एबीएन सेंट्रल डेस्क। कंगाली से जूझ रहे पाकिस्तान में सरकार को आखिर वित्तीय आपातकाल का ऐलान करना पड़ ही गया। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि देश में वर्तमान वित्तीय आपदा और धन की भारी कमी के कारण आर्थिक आपातकाल के निर्देश जारी करना अनिवार्य हो गया है, अन्यथा आगे की वित्तीय तबाही से जनता के वेतन में रुकावट की स्थिति पैदा हो सकती है।
पाक सरकार के अनुसार इन निर्देशों का क्रियान्वयन प्रत्येक सार्वजनिक/स्वायत्तशासी संगठन एवं वितरण पर अनिवार्य होगा। गौरतलब है कि पाकिस्तान में बेहद गरम सियासी माहौल के बीच देश की अर्थव्यवस्था के श्रीलंका की राह पर जाने के संकेत मजबूत हो रहे हैं। नीति निर्माताओं को अंदेशा है कि आर्थिक हालात बिगड़ने से देश राजनीतिक अस्थिरता की तरफ जा सकता है। ताजा आंकड़े ने यहां सबकी चिंता बढ़ा दी है कि मौजूदा वित्त वर्ष में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में भारी गिरावट आ चुकी है। इसे देखते हुए अर्थशास्त्रियों ने देश में वित्तीय आपातकाल लागू करने की सलाह दी है, ताकि हालात को और बिगड़ने से रोका जा सके।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार पाकिस्तान की इस हालत के लिए चीन का ऋण जाल जिम्मेदार है।आर्थिक विशेषज्ञों पाक ने सरकार को गैर जरूरी रक्षा खर्च घटाने, 1600 सीसी से अधिक क्षमता वाले वाहनों पर इमरजेंसी टैक्स लगाने, बिजली शुल्क दो गुना करने और आठ सौ वर्ग गज से अधिक के आवासीय जायदाद पर कर लगाने की सलाह भी शाहबाज शरीफ सरकार को दी है। कुछ सलाहकारों का मानना है कि कामकाज के दिनों को भी कम कर के इंधन और बिजली की वजह से पड़ने वाले आर्थिक बोझ से बचा जा सकता है।
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