एबीएन हेल्थ डेस्क। ठंड के मौसम में हार्ट के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इनमें कई ऐसे भी है जिन की हालत नाजुक हो जाती है। ऐसे पेशेंट्स मरीजों को इस मौसम में विशेष रूप से अपना ख्याल रखने की जरूरत है। मेदांता रांची के एसोसिएट डायरेक्टर, कार्डियोलॉजी डॉक्टर नीरज प्रसाद का कहना है कि कड़ाके की ठंड में कुछ सावधानियां जरूर रखनी पड़ेगी ताकि हालात विपरीत न हो।
डॉक्टर नीरज प्रसाद ने बताया कि कुछ ऐसे भी केस होते हैं। जिनको हल करना बहुत मुश्किल होता है। कार्डियोजेनिक शॉक वाले केस काफी चैलेंजिंग होते हैं। इनमें तीन ऐसे लिजन्स होते हैं, जिनके इलाज के दौरान काफी सावधानी रखनी होती है। इनमें एक नस होती है जिसकी शुरूआत मुंह से होती है और उसमें दो-तीन ब्रांच निकलते हैं। मुंह से निकलने वाली नस में जो बीमारी होती है और उसे खोला जाता है तो बीपी क्रैश करने का डर होता है। इस हालत में बहुत सावधानी और तेजी से इलाज करना पड़ता है। इसके अलावा सीटीओ क्रॉनिक टोटल ओकुलजन होता है। यह अगर पूरी तरीके से बंद हो तो भी मैं इसे खोल देता हूं। डॉक्टर नीरज बताते हैं कि हर 3 महीने में कोई न कोई एक चैलेंजिंग केस आता है। कई केस ऐसे भी आए हैं जिन में मरीजों को 10 से ज्यादा ब्लॉकेज देखा गया। अभी तक मैंने 18 ब्लॉकेज को ठीक किया है।
मेदांता रांची के डॉक्टर नीरज प्रसाद बताते हैं कि शीतकालीन मौसम में तीन तरह की दिक्कतें आती है। तापमान कम हो जाता है, तब हमारे शरीर की नसें सिकुड़ जाती है तो रक्त का प्रवाह तेज हो जाता है। जिसके कारण ब्लॉक टूट जाते हैं। इससे हार्ट अटैक की संभावना बढ़ जाती है। ठंड के वक्त 65 साल के ऊपर के लोगों को बहुत दिक्कत होती है। उनको इस मौसम में बचाकर चलना चाहिए।
अगर हार्ट की बीमारी से बचना है तो किसी भी प्रकार के वैसे खाद्य पदार्थ का सेवन न करें। जिनमें निकोटिन होता है। इसके अलावा कभी भी तनाव न लें। तनाव के कारण ब्लड प्रेशर क्रिएट होता है। ब्लड प्रेशर के कारण कभी-कभी हार्ट अटैक होने का डर बना रहता है। अगर भोजन कर रहे हैं तो कोशिश रखें कि वह सात्विक हो। कई लोग प्रतिदिन नॉनवेज का सेवन करते हैं। इससे हाई कोलेस्ट्रॉल बनता है जो खतरनाक हो सकता है। हाई कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से न केवल हार्ट बल्कि ब्रेन हेमरेज भी हो सकता है। साथ ही ब्लड प्रेशर पर ध्यान रखना चाहिए। हाई ब्लड प्रेशर नहीं होना चाहिए। इससे आर्टरी पर असर पड़ सकता है।
मेदांता रांची के डॉक्टर नीरज प्रसाद ने बताया कि ठंड के दिनों में पानी की कमी से हार्ट के वेंट्रिकल में क्लॉट बनता है। वह कभी मस्तिष्क में या कहीं और चल जाता है पर वह हानिकारक हो सकता है। ये कम पानी पीने से होता है। इसलिए इस मौसम में पानी पीने में कमी नहीं होनी चाहिए। हल्का गर्म पानी पी सकते हैं।
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