टीम एबीएन, रांची। इसाई धर्म प्रचारकों द्वारा आदिवासी, सिख व हिंदुओं के बीच अंधविश्वास व अंध श्रद्धा फैलाकर उन्हें धर्म परिवर्तन के कुचक्र में फंसाया जा रहा है। रविवार 27 फरवरी रविवार को जमशेदपुर के गोलमुरी में बिना प्रशासन की अनुमति के आयोजित चंगाई सभा में इसका पर्दाफाश हो भी गया। उक्त जानकारी विहिप के जमशेदपुर महानगर के मंत्री ने दी। उन्होंने कहा कि हम बताना चाहेंगे कि धर्म परिवर्तन के इस कुचक्र का भान स्थानीय लोगों, सामाजिक धार्मिक संगठनों व सिख समाज के कई जागरूक लोगों का था भी। यही कारण रहा कि इनके द्वारा विगत छह माह से इसे लेकर स्थानीय थाना समेत जिले के वरीय प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की जारी रही। उनसे गोलमुरी में चल रहे ईसाई मिशनरियों के कुचक्रों की शिकायत निरंतर की गई। थाना से उचित कार्रनाई की मांग की जा रही थी, लेकिन जिला प्रशासन की ओर से उपरोक्त विषय पर संज्ञान नहीं लिया गया और न ही इस कुचक्र में स्थानीय थाना की कोई कार्रवाई की गई। इसी से धर्म परिवर्तन का कुचक्र रचनेवाले ईसाई धर्म प्रचारकों का मनोबल बढ़ता चला गया और वे लोग पिछले कई वर्षों की भांति कोरोना काल में भी मानसिक तथा शारीरिक रूप से परेशान आदिवासी, सिख व हिदुओं को अंधविश्वास व अंध श्रद्धा की आड़ में फंसाने का तानाबाना बुनते रहे। ईसाई धर्म प्रचारकों द्वारा प्रार्थना करके जटिल से जटिल रोग-व्याधि-समस्याओं के निराकरण करने का झूठा ढोंग किया जाता रहा। जब यह पाखंड का खेल पूरे बस्ती वासियों के लिए समस्या बन गया तब विश्व हिन्दू परिषद ने घटना के एक दिन पूर्व यानी दिनांक 26/02/22 को जिला के वरीय प्रशासनिक अधिकारियों के साथ साथ स्थानीय थाना प्रभारी से भी इसकी शिकायत की तथा ऐसे गैर कानूनी कार्यक्रम (चंगाई सभा) को रूकवाने का आग्रह किया। बताया गया कि आयोजकों के पास चंगाई सभा करने का प्रशासन से जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र तथा अनुमति पत्र है ही नहीं। उसके उपरांत भी यह असंवैधानिक चंगाई सभा पूर्व की भांति स्थानीय थाना पुलिस के संरक्षण में दिनांक 27/02/22 को संपन्न करवायी जा रही थी। इसे देखकर व जानकर विश्व हिंदू परिषद जब उक्त स्थान पर पहुंची तो पाया कि अंधश्रद्धा का कार्यक्रम अपने चरम पर है और हजारों ग्रामीण आदिवासी हिन्दू, सिख हिन्दू परिवार जो कई तरह की परेशानियों से पीड़ित है, रोग से पीड़ित हैं, वहां मौजूद हैं। देखा गया कि वहां जुटे लोगों में से किसी को शारीरिक रोग है तो किसी को मानसिक रोग है। ऐसे लोगों को बेहतर स्वास्थ्य-चिकित्सा सुविधा की आवश्यकता है, विशेष डॉक्टर की आवश्यकता है लेकिन इन लोगों को अंध विश्वास में धकेला जा रहा है। बड़ी बात यह भी देखी गई सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से बरगलाकर लाए गए ऐसे हिंदू परिवारों के रोगियों को संकीर्ण जगह में भेड़ बकरियों की तरह ठूंस ठूंस कर रखा गया था और ढोंग का तांडव किया जा रहा था। जब विहिप के लोगों ने रोगी परिवारों से पूछा कि आपलोगो में से कोई ऐसा रोगी है जो ईसाई है तो जवाब मिला नहीं। ऐसा एक भी रोगी परिवार नहीं मिला जो ईसाई था। इसका अर्थ तो यही हुआ न कि दुष्ट आत्माएं ईसाई को नहीं सिर्फ हिंदुओ को सता रही हैं और इनके लिए ही चंगाई सभा का आयोजन किया जाता है। इसके बाद थाना प्रभारी से पुन: इस ईसाई धर्म के प्रचारकों की ओौर से चलाए जा रहे इस असंवैधानिक कार्यक्रम की शिकायत की गई। ऐसे कार्यक्रम को अविलंब रोकने की मांग की गई जो पीड़ित हिन्दू परिवारों के साथ खिलवाड़ करने का कार्य कर रहा है। थाना प्रभारी की उदासीनता से हमें मिलीभगत की बू आ रही थी। रविनार 27 फरवरी की घटना के बाद विश्व हिन्दू परिषद को ऐसा अंदेशा था कि प्रशासन की ओर से हिन्दू संगठन के कार्यकर्ताओं, अन्य संगठनों के कार्यकर्ताओं तथा स्थानीय लोगों पर निराधार आरोप लगा कर अत्याचार किया जाएगा। आशंका सच साबित हुई। बदले की भावना रखते हुए थाना प्रभारी की ओर से अपने स्तर पर बस्ती वासियों पर विहिप संगठन के कार्यकतार्ओं व सिख समाज के प्रबुद्ध लोगों पर झूठा मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। किन्तु विश्व हिन्दू परिषद, सिख समाज, बस्ती वसी ऐसी कार्रवाई से नहीं डरेंगे। प्रशासन यदि इस तरह की असंवैधानिक चंगाई सभा को हिन्दू विरोधी राज्य सरकार के आदेश पर संरक्षण देने का कार्य करेगी तो समाज व संगठन के लोग ऐसी असंवैधानिक सभा को रोकने के लिए आंदोलन करेंगे। भविष्य में विश्व हिंदू परिषद अपनी शिकायत प्रशासन से नहीं न्यायालय में करेगी, ताकि ऐसे कार्यक्रमों के होने पर अंधश्रद्धा उन्मूलन कानून के तहत सभी आयोजकों पर कार्रवाई हो सके।
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