एबीएन सेंट्रल डेस्क। चीन में कोविड-19 मामलों की संख्या को कम रखने और अर्थव्यवस्था के सुचारू ढंग से संचालन के वास्ते इस्तेमाल की जा रही कड़ी रणनीति से देश के लिए महामारी से बाहर निकलना कठिन हो सकता है। ज्यादातर विशेषज्ञों का कहना है कि दुनियाभर में कोरोना वायरस अभी नहीं जा रहा है और उनका मानना है कि यह अंततः फ्लू की तरह बन सकता है जो कि बना रहेगा। लेकिन टीकों के जरिये इसके खतरे को कम किया जा सकता है। ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों में, जहां ओमीक्रोन लहर के बावजूद तुलनात्मक रूप से हल्के प्रतिबंध हैं। चीन में दो सप्ताह में बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक शुरू होने वाले है और यह देश उस दौरान अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में होगा लेकिन वह गतिशील नहीं दिख रहा है। चीन में ज्यादातर लोग कभी भी वायरस के संपर्क में नहीं आए हैं। साथ ही, चीन के सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले टीकों की प्रभावशीलता पर सवाल उठाया गया है। भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान में एक प्रतिरक्षाविज्ञानी डा. विनीता बल ने कहा, चीन में प्रकोप अधिक होने की आशंका है क्योंकि ज्यादातर लोग कड़े उपायों के कारण वायरस के संपर्क में नहीं आये हैं, इस प्रकार हाइब्रिड प्रतिरक्षा की कमी है। उन्होंने कहा, चीन में अभी खतरा बना हुआ है क्योंकि ओमीक्रोन विश्व स्तर पर फैल रहा है, और भले ही यह स्वरूप गंभीर बीमारी का कारण नहीं बनता है, लेकिन यह जंगल की आग की तरह फैल जाएगा। शिकागो विश्वविद्यालय में चीनी राजनीति का अध्ययन करने वाले प्रो डाली यांग ने कहा कि यह नेताओं के लिए एक बड़ी चुनौती है, विशेष रूप से जीवन बचाने के संबंध में। हांगकांग के चीनी विश्वविद्यालय में चीनी राजनीतिक नेतृत्व के विशेषज्ञ विली लैम ने कहा, अगर कोविड के मामलों की संख्या में बड़े स्तर पर वृद्धि होती है, तो यह उनके नेतृत्व पर बुरी तरह से प्रतिबिंबित होगा।
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