एबीएन ,देवघर। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर में भगवान भोलेनाथ का विवाह माता पार्वती के साथ पूरे विधि-विधान से संपन्न कराया जाएगा। मंदिर और शहर में इस खास मौके को लेकर भव्य तैयारी की गई है। देर रात से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं और पूरे परिसर में हर-हर महादेव के जयघोष गूंज रहे हैं।
पंचशूल पूजा के साथ शुरुआत
बीते शनिवार को तांत्रिक और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पंचशूल की विशेष पूजा की गई। इसके बाद पंचशूल को संबंधित मंदिरों में स्थापित किया गया। रविवार तड़के ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर के पट सरकारी पूजा के लिए खोले गए। सुबह 3 बजे सरकारी पूजा संपन्न हुई और 4 बजे से आम श्रद्धालुओं के लिए जलार्पण शुरू कर दिया गया।
तीन किलोमीटर लंबी कतार
महाशिवरात्रि को लेकर भक्तों का उत्साह चरम पर है। मंदिर परिसर के बाहर करीब तीन किलोमीटर लंबी कतार बीएड कॉलेज, क्यू कॉम्प्लेक्स, नाथबाड़ी और रूटलाइन तक पहुंच गई। अनुमान है कि देर शाम तक दो से ढाई लाख श्रद्धालु जलार्पण करेंगे। महाशिवरात्रि पर यहां चतुष्प्रहर (चार पहर) की विशेष पूजा होगी। साथ ही पारंपरिक शिव बारात भी निकाली जाएगी। भीतरखंड से मशाल, ढोल-नगाड़े और वाद्ययंत्रों के साथ शिव बारात मुख्य निकास द्वार तक पहुंचेगी। इसके बाद भस्म, चंदन, बेलपत्र और पुष्पमालाओं से सजी आरती की जाएगी। परंपरा के अनुसार, सरदार पंडा और अन्य पुजारी ढोल-ढाक के साथ पूजन सामग्री लेकर निकास द्वार तक जाएंगे और वहां से गर्भगृह में प्रवेश कर पूजा संपन्न करेंगे। यह अनुष्ठान सुबह तक चलता रहेगा।
600 साल पुरानी परंपरा
मान्यता है कि लगभग 600 वर्षों से बाबा बैद्यनाथ रोहिणी में बने मोउर मुकुट और पारंपरिक वेशभूषा में विवाह पूजन करते हैं। देवघर के रोहिणी क्षेत्र के घाटवाल और मालाकार परिवार पीढ़ियों से विवाह के लिए मुकुट और अन्य सामग्री तैयार करते आ रहे हैं। आज भी उनके वंशज इस परंपरा को निभा रहे हैं।
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
महाशिवरात्रि को देखते हुए मंदिर और पूरे शहर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन और पुलिस के अधिकारी रात से ही तैनात हैं। उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा, पुलिस अधीक्षक सौरभ कुमार और अनुमंडल पदाधिकारी रवि कुमार ने मंदिर क्षेत्र का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। श्रद्धालुओं को कम से कम इंतजार करना पड़े, इसके लिए कतार को तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। पूरे मंदिर परिसर को करीब पांच लाख गेंदा फूलों से सजाया गया है। 22 मंदिरों में विशेष सजावट की गई है। रात में विवाहोत्सव और सिंदूरदान की रस्म निभाई जाएगी। विशेष पूजा के बाद सोमवार सुबह 8:10 बजे मंदिर के पट फिर से श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।
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