एबीएन सेंट्रल डेस्क। पंजाब विधानसभा चुनाव में एग्जिट पोल सही साबित होते दिख रहे हैं। आम आदमी को ऐतिहासिक जीत मिलने की संभावना है। शुरुआती तीन घंटों की मतगणना में आप को 89 सीटों पर बढ़त है। अकाली दल और कांग्रेस नतीजों में काफी पीछे हैं। इस चुनाव की खासियत यह रही कि 2017 में आम आदमी पार्टी ने सत्ता की दावेदारी की थी। आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार भगवंत मान को जीत मिली है।चुनाव से ठीक पहले पार्टी में कलह से जूझ रहे कांग्रेस ने सीएम बदल दिया था और दलित चेहरे चरणजीत सिंह चन्नी पर दांव लगाया था। मगर खुद सीएम चरणजीत सिंह चन्नी अपनी दोनों सीट चमकौर साहिब और खरड़ से पीछे चल रहे हैं। शुरुआती रुझानों में कांग्रेस भी 14 सीटों पर सिमट गई। अमृतसर ईस्ट सीट से नवजोत सिंह सिद्धू भी हार के करीब पहुंच गए। कांग्रेस की हार से राहुल गांधी के फैसले से कठघरे में खड़े होंगे। इस बार अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल के सामने पार्टी को एकजुट रखने और विद्रोह से बचाने की दोहरी चुनौती थी। लांबी से छठी बार चुनाव मैदान में उतरे प्रकाश सिंह बादल और चौथी बार जलालाबाद से उतरे उनके बेटे सुखबीर सिंह बादल भी आप की आंधी में हार की ओर बढ़ रहे हैं। इन दो दिग्गज नेताओं की स्थिति ने यह तय कर दिया है कि आने वाले दौर में अकाली दल में भी भगदड़ हो सकती है। इसके अलावा सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व पर पार्टी के भीतर सवाल उठना तया है। अभी तक रुझानों के अनुसार अकाली दल 9 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है। आम आदमी पार्टी ने इस बार पूरे पंजाब में मालवा, माझा और दोआबा में बाजी मार ली है। पंजाब में कांग्रेस का दलित कार्ड भी फेल हो गया। इसके अलावा डेरों की ओर से जारी होने वाले फरमान भी बेअसर साबित हो गए हैं। बता दें कि वोटिंग से ठीक पहले डेरा सच्चा सौदा समेत कई डेरों ने शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी गठबंधन के पक्ष में वोट करने की अपील की थी
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