टीम एबीएन, धनबाद। टाटा डीएवी स्कूल जामाडोभा, धनबाद ने सत्यानन्द योग मिशन रांची के प्रमुख स्वामी मुक्तरथ जी के मार्गदर्शन में उनके समर्पित अनुयायियों में से एक श्री केशव कुमार के साथ एक चरित्र निर्माण शिविर में योग के मूल उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए अनुशासित जीवन और मनोनियंत्रण विषय पर बृहत कार्यशाला का आयोजन किया। यह शिविर दो दिनों तक 18 एवं 19 मार्च 2024 तक आयोजित है जिसका उद्देश्य छात्रों में अनुशासन तथा नैतिक गुणों का संवर्धन है।
आज प्रथम दिवस पर कक्षा छः, सात एवं आठ के छात्र-छात्राओं ने सक्रिय रूप से उत्साहपूर्वक भाग लिया। जबकि अगले दिन नौंमी, दशमी एवं ग्यारहवीं के छात्र भाग लेंगे। यह पहल न केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देता है बल्कि छात्रों में समझ और कल्याण की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है।
डीएवी जामाडोभा के प्राचार्य ए के मिश्रा के मार्गदर्शन में विद्यालय प्रबंधन ने काफी कुछ परिवर्तन लाने का कार्य किया है जिसमें विद्यालय के इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ बच्चों की गुणवत्तायुक्त पढ़ाई, मोरल वेल्यू,अनुशासन और चरित्र निर्माण जैसे पहलुओं पर जोड़ दिया है। इसी निमित्त झारखण्ड के प्रसिद्ध योगाचार्य स्वामी मुक्तरथ जी को व्याख्यान सह प्रायोगिक कक्षा संचालन हेतू आमंत्रित किया गया है।
उनके मार्गदर्शन में टाटा डीएवी जामाडोभा ने परिवर्तन की यात्रा शुरू की है जिसमें कई महत्वपूर्ण पहल पहली बार लागू की गयी है। छात्रों द्वारा प्रदर्शित उत्साह विद्यालय प्रशासन द्वारा लागू किये गये उपायों की प्रभावशीलता का प्रमाण है। चरित्र-निर्माण और योग शिविरों के अलावा विद्यालय अपने छात्रों के समग्र शैक्षिक अनुभव को बढ़ाने के उद्देश्य से नवीन कार्यक्रम शुरू करने में सक्रिय रहा है।
इस तरह की पहल अनुशासन, लचीलापन और आत्म-सुधार के मूल्यों को स्थापित करने का काम करती है ताकि छात्रों को आत्मविश्वास और अनुग्रह के साथ आधुनिक दुनिया की चुनौतियां का सामना करने के लिये तैयार किया जा सके। स्वामी मुक्तरथ अपने उदबोधन से सभी शिक्षकों के दिल को जीत लिये। उन्होंने बच्चों के जीवन निर्माण में शिक्षकों के अमूल्य योगदान को पहचानने पर जोड़ देते हुए कहा कि शिक्षक जैसा कोई नहीं है।
परमात्मा ने आपको सबसे उत्तम कार्य दिया है। आप व्यक्ति के जीवन को ज्ञान से भरने वाले हैं, जीवन मे प्रकाश दिखलाने वाले हैं, मार्गदर्शक और पथ-प्रदर्शक हैं। आप इस धरती के बहुत ही भग्यशाली इंसान हैं जो कि आप को यह कार्य मिला है।
ॐ सहनाववतु सहनौ भुनक्तु... मंत्र का अर्थ समझना बहुत जरूरी है जिसमें शिक्षकों के ही गुणों को महत्ता दी गई है। किस प्रकार शिक्षक समभाव रखते हुए अपने छात्रों के हित के लिये ईश्वर से प्रार्थना करते हैं। मेरा मानना है कि समाज की बेहतरी में योगदान देने वाले प्रयासों को पहचानना और उनकी सराहना आवश्यक है।
योग के अर्थों को स्पष्ट करते हुए मुक्तरथ जी ने बताया योग वही है जो आप को स्वयं से जोड़ दे। योग जीवन का अनुशासन है और अनुशासन चरित्र का निर्माता है। बिहार योग विद्यालय मुंगेर की योग-शैली दुनिया में बहुत प्रसिद्धि पायी है और विश्व को मार्गदर्शन करने वाला है। इन योग विधियों से नाशा के वैज्ञानिक भी बहुत अचंभित हैं।
परमहंस स्वामी सत्यानन्द सरस्वती का दिया हुआ योग और स्वामी निरंजनानंद सरस्वती द्वारा पोषित एवं संरक्षित योग आज दुनियां को रास्ता दिखाने का काम कर रहा है। योग अनुदेशक केशव कुमार ने बहुत ही प्रभावी तरीके से छात्रों और शिक्षकों को ताड़ासन, कटिचक्रासन, सूर्यनमस्कार, शशांकासन, नाड़ीशोधन प्राणायाम और भ्रामरी प्राणायाम को सिखाया।
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