एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत रूस से तेल खरीदना बंद करेगा या जारी रहेगा, केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया। उन्होंने शनिवार को कहा कि इस मुद्दे पर विदेश मंत्रालय ही बात करेगा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को पोस्ट कर दावा किया था कि अमेरिका से डील के साथ ही भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा। इस पर भारत की ओर से फिलहाल कोई जवाब नहीं दिया गया है।
हालांकि सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि भारत अपने फैसले देश के लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर करेगा। इसमें कहा गया था कि उन गैर-प्रतिबंधित संस्थाओं का मार्केट से तेल खरीदना जारी रखा जाएगा, जो सबसे अच्छा सौदा दे रहे हैं। मार्केट के अनुसार कीमतों को तय किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत को अमेरिकी अर्थव्यस्था से कम टैरिफ का सामना करना पड़ता है, जो अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक डील भारतीय किसानों को नुकसान नहीं पहुंचाएगी।
अमेरिका हमारे पड़ोसी देशों वियतनाम और बांग्लादेश पर 20 प्रतिशत, इंडोनेशिया पर 19 प्रतिशत और चीन पर 35 प्रतिशत टैरिफ लगाता है। साथ ही उन्होंने कहा कि कई ऐसी चीजें हैं, जो हमारे एक्सपोर्टर्स बिना किसी टैरिफ के अमेरिका भेज सकते हैं। इस दौरान उन्होंने स्मार्टफोन का उदाहरण दिया।
उन्होंने कहा कि जिन उत्पादों में भारत आत्मनिर्भर है, उन्हें इस डील के दायरे से बाहर रखा गया है। जेनेटिकली मॉडिफाइड फसलें, मांस, पोल्ट्री, डेयरी, सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, चीनी, ज्वार, बाजरा, रागी, अमरंथ जैसे मोटे अनाज को कम टैरिफ पर भारत में अनुमति नहीं दी जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि केला, स्ट्रॉबेरी, चेरी और खट्टे फलों जैसे फलों पर कोई रियायत नहीं दी गई है। ग्रीन टी, काबुली चना, मूंग, तिलहन, मूंगफली, माल्ट और माल्ट-आधारित उत्पादों, गैर-अल्कोहल पेय, स्टार्च, इथेनॉल, तंबाकू पर डील में कोई रियायत नहीं दी गई है। इस प्रकार भारतीय किसानों की रक्षा की गई है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा कई कृषि उत्पादों ऐसे भी हैं, जिन्हें अमेरिका निर्यात करेगा तो शून्य टैरिफ लगेगा। इसमें मसाले, चाय, कॉफी, नारियल, नारियल का तेल, काजू और कई फल-सब्जियां हैं।
साथ ही उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि इस देश में कुछ लोग ऐसे हैं, जो किसान विरोधी हैं। किसानों को गुमराह करने की कोशिश करते हैं। ये लोग हैरान हैं कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील के तहत कृषि उत्पादों पर रियायत नहीं दी गई है।
इसके अलावा उन्होंने डील पर सदन में चर्चा को लेकर कहा कि संसद में क्या किया जाना चाहिए और क्या नहीं, यह स्पीकर और चैयरमेन तय करेंगे। संसद में हर बात नहीं पढ़ी जा सकती। कुछ मामलों को सीधे देश के लोगों तक पहुंचाना होता है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि व्यापारिक समझौते के कारण देश में खुशी की लहर है। देश के हर क्षेत्र में उत्साह है। ये डील हर सेक्टर्स के लिए फायदेमंद रहेगा।
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