टीम एबीएन, कोडरमा। आजादी के अमृत महोत्सव के मौके पर भारतीय जन नाट्य संघ इप्टा की ढाई आखर प्रेम नामक सांस्कृतिक यात्रा रायपुर छत्तीसगढ़ से शुरू होकर झारखंड के विभिन्न स्थानों से होते हुए 17 अप्रैल को कोडरमा पहुंची। बंधुत्व के मूल्यों को तलाशने की कोशिश:- इस आयोजन की जानकारी देते हुए इप्टा के राष्ट्रीय सचिव सह जाने- माने विचारक शैलेंद्र ने बताया कि इप्टा की यह पहल असल में स्वतंत्रता संग्राम के गर्भ से निकले स्वतंत्रता समता न्याय और बंधुत्व के उन मूल्यों के तलाश करने की कोशिश है, जो आजकल नफरत वर्चस्व और दंभ के तुमुलघोष में डूब सा गया है। जिसका दामन पकड़ कर हमारे किसान गांधी के अहिंसा और भगत सिंह के अदम्य साहस के रास्ते अपनी कुबार्नी देते हुए डटे हैं। यात्रा पुरोधाओं का सादर स्मरण:- उन्होंने कहा कि यह यात्रा उन तमाम शहीदों समाज सुधारकों, भक्ति आंदोलन और सूफीवाद के पुरोधाओं का सादर स्मरण है जिन्होंने भाषा जाति लिंग और धार्मिक पहचान से इतर मनुष्य के मुक्ति एवं लोगों से प्रेम को अपना एकमात्र आदर्श घोषित किया है। शैलेंद्र ने अपने संबोधन में कहा कि ढाई आखर प्रेम की सांस्कृतिक यात्रा सबके लिए एक सुंदर दुनिया बनाने की सिलसिले को आगे बढ़ाने वाली और नफरत के जगह प्रेम, दया, करुणा, बंधुत्व समता से परिपूर्ण न्याय पूर्ण हिंदुस्तान को समर्पित है। झारखंड इप्टा के सचिव प्रेम प्रकाश ने कहा आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर भारतीय जन नाट्य संघ ने 9 अप्रैल से 22 मई तक लगातार देश के छत्तीसगढ़ झारखंड बिहार उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के ढाई सौ से ज्यादा स्थानों पर ढाई आखर प्रेम की सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेगी, इसी कार्यक्रम के तहत रविवार को यह टीम झारखंड के गढ़वा, डाल्टनगंज, रांची, घाटशिला, जमशेदपुर, रामगढ़, हजारीबाग होते हुए कोडरमा पहुंची जिसका स्वागत कोडरमा के आयोजन समिति के संयोजक उदय द्विवेदी, प्रेम पांडे, महादेव राम, असीम सरकार, मनोज सहाय, धीरज यादव, रमेश प्रजापति, चरणजीत सिंह, श्यामदेव यादव सहित कई अन्य लोगों ने किया मौके पर बिहार इप्टा की टीम भी उपस्थित थे।कलाकारों ने बताया की यह यात्रा देश में फैले रहे जातिवाद और धार्मिक उन्माद पर अंकुश लगाने वाली यात्रा है हम लोग गीत संगीत नाटक व कविता के माध्यम से लोगों में जागरूकता लाने का प्रयास कर रहे हैं। 17 अप्रैल की शाम स्थानीय कला मंदिर झुमरी तिलैया के प्रांगण में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए जो देर रात तक चली। कार्यक्रम में एक से बढ़कर एक जनगीत, कविता एवं नाटक की प्रस्तुति की गई। संजय कुंदन द्वारा लिखित नाटक हंसमुख नवाब व्यंग एवं वर्तमान परिस्थिति की सचित्र वर्णन था। मंच संचालन विनोद विश्वकर्मा ने किया।
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