एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। साहित्य एवं फ़िल्म महोत्सव अखड़ा आलाप का आज दूसरा दिन रहा। पहले सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में माननीय सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि समस्याओं का सामना करना ही उसका समाधान है। कभी भी संघर्ष से दूर ना भागें। संघर्ष में आगे बढ़ने की हमेशा ललक होनी चाहिए।
सांसद ने कहा कि इस साहित्य महोत्सव में कई रचनाकारो की पुस्तकें उपलब्ध हैं जिसे पढ़ने के बाद हमें बहुत कुछ सीखने और समझने का अवसर मिलता है। हमारी चेतना जागृत होती है।
सांसद ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा बीते वर्ष भी पुस्तक मेला यहां लगाया गया था जिसे नया रूप देते हुए इसे और भी विकसित कर साहित्य एवं फ़िल्म महोत्सव के रूप में आयोजित किया जा रहा है।
उप विकास आयुक्त ने कहा कि आज लोहरदगा में भी युवाओं में ऐसी प्रतिभाएं हैं जो कला और संस्कृति में बहुत अच्छा कर सकते हैं। इस महोत्सव से काफी कुछ सीखा जा सकता है।
पैनल डिस्कसन में कवि व लेखक के द्वारा किये गए सवालों के जवाब में कवयित्री एवं साहित्यकार डॉ पार्वती ने कहा कि आज के बच्चों व युवाओं को अपने पुरखों से सीखने की जरूरत है।
धुमकुड़िया में चीजें होतीं थीं उन्हें अपनाया जाना चाहिए। अखड़ा में जाने व साथ में सामूहिक परंपराओं में शामिल होने की आवश्यकता है। आदिवासियों की जीवन पद्धति पूरी तरह प्रकृति से जुड़ी है।
साहित्यकार महादेव टोप्पो ने कहा कि विकास संतुलित होना चाहिए, ना कि प्रकृति को नुकसान पहुंचाकर। आज भी आदिवासी प्रकृति में होने वाले बदलाव को कई संकेतों के माध्यम से समझते हैं।
इस ज्ञान को पठन पाठन में शामिल किया जाना चाहिए। लोक गायकों के लिखे व गाये हुए गीत फिर से प्रकाशित होने चाहिए। इससे आदिवासी व सभ्य समाज के बीच दूरी कम होगी।
आज के कार्यक्रम में उपायुक्त डॉ ताराचंद, उप विकास आयुक्त अपर समाहर्ता जितेंद्र मुंडा सभी वरीय पदाधिकारीगण, जिला स्तरीय पदाधिकारीगण व छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
कार्यक्रम में कवि व साहित्यकार महादेव टोप्पो ने वार्षिक पत्रिका धुमकुड़िया की प्रति भेंट की। कार्यक्रम में गायक जयंत मिश्रा, डॉ पार्वती तिर्की व अन्य अतिथियों को भी सम्मानित किया गया।
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