एबीएन बिजनेस डेस्क। भारतीय सरार्फा बाजार में सोने की कीमतों में जबरदस्त गिरावट का सिलसिला जारी है। जनवरी 2026 में 1,80,779 प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर को छूने वाला सोना अब अपने ऊंचे स्तर से लगभग 13.50% (24,500) फिसल चुका है। सोमवार को एमसीएक्स पर सोना 0.61% की गिरावट के साथ 1,54,937 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह गिरावट महज एक शुरुआत हो सकती है।
सोने में आई इस अचानक गिरावट की सबसे बड़ी वजह रूस का अमेरिकी डॉलर (यूएसडी) के प्रति बदलता रुख माना जा रहा है।
लंबे समय से डॉलर के खिलाफ अभियान चलाने वाला रूस अब अमेरिका के साथ फिर से डॉलर में व्यापार की संभावनाएं तलाश रहा है।
ब्रिक्स देशों ने डॉलर को चुनौती देने के लिए गोल्ड बेस्ड ट्रेड का सपना देखा था। रूस की डॉलर में संभावित वापसी इस लक्ष्य को कमजोर कर रही है, जिससे सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग घट गयी है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में सोने की कीमतों में आयी उछाल कृत्रिम मांग के कारण थी।
2020 से 2024 के बीच वैश्विक स्वर्ण खरीद का 50% हिस्सा ब्रिक्स देशों के केंद्रीय बैंकों ने खरीदा।
अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद टैरिफ के डर से दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने सोने का स्टॉक जमा करना शुरू किया, जिससे मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ गया।
पीएसीई 360 के अमित गोयल जैसे विशेषज्ञों ने सोने को लेकर मंदी के संकेत दिये हैं। उनका मानना है कि सबसे पहले डिजिटल या पेपर गोल्ड में बिकवाली होगी, जिसका असर भौतिक सोने पर पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना $3,000 प्रति औंस तक गिर सकता है।
वहीं भारत में कीमतें 1,00,000 प्रति 10 ग्राम के स्तर से भी नीचे जा सकती हैं। बाजार में आने वाली किसी भी छोटी तेजी को एक्सपर्ट डेड कैट बाउंस कह रहे हैं, यानी एक अस्थायी उछाल जो बड़ी गिरावट का संकेत है।
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