साल 2023 भारतीय इक्विटी के लिए रहेगा सपाट

 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोटक सिक्योरिटीज ने अगले साल के लिए निफ्टी का आधारभूत लक्ष्य 18,717 तय किया है। ब्रोकरेज ने कहा कि कई तरह के वैश्विक अवरोधों और बढ़ा हुआ मूल्यांकन अगले साल बढ़त को सीमित कर सकता है।

कोटक सिक्योरिटीज के कार्यकारी उपाध्यक्ष और शोध प्रमुख श्रीकांत चौहान ने कहा कि अल्पावधि में बाजार महंगे हो गए हैं और इस स्तर पर अहम रिटर्न की उम्मीद लगाना मुश्किल है। गिरावट सीमित रह सकती है लेकिन बढ़त की भी सीमा है। हम सपाट वर्ष की उम्मीद कर रहे हैं। चौहान ने कहा कि निवेशकों के लिए सिर्फ इक्विटी से कमाई करना आसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि उन्हें अन्य परिसंपत्ति वर्गों में निवेश करना होगा। लेकिन गिरावट में खरीदारी के मौके होंगे और निवेशकों को 12 महीने से ज्यादा ​के निवेश नजरिये को ध्यान में रखते हुए खरीदारी करनी चाहिए।

ब्रोकरेज ने कहा कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की निकासी को देखें तो भारतीय इक्विटी बाजारों ने खासी सुदृढ़ता का प्रदर्शन किया है। कोटक सिक्योरिटीज ने कहा कि कोविड, वैश्विक आपूर्ति शृंखला में अवरोध के कारण उच्च महंगाई, रूस-यूक्रेन युद्ध‍ के कारण भूराजनैतिक तनाव और ब्याज दरों में तीव्र बढ़ोतरी के रूप में भारतीय इक्विटी ने पिछले दो वर्षों में लगातार चार झटकों का सामना किया है।

अन्य अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले भारतीय अर्थव्यवस्था इन झटकों को अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से झेलने में सक्षम रही। और यह काम रियल एस्टेट, वाहन व बैंकिंग समेत कई क्षेत्रों में साइक्लिकल तेजी की अगुआई में हुई। विनिर्माण को लेकर चीन के विनिर्माण के सकारात्मक प्रभाव, उत्पादन से जुड़ाव वाला प्रोत्साहन कार्यक्रम और पूंजीगत खर्च में सुधार ने भी भारतीय अर्थव्यवस्था की सुदृढ़ता में योगदान किया है।

कोटक सिक्योरिटीज के सीईओ जयदीप हंसराज ने कहा कि अगर निवेश निकासी पर नजर डालें तो यह साल आश्चर्यजनक रूप से अच्छा रहा है। 3 लाख करोड़ रुपये वाली अर्थव्यवस्था को देखते हुए मुझे उम्मीद है कि भविष्य में भारत उभरने वाला बाजार नहीं रहेगा बल्कि यह विकसित अर्थव्यवस्था के चरण में होगा। मुझे इसकी पूरी उम्मीद है। हालांकि ब्रोकरेज ने कहा कि वैश्विक कारकों और मौद्रिक सख्ती का बहुत ज्यादा असर नहीं रहने के कारण गिरावट का जोखिम बढ़ रहा है।

ब्रोकरेज ने कहा कि हम वित्त वर्ष 23 व वित्त वर्ष 24 के लिए जीडीपी में वास्तविक बढ़ोतरी का अनुमान 6.8 फीसदी व 6 फीसदी जता रहे हैं और इसके साथ गिरावट का भी जोखिम है। भारी-भरकम देसी निवेश से भारतीय इक्विटी को विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के बीच खुद को खड़ा रखने में मदद मिली।

एसआईपी के जरिये भारतीय बाजारों में निवेश मई के बाद से बढ़कर 12,000 करोड़ रुपये के पार निकल गया है। वित्त वर्ष 7 महीने के पिछले सात महीने का औसत 12,300 करोड़ रुपये रहा है। वित्त वर्ष 22 में औसत मासिक निवेश करीब 10,000 करोड़ रुपये रहा था। ब्रोकरेज ने कहा कि एसआईपी के जरिए इक्विटी बाजारों में टुकड़ों मे किया जाने वाला निवेश अनिश्चितता के दौर से निपटने का समाधान है।

एसआईपी के जरिये मजबूत निवेश भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेशकों के भरोसे के बारे में बताता है। हालांकि ब्रोकरेज ने सावधि जमाओं की ब्याज दरों में इजाफे के बीच देसी निवेश की निरंतरता पर चिंता जताई है। चौहान ने कहा कि इस साल निवेशकों के पास शेयर बाजारों में निवेश के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है। लेकिन अगले साल एफडी की बढ़ती ब्याज दरें कुछ निवेश आकर्षित कर सकता है। ­

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