योगेश कुमार गोयल
एबीएन एडिटोरियल डेस्क। युवा पीढ़ी किसी भी राष्ट्र के विकास की रीढ़ होती है। ऐसी रीढ़, जो यदि क्षतिग्रस्त हो जाए तो शरीर का सीधे खड़े रहना भी असंभव हो जाता है अर्थात रीढ़ के क्षतिग्रस्त होने पर शरीर का विकास होना भी संभव नहीं। ठीक इसी प्रकार देश के विकास के लिए विकास की रीढ़ यानी युवा वर्ग की मानसिकता का स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है। वर्तमान परिवेश में समाज में चारों तरफ अपराधों तथा भ्रष्टाचार का जो मकड़जाल फैल चुका है, वह घुन बनकर न सिर्फ देश को अंदर ही अंदर खोखला कर रहा है बल्कि युवा वर्ग भी भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के इस दूषित माहौल में हताश व निराश है।
ऐसे में युवा वर्ग सही मार्ग से न भटके, इसके लिए युवा शक्ति को जागृत कर उसे देश के प्रति कर्तव्यों का बोध कराते हुए सही दिशा में प्रेरित एवं प्रोत्साहित करना और उचित मार्गदर्शन बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में राष्ट्रीय युवा दिवस की प्रासंगिकता बहुत बढ़ जाती है, जो प्रतिवर्ष स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर 12 जनवरी को मनाया जाता है।
हमें भूलना नहीं चाहिए कि देश की आजादी की लड़ाई में अपना सब कुछ बलिदान कर लोगों में क्रांति का बीजारोपण करने वाले अधिकांश युवा ही थे। स्वामी विवेकानंद, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, सुखदेव, राजगुरु इत्यादि देश के अनेक युवाओं ने देश की आन-बान और शान के लिए अपने निजी जीवन के समस्त सुखों का त्याग कर दिया था और अपना समस्त जीवन देश के लिए न्यौछावर कर दिया था लेकिन आधुनिक युग में हम स्वार्थी बनकर ऐसे क्रांतिकारी युवाओं की जीवन गाथाओं को भूल रहे हैं और हम सब धीरे-धीरे भ्रष्ट तंत्र का हिस्सा बन रहे हैं।
ऐसे ही क्रांतिकारी युवा महापुरुषों की जीवन गाथाओं के जरिये देश की युवा पीढ़ी को समाज में व्याप्त गंदगी से बचाकर देश के विकास में उसका सदुपयोग किया जा सके, इसी उद्देश्य से आधुनिक भारत के महान चिंतक, दार्शनिक, समाज सुधारक, युवा संन्यासी स्वामी विवेकानंद की जयंती 12 जनवरी को ही प्रतिवर्ष राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो बहुत कम आयु में अपने विचारों के चलते समस्त जगत में अपनी एक विशेष पहचान बनाने में सफल हुए थे।
स्वामी विवेकानंद के वक्तव्यों का आम जनमानस और खासकर युवाओं के मन-मस्तिष्क पर कितना प्रभाव पड़ता था, इसका उनके शिकागो भाषण से बेहतर उदाहरण नहीं मिल सकता। 11 सितम्बर, 1893 को जब शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन में हिन्दू धर्म पर अपने प्रेरणात्मक भाषण की शुरुआत उन्होंने मेरे अमेरिकी भाइयों और बहनों के साथ की थी तो बहुत देर तक तालियों की गड़गड़ाहट होती रही थी। अपने उस भाषण के जरिये उन्होंने दुनियाभर में भारतीय अध्यात्म का डंका बजाया था।
विदेशी मीडिया और वक्ताओं द्वारा भी स्वामीजी को धर्म संसद में सबसे महान व्यक्तित्व और ईश्वरीय शक्ति प्राप्त सबसे लोकप्रिय वक्ता बताया जाता रहा। यह स्वामी विवेकानंद का अद्भुत व्यक्तित्व ही था कि वे यदि मंच से गुजरते भी थे तो तालियों की गड़गड़ाहट होने लगती थी। उन्होंने 01 मई 1897 को कोलकाता (तब कलकत्ता) में रामकृष्ण मिशन तथा 9 दिसंबर 1898 को कोलकाता के निकट गंगा नदी के किनारे बेलूर में रामकृष्ण मठ की स्थापना की। 04 जुलाई 1902 को इसी रामकृष्ण मठ में ध्यानमग्न अवस्था में महासमाधि धारण किए वे चिरनिद्रा में लीन हो गये।
स्वामी विवेकानंद सही मायनों में युवाओं के प्रेरणास्रोत और आदर्श व्यक्त्वि के धनी थे, जिन्हें उनके ओजस्वी विचारों और आदर्शों के कारण ही जाना जाता है। विवेकानंद सदैव कहा करते थे कि उनकी आशाएं देश के युवा वर्ग पर ही टिकी हुई हैं। वे आधुनिक मानव के आदर्श प्रतिनिधि थे और खासकर भारतीय युवाओं के लिए उनसे बढ़कर भारतीय नवजागरण का अग्रदूत अन्य कोई नेता नहीं हो सकता।
अपने 39 वर्ष के छोटे से जीवनकाल में स्वामी जी अलौकिक विचारों की ऐसी बेशकीमती पूंजी सौंप गये, जो आने वाली अनेक शताब्दियों तक समस्त मानव जाति का मार्गदर्शन करती रहेगी। उनका कहना था कि मेरी भविष्य की आशाएं युवाओं के चरित्र, बुद्धिमत्ता, दूसरों की सेवा के लिए सभी का त्याग और आज्ञाकारिता, खुद को और बड़े पैमाने पर देश के लिए अच्छा करने वालों पर निर्भर है। उन्होंने देश को सुदृढ़ बनाने और विकास पथ पर अग्रसर करने के लिए हमेशा युवा शक्ति पर भरोसा किया। उनका कहना था कि मेरी भविष्य की आशाएं युवाओं के चरित्र, बुद्धिमत्ता, दूसरों की सेवा के लिए सभी का त्याग और आज्ञाकारिता, खुद को और बड़े पैमाने पर देश के लिए अच्छा करने वालों पर निर्भर है। युवा शक्ति का आह्वान करते हुए उन्होंने अनेक मूलमंत्र दिये। (लेखक, स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse