एबीएन एडिटोरियल डेस्क। ...और देखते ही देखते बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी वादा पूरी करते हुए कि सम्राट चौधरी को बड़ा आदमी बनायेंगे, दिल्ली कूच कर गये... ...सम्राट चौधरी के पिताजी स्वर्गीय शकुनी चौधरी समता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे।
राजद, कांग्रेस, जदयू और हिंदुस्तानी आवाम पार्टी (हम) में सक्रिय रहते हुए बिहार के तारापुर से विधायक और खगड़िया से सांसद रहे। सम्राट चौधरी ने भी राजद, जदयू और अब भारतीय जनता पार्टी में कार्य करते हुए परिवारवाद को आगे बढ़ाया; अब तो शानदार मुख्यमंत्री...।
भारतीय राजनीति में जब परिवारवाद के तथाकथित नैतिक प्रचलन जो शुद्ध रूप से राजतंत्र का ही प्रयाय है, स्वीकृति प्राप्त हो ऐसे मे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इकलौता बेटा निशांत कुमार ने एक अलग ही नजीर पेश किया है और उन्होंने अनुकूल परिवेश होते हुए भी उपमुख्यमंत्री बनना स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि वह अभी किसी सदन के सदस्य नहीं हैं और इसलिए उपमुख्यमंत्री नहीं बनेंगे।
एनडीए के घटक दल के नेता उपेंद्र कुशवाहा का बेटा मंत्री बन गये जबकि वे किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। हिंदुस्तान आवाम पार्टी के नेता जीतन राम मांझी तो परिवारवाद के माल वाहक ट्रक ही चला रहे हैं। परिवारवाद के इंजन लालू प्रसाद यादव की गाड़ी राजनीति के पटरी में सबसे लंबी है। राजनीति में परिवारवाद के इतिहास का किताब नेहरू गांधी परिवार का सबसे मोटा है जो वर्तमान तक यथावत चला आ रहा है।
दक्षिण भारतीय राजनीति का तो आधार ही परिवारवाद रहा है। बड़े मियां तो बड़े मियां छोटे मियां सुभान अल्लाह.. अब तो प्रखंड से लेकर जिला स्तर तक के राजनीति में परिवारवाद का करिश्मा देखने का सौभाग्य एवं शुभ अवसर प्राप्त हो रहा है। सब प्रकार से अनुकूल परिस्थिति और कूवत होते हुए भी श्रीमान नीतीश कुमार तथा उनके पुत्र श्रीमान निशांत कुमार ने जो आदर्श प्रस्तुत किया है उसकी सराहना पूरे देश में हो रही है।
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