लाभकारी मूल्यों को लेकर भारतीय किसान संघ करेगा राज्यव्यापी आंदोलन

 

रांची। झारखंड खनिज संपदाओं से भरपूर होने के बावजूद एक कृषि प्रधान राज्य है। लेकिन यहां के किसानों की स्थिति दयनीय है। बावजूद सरकार का ध्यान इस ओर नहीं है। किसानोें के लाभकारी मूल्यों को लेकर भारतीय किसान संघ राज्यव्यापी आंदोलन की तैयारी में जुट गया है। उक्त बातें भारतीय किसान संघ के प्रदेश प्रवक्ता सह भारतीय एग्रो इकोनॉमिक्स के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश कुमार सिंह ने कही। वे शनिवार को बरियातू रोड स्थित आरोग्य भवन के रवींद्रनाथ टैगोर सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। बैठक में भारतीय किसान संघ के कार्यकारी अध्यक्ष श्री जय सिंह, उपाध्यक्ष मनधीरन महतो, मीडिया प्रभारी सह प्रदेश प्रवक्ता, प्रकाश कुमार सिंह, प्रदेश मंत्री रंजन कुमार मिश्र, मत्स्य प्रमुख मनोज साहू, युवा प्रमुख दीपक उरांव शामिल थे। उन्होंने कहा कि भारतीय किसान संघ की प्रबंध समिति बैठक सोनीपत हरियाणा में हुई थी, जिसमें देशभर के अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य 36 प्रांतों की अध्यक्ष महामंत्री संगठन मंत्री एवं कोषाध्यक्ष ने भाग लिया था। कोविड प्रोटोकॉल को ध्यान में रख दो दिवस के गहन मंथन के बाद निर्णय लेते हुए घोषणा की कि किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य नहीं मिलने से गरीब किसान और गरीब और कर्जदार होता जा रहा है। उनके बच्चों का जीवन अंधकारमय एवं स्वयं का जीवन नारकीय होता जा रहा है। सरकार अपने ढंग से मदद का प्रयास करती है परंतु क्षणिक सांत्वना से किसानों की दशा को सुधारना असंभव है। परेशान किसान मात्र इतनी मांग कर रहा है कि उसे उसकी लागत एवं उस पर जो भी लाभ स्वरूप देना चाहे देना शुरू करिए। नहीं तो बेरोजगारी के इस माहौल में अब वह अकेला नहीं परिवार के साथ आत्महत्या को अग्रसर होने लगा है। आने वाले समय में ऐसी घटनाएं और बढ़ने वाली है। इसका अनुमान सरकारी मुलाजिम और राजनेता नहीं लगा सकते सरकार कुछ फसलों का समर्थन मूल्य घोषित कर अपने दायित्व से बच नहीं सकती सब जान चुके हैं कि यह समर्थन मूल्य मात्र छलावा है। गरीब किसान को बाजार के भरोसे छोड़ना ही नहीं बल्कि उसकी उपज के मूल्यों पर सरकार द्वारा नियंत्रण रखना जानबूझकर उसका मनुष्य जीवन बर्बाद करने जैसा है पापकर्म नहीं तो और क्या है? समर्थन मूल्य की घोषणा मात्र का भी क्या अर्थ रह जाता है जब उस मूल्य पर बिक नहीं सकता अत: 1. किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य दें। 2. एक बार घोषित मूल्य के बाद उसके अनाज में होने वाली महंगाई का भुगतान के समय समायोजन कर महंगाई के अनुपात में वास्तविक मूल्य चुकायें। 3. घोषित मूल्य पर किसान की उपज का बेचान भी हो फिर चाहे मंडी में चाहे बाहर और चाहे सरकार खरीदे लेकिन घोषित मूल्य से कम पर विक्रय को अपराध माना जाएगा। यह भी समझना मुश्किल नहीं है, यह सब केवल और केवल तभी संभव है, जब इस बाबत कठोर कानून बनेगा इसलिए सरकार लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य का कानून लेकर आएं अन्यथा भारतीय किसान संघ प्राइवेट बिल के माध्यम से संसद में कानून बनाने की प्रक्रिया आरंभ करेगा। भारत का किसान अपने राष्ट्रीय दायित्व को भली भांति समझता है। इसलिए सरकार को आगाह करता है कि आगामी 31 अगस्त 2021 तक केंद्र सरकार इस बाबत सकारात्मक प्रयास करें आश्वस्त करें घोषणा करें अन्यथा 8 सितंबर 2021 को देश भर जिला केंद्रों पर एक दिवसीय धरने के साथ भारतीय किसान संघ देशव्यापी आंदोलन की घोषणा करेगा, जिसकी सारी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

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