एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न स्व. प्रणब मुखर्जी की पुण्यतिथि पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सह पूर्व राज्यसभा सांसद धीरज प्रसाद साहू ने उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए भावुक शब्दों में याद किया।
उन्होंने कहा कि प्रणब मुखर्जी भारतीय राजनीति के ऐसे व्यक्तित्व थे, जिनका योगदान देश की राजनीति में लंबे समय तक याद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज राजनीति में जो भी लोग सक्रिय हैं, उनमें से बहुतों को आगे बढ़ने और राजनीति को समझने में प्रणब मुखर्जी जैसे वरिष्ठ नेताओं का मार्गदर्शन और योगदान मिला है।
धीरज प्रसाद साहू ने कहा कि प्रणब मुखर्जी केवल एक कुशल राजनेता ही नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र और संसदीय परंपराओं के गहरे जानकार थे। राजनीति में उनका अनुभव और उनकी समझ असाधारण थी। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और हर पद की गरिमा को बनाए रखा।
देश के वित्त मंत्री, रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए उन्होंने देश की नीतियों और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।पूर्व राज्यसभा सांसद ने प्रणब मुखर्जी के साथ अपने व्यक्तिगत अनुभवों को याद करते हुए कहा कि उनके राष्ट्रपति बनने के बाद भी उनके व्यवहार में किसी तरह का अहंकार या दूरी नहीं आई थी।
उन्होंने कहा, जब प्रणब दा राष्ट्रपति थे, तब उनसे मिलने के लिए समय लेने की जरूरत नहीं पड़ती थी। बेहिचक उनसे मिलने जाना होता था। उनका व्यवहार हमेशा आत्मीय और सहज रहा। उन्होंने कहा कि प्रणब मुखर्जी की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वह पार्टी और विचारधारा की सीमाओं से ऊपर उठकर लोगों से संबंध बनाते थे।
राजनीतिक मतभेद होने के बावजूद उनके व्यक्तित्व में सभी के प्रति सम्मान और अपनापन था। यही कारण था कि अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेता भी उनका सम्मान करते थे और उनसे मार्गदर्शन लेते थे।धीरज प्रसाद साहू ने कहा कि प्रणब मुखर्जी का जीवन संघर्ष, अनुभव और समर्पण का उदाहरण है।
उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत जमीनी स्तर से की और धीरे-धीरे देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रणब मुखर्जी की राजनीतिक समझ इतनी गहरी थी कि जटिल से जटिल परिस्थितियों में भी वह संतुलित और व्यावहारिक समाधान निकालने की क्षमता रखते थे।
उन्होंने कहा कि प्रणब मुखर्जी से मिलने वाले हर व्यक्ति को कुछ न कुछ सीखने को मिलता था। उनका अध्ययन व्यापक था और देश-दुनिया के राजनीतिक, सामाजिक तथा आर्थिक विषयों पर उनकी पकड़ मजबूत थी। संसद की कार्यवाही और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति उनका सम्मान अनुकरणीय था।
धीरज प्रसाद साहू ने कहा कि प्रणब मुखर्जी का निधन भारतीय राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति थी। उनके जाने के बाद देश ने एक अनुभवी राजनेता, कुशल प्रशासक और मार्गदर्शक को खो दिया। हालांकि उनका व्यक्तित्व और उनके विचार आज भी देश की राजनीतिक पीढ़ियों को प्रेरणा देते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रणब दा से उनके व्यक्तिगत संबंध हमेशा उनके लिए विशेष रहे। उनके सहज व्यवहार और आत्मीयता को याद करते हुए साहू ने कहा कि इतने बड़े पद पर पहुंचने के बावजूद प्रणब मुखर्जी आम लोगों और अपने पुराने साथियों से उसी आत्मीयता के साथ मिलते थे, जिसके लिए वे अपने राजनीतिक जीवन में जाने जाते थे।
अंत में धीरज प्रसाद साहू ने स्व. प्रणब मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि देश उनके योगदान को कभी नहीं भूल सकता। उनकी राजनीतिक सूझबूझ, लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता और सरल व्यक्तित्व आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
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