टीम एबीएन, कोडरमा। गौशाला समिति और प्रेरणा शाखा के द्वारा इन दिनों गौशाला की अर्थोपार्जन और कुछ महिलाओं को रोजगार देने के लिए अनोखी पहल की जा रही है। इसके तहत समिति के द्वारा गाय से गोबर से बड़कुल्ला बनवाकर बेचा जा रहे हैं, जिसे लोग काफी पसंद कर रहे हैं। अब तक लगभग चालीस परिवारों के द्वारा पांच हजार बड़कुल्ला का आर्डर दिए जाने की सूचना मिली है। गाय का गोबर और गोमूत्र पर्यावरण संरक्षण के लिए उपयोगी भी है। गाय में आध्यात्मिक, धार्मिक, चिकित्सीय, वैज्ञानिक तत्व होते हैं। गाय एकमात्र पशु है जिसकी पूजा की जाती है और सनातन धर्म में मान्यता यह है कि गाय में 36 करोड़ देवी देवताओं का वास होता है। गौशाला समिति और प्रेरणा शाखा इस वर्ष महानगरों की तर्ज पर झुमरी तिलैया में भी बड़कुल्ला उपलब्ध कराने का कार्य शुरू किया है। प्रेरणा शाखा की शालू चौधरी, काजल गुप्ता, गौशाला समिति के अध्यक्ष प्रदीप केड़िया, सचिव ओम खेतान ने बताया कि राजस्थानी समाज में होलिका दहन के दिन अगजा में बड़कुल्ला डालने की प्रथा है। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में गौशाला परिसर में गोबर के जरिए हवन में कार्य आने वाली पूजन सामग्री को बनाने का कार्य भी शुरू किया जाएगा। इसके लिए एक मशीन की खरीदारी की जाएगी। गोशाला समिति पर्यावरण संरक्षण के लिए सार्थक कार्य करेगी। पर्यावरण सुरक्षा के लिए इको फेंडली के तहत यह कार्य किया जा रहा है। पांच महिलाएं कर रही हैं काम : गोबर से बड़कुल्ला बनाने के कार्य में गौशाला समिति के द्वारा पांच महिलाओं को रखा गया है। यह महिलाएं सुबह, दोपहर और शाम में जब भी गोबर उपलब्ध हो जाता है, उससे बड़कुल्ला बनाने का कार्य कर रही है। इसके लिए इनको मजदूरी भी दी जा रही है। 40 परिवारों ने 5 हजार बड़कुल्ला का दिया ऑर्डर : होली में लगने वाले बड़कुल्ला की मांग अच्छी खासी देखी जा रही है। 40 परिवार ने लगभग पांच हजार बड़कुल्ला का आर्डर दिया है। 14 मार्च के पहले सभी को उपलब्ध करा दिया जाएगा। 50 बड़कुल्ले का मूल्य 30 रुपये तथा होली सेट बड़कुल्ला का मूल्य 50 रुपये रखा गया है। इसमें 50 बड़कुल्ला, एक होलिका, एक नारियल, एक चांद-सूरज, पांच ढाल और पांच सुपारी होगी।
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