‘आजादी के अमृत काल’ पर डीएवी हेहल में छात्रों से देश की स्थिति और संभावना पर संवाद...

 

टीम एबीएन, रांची (मुरलीधर)। आजादी के अमृत महोत्सव पर युवाओं से संवाद के कार्यक्रम में शनिवार को डीएवी हेहल, रांची में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देश के अतीत से लेकर अबतक के उतार चढ़ाव की पूरी जानकारी छात्रों को दी गयी। मोटिवेटर-काउंसलर एनके मुरलीधर ने इस कार्यक्रम में बच्चों को संबोधित किया और उनके द्वारा पूछे गये सवाल का जवाब भी दिया। कार्यक्रम में श्री मुरलीधर ने कहा कि आज देश जहां है उससे आगे ले जाने की जवाबदेही हमारे युवाओं की ही है। देश में 30 वर्ष से कम उम्र के 50 फीसदी लोग हैं, जो पूरी दुनिया में भारत को सबसे युवा आबादी के तौर पर साबित करता है। एक युवा देश आजादी के 75 साल बाद तमाम कठिनाइयों से जूझते हुए जहां खड़ा है उसके आगे एक भव्य भारत का दृश्य उपस्थित होता है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश ने जिस प्रकार बाहरी आक्रमण को झेला और एकजुट रहते हुए विकास के रास्ते पर बढ़ता गया, उससे हमारी निष्ठा से दुनिया कायल हो गयी। भारत दुनिया का सबसे समृद्ध देश था। इस बात को मानने में कोई कठिनाई नहीं है। लेकिन आज फिर से उस स्थान को पाने का संघर्ष कर रहा है, यह बात भी सही है। आजादी और सेक्युलर राष्टÑ के रूप में जिस प्रकार भारत ने अपनी गरीबी से लड़ाई लड़ी, वह पूरी दुनिया के लिए अध्ययन का विषय है। ऐसा नहीं है कि यह आर्थिक स्थिति हमें सहजता से मिल गयी। आजादी के समय हमारा पहला बजट मात्र 200 करोड़ का था, जबकि रक्षा पर 50 करोड़ खर्च करना होता था। हमारी चीन से शर्मनाक हार से हमारा मनोबल गिर गया, लेकिन 1971 कि पाकिस्तान पर जीत के बाद भारत ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। हर दशक हम कुछ न कुछ विकास करते रहें लेकिन हमारी मिश्रित अर्थव्यवस्था का प्रयोग 1990 में बुरी तरह से विफल हो गया। फिर हमारी देश की सरकार ने नयी आर्थिक नीति अपनाकर देश को मात्र दस साल में एक आर्थिक शक्ति में बदल दिया। हमने दुनिया की सबसे बड़ी सड़क परियोजना स्वर्णिम चतुर्भुज आरंभ किया गया। बैंकिंग सेवा को विश्व स्तरीय बना दिया गया। शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, व्यापार, रक्षा, आइटी सहित हर क्षेत्र में विकास की गति तेज की गयी। आज का भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित हो चुका है। एक लंंबे समय तक देश गरीबी, युद्ध, हिंसा और अतंरराष्टÑीय षडयंत्र में उलझे रहने के बाद आज विश्व शक्ति बनने की ओर बढ़ रहा है। आज हमारे युवाओं के लिए जो देश बना है उसमें सुपर पावर बनने की पूरी क्षमता है। इस कारण आज युवा पहले से अधिक दायित्वबोध वाले बुद्धिमान होने चाहिए। युवा छात्रों ने पूछे सवाल : प्रश्न 1 : बेरोजगारी लगातार बढ़ती जा रही है? मुरली सर का जबाव - हम बेरोजगारी की बात क्यों करते हैं? हम रोजगार की बात करें। यह सही है कि एक बड़ी संख्या ऐसी है जो काम नहीं कर रही है लेकिन दूसरी ओर देश में योग्य लोगों का भी अभाव है जो संकेत कर रहा है बेरोजगारी से ज्यादा परेशानी हमें स्किल्ड युवाओं की कमी का है। आज बंगलुरू में 88 हजार युवाओं को एक शहर में 60 लाख से अधिक पैकेज मिला है। अगर हम अपने करियर की तैयारी पूरी मेहनत से करते हैं तो भारत ही नहीं पूरी दुनिया में भारतीय युवाओं की संभावना लगातार बढ़ रही है। प्रश्न 2 : भ्रष्टाचार से पीड़ा होती है? मुरली सर का जवाब - हां, यह पीड़ादायक है। लेकिन विकासशील देश में भ्रष्टाचार कैसे कम हो, इसपर अंतरराष्टÑीय स्तर पर रिसर्च हो रहा है और काम हो रहा है। भ्रष्टाचार से समाज और देश कमजोर होता है। जैसे-जैसे समाज जागरूक होगा, यह कम होता जा रहा है। साथ ही आइटी के प्रयोग, सीधे पैसों के हस्तांतरण से भी स्थिति सुधरी है। प्रश्न 3 : क्या धार्मिक उन्माद सही है? क्या अपराधियों को धर्म से चिह्नित किया जाना चाहिए? मुरली सर का जवाब - नहीं, धार्मिक उन्माद सही नहीं है। यह केवल एक राजनैतिक हथकंडा है। भारत की संस्कृति और समाज सहयोग की रही है। राजनीति में चुनाव जीतने के हथकंडा ही धार्मिक उन्माद को हवा देता है। लेकिन यह लगातार कम होता जा रहा है। यह अलग बात है कि मीडिया में अधिकांश समय नकारात्मकता को महत्व दिया जाता है जिससे यह समस्या हमारे दिमाग में बैठ जाती है। अपराध एक मानसिकता है जिसे किसी धर्म से जोड़ा जाना गलत है। अपराधी किसी भी धर्म जाति या समुदाय का हो उसे सजा हो, समाज उसे सामाजिक दंड दे, कानून उसे कानूनी दंड दे। प्रश्न 4 : देश की राजनीति में अच्छे लोगों का अभाव है? मुरली सर का जवाब - हां, ऐसा है। लेकिन अब राजनीति में समाज के हर तबके के उच्च शिक्षा प्राप्त, अनुभवी और योग्य लोग आ रहे हैं। साथ ही वे अनुभवी भी हैं। जैसे हमारे देश के रेल मंत्री अश्विणी वैष्णव आइआइटियन हैं। प्रशासनिक अधिकारी रहे और अब फिर राजनेता बने। वर्तमान में देश के रेल मंत्री है। देश में नयी शिक्षा नीति आ रही है, जिससे हम कुछ बेहतर होने की उम्मीद कर सकते हैं। अशिक्षा तुलनात्मक कम हुई है और अब देश में बेहतर संस्थान खुल रहे हैं। इन सवालों के अतिरिक्त छात्रों ने गरीबी, अशिक्षा और समाजिक कुरीतियों से जुड़े सवाल भी पूछे। डीएवी हेहल स्कूल रांची में आयोजित इस कार्यक्रम में डीएवी हेहल के प्राचार्य एमके सिन्हा ने विशेष सहयोग किया। उन्होंने कहा कि आजादी के अमृत काल पर युवाओं के लिये ऐसे कार्यक्रम उपयोगी साबित होगा। बताते चलें कि एबीएन न्यूज देश की आजादी के अमृत काल के 75 वर्ष पूरे होने पर देश के युवाओं के साथ संवाद के 75 कार्यक्रम आयोजित करने जा रहा है जो युवाओं के विमर्श पर आधारित होगा।

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