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Published / 2026-06-02 21:32:29
धनबाद : एसएसपी प्रभात कुमार ने सिखाये प्रोफेशनल पुलिसिंग के गुर

धनबाद पुलिस की विशेष कार्यशाला : एसएसपी प्रभात कुमार ने दिये प्रोफेशनल पुलिसिंग के गुर 

बेहतर कार्य करने वालों को मिलेगा सम्मान, लापरवाही पर होगी विभागीय कार्रवाई 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। धनबाद पुलिस केंद्र धनबाद में मंगलवार को वरीय पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार के नेतृत्व में पुलिस पदाधिकारियों के लिए विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में सिटी एसपी रित्विक श्रीवास्तव एवं ग्रामीण एसपी एस मोहम्मद याकूब भी मौजूद रहे। इस दौरान पुलिस अवर निरीक्षक (सब इंस्पेक्टर) स्तर के पदाधिकारियों को पुलिस कार्यप्रणाली, अनुसंधान, अपराध नियंत्रण एवं जनसंपर्क से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया। 

एसएसपी प्रभात कुमार ने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम चरणबद्ध तरीके से आयोजित किया जा रहा है जिसके माध्यम से जिले के 329 पुलिस अवर निरीक्षक एवं 561 सहायक अवर निरीक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य पुलिसिंग की गुणवत्ता में सुधार लाना, अनुसंधान को अधिक प्रभावी बनाना तथा अपराध नियंत्रण के साथ आम नागरिकों को बेहतर कानूनी सहायता उपलब्ध कराना है। 

कार्यशाला के दौरान एसएसपी प्रभात कुमार ने सभी पदाधिकारियों को लंबित मामलों के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि कांडों के उद्भेदन में तेजी लाते हुए समय पर चार्जशीट न्यायालय में समर्पित की जाए तथा अनुसंधान के दौरान इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल साक्ष्यों का अधिकतम संकलन किया जाए। इसके अलावा वारंट और कुर्की के निष्पादन में भी तेजी लाने को कहा गया। 

उन्होंने निर्देश दिया कि किसी भी आपराधिक घटना की सूचना तत्काल वरीय अधिकारियों एवं कंट्रोल रूम को दी जाए। पुलिस पदाधिकारी अपने कर्तव्यों का ईमानदारी एवं जिम्मेदारी के साथ निर्वहन करें तथा क्षेत्र में लगातार भ्रमणशील रहकर पेट्रोलिंग करें। रात के समय संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान सत्यापित करने, पहचान पत्रों की जांच करने तथा देर रात बाहर रहने के कारणों की जानकारी लेने का भी निर्देश दिया गया। 

एसएसपी प्रभात कुमार ने कहा कि क्षेत्र में सूचना तंत्र को मजबूत बनाना अत्यंत आवश्यक है। यदि पुलिस को समय रहते हर गतिविधि की जानकारी मिलेगी तो अपराधों की रोकथाम में अधिक सफलता मिलेगी। उन्होंने एंटी क्राइम चेकिंग अभियान, वाहन जांच एवं संदिग्ध व्यक्तियों की तलाशी को नियमित रूप से संचालित करने पर बल दिया। 

थाना स्तर पर शिकायतों के त्वरित निष्पादन पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि सभी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए और किसी भी फरियादी को अनावश्यक परेशान न किया जाये। पुलिस पदाधिकारी असामाजिक एवं दागी तत्वों से दूरी बनाये रखें तथा आम नागरिकों के साथ मित्रवत एवं मानवीय व्यवहार कर पुलिस की सकारात्मक छवि को मजबूत करें। 

एसएसपी प्रभात कुमार ने कहा कि जिस दिन उनके कार्यालय में फरियादियों की संख्या न्यूनतम हो जायेगी, उसी दिन यह माना जायेगा कि थाना स्तर पर लोगों को समय पर न्यायिक एवं कानूनी सहायता मिल रही है। उन्होंने अड्डाबाजी के विरुद्ध प्रतिदिन अभियान चलाने तथा क्षेत्र में संचालित नशे के कारोबार पर कड़ा प्रहार करने का निर्देश दिया ताकि समाज को नशे के दुष्प्रभावों से बचाया जा सके। 

कार्यशाला के अंत में एसएसपी ने स्पष्ट किया कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिस पदाधिकारियों को सम्मानित किया जायेगा, जबकि कार्य में लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध आवश्यक विभागीय कार्रवाई भी सुनिश्चित की जायेगी। मौके पर सिटी एसपी ऋत्विक श्रीवास्तव और ग्रामीण एसपी एस मोहम्मद याकूब ने भी पुलिस पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए आवश्यक दिशा निर्देश दिये।

Published / 2026-06-02 21:29:47
निगलने के दौरान चंपई के गले में फंसी जिंदा मछली, फिर...

जिंदा मछली को निगलने की कोशिश कर रहा था युवक, गले में फंस गया सिर; फिर जो हुआ.... 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, पश्चिम सिंहभूम। जिले में सोमवार को 32 वर्षीय एक व्यक्ति की जान उस समय सांसत में फंस गयी, जब उसके गले में मछली का सिर फंस गया। हालांकि चिकित्सकों ने समय पर सर्जरी कर उसे बचा लिया।  

अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सोनुआ क्षेत्र के निवासी चंपई गगराई को मछली का सिर गले में फंस जाने के बाद गंभीर हालत में सदर अस्पताल लाया गया। अधिकारियों ने बताया कि गगराई मछली का टुकड़ा निगल नहीं पा रहा था और उसे सांस लेने में समस्या हो रही थी। 

उन्होंने बताया कि इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचने के लिए उन्हें लगभग 50 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ा। अधिकारियों ने बताया कि आपातकालीन वार्ड में पहुंचते ही, कान-नाक-गला विशेषज्ञ एवं सर्जन डॉ. प्रदीप कुमार और उनकी टीम ने तुरंत गगराई का इलाज शुरू किया। 

उन्होंने बताया कि सर्जरी के जरिए मछली का सिर सफलतापूर्वक निकाल दिया गया, जिससे मरीज को तत्काल राहत मिली और उसकी जान बच गयी। 
जिला सिविल सर्जन डॉ. जुझार माझी ने कहा कि चिकित्सा दल के समय पर इलाज और समन्वित प्रयासों सेमरीज की जान बचायी जा सकी। 

उन्होंने कहा, यह चिकित्सकों की सजगता, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और एक इकाई के रूप में काम करने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। अधिकारियों ने बताया कि सर्जरी के बाद मरीज की हालत स्थिर बतायी गयी और वह खतरे से बाहर है।

बिहार

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Published / 2026-05-12 20:21:01
गोपालगंज : आर्केस्ट्रा से 40 नाबालिग मुक्त, 22 गिरफ्तार

गोपालगंज में आर्केस्ट्रा समूहों से मुक्त करायी गयी 40 से ज्यादा नाबालिग लड़कियां, 22 गिरफ्तार 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। बिहार के गोपालगंज जिले में आर्केस्ट्रा समूहों में नाबालिग लड़कियों के शोषण व उत्पीड़न के खिलाफ हालिया समय की सबसे बड़ी छापे की कार्रवाई में 40 से ज्यादा नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया गया। जिले के कुचायकोट थानाक्षेत्र में रात एक बजे से सुबह सात बजे तक तकरीबन 15 आर्केस्ट्रा समूहों पर हुई इस कार्रवाई में ट्रैफिकिंग व बच्चों के शोषण के आरोप में 22 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। 

यह पूरा अभियान अपर पुलिस महानिदेशक (कमजोर वर्ग) अमित जैन व गोपालगंज के पुलिस अधीक्षक विनय तिवारी की देखरेख में कुचायकोट पुलिस, एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन, नारायणी सेवा संस्थान व पटना स्थित बिहार पुलिस मुख्यालय ने संयुक्त रूप से चलाया। छापे की इस कार्रवाई में शामिल एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन और नारायणी सेवा संस्थान बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठन हैं। 

मुक्त करायी गयी लड़कियों की काउंसलिंग के बाद उनको सुरक्षित जगह भेज दिया गया और उनकी उम्र के सत्यापन की प्रक्रिया व अन्य कानूनी कार्रवाई जारी है। मुक्त करायी गयी लड़कियों की उम्र 10 से 17 साल है। फिलहाल मिली जानकारी के अनुसार इन बच्चियों को झांसा देकर ट्रैफिकिंग के जरिए पश्चिम बंगाल, असम, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से लाया गया था।  

बिहार में ट्रैफिकिंग गिरोहों व आर्केस्ट्रा समूहों के बीच गहरी सांठ-गांठ की ओर संकेत करते हुए एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन के वरिष्ठ निदेशक मनीष शर्मा ने कहा, इस अभियान ने एक बार इस तथ्य को उजागर किया है कि कितने बड़े पैमाने पर लड़कियों की ट्रैफिकिंग कर उन्हें राज्य के विभिन्न हिस्सों में चल रहे आर्केस्ट्रा समूहों में धकेला जा रहा है। इन लड़कियों को बहला-फुसलाकर यौन शोषण व उत्पीड़न के अंतहीन दलदल में धकेल दिया जाता है। हमें ट्रैफिकिंग के संगठित अपराध और आर्केस्ट्रा समूहों की मिलीभगत के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने की जरूरत है। 

इन्हें सख्त सजा देने के साथ ही पीड़ित बच्चियों के पुनर्वास व पर्याप्त मुआवजे की तत्काल आवश्यकता है। न्याय में किसी भी तरह की देरी इन बच्चों को दोबारा निराश कर सकती है। एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन और नारायणी सेवा संस्थान पिछले एक महीने से इन आर्केस्ट्रा समूहों की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे।

उन्होंने पाया कि आर्केस्ट्रा समूह शादी-ब्याह के समय ट्रैफिकिंग के जरिए पड़ोसी राज्यों से नाबालिग बच्चियों को लाते हैं और इन्हें विवाह समारोहों में भोजपुरी गानों पर अश्लील नृत्य के लिए मजबूर किया जाता है। हालांकि इनके यौन उत्पीड़न का सिलसिला समारोह खत्म होने के बाद भी जारी रहता है। चूंकि शादी-ब्याह का मौसम कुछ ही दिनों में खत्म होने वाला है, इसलिए छापे के लिए जानबूझ कर ऐसा दिन चुना गया जब कोई लग्न नहीं हो और ये सभी लड़कियां अपने ठिकानों पर मौजूद रहें।     

मुक्त कराये जाने के बाद काउंसलिंग के दौरान भयभीत दिख रही कई लड़कियों ने बताया कि उन्हें उनके कथित प्रेमी ने बेच दिया या फिर पैसे, नाम व बेहतर जिंदगी का लालच देकर शोषण के दलदल में धकेल दिया। कुछ लड़कियों ने बताया कि उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि अगर वे आर्केस्ट्रा से जुड़ी रहेंगी तो उन्हें भोजपुरी फिल्मों में काम करने का अवसर भी मिलेगा।   

ऐसे मामलों में जवाबदेही व तत्काल कार्रवाइयों की जरूरत पर जोर देते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के राष्ट्रीय संयोजक रवि कांत ने कहा, यह देखना दुखद है कि संगठित ट्रैफिकिंग गिरोह आर्केस्ट्रा समूहों के जरिए शोषण के इरादे से विभिन्न राज्यों में बच्चों को निशाना बना रहे हैं। यह कोई इकलौती घटना नहीं है बल्कि एक संगठित आपराधिक तंत्र की ओर इशारा करती है जो बच्चों की लाचारी, आर्केस्ट्रा जैसे धंधों में उनकी मांग और कानूनी सख्ती में कमी की वजह से फल-फूल रहा है। 

भारत में बच्चों की सुरक्षा के लिए काफी कड़े कानून हैं और हालिया समय में बिहार पुलिस की सख्ती बताती है कि वे ट्रैफिकिंग और बच्चों के शोषण के खात्मे के लिए गंभीर हैं। फिर भी राज्यों में आपसी समन्वय, शादी-ब्याह के मौसमों के दौरान इन पर सख्त निगरानी व जवाबदेही तंत्र को और मजबूत बनाने की जरूरत है ताकि इसका हमेशा के लिए खात्मा किया जा सके। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क कर सकते हैं।

Published / 2026-04-07 19:28:02
किशनगंज : नाबालिग की पिटाई कर जबरन बाल विवाह कराया, सात पर एफआईआर

एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। बिहार के किशनगंज जिले में एक 17 वर्षीय नाबालिग को मारपीट कर उसका 20 साल की युवती से जबरन विवाह करा दिया गया। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने सात आरोपियों के खिलाफ बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम सहित कई धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है। 

पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार घटना की रात रिजवान (बदला हुआ नाम) अपनी मां के साथ घर में था और पिता मजदूरी के लिए बाहर गये हुए थे। रात करीब नौ बजे आधा दर्जन लोगों ने दरवाजा खटखटाया और रिजवान की मां को धमकाते हुए उसका विवाह 20 साल की एक युवती से करने को कहा। 

मां के इनकार से नाराज आरोपी रिजवान को जबरन उठाकर एक होटल में ले गए। वहां उसे बंद कर मारा-पीटा गया इससे डरकर वह बेहोश हो गया। इसी दौरान बेहोशी की हालत में शादी की रस्में पूरी की गयीं। होश आने पर लड़के ने आरोपियों से उसका विवाह नहीं कराने की विनती की लेकिन इसी बीच उन्होंने मौलवी को बुलाकर जबरन निकाह पढ़ा दिया और निकाहनामे पर दस्तखत भी करा लिये। 

दबाव बनाने की गर्ज से आरोपियों ने पीड़ित परिवार से छह लाख रुपए की रंगदारी भी मांगी और पैसे नहीं देने पर झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी। रिजवान की मां अपने बेटे के जबरन बाल विवाह की शिकायत लेकर बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन जन निर्माण केंद्र तक पहुंची। संगठन ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत जिले के एसडीएम अनिकेत कुमार को सूचित किया। 

प्रशासन ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों के खिलाफ बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006, किशोर न्याय अधिनियम 2015 और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की। फिलहाल लड़का अपनी मां के पास सुरक्षित है और पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है। 

बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठन जन निर्माण केंद्र के राकेश कुमार ने कहा बाल विवाह की बहस हमेशा लड़कियों के इर्द-गिर्द घूमती है और यह गलत भी नहीं, क्योंकि वे सबसे बड़ी पीड़ित होती हैं। लेकिन लड़कों के साथ होने वाले ऐसे मामले अक्सर सुर्खियों से बाहर रह जाते हैं। 

समाज सोचता है लड़का है, झेल लेगा। जबकि बच्चा तो बच्चा होता है, चाहे बेटा हो या बेटी। बिहार में एक दौर जबरन विवाहों जिसे पकड़ुआ विवाह कहते हैं, का भी रहा है। ऐसे में जरूरी है कि प्रशासन चौकस रहे क्योंकि आम तौर पर इसके पीड़ित नाबालिग किशोर ही होते हैं। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क कर सकते हैं।

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