एबीएन सेंट्रल डेस्क। पिछले दिनों किए गए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के लेटेस्ट आंकड़ों में बताया गया है कि हर तीन में से दो भारतीय मांसाहारी हैं। हालांकि देशभर में अलग-अलग हिस्सों के औसत आंकड़ों से इसकी समानता नहीं है। राज्यवार आंकड़ों पर गौर करें तो उत्तर भारत और मध्य भारत में व्यापक स्तर पर शाकाहार ही प्रचलित है। मांसाहार की बात करें, तो महिलाओं की तुलना में पुरुषों की संख्या अधिक है। 23 फीसदी महिलाओं ने कभी चिकन, मटन या मछली नहीं खाई है, वहीं पुरुषों में यह आंकड़ा महज 15 फीसदी है। यानी कि हर 4 में से 3 महिलाएं, जबकि हर 6 में से 5 पुरुष मांसाहारी हैं। उत्तर और मध्य भारत की बात करें तो पंजाब, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 50.7 फीसदी महिलाएं और करीब 33 फीसदी पुरुष नॉनवेज नहीं लेते। उत्तर और मध्य भारत में कुल आबादी में शाकाहारी लोगों की संख्या राष्ट्रीय औसत से लगभग दोगुनी है। सबसे ज्यादा शाकाहारी (80 फीसदी महिलाएं और 56 फीसदी पुरुष) लोग हरियाणा में हैं। आंकड़े के मुताबिक, वेजिटेरियन्स में हरियाणा के बाद राजस्थान (75 फीसदी महिलाएं और 63 फीसदी पुरुष) और पंजाब (70 फीसदी महिलाएं और 41 फीसदी पुरुष) का नंबर आता है। वहीं बात करें पूर्वोत्तर, पूर्वी और दक्षिण भारत की, तो यहां सबसे कम शाकाहारी यानी सबसे ज्यादा मांसाहारी लोग पाए जाते हैं। अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, मेघालय, त्रिपुरा और सिक्किम में करीब-करीब 99 फीसदी लोग मांसाहारी हैं। इन राज्यों में केवल 1.6 फीसदी महिलाएं और 1.3 फीसदी पुरुष शाकाहारी हैं। पूर्वी राज्यों में पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा और बिहार की बात करें तो यहां करीब 10 फीसदी आबादी ने कभी मटन, चिकन या मछली का सेवन नहीं किया है। यानी यहां 10 फीसदी लोग शाकाहारी और 90 फीसदी लोग मांसाहारी हैं। पश्चिमी भारत में शाकाहारियों की संख्या राष्ट्रीय औसत से अधिक (31 फीसदी महिलाएं और 23 फीसदी पुरुष) है। इनमें सबसे ज्यादा हिस्सेदारी गुजरात की है। गुजरात भारत में चौथा सबसे अधिक शाकाहारी लोगों वाला प्रदेश है। गुजरात में करीब 61 फीसदी महिलाएं और 50 फीसदी पुरुष नॉनवेज नहीं खाते। कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना समेत दक्षिण भारत में केवल 8 फीसदी महिलाएं और 5 फीसदी पुरुष ऐसे हैं, जो कभी नॉनवेज नहीं खाते। गोवा में केवल 3 फीसदी महिलाएं और 4 फीसदी पुरुष शाकाहारी हैं, जबकि महाराष्ट्र में 28 फीसदी महिलाएं और 17 फीसदी पुरुष शाकाहारी हैं। इस तरह पूरे भारत में खानपान को लेकर विविधता पाई जाती है। शाकाहारी और मांसाहारी लोगों का अनुपात भी पूरे देश में क्षेत्र के अनुसार बहुत अलग है।
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