झारखंड नाम देनेवाले शिखर पुरुष लाल रणविजय नाथ शाहदेव जयंती पर उमड़ा जनसैलाब

 

  • झारखंड नाम के सूत्रधार और नागपुरी के शिखर पुरुष लाल रणविजय नाथ शाहदेव की जयंती पर उमड़ा साहित्यकार, कलाकार की भीड़  
  • श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के सभागार में जुटे राज्य के दिग्गज; जीवन, संघर्ष और रचनात्मक योगदान का हुआ विमर्श 

टीम एबीएन, रांची। झारखंड आंदोलन के प्रखर वैचारिक स्तंभ, राजनीतिज्ञ और कालजयी साहित्यकार स्व. लाल रणविजय नाथ शाहदेव की जयंती आज श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू) के सभागार में श्रद्धा और संकल्प के साथ मनायी गयी। मौके पर राज्य की कला, साहित्य और अकादमिक जगत की विभूतियों ने उन्हें एक ऐसे महानायक के रूप में याद किया, जिन्होंने कलम और वैचारिक संघर्ष के समन्वय से झारखंड को उसकी पहचान दिलायी। 

वनांचल नहीं झारखंड ही रहेगी पहचान 

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित डीपीएमयू के कुलपति डॉ. धर्मेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि शाहदेव जी का सबसे बड़ा योगदान राज्य का नामकरण है। विश्वविद्यालयों में इनसे संबंधित और भी अनुसंधान होने चाहिए। कार्यक्रम का स्वागत भाषण विभाग के समन्वयक विनोद कुमार ने देते हुए कहा कि उनकी स्मृतियां आज भी नागपुरी साहित्य में जीवित हैं। 

पद्मश्री मधु मंसूरी हंसमुख ने भावुक होते हुए कहा कि शाहदेव जी के गीतों में शोषण के विरुद्ध जो तड़प थी, उसी ने जन-आंदोलन को ऊर्जा दी।  पद्मश्री महाबीर नायक ने उनके सांस्कृतिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नागपुरी कला संगम के माध्यम से उन्होंने लोक कलाकारों को जो मंच दिया, वह आज भी हमारी धरोहर है। 

साहित्य और शोध का संगम 

कार्यक्रम में डॉ. संजय कुमार षाडंगी द्वारा लिखित कविता लाल रणविजय नाथ शाहदेव: जीवन, संघर्ष और रचनात्मक योगदान का स्वर उनके द्वारा पाठ किया गया। विभागाध्यक्ष डॉ. उमेश नंद तिवारी ने उनकी कृति नागपुरी भगवद्गीता उनके भाषाई पांडित्य का अनूठा प्रमाण है। एक अटूट वैचारिक विरासत है। डॉ मालती वागीशा लकड़ा ने उनके  संक्षिप्त जीवन परिचय देते हुए कहा कि उनका  

  • जन्म: 5 फरवरी 1940, पालकोट राजघराना में हुआ। 
  • शिक्षा: राजनीति शास्त्र, इतिहास (एमए) एवं विधि (एलएलबी)। 
  • संघर्ष : 1968 का आंदोलन, 1975 का जेपी आंदोलन (मीसा जेल यात्रा)। 
  • साहित्य: पूजा कर फूल, जागी जवानी चमकी बिजुरी, नागपुरी भगवद्गीता समेत लगभग 400 रचनाएं। 
  • योगदान: झारखंड विधेयक प्रारूप तैयार करने और झारखंड नाम की स्वीकृति दिलाने में निर्णायक भूमिका। 
  • लाल रणविजय नाथ शाहदेव की जयंती पर झारखंडी चेतना का विराट स्मरण 

श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में साहित्य, संघर्ष और राज्य निर्माण पर हुआ ऐतिहासिक विमर्श 

झारखंड आंदोलन के वैचारिक शिल्पकार, प्रखर राजनीतिक विचारक, वकील, कवि, लेखक और नागपुरी भाषाझ्रसंस्कृति के महान साधक स्व. लाल रणविजय नाथ शाहदेव की जयंती के अवसर पर आज नागपुरी विभाग, श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची के सभागार में एक भव्य श्रद्धांजलि एवं वैचारिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम ने झारखंड के राज्य निर्माण, सांस्कृतिक चेतना और लोकभाषाओं की भूमिका पर गहन विमर्श का रूप लिया। डॉ देवशरण ने कहा की वे व्यक्ति नहीं, एक विचार थे। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि लाल रणविजय नाथ शाहदेव केवल एक राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि झारखंड आंदोलन की वैचारिक रीढ़ थे। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन संजय कुमार साहू ने किया। 

मौके पर डॉ. धर्मेंद्र कुमार सिंह, (कुलपति), पद्मश्री मधु मंसूरी हंसमुख, पद्मश्री मुकुंद नायक, पद्मश्री महाबीर नायक, डॉ मनोज कच्छप, डॉ. लाल अदितेंद्र नाथ शाहदेव, क्षितिज कुमार राय, डॉ. उमेश नंद तिवारी, डॉ. शकुंतला मिश्र, डॉ देवशरण भगत, प्रवीण प्रभाकर, डॉक्टर अजय नाथ शाहदेव, ऋतुराज शाहदेव, कर्नल ज्योतिदेव, प्रताप सिंह, ओम वर्मा, बबलू महतो, अमन साहू, शिवम चौबे, आनंद कुमार, राज दुबे, सौरभ यादव, सचिन सिंह, विद्यानंद, राजेश सिंह, अभिषेक महतो सहित कई विश्वविद्यालयों के विद्वान प्राध्यापक, शोधार्थी, छात्र-छात्राएं, साहित्यकार, कलाकार एवं शाहदेव परिवार के सदस्य उपस्थित रहे। उक्त जानकारी स्व लाल रणविजय नाथ शाहदेव जी के पौत्र ऋतुराज शाहदेव (7903157382) ने दी।

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