टीम एबीएन, पलामू/रांची। चिकित्सालय परिसर एवं आस-पास के क्षेत्रों में संक्रमण प्रबंधन और पर्यावरण योजना विषय पर गुरुवार को सिविल सर्जन सभागार में कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें अस्पतालों से निकलने वाले जैव-अपशिष्ट के उचित छंटाई, संग्रहन एवं ट्रान्सपोर्टेशन के बारे में जानकारी दी गयी। साथ ही यह भी बताया गया कि अस्पतालों से निकलने वाले वाले जैव-अपशिष्ट की मात्रा का सलाना हिसाब-किताब प्रत्येक वर्ष 30 जून तक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दी जाए। संक्रमण से बचाव हेतु अस्पताल में कार्यरत चिकित्साकर्मी, पारा मेडिकल स्टाफ एवं नर्सिंग स्टाफ को किस तरह पीपीई का प्रयोग करना है, इसके बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। स्वयं को संक्रमण से बचाने के लिए निजी सुरक्षात्मक पीपीई के उपयोग के अलावा समुचित तरह से हाथों की धुलाई, मरीजों को देखने से पहले एवं देखने के बाद हाथों की धुलाई लिक्विड हैंडवाश, साबुन या सेनेटाइजर के माध्यम से किया जाना है बताया गया। सिविल सर्जन डॉ अनिल कुमार ने सभी चिकित्साकर्मियों को निदेशित किया कि प्रशिक्षण में दी गई जानकारी को अपने स्वास्थ्य संस्थान में अमल में लाएं एवं अपने यहां कार्यरत लैब टेक्नीशियन, जीएनएम, एएनएम आदि को प्रशिक्षित करें, जिससे संक्रमणमुक्त पर्यावरण का निर्माण हो सके। जिला गुणवत्ता आश्वासन परामर्शी सन्तोष कुमार के द्वारा प्रशिक्षण दिया गया, जिसमे सभी अनुमंडलीय अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत चिकित्सक उपस्थित हुए। सभी अस्पतालों में इन्फेक्शन कंट्रोल कमेटी के गठन हेतु चर्चा की गई। प्रशिक्षण प्राप्त करने वालों में डॉ अशोक कुमार, डॉ रवि प्रकाश, डॉ सुरेश कुमार, डॉ केदार प्रसाद, डॉ सोमनाथ, डॉ रिंकी कुमारी, डॉ बिनोद कुमार, डॉ रेयाज अनवर, डॉ जितेंद्र कुमार, डॉ रजी, डॉ चमन, डॉ जुबेर अहमद, डॉ आरिफ नैयर, डॉ शशि रंजन, डीपीएम सुखराम बाबू आदि अन्य चिकित्सक और कर्मी शामिल थे।
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