देश में बिजली संकट : 173 पावर प्लांट में से करीब 100 में कोयले की हुई कमी

 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोयले की कमी के चलते इस बार गर्मियों में बिजली का संकट देखने को मिल सकता है। दरअसल नोमुरा की एक रिपोर्ट कहा गया है कि देश के आधे से ज्यादा पावर प्लांट कोयले की किल्लत से जूझ रहे हैं और उनमें कुछ दिनों का ही कोयला बाकी बचा है। ऐसे में भारत एक बड़े बिजली संकट के करीब पहुंच रहा है। ईटी ने नोमुरा के हवाले से अपनी एक खबर में लिखा है कि अगर देश में बिजली संकट आता है तो इसका पूरी अर्थव्यवस्था पर बड़ा बुरा असर देखने को मिलेगा, क्योंकि देश में पहले से ही महंगाई का असर है दूसरी तरफ बिजली संकट से उद्योगों में काम ठप्प होने की स्थिति आ सकती है, जिससे सप्लाई की स्थिति और बिगड़ जाएगी। हालांकि कोल इंडिया ने जानकारी दी है कि देश में कोयले का कोई संकट नहीं है फिलहाल कोल इंडिया के पास इतना कोयला है कि देश की एक महीने की जरूरत को पूरा किया जा सकता है। सेंट्रल इलेक्ट्रिक अथॉरिटी की माने तो पावर प्लांट में नियमों के मुताबिक पावर प्लांट में जितना कोयला होना चाहिये 13 अप्रैल तक उसका सिर्फ 35 प्रतिशत कोयला ही इन प्लांट में मौजूद था। ईटी में छपी खबर के अनुसार नोमुरा ने भारत में बड़े बिजली संकट की चेतावनी दी है। नोमुरा ने अपनी रिपोर्ट इंडिया: ए पावर क्रंच इन द मेकिंग में लिखा है कि देश में बिजली की मांग में तेज उछाल देखने को मिला है हालांकि कोयले की सप्लाई में उतनी तेजी दर्ज नहीं हुई है इससे पावर प्लांट में कोयले के किल्लत हो गई है। नोमुरा ने जानकारी दी कि 173 पावर प्लांट में से करीब सौ पावर प्लांट में कोयले का स्टॉक गंभीर स्तर तक गिर चुका है इन प्लांट में जरूरी सीमा का सिर्फ एक चौथाई कोयला ही बचा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इंडस्ट्री के फिर से खुलने और गर्मी के मौसम की शुरूआत में ही तापमान में उछाल की वजह से बिजली की मांग काफी बढ़ चुकी है। हालांकि कोयले की सप्लाई इसके अनुसार नहीं हो रही है, इसकी प्रमुख वजह मालगाड़ियों के डिब्बों की घटती उपलब्धता है जिससे कोयले की सप्लाई पर असर पड़ा है। नोमुरा ने कहा कि फिलहाल घरेलू अर्थव्यवस्था के सामने दोहरी चुनौतियां हैं। अगर कोयले की सप्लाई मे सुधार नहीं होता तो बिजली कटने से उद्योगों पर बुरा असर पड़ेगा और अगर सीमित उत्पादन पर बिजली संयंत्रों को कोयला सप्लाई किया जाता है तो नॉन पावर सेक्टर जैसे एल्युमीनियम, सीमेंट और स्टील को कोयले की कमी से नुकसान उठाना पड़ेगा, जिसका असर अर्थव्यवस्था पर देखने को मिलेगा। वहीं ईटी की रिपोर्ट में कोल इंडिया के अधिकारी ने कहा है कि थर्मल पावर प्लांट के लिये कोयले की सप्लाई लगातार बढ़ाई जा रही है और अप्रैल के पहले 15 दिन की अवधि में पिछले साल के मुकाबले कोल इंडिया ने 14 प्रतिशत से ज्यादा कोयले की सप्लाई की है।कोल इंडिया के मुताबिक कंपनी की इन्वेंटरी 6।1 करोड़ टन है जो कि देश के पावर प्लांट को एक महीने तक चलाए रखने के लिए पर्याप्त है, उनके मुताबिक अप्रैल के पहले 15 दिनों में कोयले का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 27 प्रतिशत बढ़ा है और कंपनी इस महीने रिकॉर्ड उत्पादन करने जा रही है।

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