एबीएन एडिटोरियल डेस्क (अजय सानी)। पाकिस्तान में आजकल एक चर्चा जोरों पर है। आए दिन इस बात पर डिबेट होती है कि भारत के पास इतना अनाज है कि दुनिया के तमाम देशों को वो खाद्यान्न की सप्लाई कर सकता है। हालांकि ये बात अतिश्योक्ति प्रतीत होती है पर इतना जरूर है कि खाद्यान्न के मामले में हम आत्मनिर्भर हुए हैं। पाकिस्तानी इस बात पर भी हैरान हैं कि भारत में प्रति हेक्टेयर पैदावार पाकिस्तान की तुलना में ढाई गुना ज्यादा कैसे है? यहां ये बताना आवश्यक है कि पाकिस्तान के प्रथम प्रधानमंत्री मोहम्मद अली जिन्ना ने सन 1920 में ही भारत पाक विभाजन की रूपरेखा तैयार कर ली थी। कौन सा क्षेत्र अनाज उत्पादन और खनिज पदार्थों से भरपूर है, इसे चिन्हित कर लिया गया था ताकि भारत पाक विभाजन के समय इन्हीं क्षेत्रों को मांगकर पाकिस्तान बनाया जा सके। लाहौर, कराची और बलूचिस्तान खनिज बाहुल्य क्षेत्र है। पंजाब का अधिकांश क्षेत्र पाकिस्तान के हिस्से में आया जो दुग्ध और अनाज उत्पादन के मामले में अग्रणी था। इस लिहाज से अगर देखा जाये तो पाकिस्तान को भारत की अपेक्षा ज्यादा सम्पन्न होना चाहिए था। पर जैसे बंदर को हीरा पकड़ा दो तो वो उसे भी कंकड़ बना देता है, वैसा ही कुछ पाकिस्तान के साथ भी हुआ। तामसिक भोजन के शौकीन पाकिस्तानियों ने बगैर सोचे समझे स्वाद के लिए गाय, भैसों को भोजन बनाया। इन जानवरों की कमी के चलते प्राकृतिक खाद गोबर भी अनुपलब्ध हो गया जिसका स्थान यूरिया ने लिया। यूरिया के अंधाधुंध प्रयोग ने इनके खेतों को बंजर कर दिया। कभी गेंहूं, कपास, चावल का निर्यात करने वाला पाकिस्तान आज इनके आयात के लिए भारत के आगे गिड़गिड़ा रहा है। पाकिस्तान के ढाबों में एक रोटी की कीमत 50 रुपये है, दूध 200 रुपया लीटर है और मक्खन लगभग विलुप्त है। यही हाल अनाज का है दाल 1000 रुपया किलो तो आटा 170 रुपया किलो है। पाकिस्तानियों ने हिंदुओं-सिखों को मिटाने की हरसंभव कोशिश की। उनको महत्वहीन समझा। जिसका खामियाजा आज उन्हें भुगतना पड़ रहा है क्योंकि हिंदू-सिख गाय, भैंसों का महत्व जानते हैं, उनके पोषक होते हैं, उन्हें मारते नहीं हैं। जहां हिंदू-सिख होते हैं वहां भूमि की उर्वरा शक्ति में वृद्धि ही होती है। इसलिए विभाजन के समय कम उत्पादक क्षेत्र पाकर भी भारत आज पाकिस्तान की अपेक्षा प्रति हेक्टेयर ढाई गुना अनाज अधिक उत्पन्न कर रहा है।
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