टीम एबीएन, रांची। श्री दिगंबर जैन पंचायत के तत्वावधान में कल से पांच दिवसीय श्री मज्जिनेंद्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव मुनि श्री 108 प्रमाण सागर जी महाराज के सान्निध्य में प्रारंभ होगा।
महोत्सव के प्रथम दिन सुबह 5:30 बजे अपर बाजार स्थित दिगंबर जैन मंदिर से गाजे-बाजे के साथ भव्य घटयात्रा निकाली जायेगी। दिगंबर जैन पंचायत के अध्यक्ष प्रदीप वाकलीवाल और प्रवक्ता राकेश गंगवाल ने बताया कि घटयात्रा में 271 महिलाएं पारंपरिक परिधान में शामिल होंगी।
घटयात्रा मंदिर परिसर से निकलकर सर्कुलर रोड स्थित बिरसा मुंडा फन पार्क स्थित महोत्सव स्थल तक जायेगी। इसके बाद महोत्सव का शुभारंभ मंगलाचरण और यागमंडल विधान से होगा, तत्पश्चात गर्भ कल्याणक का आयोजन किया जायेगा।
इस दौरान तीर्थंकर भगवान के गर्भ में आगमन की पावन घटना का भावपूर्ण चित्रण किया जायेगा तथा माता के 16 स्वप्नों की झांकी प्रस्तुत की जायेगी। इस अवसर पर मुनि श्री का विशेष प्रवचन भी होगा। शाम में शंका समाधान और धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।
पांच दिवसीय महोत्सव के प्रारंभ से पूर्व मंगलवार को महोत्सव स्थल पर भगवान के माता सीता सोगानी और पिता के पात्र बिमल सोगानी का दिगंबर जैन पंचायत के अध्यक्ष और मंत्री द्वारा सहपरिवार सम्मान किया गया। इसके बाद कनक-प्रदीप और ज्योति-जितेंद्र छाबड़ा द्वारा भी सम्मान किया गया। तत्पश्चात महिलाओं ने भजनों के साथ मेहंदी की रस्म संपन्न की।
राजधानी में विराजमान दिगंबर जैनाचार्य मुनि श्री 108 प्रमाण सागर जी महाराज ने मंगलवार को अपने प्रात:कालीन प्रवचन में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए आत्मशुद्धि, अहिंसा और संयम को जीवन का अनिवार्य आधार बताया।
उन्होंने कहा कि मनुष्य का उत्थान बाहरी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि अंतर्मन की निर्मलता से होता है। अहिंसा केवल व्यवहार नहीं, बल्कि जीवन का दृष्टिकोण है। जब मनुष्य के भीतर कटुता, ईर्ष्या और राग-द्वेष समाप्त होते हैं, तभी उसके जीवन में शांति और स्थिरता आती है। उन्होंने सत्य, करुणा और अपरिग्रह को जीवन की मूल आवश्यकताएं बताते हुए कहा कि इन सिद्धांतों के पालन से समाज में सौहार्द और सद्भाव बढ़ता है।
आगामी पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का उल्लेख करते हुए मुनिश्री ने कहा कि यह उत्सव आत्मजागरण और श्रेष्ठ आचरण का संदेश देता है। यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मनिर्माण का मार्गदर्शक है। युवा वर्ग को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नैतिकता, अनुशासन और सकारात्मक सोच किसी भी राष्ट्र के विकास की आधारशिला हैं। यदि युवाओं का चरित्र उज्ज्वल हो, तो समाज स्वत: बदल जाता है।
प्रवचन के अंत में मुनिश्री ने स्व-रचित मंगल पाठ मंगल-मंगल होय जगत में, सब मंगलमय होय, इस धरती के हर प्राणी का मन मंगलमय होय... का पाठ किया और अहिंसा, संयम एवं सद्भावना का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। संध्या 6:20 बजे शंका समाधान कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया, जिसके बाद आरती संपन्न हुई।
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