टीम एबीएन, रांची। ग्राहकों से होने वाली ठगी और उनके अधिकार को लेकर पिछले 50 सालों से अनवरत आंदोलन और अन्य विभिन्न माध्यमों से सहायता करने वाली संगठन अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत ने वित्त एवं खाद्य आपूर्ति मंत्री केंद्र सरकार को ज्ञापन सौंपा है।
उपायुक्त के माध्यम से सौंपे गये इस ज्ञापन में ग्राहक पंचायत ने वस्तुओं के दाम पर उत्पादन से 100 प्रतिशत अधिक अंकित किये जाने वाले मूल्य सहित अन्य विषयों को लेकर प्रश्न खड़े किए हैं। समाधान बताते हुए अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत ने केंद्र सरकार से प्रत्येक उत्पादक और निर्माता को उत्पाद की पैकेजिंग पर प्रथम बिक्री मूल्य मुद्रित करना आवश्यक करने की मांग की है।
बुधवार को अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत स्वर्ण जयंती आयोजन समिति के झारखंड प्रांत सचिव आर अजय और रांची जिला संयोजक श्री आलोक कुमार सिंह ने ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि प्रथम बिक्री मूल्य की अवधारण शुरू करके पहला कदम उठायें। प्रत्येक उत्पादक और निर्माता को उत्पाद की पैकेजिंग पर प्रथम बिक्री मूल्य मुद्रित करना आवश्यक होना चाहिए। प्रथम बिक्री मूल्य (एमएसपी) एमआरपी का पूरक होगा।
यदि उपभोक्ता को एमएसपी के बारे में जानकारी हो, तो वह खरीदारी करते समय तर्कसंगत विकल्प चुन सकता है। उपभोक्ता को वास्तव में लाभ होगा। ज्ञापन में संगठन के सचिव आर अजय ने बताया कि एमआरपी से सबंधित मुद्दों पर आंतरिक रूप से चर्चा की है। बताया कि प्रथम अंकित मूल्य एमआरपी की शुरुआत एक सकारात्मक कदम है, लेकिन कानून इस बारे में कोई दिशा-निर्देश नहीं देता है कि एमआरपी कैसे तय की जानी चाहिए।
वर्तमान में निर्माता यह अनुमान नहीं लगाता कि उसके उत्पाद के लिए उचित एमआरपी क्या होगी। एमआरपी अपारदर्शी है और उपभोक्ता को एमआरपी की संरचना के बारे में कोई जानकारी नहीं है। हमें ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं जहां उपभोक्ता ऐसी कीमत चुकाता है जो उत्पाद को योग्यता या उत्पाद में सन्निहित मूल्यवर्धन से असंबधित होती है।
उपभोक्ताओं के हित में ग्राहक पंचायत की मांग है कि एमआरपी संरचना निष्पक्ष, पारदर्शी और आसानी से समझी जाने वाली होनी चाहिए। बकायदा संगठन ने एमआरपी की छपाई के लिए अधिकतम सीमा निर्धारित करने वाले नियम, अधिनियम, विधान, आदेश लाने को कहा है। श्री आलोक कुमार सिंह ने बताया कि वस्तुओं में एमआरपी के नाम पर लूट का सबसे बड़ा उदाहरण दवा है।
दवाओं की मूल उत्पादन मूल्य और ग्राहक जिस मूल्य दवा की खरीदी करता है। दवाओं की खरीदी करता है। दवाओं की उत्पादन लागत (सिओपी) मुद्रित एमआरपी से सौ ज्यादा है। निर्माताओं, थोक विक्रेताओं, वितरकों, स्टॉकिस्ट, डॉक्टरों की लौबी के साथ साथ अंतत: खुदरा विक्रेताओं से लेकर सभी फर्मास्युटिकल चैनलों द्वारा ग्राहकों को धोखा दिया जाता है और लूटा जाता है। सभी मेडिकल दुकानें और आनलाइन दवा व्यापारी एमआरपी पर 20 से 80 तक की छूट दे रहे हैं, जो दर्शाता है कि एमआरपी पर निर्माता और उसकी इच्छा का एकाधिकार है।
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