पर्यावरण की नीति और नियम में खोट से बढ़ रही समस्या : सरयू राय

 

  • डॉ आरपीपी सिंह फाउंडेशन रांची ने विवि प्रबंधन संस्थान के सभागार में विशेषज्ञों ने रखा विचार 

टीम एबीएन, रांची। रांची विश्वविद्यालय के प्रबंधन संस्थान के सभागार में जलवायु परिवर्तन और टिकाउ विकास विषय पर एक कार्यक्रम किया गया। शुक्रवार को आयोजित इस कार्यक्रम में विधायक और पर्यावरणविद सरयू राय, विनोबा भावे यूनिवर्सिटी के पूर्व वीसी रमेश शरण, श्यामा प्रसाद विवि रांची के वीपी प्रो तपन कुमार शांडिल्य सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया।  

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता विधायक एवं पर्यावरणविद सरयू राय ने कहा अब हमारी जिंदगी में पर्यावरण ऐसा रच बस गया है कि हमारा सुबह मौसम की गर्मी तो दोपहर तपती गर्मी शाम बादलों और बरसात की प्रतिक्षा में बीतता है। मानसून आया कि नहीं यह आम लोगों के चर्चा का विषय बना हुआ है। 

दुनिया प्रकृति के अनुसार चल रही है और हम पृथ्वी के गर्भ में से भी कोयला, तेल, जल निकालने में लगे हुए है। प्रकृति का विनाश हम विकास के क्रम में कर रहे हैं। सिर्फ तीन सौ साल में ही हमने इतना सर्वनाश कर दिया है। औद्यागिक क्रांति कोयला मिलने और उससे वाप्प की ताकत मिलने से आंरभ हुई जो गैस, पेट्रोल और बिजली मिलने के बाद और अधिक तेज हो गयी। 

पहले परिवर्तन का समय भी अधिक था अब यह कम होता जा रहा है। पृथ्वी पर चिंता किया जा रहा है लेकिन एक से एक विकसित अविष्कार जैैसे आर्टिफिसिलय इंटलिजेंस जैसे विषयों से होने वाले परिवर्तन की चिंता हो रही है। हमारी स्थिति कालिदास जैसी हो गयी है कि हम जिस पृथ्वी पर रहते हैं उसी के नाश में लगे हुए है। 

18 वीं सदी से 21 वीं सदी के बीच हमने प्रकृति पर विजय प्राप्त करने की बात करते-करते पृथ्वी के नाश की कहानी तैयार कर दी। हमें कितना पानी और कितने कोयले का खपत करना है यह समझना होगा। पृथ्वी एक धुरी पर घूम रही है। पृथ्वी को खोखला करने से इसके धूर्णप पर हाने वाले असर का अध्ययन करना अभी शेष है। 

आज समय आ गया है जब ग्रीनरी के साथ डवलपमेंट अनिवार्य हो गया है। पृथ्वी पर उपलब्ध संसाधनों को हम अपने जीडीपी से जोड़ते हैं। दोहर की कोई सीमा नहीं तय की गयी है। आज अमीरी भी बढ़ी है और गरीबी भी। श्री राय ने जोर देते हुए कहा कि समय आ गया है जब अंतरिक्ष में जाने वाले को जिस प्रकार ताप और दबाव सहने की प्रेरणा दी जाती है उसी प्रकार का प्रशिक्षण हमलोगों को लेना पड़ेगा।

हम 1990 तक पानी के बोतल की कोई कल्पना नहीं करते थे लेकिन आज यह किस प्रकार जगह बना लिया है। प्लास्टिक कूड़ें से होने वाले प्रभाव पृथ्वी और समुद्र दोनों स्थान पर देखे जा रहे हैं। 1961 में रोम में पर्यावरण पर चिंता व्यक्त करने के लिए सम्मेलन हुए तब से आज तक लगातार सम्मेलनों का दौर जारी है।  

अब वर्ष में चार सम्मेलन हो रहें हैं। आज सरकारें आम लोगों की चिंता नहीं कर रही है। चांडिल स्टेशन के प्लेटफार्म से कोयला की लोड़िंग हो रही है जबकि यह नियम के खिलाफ है। सरकार की नीतियों में कमी है खोट है।  

इस अवसर पर आरपीपी सिंह फाउडेशन की ओर से अविनाश कुमार ने कहा पिताजी का आज जन्म दिन है और इस अवसर पर हम उनके द्धारा दिखाये रास्ते पर चलने का प्रयास कर रहे हैं। फाउडेशन शिक्षा के क्षेत्र में लगातार काम करता रहेगा और महत्वपूर्ण विषयों पर संवाद इसमें अवश्य शामिल होगा।  

आज भले आरपीपी सिंह नहीं हैं लेकिन उनके कृत्य और विचार को लेकर हम आगे बढ़ेंगे। पर्यावरण की समस्या आज दुनिया की सबसे बड़ी समस्या हैऔर पृथ्वी ही नहीं पूरे यूनिवर्स का अस्तित्व संकट में है।  डॉ रमेश शरण ने कहा कि वर्षा के दिनों का कम होना, जाड़ें और गर्मी में उतार चढ़ाव पर पूरे विश्व को चिंता करने की आवश्यकता है। 

 हमें सोलर और पवन ऊर्जा पर ध्यान देना चाहिए।  आज 80 प्रतिशत संसाधनों का उपयोग मात्र 20 प्रतिशत लोग कर रहें हैं। संसाधनों का अधांधुंध उपयोग से पर्यावरण की स्थिति बिगड़ती जा रही है। हमें बुद्धिज्म इकोनॉमी की ओर जाना होगा या हमें गांधी जी के साधनों के उपयोग के नियमों का पालन करना होगा। 

प्रो तपन कुमार शांडिल्य ने कहा रांची को हम बेहतर मौसम के कारण जानते थे लेकिन आज जिस प्रकार तापमान 42 डिग्री से अधिक हो रहा है वह संकेत दे रहा है कि पर्यावरण की सुरक्षा पर चिंतित होने की जरुरत है। 

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्जवलन के बाद सरस्वती वंदना से की गयी। इकोनॉमी डिपार्टमेंट की प्रो रंजना श्रीवास्तव ने सेमिनार में आये हुए शिक्षाविदों, पर्यावरणविद और छात्रों का स्वागत किया। इकोनॉमी विभाग की डॉ मधुमिता दास गुप्ता ने सेमिनार के विषय वस्तु और विषय की गंभीरता से उपस्थित जनों को अवगत कराया।  

इस अवसर पर विशेषज्ञों ने अपनी राय रखी और इस गंभीर समस्या के निराकरण की ओर किस प्रकार बढ़ा जाए इस दिशा में अपने महत्वपूर्ण विचार दिया। 

आइएमएस के निदेशक डॉ वीएस तिवारी ने डॉ आरपीपी सिंह फाउंडेशन रांची द्धारा विवि प्रबंधन संस्थान के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में उपस्थित होने और कार्यक्रम को सफल बनाने के लिये धन्यवाद ज्ञापित किया। इस कार्यक्रम में विभाग के शिक्षण और बुद्धिजीवियों को सम्मानित किया गया।

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