एबीएन एडिटोरियल डेस्क। इसमें दो राय नहीं कि वित्तीय वर्ष की तीसरी तिमाही में जीडीपी के आंकड़े अर्थव्यवस्था में आशा का संचार करने वाले हैं। अक्तूबर-दिसंबर की तिमाही के जीडीपी आंकड़े बताते हैं कि देश कोरोनाकाल के संकट और वैश्विक चुनौतीपूर्ण स्थितियों से मुक्त होकर विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है।
शुक्रवार को शेयर बाजार का रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंचना बताता है कि उसे तरक्की के आंकड़े रास आए हैं। विपक्षी नेता कह सकते हैं कि चुनावी समर में जाते देश की गुलाबी तसवीर सरकार पेश कर रही है। लेकिन मार्च माह के पहले दिन घरेलू बाजार में दमदार तेजी हकीकत बयां करती है। विदेशी निवेशकों का भरोसा भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़ा है।
जिसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी नए सर्वकालिक उच्च स्तर तक जा पहुंचे। जो बताते हैं कि देश की अर्थव्यवस्था ने नई रफ्तार पकड़ ली है। देश ने आर्थिक विकास के मामले में चीन-अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है। गुरुवार को जारी तीसरी तिमाही के आंकड़ों के अनुसार देश की विकास दर 8.4 फीसदी रही है। पहले कयास लगाए जा रहे थे कि यह आंकड़ा साढ़े छह प्रतिशत के आसपास रह सकता है।
वैसे इससे पहले दूसरी तिमाही की ग्रोथ दर 7.6 फीसदी रही थी। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष की इसी तिमाही में विकास दर 4.3 फीसदी रही थी। निस्संदेह, ये आंकड़े मोदी सरकार के लिए बूस्टर का काम कर सकते हैं। जो आने वाले आम चुनाव में एक मुद्दा भी रहेगा और सरकार अर्थव्यवस्था के सवाल पर विपक्ष के सवालों का जवाब देने में मजबूत रहेगी।
इतना ही नहीं, आईएमएफ जैसी वैश्विक संस्थाएं भी कह रही हैं कि मौजूदा वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक विकास की गति अमेरिका, जापान व चीन से अधिक रहेगी। उम्मीद की जानी चाहिए कि विकास के आंकड़ों की यह क्षमता देश के 140 करोड़ से अधिक लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाये। देश में बेरोजगारी की दर धरातल पर कम हो।
उल्लेखनीय है कि पिछली तिमाही में अर्थव्यवस्था के बेहतर प्रदर्शन के मूल में तीन बड़े कारक रहे हैं। भले ही कृषि क्षेत्र में सुस्ती देखी गई है, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग और विनिर्माण के क्षेत्रों में उत्साहवर्धक गति देखी गयी है। बढ़ते अप्रत्यक्ष करों में वृद्धि का भी अर्थव्यवस्था को गति देने में योगदान रहा है।
उत्साहजनक बात यह रही कि उत्पादन क्षेत्र में तीसरी तिमाही में 11.6 फीसदी की वृद्धि देखी गयी है। यह वृद्धि पिछली तिमाही में महज 4.8 फीसदी रही थी। वहीं खनन के क्षेत्र में भी विकास दर 7.5 फीसदी रही है। अच्छी बात यह भी है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार फरवरी में करीब तीन अरब डॉलर बढ़ा है।
भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से शुक्रवार को दी गयी जानकारी के अनुसार, विदेशी मुद्रा का भंडार अब बढ़कर 619 अरब डॉलर हो गया है। वहीं दूसरी ओर भारतीय स्टेट बैंक के एक अध्ययन में बताया गया है कि चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर आठ फीसदी के दायरे में रह सकती है।
भारत की यह उपलब्धि इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि दुनिया की तमाम बड़ी अर्थव्यवस्थाएं उच्च मुद्रास्फीति की चुनौतियों से जूझ रही हैं। जिसके चलते विश्व की वित्तीय स्थितियों में विषमता नजर आ रही है। वहीं भारत ने दुनिया में जारी युद्धों के प्रभाव, महामारी के प्रभावों के बावजूद ये कामयाबी हासिल की है।
अच्छी बात यह है कि हमारी उपलब्धियां अनुमानों से अधिक हैं। सुखद यह भी है कि देश ने लगातार तीसरी बार अर्थव्यवस्था की विकास दर को सात प्रतिशत से अधिक रख पाने में सफलता पायी है। इसके बावजूद कि वैश्विक आर्थिक परिदृश्य अनुकूल नहीं है। निस्संदेह, विनिर्माण क्षेत्र में दो अंकों में वृद्धि महत्वपूर्ण है।
लेकिन कृषि क्षेत्र में अपेक्षित वृद्धि का न होना हमारी चिंता का विषय होना चाहिए। देश की खाद्य शृंखला को मजबूत बनाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। बहरहाल, अर्थव्यवस्था के ताजा आंकड़ों से निश्चित रूप से नये जनादेश के लिये जाने वाली राजग सरकार का आत्मविश्वास बढ़ेगा।
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