एबीएन सोशल डेस्क। फाल्गुन मास के पूर्णिमा को होलिका दहन के साथ संवत काटते हुए नव वर्ष का स्वागत एवं अपने आनंद की अभिव्यक्ति चैत्र मास के प्रथम दिवस को होली के त्यौहार के रूप में मनाया जाता है, जिसमें विभिन्न रंगों के रंग एवं अबीर गुलाल लगाकर एक दूसरे के प्रति शुभकामनाओं का आदान प्रदान करते हैं। हमारी प्रकृति विभिन्न रंगों से सजी हुई है और रंगों का व्यापक प्रभाव हमारी चेतना, भावना, संवेदना तथा बुद्धि के ऊपर होती है
लाल रंग क्रोध का, भगवा सामूहिकता का, हरा समृद्धि का, पीला ज्ञान विज्ञान कला साहित्य विवेक का, गुलाबी प्रेम का, नीला शांति एवं विस्तार का तथा श्वेत रंग तप एवं त्याग का, और रंगों का सूक्ष्म प्रभाव हमारे व्यक्तित्व कृतित्व के ऊपर सीधा पड़ता है। विभिन्न रंगों से युक्त यह जीवन एक उत्सव ही है और उत्सव का रंगों के साथ शुभारंभ हमारे मनोविज्ञान में संतुलन स्थापित करता है।
होली के पर्व के बाद वसंत ऋतु का पवित्र एवं शक्ति साधना नवरात्र के साथ नव वर्ष आरंभ हो जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों में हम प्रकृति से सानिध्य स्थापित करते हुए उसकी सूक्ष्म शक्तियों को धारण करने का अनुष्ठान करते हैं और आने वाले वर्ष भर के लिए स्वयं को अपने भीतर संकल्प एवं चरित्र की शक्ति से अभिसिंचित करते हैं।
होली का त्यौहार मात्र औपचारिकता न रह जाए। सतही शुभकामनाओं के आदान-प्रदान भर से काम चलने वाला नहीं है। अपने विभिन्न रंगों की भावनाओं को खुलकर बहने दें जिसकी सुखद फुहार की अनुभूति सबको मिल पाये।
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