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Published / 2026-03-19 23:07:03
पलामू : विक्रम संवत नव वर्ष अवसर पर सरस्वती शिशु विधा मंदिर ने निकला पथ संचलन

  • पलामू : विक्रम संवत नव वर्ष अवसर पर सरस्वती शिशु विधा मंदिर ने निकला पथ संचलन
  • विक्रम संवत की जय हो नव वर्ष मंगल हो के नारे से गुंजा शहर
  • भैया-बहनों ने  राजा विक्रमादित्य व भगवान श्री राम की निकाली आकर्षक झांकी

एबीएन न्यूज नेटवर्क, हुसैनाबाद, पलामू। हिन्दू सनातन वर्ष कलेण्डर के अनुसार चैत प्रथम तिथि व राजा विक्रम संवत वर्ष 2083 के आगमन के शुभ अवसर पर जपला शहर के सरस्वती शिशु विधा मंदिर परिवार के भैया-बहनों के द्वारा पथ संचलन का आयोजन किया गया जिसका नेतृत्व विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. शिव प्रसाद मेहता एवं प्रधानाचार्य कुशजी पांडेय ने किया। कार्यक्रम की सुरुआरत जपला नहर मोड़ स्थित विद्यालय से किया गया।

इस दौरान स्कूल के भैया बहनों ने भगवान श्री राम लक्ष्मण व माता सीता एवं राजा विक्रमादित्य व आरएसएस के संथापक डॉ हेडगेवार की आकर्षक झांकी निकली। साथ ही सभी के हाथों में भगवा ध्वज व नव वर्ष मंगल मय हो ,हिन्दू नव वर्ष की जय हो,आदि के नारा को बुलंद किया पूरा शहर में हिन्दू वर्ष की मंगलमय कामनाओं से गूंज उठा।

पथ संचलन जपला छतरपुर रोड से मुख्य बाजार, गांधी चौक होते हुए पूरा शहर का भ्रमन किया गया। मौके पर अध्यक्ष डॉ शिव प्रसाद मेहता ने कहा यह दिन हिंदुओ के लिए प्रथम दिन हैं साथ उन्होंने यह भी कहा कि यह माह केवल हिंदुओ के लिए नही बल्कि प्राकृतिक से नया माना गया पेड़ पौधा,पशु पंक्षी सबके लिए यह शुभ दिन हैं।

वहीं प्रधानाचार्य यह महान वर्ष प्रतिपदा से हम सबो के लिए संस्कार व संस्कृति की रक्षा व देश भक्ति की प्रेरणा देती हैं पूरे सनातन के लिए यह गर्व का विषय हैं।मौके शशि कुमार  मृत्युंजय प्रसाद, राजकुमार सिंह  नितीश सर धर्मेन्द्र जी दीपक पांडेय, हर्षदा दीदी छाया दीदी तथा अन्य आचार्य/आचार्या दीदी के साथ पूरा विद्यालय परिवार शामिल था।

Published / 2026-03-19 23:00:49
ईरान-इजरायल में संघर्ष युद्ध नहीं, संवाद ही रास्ता : सुखदेव भगत

ईरान-इजरायल संघर्ष पर लोहरदगा सांसद सुखदेव भगत की अपील, युद्ध नहीं, संवाद ही समाधान का रास्ता 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुखदेव भगत ने ईरान-इजरायल के बीच जारी तनावपूर्ण हालात पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि युद्ध किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। 

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर शांति, संयम और संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया। सांसद भगत ने अपने बयान में ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए इरान-इराक वार का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह युद्ध लंबे समय तक चला और इससे दोनों देशों को भारी नुकसान उठाना पड़ा, लेकिन अंतत: कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। 

यह इतिहास हमें सिखाता है कि हिंसा और टकराव केवल विनाश की ओर ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ईरान और इजरायल के बीच जो हालात बन रहे हैं, वे न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक शांति के लिए भी खतरा पैदा कर सकते हैं। ऐसे समय में सभी पक्षों को संयम बरतते हुए बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए। 

सुखदेव भगत ने भारत की विदेश नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत हमेशा से शांति, सह-अस्तित्व और आपसी समझ का पक्षधर रहा है। भारत का मानना है कि किसी भी प्रकार के मतभेद, अविश्वास या कड़वाहट को संवाद के माध्यम से दूर किया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि संघर्ष और हमलों का सिलसिला कभी स्थायी समाधान तक नहीं पहुंचता, बल्कि इससे स्थिति और अधिक जटिल हो जाती है। 

इसलिए सभी देशों को चाहिए कि वे कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता दें और शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ें।अंत में सांसद भगत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की कि वे इस संवेदनशील मुद्दे पर सक्रिय भूमिका निभायें और दोनों देशों के बीच संवाद स्थापित कराने में सहयोग करें, ताकि क्षेत्र में स्थिरता और शांति कायम रहे।

बिहार

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Published / 2026-03-18 20:32:53
सीएम हेमंत से मिले बिहार विधान परिषद के सदस्य

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बिहार विधान परिषद समिति के सदस्यों ने की मुलाकात 

टीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से झारखंड विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कक्ष में बिहार विधान परिषद की बाल संरक्षण एवं महिला सशक्तिकरण समिति के सदस्यों ने मुलाकात की। 

इस अवसर पर समिति के सदस्यों ने मुख्यमंत्री को बाल संरक्षण एवं महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में किये जा रहे अपने कार्यों से अवगत कराया। साथ ही उन्होंने बताया कि झारखंड विधानसभा के परिभ्रमण के दौरान यहां की महिला एवं बाल विकास समिति द्वारा किये जा रहे कार्यों की जानकारी प्राप्त हुई और दोनों राज्यों के अनुभवों का आदान-प्रदान भी किया गया। 

मौके पर कल्पना सोरेन, जो झारखंड विधानसभा की महिला एवं बाल विकास समिति की सभापति हैं, भी उपस्थित रहीं। मुख्यमंत्री से मुलाकात करने वालों में बिहार विधान परिषद की बाल संरक्षण और महिला सशक्तिकरण समिति की अध्यक्ष डॉ कुमुद वर्मा, सदस्य रीना यादव, मुन्नी देवी और निवेदिता सिंह सहित अन्य शामिल थे।

Published / 2026-03-08 15:44:14
बिहार में तो सिर्फ और सिर्फ नीतीशे कुमार...

बिहार में तो सिर्फ और सिर्फ नीतीशे कुमार...

त्रिवेणी दास 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। पिछला बिहार विधानसभा का चुनाव नवंबर 2025 को हुआ था। 243 विधानसभा क्षेत्र में 89 भाजपा, 85 जदयू और 19 एलजेपी (रामविलास) तथा अन्य एनडीए गठबंधन कुल 202 सीट जीत कर बहुमत का आंकड़ा प्राप्त किया और नीतीश कुमार 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बने। मात्र (3) सवा तीन (3:15) महीना के भीतर नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री का कुर्सी छोड़कर राज्यसभा के सांसद के रूप में दिल्ली जाने का निर्णय लिया जो अचंभित भी करता है और राजनीति के लिए आश्चर्यजनक है।

बताया यह जा रहा है कि नीतीश कुमार चारों सदन की सदस्यता का रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं इसीलिए उन्होंने स्वेच्छा से मुख्यमंत्री पद छोड़ना स्वीकार किया; परंतु सियासत एवं वक्त में एकदम से सीधा अनोनाश्रय रिश्ता होता है जो कभी भारी पड़ता है, कभी ढीला पड़ जाता है और कभी राजनीतिज्ञ को कमजोर बना देता है। 

वक्त को भारी पड़ते हुए देख राजनीति के ट्रैक में लाइन बदलने का निर्णय नीतीश कुमार के राजनीतिक परिपक्वता का परिचायक है। आजादी के बाद से भारतीय राजनीति में परिवारवाद का प्रचलन कोई अपवाद नहीं है, विशेष कर कांग्रेस एवं क्षेत्रीय दलों में तो यही परिपाटी रही है। इस परिपाटी का अनुपालन जदयू में भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है। 

नीतीश कुमार के सुपुत्र निशांत का जदयू के राजनीति में एंट्री हो चुका है। वह बकायदे सक्रिय हो चुके हैं और अपने बाबूजी की तरह अपनी राजनीतिक यात्रा बिहार के चंपारण से शुरू करने वाले हैं। पार्टी के जिला अध्यक्षों से उन्होंने लंबी मंत्रणा की है और पार्टी के युवा विधायकों के साथ जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के आवास पर लंबी चर्चा की है। 

इधर बिहार विधानसभा के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी लगातार अधिक सीट जीतने के बाद भी अधिकतम ऊंचाई उपमुख्यमंत्री तक ही सीमित रही है। सुशील कुमार मोदी की लंबी पारी के कारण भाजपा में कोई अन्य नेता उभर कर सामने नहीं आ पाया है। बिहार से नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर पहले ही दिल्ली बुला लिया गया और अब उन्हें राज्यसभा भेज कर उनका स्थाई निवास दिल्ली बना दिया जा रहा है। 

बीजेपी के पास बिहार के राजनीति की उच्चतम पद पर काबिज होने का यह सुनहरा मौका है और वह मुख्यमंत्री बनाने के अत्यंत करीब पहुंच भी चुकी है। भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री कौन होगा यह एक बड़ा सवाल है। हमेशा की तरह मोदीजी इस निर्णय पर भी चौंकाने का कार्य करेंगे? राजनीति के पंडितों के दिमाग में इसके उत्तर नहीं मिल पा रहे हैं। 

नीतीश कुमार का कद, काठी, प्रभाव और केंद्र की सरकार के टिकाऊ के लिए अत्यंत आवश्यक समर्थन को देखते हुए इतना तो तय है कि बिहार की राजनीति और सरकार में उनके सुपुत्र निशांत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाली है।

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