कुरमी/कुड़मी महतो समुदाय के आदिवासी बनाने की मांग असंवैधानिक : आदिवासी अधिकार रक्षा मंच

 

टीम एबीएन, रांची। झारखंड के कुर्मी/कुड़मी महतो समुदाय द्वारा आदिवासी बनने का षड्यंत्र कर आदिवासियों की संवैधानिक हक-अधिकार, पहचान, संस्कृति और अस्मिता को लूटने की साजिश के खिलाफ आज 25 सितम्बर 2022, रविवार को विभिन्न आदिवासी संगठनों की पहली संयुक्त बैठक पाही पैलेस, मोरहाबादी, रांची में हुई। बैठक में रांची, छोटानागपुर कोल्हान औऱ संथाल क्षेत्र के बुद्धिजीवी गण शामिल हुए। सभों ने एक स्वर से महतों लोगों की आदिवासी बनाये जाने की मांग का विरोध किया। पूर्व शिक्षा मंत्री गीताश्री उरांव ने समुदाय से अपील करते हुवा कहा कि आदिवासी समाज अपने हक अधिकार के प्रति सजग रहे, अन्यथा महतों लोगों की आदिवासी समुदाय में शामिल होने से वर्तमान का असली आदिवासी समुदाय हाशिये पर चला जायेगा औऱ राजनीतिक-आर्थिक औऱ नौकरी क्षेत्र में कुरमी समुदाय हावी हो जायेगा। निरंजना हेरेंज टोप्पो ने कहा कि कुडमी/ कुरमी महतो को आदिवासी का दर्जा देना समस्त मूल आदिवासी के साथ नाइंसाफ़ी होगा। यह आदिवासी के सम्मान की मुद्दा है। किसी भी कीमत पर आदिवासी का दर्जा नहीं देना, इसके लिए आर पार लड़ाई के तैयार हम पूरे आदिवासी समुदाय अपने हक अधिकार के गोलबंद करेंगे। बुद्धिजीवी मंच के प्रेमचंद मुर्मू ने कहा कि महतो समुदाय की मांग को काफ़ी पहले ही ख़ारिज किया जा चुका है। क्योंकि इनकी रहन सहन, संस्कृति और पहचान, आदिवासी समुदाय के अनुरूप नहीं हैं। इसलिए इनकी मांग अनुचित है। मुंडा समाज के लक्ष्मी नारायण मुंडा न कहा कि कुरमी समुदाय की नजर अब आदिवासियों की जमीन और आरक्षण पर है,वे आदिवासियों के हक-अधिकार में सेंधमारी कर डोमिनेट करना चाहते हैं। भूमिज परिवार के मुंडा जी ने इतिहास की जानकारी शेयर करते हुए बताया कि कुर्मी-महतो समाज ने इतिहास के साथ छेड़छाड़ कर छलपूर्वक भूमिज आंदोलन/ चुआड़ विद्रोह के जननायक रघुनाथ सिंह सरदार का नाम बदलते हुए रघुनाथ महतो करके पूरे चुआड़ आंदोलन को महतो समाज का आंदोलन के रूप में पहचान दिलाने की गंदी राजनीति कर रहा है। सरना राजी पड़हा समाज के संजय जी ने सारे आदिवासी समुदाय को एकजुट होकर विरोध करने की अपील की। केंद्रीय सरना समिति के अजय तिर्की के अनुसार कुर्मियों के इस नाजायज मांग का पुरजोर विरोध किया जायेगा और आक्रोश रैली की जायेगी। छात्र नेता अजय जी आने वाले दिनों में ब्लॉक और ग्राम स्तर पर आमजनों के मध्य में जन जागरूकता अभियान चलाया जायेगा। सभा के समापन पर झारखंड सरकार को धन्यवाद दिया गया और 1932/खतियान आधारित, स्थानीय नीति को जल्द से जल्द लागू कराने हेतु मुख्यमंत्री से आदिवासी प्रतिनिधिमंडल के मुलाकात करने का निर्णय लिया गया।

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