एबीएन सोशल डेस्क। सरकार ने बताया है कि 2025 में 22 हजार 495 करोड़ रुपये के 24 लाख दो हजार 579 मामले दर्ज किये गये। सरकार ने बुधवार को राज्य सभा में पूछे गये एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी। सरकार ने बताया है 23 लाख 62 हजार मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए लोगों के आठ हजार 189 करोड़ रुपये बचाये गये हैं।
राज्य सभा में तृणमूल कांग्रेस के साकेत गोखले ने सरकार से जानना चाहा था कि नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर जनवरी 2023 से अबतक कितने मामले दर्ज किये गये हैं। उन्होंने यह भी जानना चाहा था कि शिकायतकर्ताओं ने कितनी धनराशि के नुकसान की शिकायत दर्ज करायी है।
उन्होंने सरकार से यह भी बताने कहा था कि इस तरह के मामलों में कितनी एफआईआर दर्ज की गई और कितने मामलों की जांच पूरी हुई और कितने मामलों में चार्जशीट फाइल की गयी है। उन्होंने देश में साइबर फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरीज की भी जानकारी मांगी थी।
इन सवालों के जवाब में गृह राज्यमंत्री बंडी संजय कुमार ने बताया कि साइबर क्राइम से निपटने के लिए केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित राज्यों को अलग-अलग तरह से मदद करती है। उन्होंने बताया कि उनके मंत्रालय ने इंडियन साइबर क्राइम कोआर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) का गठन किया है।
यह आई4सी ही देश में साइबर क्राइम से निपटने में मदद करता है। इसी के तहत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) की शुरुआत की गयी थी। इसमें लोग साइबर क्राइम की शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसमें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले साइबर अपराधों को प्राथमिकता दी जाती है।
गृह राज्यमंत्री के मुताबिक आई4सी के तहत सिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्राड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम को 2021 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य वित्तिय फ्राड की तत्काल रिपोर्टिंग और धोखेबाजों द्वारा पैसा इधर से उधर करने पर रोक लगाना है।
सरकार के मुताबिक इस पर दर्ज कराये गये 23 लाख 62 हजार मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए लोगों के आठ हजार 189 करोड़ रुपये बचाये गये हैं। साइबर क्राइम से जुड़ी मदद लेने के लिए सरकार हेल्पलाइन नंबर 1930 भी शुरू किया है। सरकार के मुताबिक 2021 से 2025 के बीच इतने मामले दर्ज हुए हैं।
सरकार ने बताया है कि आई 4 सी के तहत 2009 में नेशनल डिजिटल इंवेस्टीगेशन सपोर्ट सेंटर की स्थापना दिल्ली में की गयी है। पहले इसे नेशनल फॉरेंसिक इन्वेस्टिगेशन लैबोरेटरी के नाम से जाना जाता था। इसी तरह की एक लैबोरेटरी अगस्त 2025 से असम में काम कर रही है।
इनका मकसद राज्यों और केंद्रशासित राज्यों के जांच अधिकारियों की उनकी जांच में मदद करना है। इसके नई दिल्ली केंद्र ने 31 दिसंबर 2025 तक साइबर क्राइम के 13 हजार 299 मामलों में राज्यों और केंद्रशासित राज्यों की मदद की है। इसके अलावा केंद्र सरकार राज्य सरकारो के फॉरेंसिंक साइंस लैब के उन्नयन में भी मदद कर रही है।
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