खूंटी को कुपोषणमुक्त जिला बनाने में सबकी भूमिका अहम : उपायुक्त

 

टीम एबीएन, खूंटी/रांची। आज उपायुक्त शशि रंजन की अध्यक्षता में खूंटी जिले को कुपोषण मुक्त बनाने के उद्देश्य से विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला के दौरान प्रशासन व विभिन्न संस्थाओं की भूमिका पर विस्तृत चर्चा करते हुए पीपीटी के माध्यम से जिला अंतर्गत किये जा रहे कार्यों और किये जाने वाले कार्यों से अवगत कराया गया। साथ हीं विभिन्न बिन्दुओं पर चर्चा करते हुए गर्भवती महिलाओं, माताओं, किशोरियों , बच्चों के पोषण की आवश्यकताओं को पूरा करने के उद्देश्यों से सभी को अवगत कराया गया। वहीं कार्यशाला के दौरान फिया फाउंडेशन के प्रतिनिधि दीपक कुमार ने अपने प्रेजेंटेशन के माध्यम से कुपोषण को लेकर किये गए कार्य एवं आवश्यक सुझाव व इस दिशा में बेहतर कार्य करने के उपयोगी तरीकों से सभी को अवगत कराया। इसके अलावे कार्यक्रम के दौरान प्रदान, वर्ल्ड विजन व एकजुट संस्था के प्रतिनिधियों ने भी पीपीटी के माध्यम से कुपोषण से सम्बन्धित विषयों पर जानकारी दी। कार्यशाला में वी.सी के माध्यम से उऋठर, फिया फाउंडेशन के प्रतिनिधि व अन्य समाज सेवी उपस्थित थे। साथ ही जिले के विभिन्न प्रखण्डों से आयी आंगनबाड़ी सेविकाओं ने भी कार्यक्रम के दौरान अपनी जिज्ञासाओं को प्रस्तुत किया। पोष्टिक आहार, साफ-सफाई और स्वस्थ्य भोजन को बनाये अपने जीवनशैली का आधार : उपायुक्त- कार्यशाला के दौरान उपायुक्त द्वारा बताया गया कि कुपोषण के प्रति गंभीर दृष्टिकोण अपनाते हुए संबंधित कार्यों के उचित संचालन व क्रियान्वयन को लेकर जनभागीदारी और आपसी समन्वय की आवश्यकता है, ताकि अपने समाज और जिले से कुपोषण की समस्या को जड़ से खत्म किया जा सके। ऐसे में लोगों को जागरूक करने का सशक्त माध्यम है ग्राम सभाएं। वहीं कार्यशाला आयोजन का मुख्य उदेश्य भी है कि शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी पोषण के प्रति लोगों को जागरूक किया जा सके। साथ ही उपायुक्त ने कहा कि जनभागीदारी और समाज के हर तबके के लोगों, स्वयंसेवी संस्थाओं, अधिकारियों, कर्मचारियों की भागीदारी को शत प्रतिशत सुनिश्चित करते हुए ही समाज से व्याप्त कुपोषण को दूर किया जा सकता है। आज हेल्दी डाइट चार्ट ना सिर्फ रोगी के लिए फायदेमंद होता है, बल्कि सभी लोगों को इससे लाभ मिलता है, क्योंकि दैनिक आहार तालिका का पालन कर आप खुद के साथ अपने परिवार को भी स्वस्थ बना सकते हैं। भोजन में अनेक पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर के विकास एवं वृद्धि के लिए आवश्यक होते हैं। सामुदायिक स्तर पर कुपोषण को लेकर जागरूकता जरूरी : आगे उपायुक्त द्वारा बताया गया कि जिले में कुपोषित बच्चों की उचित देखभाल व आवश्यक उपचार को लेकर न्यूट्रिशन आॅन व्हील कार्यक्रम चलाया गया। इस माध्यम से मोबाईल केयर यूनिट के माध्यम से सर्वप्रथम सर्वे कर कुपोषित बच्चों को चिन्हित किया जाता है। इसके पश्चात पँचायत स्तर पर 15 दिनों के लिए कैम्प लगाकर बच्चों की देखभाल के साथ-साथ माताओं को जागरूक किया गया एवं उन्हें स्थानीय साग-सब्जियों एवं पौष्टिक आहार की जानकारी दी गयी। साथ ही बच्चों के वजन को लेकर उनकी ट्रेकिंग भी की गई। साथ ही इस दौरान बच्चों और माताओं को उचित पौष्टिक आहार भी उपलब्ध कराया गया। उन्होंने कहा कि सामुदायिक स्तर पर सुविधाएं ग्राम स्तर तक पहुंचें इस उद्देश्य से सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराने की योजना है। आवश्यक पोषक तत्वों और कैलोरी के संयोजन के साथ एक संतुलित आहार मानव शरीर के सुचारू रूप से काम करने और विकास के लिए महत्वपूर्ण है। साथ ही सबसे महत्वपूर्ण है कि समाज के वंचित एवं कमजोर वर्ग के लोगों तक कुपोषण के कारणों की जानकारी आसानी से पहुंचाई जाए। दूसरी तरफ बच्चों, गर्भवती एवं धातृ महिलाओं को पौष्टिक आहार, एनीमिया, स्वच्छता और साफ सफाई के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए उन्हें जागरूक करने का प्रयास सही तरीके से किया जाए। जिले के पदाधिकारियों व सेविकाओं के साथ हुई चर्चा : कार्यशाला के दौरान उपस्थित जिला पंचायती राज पदाधिकारी, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, सिविल सर्जन, ऊढट खरछढर, जिला शिक्षा पदाधिकारी व अन्य अधिकारियों ने कुपोषण के सम्बंध में अपने विचार व्यक्त किये। इस दौरान बताया गया कि अपने भोजन को पोषण से भरपूर बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि आप उसमें दैनिक तौर पर प्रोटीन, विटामिन, कैल्शियम, खनिज-लवण और एंटी आॅक्सिडेंट्स की संतुलित मात्रा शामिल करें। अपने भोजन में उन चीजों को शामिल करें, जिनमें आपको पोषण देने वाली ऐसी तमाम चीजें पर्याप्त मात्रा में हैं। खाने में सही पोषण पाने के लिए यह बेहद जरूरी है कि आप यह जानें कि किस चीज को किस रूप में खाना ज्यादा फायदेमंद है। खुद को स्वस्थ रखने के लिए काबोर्हाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, कैल्शियम, विटामिन, खनिज लवण सबकी संतुलित मात्रा होना जरूरी है। आज के समय में मड़ुआ, उसना चावल के अलावा हमें भोजन के रूप में अपने पुरानी जीवनशैली को अपनाने की आवश्यकता है, ताकि सही पोषण हमारे शरीर को मिलता रहें। स्वस्थ जीवन शैली पोषण का आधार : कार्यशाला के दौरान बताया गया कि कुपोषण मुक्त अभियान के माध्यम बच्चों में ठिगनापन, कम वजन, जन्म के समय बच्चे का कम वजन का होना, बच्चे-बच्चियों में एनीमिया को कम करना है। इस अभियान के तहत बच्चों को स्तनपान कराने के लिए माताओं को जागरूक करना है। छोटे बच्चों के पूरक पोषाहार के सबंध में बताना है और उनके परिजनों को इससे जुड़ी जानकारी से अवगत कराना है, ताकि सही मायनों में कुपोषण मुक्त समाज व जिला की परिकल्पना को साकार किया जा सके। पोषण वाटिका व किचन गार्डन की पद्धति को अपने घरों में शुरू करने की आवश्यकता : इसके अतिरिक्त कार्यशाला के दौरान बताया गया कि कुपोषण के कारण किसी भी पुरूष, महिला व बच्चों का सर्वांगीण विकास नहीं हो पाता है, जिससे उनके कार्य करने की क्षमता भी घटती है और इसका दुष्परिणाम उस व्यक्ति के साथ उसके परिवार, समाज को प्रभावित करता है। साथ ही बताया गया कि यदि घर के आस-पास पोषण वाटिका को विकसित किये जाय तभी पोषण के प्रति सही राह दिखेगी एवं बच्चे व परिवार पौष्टिक आहार भी प्राप्त करेंगे। हर घर में आज जंक फूड, बाहर के खाने का प्रचंलन बढ़ता जा रहा है, जो की हमारे शरीर के लिए अत्यंत नुकसानदेह है। वर्तमान में आवश्यक है कि हम अपने खान-पान में अपनी पुरानी जीवनशैली को अपनाए और उसका पालन करें, ताकि शरीर को सही तरीके से पोषण मिलता रहें। भोजन से विभिन्न पौष्टिक तत्व मिलते हैं, जैसे- प्रोटीन, वसा, खनिज-लवण, विटामिन्स और जल आदि। पौष्टिक तत्व आपके शरीर में पोषण स्तर को बनाए रखता है ताकि आप स्वस्थ रहें। इसलिए ना केवल जीवित रहने के लिए, बल्कि स्वस्थ और सक्रिय जीवन बिताने के लिए संतुलित आहार का सेवन करना जरूरी होता है। साथ हीं बताया गया की सरकार की ओर से गर्भ से लेकर बच्चों के व्यस्क होने तक पोषण संवर्द्धन कार्यक्रम चलाये है रहे हैं। इसके बावजूद भी समाज के कई स्तरों पर शिशु एवं मातृ कुपोषण की स्थिति विद्यमान है। इसकी मूल वजह जनभागीदारी और जागरुकता की कमी है। लोगों के बीच जागरुकता उत्पन्न कर इस स्थिति में सुधार लाया जा सकता है। बताया गया कि 1 से 6 वर्ष के बीच के बच्चों को तथा धात्री एवं गर्भवती महिलाओं को कुपोषण से मुक्त बनाना उद्देश्य है।

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