टीम एबीएन, रांची। झारखंड में इस बार मॉनसून की बेरुखी के कारण खेती में संकट आ गया है। खरीफ फसलों खास कर धान की खेती पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा है। राज्य में सूखे से हालात खराब हो रहे हैं। सूखे का अकलन करने के लिए प्रखंडवार सर्वे किया गया था। पहले 31 जुलाई को मानक तिथि मानकर सर्वे किया गया था उसके बाद फिर 15 अगस्त तक में सूखे की स्थिति का जायजा लिया गया। हालांकि अगस्त की शुरूआत के बाद अच्छी बारिश दर्ज की गई, इससे किसान थोड़े खुश जरूर हुए, पर सूखा ग्रस्त प्रखंडों की संख्या घटने के बजाय बढ़ गई है। राज्य में फिलहाल 243 प्रखंड सूखे की चपेट में है। झारखंड में कुल प्रखंडों की संख्या 263 है। इनमें 90 फीसदी से अधिक ऐसे प्रखंड हैं जो गंभीर सूखे का संकट झेल रहे हैं। इसके कारण किसान काफी परेशान हैं। गौरतलब है कि सूखाग्रस्त घोषित करने के लिए 2016 के सूखा मैनुअल का पालन किया गया है। सूखा का आकलन करने के लिए कषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की टीम बनाई गई थी। प्रत्येक प्रखंड में जाकर सूखे का आकलन करना था। सूखाड़ पर चर्चा करते हुए राज्य के कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा था कि 15 अगस्त के बाद सूखे की आकलन कर इसकी घोषणा की जाएगी। हालांकि सूखे को लेकर केंद्रीय सहायता प्राप्त करने के लिए आपदा प्रबंधन समिति की रिपोर्ट भेजी जाती है। पर अभी तक राज्य में सूखे को लेकर आपदा प्रबंधन समिति की बैठक नहीं हो पाई है। झारखंड में बारिश की बात करें तो जुलाई महीने तक राज्य में औसतन 49 फीसदी कम बारिश हुई थी, इसका सीधा असर राज्य में धान की खेती पर पड़ा है। ड्राउट मैनुअल के मुताबिक जिन क्षेत्रों में 75 फीसदी से भी कम बुवाई हुई है उसे सूखा क्षेत्र घोषित किया जा सकता है। झारखंड के प्रमंडलवार आकंड़ों को देखे तो पलामू प्रमंडल सूखे से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। पलामू प्रमंडल के तीनों जिलों में इस बार भयंकर सूखे की स्थिति है। पश्चिमी और पूर्वी सिंहभूम को छोड़कर बाकी सभी जिलों को गंभीर सूखा या अत्यंत सूखा की श्रेणी में रखा गया है। अगस्त महीने की शुरुआत के बाद राज्य में बारिश की स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ है इसके कारण बुवाई का क्षेत्रफल बढ़ा है। मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक 15 अगस्त तक झारखंड में 35 फीसदी बारिश की कमी थी। हालांकि अगस्त की बारिश के बाद धान की बुवाई में थोड़ा सुधार हुआ था।
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