टीम एबीएन, रांची। एसआर डीएवी पब्लिक स्कूल, पुंदाग में युगपुरुष महर्षि दयानंद सरस्वती जी की दूसरी शताब्दी जयंती का आयोजन धूमधाम से किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक महाहवन से हुई, जिसमें विद्यालय परिवार ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। तत्पश्चात ऋषिवर को भावभीनी पुष्पांजलि अर्पित की गयी।
विद्यालय के संगीत शिक्षक ने भजन के माध्यम से महर्षि के प्रति भावांजलि अर्पित की। नवम वर्ग के श्रेयश श्रीवास्तव ने स्वामी जी के व्यक्तित्व तथा कृतित्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर कक्षा षष्ठ के विद्यार्थियों ने लोमहर्षक लघु नाटिका "महर्षि" का प्रस्तुतीकरण कर विद्यालय परिवार के सभी सदस्यों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
प्राचार्य श्री संजय कुमार मिश्रा ने अपने संदेश में कहा कि महर्षि ने नव भारत सृजन में अग्रणी भूमिका निभायी।
श्रेष्ठ भारत की बुनियाद महर्षि ने ही डाली थी। उनके ऋण से हम उऋण नहीं हो सकते। उन्होंने आर्य समाज की स्थापना कर आर्य मूल्यों का प्रतिस्थापन किया। डीएवी संस्थाएं आर्य मूल्यों का ध्वज वाहक हैं। ऋषिवर ने ही सबसे पहले स्वराज्य की अवधारणा से देश को परिचित करवाया, जिसे बाल गंगाधर तिलक जी ने आगे बढ़ाया।
आज हमारे समाज से अनेक कुरीतियों का अंत हो गया है। विधवा विवाह, नारी शिक्षा, वैदिक मूल्यों की पुनर्स्थापना आदि का श्रेय उन्हीं को जाता है। एक तरफ वे सुधारवादी आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे, तो दूसरी ओर देश को स्वतंत्रता दिलाने के लिए भी देशभक्तों की फौज तैयार कर रहे थे। उन्होंने शिक्षकों एवं छात्रों से सनातन वैदिक मूल्यों का संवर्धन करने की अपील की। अपने संदेश में प्राचार्य ने डीएवी संस्था के प्रधान आर्यरत्न डॉ पूनम सूरी जी, आर्य श्रेष्ठ डॉ जेपी शूर जी, निदेशक, विद्यालय के चेयरमैन श्री पीपी आर्य जी, क्षेत्रीय अधिकारी श्री अरुण कुमार जी एवं समस्त आर्य जनों के प्रति आभार प्रकट किया। वैदिक जयघोष के साथ प्रातः कालीन सभा समाप्त हुई।
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