंकर भगत, संदीप उरांव, विनोद उरांव सहित बड़ी संख्या में समिति के सदस्य एवं गणमान्य लोग उपस्थित थे।

बिहार

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Published / 2026-09-02 14:16:23
जहानाबाद : 24 घंटे में 6 फीट बढ़ा दरधा और मोरहर का जलस्तर

  • जहानाबाद में उफान पर दरधा और मोरहर नदियां: 24 घंटे में 6 फीट बढ़ा जलस्तर

एबीएन न्यूज नेटवर्क, जहानाबाद। जिले में लगातार बारिश के बाद दरधा और मोरहर नदी उफान पर हैं। पिछले 24 घंटे में दोनों नदियों का जलस्तर छह फीट से अधिक बढ़ गया है। शहर के कई संपर्क मार्ग पानी में डूब गए हैं। जाफरगंज और एसएस कॉलेज पुल पर तेज बहाव के बीच लोग जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे हैं, जबकि कई निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घरों तक पहुंच गया है।

24 घंटे में छह फीट से ज्यादा बढ़ा जलस्तर

लगातार हो रही बारिश के कारण जहानाबाद जिले में दरधा और मोरहर नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। पिछले 24 घंटे में दोनों नदियों के जलस्तर में छह फीट से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे शहर के कई इलाके बाढ़ की चपेट में आने लगे हैं और लोगों की परेशानी लगातार बढ़ रही है।

जाफरगंज पुल पर तीन फीट पानी, फिर भी आवाजाही जारी 

शहर को जाफरगंज, गोरक्षनी और धनगामा से जोड़ने वाले जाफरगंज पुल के ऊपर करीब तीन फीट पानी बह रहा है। तेज बहाव के बावजूद लोग पुल पार करने को मजबूर हैं। कोई पानी के बीच से गुजर रहा है तो कोई पुल की रेलिंग पकड़कर दूसरी ओर पहुंचने की कोशिश कर रहा है। कुछ लोग नदी में जमा जलकुंभी के सहारे भी निकलते दिखाई दिए, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

जाफरगंज पुल पर पानी का तेज बहाव होने के बावजूद अब तक न तो बैरिकेडिंग की गई है और न ही पुलिस बल की तैनाती की गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को तत्काल पुल पर आवाजाही रोकनी चाहिए, ताकि किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।

निचले इलाकों में घरों तक पहुंचा पानी

दरधा नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद जाफरगंज के निचले इलाकों में पानी घुस गया है। कई घरों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया, जिसके बाद लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं। कुछ परिवार अपने घरों की ऊपरी मंजिल पर रहने को मजबूर हैं।

एसएस कॉलेज पुल भी डूबा, स्कूल जाने का रास्ता बंद

श्याम नगर के पास दरधा नदी पर बने एसएस कॉलेज पुल के ऊपर भी करीब ढाई फीट पानी बह रहा है। इसके कारण एसएस कॉलेज, डीएवी स्कूल, अंबेडकर छात्रावास और साईं मंदिर जाने वाला रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है। अब लोगों को करीब 10 किलोमीटर लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ रहा है।

स्कूली बच्चों और अभिभावकों की बढ़ी चिंता
शहर और स्टेशन क्षेत्र के बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एसएस कॉलेज और डीएवी स्कूल आते-जाते हैं। दोनों प्रमुख पुलों पर पानी चढ़ने से उनका सीधा रास्ता बंद हो गया है। इससे अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है और बच्चों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है।
गोरक्षनी मंदिर जाने में भी बढ़ी परेशानी
ठाकुरबाड़ी स्थित दरधा-जमुना संगम घाट पूरी तरह पानी में डूब गया है। 

गोरक्षनी इलाके के कई घरों तक भी बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। संगम घाट का पैदल पुल पहले ही हटाया जा चुका था। अब जाफरगंज पुल पर पानी चढ़ जाने के कारण श्रद्धालुओं को गोरक्षनी देवी मंदिर पहुंचने के लिए करीब पांच किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।

Published / 2026-07-22 21:09:18
बिहार : नदी में डुबने से दो बच्चियों की मौत

  • चारा काटने गई थीं दो छात्राएं, पैर फिसलते ही नदी में डूबीं
  • गांव में मातम; SDRF की देरी से फूटा गुस्सा

एबीएन न्यूज नेटवर्क, पश्चिम चंपारण। जिले के मझौलिया प्रखंड के ओझा मठिया गांव में अकड़ाहा नदी में डूबने से दो छात्राओं की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद पूरे गांव में मातम छा गया। वहीं, ग्रामीणों ने राहत और बचाव कार्य में कथित देरी को लेकर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। मृतक छात्राओं की पहचान 13 वर्षीय राधा कुमारी और 12 वर्षीय गुंजा कुमारी के रूप में हुई है। 

दोनों सहेलियां अन्य बच्चों के साथ पुरैना सरेह में चारा काटने गई थीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, चारा काटने के दौरान नदी किनारे उनका पैर फिसल गया, जिससे दोनों गहरे पानी में चली गईं। साथ मौजूद बच्चों के शोर मचाने पर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तत्काल एसडीआरएफ को सूचना दी। 

ग्रामीणों और परिजनों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद एसडीआरएफ टीम काफी देर से घटनास्थल पर पहुंची। उनका कहना है कि यदि बचाव दल समय पर पहुंच जाता, तो दोनों बच्चियों की जान बचाई जा सकती थी। हादसे के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर जुट गए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

सूचना मिलने पर स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी मौके पर पहुंची। बाद में दोनों बच्चियों के शव नदी से बरामद किए गए। परिजनों ने शवों का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया, जिसके बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर शव उन्हें सौंप दिए गए। इस घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है। वहीं, ग्रामीणों ने नदी किनारे सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और आपदा राहत तंत्र को अधिक प्रभावी एवं त्वरित बनाने की मांग की है।

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