टीम एबीएन, रांची। झारखंड में जारी सत्ता पर संकट के बादल को लेकर अब स्थितियां और भी रोचक होती जा रही हैं। इस बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग भी तेज हो गयी है। कांग्रेस नेता बंधु तिर्की ने कहा है कि मुख्यमंत्री इस्तीफा नहीं दे रहे हैं। राज्यपाल कानूनी राय मांग रहे हैं और आश्वासन दिया है कि स्थिति दो दिनों के भीतर स्पष्ट हो जायेगी। हमने यह भी सवाल किया कि मीडिया में चुनिंदा जानकारी कैसे लीक की जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि ऐसे सोर्स उनके कार्यालय से नहीं लीक हुए है। झारखंड सरकार का आरोप : मीडिया में ऐसी कई रिपोर्ट आ चुकी हैं जिसमें चुनाव आयोग ने लाभ के पद के मामले में भाजपा की शिकायत के बाद मुख्यमंत्री को अयोग्य ठहराने की सिफारिश की है। भाजपा का आरोप है कि उन्होंने खुद को खनन पट्टा देकर चुनावी नियमों का उल्लंघन किया है। हालांकि, राज्यपाल की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इस बीच, सत्तारूढ़ गठबंधन ने अपने विधायकों को कांग्रेस शासित छत्तीसगढ़ में स्थानांतरित कर दिया है। जिसमें मुख्य विपक्षी दल बीजेपी पर झारखंड की सरकार को अस्थिर करने के लिए ‘आॅपरेशन लोटस’ की कोशिशों का आरोप लगाया है। क्या है मौजूदा सियासी गणित : भारतीय जनता पार्टी लगातार इस बात की मांग करती रही है कि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन नैतिक आधार पर इस्तीफा दें और राज्य में मध्यावधि चुनाव करवायें। झारखंड में 81 सदस्यीय विधानसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन के 49 विधायक हैं। जबकि सरकार बनाने का जादुई आंकड़ा सिर्फ 41 विधायकों का है। सबसे बड़ी पार्टी झामुमो के 30, उनके सहयोगी दल कांग्रेस के 18 और लालू प्रसाद यादव की राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के एक विधायक हैं। वहीं राज्य में मुख्य विपक्षी दल भाजपा के पास 26 विधायक हैं।
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