एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोरोना महामारी के दौरान भारत में 19 लाख से अधिक बच्चों के सिर से माता-पिता या सरंक्षक का साया उठ गया। जबकि पूरे विश्व में कोविड से अनाथ होने वाले बच्चों की संख्या 52 लाख से अधिक है। 20 देशों में हुई स्टडी के बाद लैंसेट में छपी रिपोर्ट के अनुसार शुरुआती 14 महीनों में जितनी मौतें हुईं, करीब उससे दोगुनी मात्र छह महीनों (1 मई से 31 अक्टूबर 2021) के बीच हुईं। पूरे विश्व में कोविड से बेसहारा हुए कुल बच्चों को देखा जाए तो 3 में से 2 किशोरावस्था में थे। ब्रिटेन के इंपीरियल कॉलेज ऑफ लंदन के मुख्य शोधकर्ता जूलियट उनविन के अनुसार कोविड से बेसहारा होने वाले बच्चों की संख्या और भी बढ़ सकती है जैसे-जैसे विश्व में कोविड-19 से होने वाली मौतों के आंकड़े दर्ज होंगे। उनविन कहते हैं, अनाथ बच्चों का जनवरी 2022 तक का रियल टाइम डेटा देखें तो ये संख्या 67 लाख तक पहुंच जाती है। स्टडी में अक्टूबर 2021 तक ही आंकड़े लिए गए हैं, जबकि महामारी पूरे विश्व में अभी भी चल रही है। साफ है कि कोविड से अनाथ हुए बच्चों की संख्या भी बढ़ेगी। महिलाओं से 3 गुना पुरुषों की जान गई : अनाथ होने वाले बच्चों की दर सबसे अधिक दक्षिण अफ्रीका के पेरू में रही, यहां 1000 बच्चों पर 8 से 7 बेसहारा हुए। जबकि विश्व में महिलाओं से तीन गुना पुरुषों की मौतें हुईं। अमेरिका के डिजीज कंट्रोल ऑफ प्रिवेंशन सेंटर के प्रमुख शोधकर्ता सुसैन हिलिस बताते हैं कि स्टडी में कोविड से होने वाली प्रति मौत के सापेक्ष एक बच्चे का अनाथ या बेसहारा होना लिया गया है। इस तरह से हर छह सेकंड में एक बच्चे को जोखिम उठाना पड़ा, जब तक कि उसके पास समय भीतर मदद नहीं पहुंचाई गई। भविष्य में ऐसे बच्चों को मॉनीटर करने के लिए सर्विलांस सिस्टम से जोड़ना होगा।
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