एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक कार्य समिति ने आज रेल मंत्रालय की लगभग 4,474 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली दो महत्वपूर्ण रेलवे परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की है। इन परियोजनाओं के लागू होने से रेलवे नेटवर्क की क्षमता में वृद्धि होगी और यात्रियों के साथ-साथ माल ढुलाई के आवागमन में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।
कैबिनेट द्वारा जिन दो प्रमुख परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, उनमें सैंथिया-पाकुड़ चौथी लाइन और संतरागाछी-खड़गपुर चौथी लाइन शामिल हैं। इन दोनों परियोजनाओं के जरिए रेलवे नेटवर्क को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। रेलवे लाइन की क्षमता बढ़ने से ट्रेनों के आवागमन में उल्लेखनीय सुधार होगा। इससे भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में भी बढ़ोतरी होगी। मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से परिचालन व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित होगी और ट्रेनों की भीड़भाड़ कम करने में भी सहायता मिलेगी।
ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नए भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं। इनका उद्देश्य क्षेत्र के लोगों को व्यापक विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना है। इससे क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ने की संभावना है। इन परियोजनाओं को पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत तैयार किया गया है। इस योजना में एकीकृत योजना और विभिन्न हितधारकों के परामर्श के माध्यम से मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इससे लोगों, वस्तुओं और सेवाओं के निर्बाध आवागमन के लिए बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी।
इन दोनों परियोजनाओं के तहत पश्चिम बंगाल और झारखंड राज्यों के कुल पांच जिलों को लाभ मिलेगा। इससे भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 192 किलोमीटर की वृद्धि होगी।
स्वीकृत मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से लगभग 5,652 गांवों को रेल कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा। इन गांवों की कुल आबादी करीब 147 लाख है, जिन्हें बेहतर रेल सेवाओं का फायदा मिलेगा। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद कई प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए रेल संपर्क में भी सुधार होगा। इनमें बोलपुर-शांतिनिकेतन, नंदिकेश्वरी मंदिर (शक्तिपीठ), तारापीठ (शक्तिपीठ), पटाचित्र ग्राम, धडिका वन, भीमबंध वन्यजीव अभ्यारण्य और रामेश्वर कुंड जैसे स्थान शामिल हैं।
स्वीकृत परियोजनाएं कोयला, पत्थर, डोलोमाइट, सीमेंट, स्लैग, जिप्सम, लोहा और इस्पात, खाद्यान्न, पीओएल और कंटेनर जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए महत्वपूर्ण मार्ग साबित होंगी। इन परियोजनाओं से रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में भी बड़ा इजाफा होगा।
क्षमता वृद्धि कार्यों के परिणामस्वरूप प्रति वर्ष 31 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता विकसित होगी। रेलवे पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा दक्ष परिवहन माध्यम होने के कारण जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने और देश की लॉजिस्टिक लागत को कम करने में भी मदद करेगा। इससे लगभग 6 करोड़ लीटर तेल आयात में कमी आएगी और करीब 28 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइआॅक्साइड उत्सर्जन कम होगा, जो लगभग 1 करोड़ पौधारोपण के बराबर माना गया है।
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