एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। वैश्विक मंच पर बढ़ते तनाव और मानवाधिकार उल्लंघनों के बीच भारत की भूमिका को लेकर एक बार फिर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने अंतरराष्ट्रीय हालात पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए साफ कहा कि अब दुनिया को सिर्फ मूकदर्शक बने रहने की बजाय सक्रिय भूमिका निभानी होगी और जहां कहीं भी मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है, वहां कड़ी निगरानी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि यह मामला केवल ब्रिक्स तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के सभी प्रमुख देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को मिलकर इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। जी7 देशों से लेकर यूनाइटेड नेशन (यूएन) तक, सभी को जिम्मेदारी के साथ स्थिति पर नजर रखनी चाहिए, खासकर उन क्षेत्रों में जहां मानवाधिकारों का हनन हो रहा है।
सुखदेव भगत ने युद्ध की नीति पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि युद्ध कभी भी किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। उनके अनुसार, युद्ध केवल विनाश, अस्थिरता और मानवीय संकट को जन्म देता है, जबकि संवाद और कूटनीति ही स्थायी समाधान का रास्ता हैं।
उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि वैश्विक समस्याओं का हल बातचीत और आपसी समझ से ही निकल सकता है। उन्होंने कहा कि भारत का ईरान से लंबे समय से दोस्ताना संबंध रहा है। सबसे बड़ी चीज की तकरीबन 80 प्रतिशत इंधन उक्त इलाकों से प्राप्त की जाती है। बड़ी संख्या में भारतीय लोग वहां से जीवन यापन करते हैं।
श्री भगत ने भारत की भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि देश हमेशा से शांति का दूत रहा है और आज के समय में उसे आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति स्थापना की पहल करनी चाहिए। उनका मानना है कि भारत के पास वह नैतिक शक्ति और कूटनीतिक क्षमता है, जिसके जरिए वह दुनिया को संघर्ष से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभा सकता है।
सुखदेव भगत का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और तनाव की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में उनका यह संदेश न सिर्फ भारत की विदेश नीति बल्कि वैश्विक शांति प्रयासों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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