रांची। राजधानी रांची सहित राज्य के ज्यादातर जिलों में हो रही मूसलाधार बारिश के चलते जहां रांची के तीनों डैम लबालब भर गए हैं, वहीं हटिया डैम के बांध पर खतरा मंडराने लगा है। हटिया डैम के अभियंताओं के साथ जल संसाधन विभाग, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अभियंता और बड़े अधिकारी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि बांध ओवर फ्लो होने की स्थिति में जिस फाटक को खोलकर पानी का डैम पर दवाब कम किया जाता है वह खुल ही नहीं रहा है। वैकल्पिक व्यवस्था कर दवाब को कम करने की कोशिश हटिया डैम के कार्यपालक अभियंता सुरेश प्रसाद ने बताया कि अभी 38.5 फीट पानी हो गया है जबकि क्षमता 39 फीट की है। अभियंता सुरेश प्रसाद ने कहा कि पानी कम करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के तहत इंटेक वेल जिससे खराब पानी निकलता है, उससे ही पानी को निकाला जा रहा है। सुरेश प्रसाद ने कहा कि गेट खोलने की कोशिश की जा रही है। अभी खतरे जैसी कोई बात नहीं है लेकिन विभाग अलर्ट है। पिछले कई वर्षों से हटिया डैम में पानी कम होने के बाद इसके अस्तित्व पर ही सवाल उठ रहे थे, लेकिन इस वर्ष अच्छी बारिश से हटिया डैम लबालब भर गया है। अब डैम की क्षमता के अनुसार जल स्तर बनाए रखने के लिए गेट खोला जा रहा है तो गेट खुल ही नहीं रहा है। सवाल यह है कि क्या हटिया डैम से जुड़े अभियंताओं और अधिकारियों ने पहले से यह मान लिया था कि डैम में कभी इतना पानी नहीं स्टोर होगा कि गेट खोलने की नौबत आएगी? सवाल यह भी है कि आखिर इस लापरवाही का जिम्मेवार कौन है? 60 के दशक में जब हटिया डैम का निर्माण हो रहा था तब इसकी खुदाई में अपना कमलेश्वर सिंह ने भी योगदान दिया था। जब उन्हें पता चला कि डैम लबालब भर गया है तब वे पुराने दिनों को याद करने अपने बेटे और पोती के साथ डैम पहुंच गए। उन्होंने बताया कि कैसे इस डैम का निर्माण हुआ था और किस तरह हर दिन 200 से ज्यादा ट्रक लगे होते थे।
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